114 प्रोफेसरों की बंगाल के दलितों-पिछडों को हिंसा से बचाने की अपील

 

बंगाल हिंसा का मामला राष्ट्रपति के पास:114 प्रोफेसर्स की राष्ट्रपति से अपील- बंगाल में दलितों और पिछड़ों पर हो रही हिंसा रोकिए
नई दिल्ली 3 जूून( संध्या द्विवेदी?राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद। एससी-एसटी समुदाय से जुड़े 114 प्रोफेसर्स ने उनसे बंगाल में हिंसा रोकने के अपील की है ।  बंगाल में विधानसभा चुनावों के बाद शुरू हुई हिंसा को लेकर एससी-एसटी समुदाय से जुड़े 114 प्रोफेसर्स ने राष्ट्रपति से अपील की है। इन प्रोफेसर्स ने कहा है कि बंगाल में दलितों और पिछड़ों पर हो रही हिंसा रोकी जाए। दरअसल, बंगाल में जारी हिंसा पर सेंटर फॉर सोशल डेवलपमेंट (CSD) संस्था ने एक रिपोर्ट तैयार की है। इसमें कहा गया है कि हिंसा में सबसे ज्यादा निशाना दलित और पिछड़ा वर्ग को बनाया गया।

CSD से जुड़े राजस्थान, एमपी, छत्तीसगढ़, बिहार, दिल्ली, उड़ीसा समेत अन्य राज्यों से जुड़े 114 प्रोफेसर्स ने इस याचिका पर साइन किए हैं। राष्ट्रपति के बाद अब इस याचिका को बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ को भी यह याचिका सौंपी जाएगी।

144 प्रोफेसर्स ने राष्ट्रपति से रखी ये 3 मांगें

इस हिंसा में अनाथ हुए बच्चों की परवरिश, मेडिकल सहायता और सुरक्षा की जिम्मेदारी सरकार उठाए।
बेघर हुए लोगों को उनके घर बनाकर दिए जाएं, नुकसान का आकलन कर मुआवजा मिले।
जिस परिवार ने अपना सदस्य खोया है उसे नौकरी या फिर रोजगार स्थापित करने में मदद मिले।
दलितों-पिछड़ों की मकान-दुकान फूंकी गई, हत्या तक हुई- रिपोर्ट
CSD की एक कमेटी ने बंगाल जाकर तीन दिन तक हिंसा पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर आंकड़े इकट्ठे किए। इस संस्था के सदस्य और दिल्ली यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर राजकुमार फुलवारिया ने बताया, “छानबीन और पड़ताल के बाद तैयार रिपोर्ट में पाया गया कि हिंसा पीड़ितों में से तकरीबन 60 प्रतिशत लोग दलित, पिछड़ा और आदिवासी तबके के हैं। इनमें से अधिकांश लोगों के घर जला दिए गए, दुकानें फूंक दी गईं, कई परिवारों के सदस्य तो जान से मार दिए गए। इनमें से कई ऐसे थे, जिनके घर में यही एक शख्स कमाने वाला था।’

संस्था के सदस्य राजस्थान के राजसमंद में स्थित मोहन लाल सुखारिया विश्वविद्यालय में प्रो. सोहल लाल गोंसाईं कहते हैं, “इसमें कोई शक नहीं कि राज्य की मिली भगत से इस हिंसा को अंजाम दिया गया है। इसमें सबसे ज्यादा दलित और पिछड़ा वर्ग को निशाना बनाया गया है। लिहाजा इस पर देश की सरकार को कदम उठाना चाहिए पीड़ितों को न्याय और सुरक्षा देनी चाहिए और गुनहगारों को सजा देनी चाहिए।’

’11 हजार बेघर, 40 हजार प्रभावित’:

बंगाल  विधानसभा चुनाव के बाद हुई हिंसा मामले में अनुसूचित जाति/जनजाति (SC/ST) वर्ग के 114 प्रोफेसरों ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद को पत्र लिखा है। इस पत्र में टीएमसी पर कार्रवाई की अपील की गई है।

टाइम्स ऑफ इंडिया के पत्रकार रोहन दुआ ने यह पत्र ट्विटर पर शेयर किया है। इस पत्र के मुताबिक चुनाव के बाद राज्य में भड़की हिंसा ने 11 हजार लोगों को बेघर कर दिया है। इनमें अधिकांश अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग से हैं। पत्र बताता है कि, 40,000 लोग इस हिंसा से प्रभावित हुए और 1627 बर्बर हमले दर्ज किए गए।

इसमें लिखा है कि हिंसा के दौरान 5000 से अधिक घर जला दिए गए। वहीं 26 लोग मारे भी गए। इसके बाद 2000 से अधिक लोगों को जो असम, झारखंड और ओडिशा में शरण लेनी पड़ी।

पत्र के मुताबिक, तृणमूल कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं ने राज्य पुलिस के साथ मिलकर उस दौरान अनुसूचित जाति व जनजाति के लोगों पर न केवल जमकर अत्याचार किया बल्कि वहाँ हिंसा भड़काई, लोगों को मारा, औरतों से रेप किया और जमीन पर कब्जा कर लिया। इसलिए वह चाहते हैं कि एससी/एसटी समुदाय को बचाने के लिए मामले में हस्तक्षेप किया जाए।

साथ ही पत्र में कहा गया है कि एससी/एसटी समुदाय के जो लोग इससे प्रभावित हुए हैं उनके घर दोबारा से बनवाकर उनके पुनर्वास पर काम किया जाए। साथ ही पीड़ितों को तत्काल प्रभाव से मेडिकल व अन्य सुविधाएँ और सुरक्षा दिया जाए।

बता दें कि सेंटर फॉर सोशल डेवलपमेंट (सीएसडी) के बैनर के तहत यह पत्र लिखा गया है। इस पर डीयू के अफ्रीकन स्टडीज विभाग के पूर्व हेड प्रोफेसर सुरेश कुमार और डीयू में ही लाइब्रेरी साइंस से जुड़े प्रोफेसर केपी सिंह के पहले पन्ने पर हस्ताक्षर हैं।

गौरतलब हो कि इससे पहले इस मुद्दे 46 सेवानिवृत्त अधिकारियों ने राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद को पत्र लिखकर मामले में SIT गठित करने की माँग की थी। साथ ही राज्य में हुई इस व्यापक राजनीतिक हिंसा के मद्देनजर 2093 महिला वकीलों ने भी भारत के मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन्ना को पत्र लिखकर मामले में संज्ञान लेने की अपील की थी।

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