मलयाली फिल्म निर्देशक अली अकबर का इस्लाम छोड़ने का ऐलान, जनरल रावत के बलिदान पर मुसलमानों के रवैए से थे आहत

मलयाली फिल्म निर्देशक अली अकबर ने किया इस्लाम छोड़ने का फैसला, CDS रावत के बलिदान पर कट्टरपंथियों के रवैए से थे आहत

फिल्म निर्देशक अली अकबर ने इस्लाम छोड़ने का किया ऐलान
मलयाली फिल्म निर्देशक अली अकबर (साभार: जानम टीवी)

सीडीएस जनरल बिपिन रावत समेत 13 वीरों की वीरगति पर एक तरफ पूरा देश रो रहा है, तो दूसरी ओर कुछ कट्टर इस्लामी देश के असली हीरो के जाने पर अट्टाहास कर रहे हैं। इससे निराश केरल के मलयाली फिल्मों के फिल्म निर्देशक अली अकबर ने इस्लाम को छोड़ हिंदू धर्म में वापसी करने का ऐलान कर दिया है। फेसबुक लाइव पर निर्देशक ने कहा कि वे इस्लाम का परित्याग कर रहे हैं।


अली अकबर ने कहा कि सेना प्रमुख सीडीएस बिपिन रावत की वीरगति के बाद कई लोग फेसबुक पर जश्न मना रहे थे, जिसके विरोध में वो इस्लाम को ही छोड़ रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, 8 दिसंबर 2021 को सीडीएस बिपिन रावत की मौत के बाद अकबर ने फेसबुक पर एक लाइव वीडियो शूट किया था, लेकिन फेसबुक ने उसे नस्लीय बताकर फिल्म निर्देशक के अकाउंट को एक महीने के लिए सस्पेंड कर दिया। हुआ ये कि जैसे ही यह वीडियो वायरल हुआ, उनके मुसलमान फालोवर्स और फेसबुक पर मुस्लिम मित्रों ने उस पर हंसी-ठिठोली वाले इमोजी लगाने शुरू कर दिए और अंततः फेसबुक ने इस वीडियो को नस्लीय घृणा मान उनका यह अकाउंट महीने भर को सस्पेंड कर दिया। इससे आहत फिल्म निर्देशक ने तत्काल अपना दूसरा फेसबुक अकाउंट बनाया और उसके जरिए लाइव आकर इस्लाम छोड़ने का ऐलान कर दिया।

फेसबुक के जरिए सीडीएस रावत को श्रद्धांजलि देने वाले फिल्म निर्देशक ने कहा, “यह स्वीकार नहीं किया जा सकता है। इसलिए मैं अपना धर्म छोड़ रहा हूँ, न मेरा और न ही मेरे परिवार का कोई और धर्म है।” उन्होंने लाइव में कहा, “मैं उन कपड़ों का एक टुकड़ा फेंक रहा हूँ, जिनके साथ मैं पैदा हुआ था।” दरअसल, जब फिल्म निर्देशक ने सीडीएस रावत की वीरगति पर लाइव वीडियो बनाना शुरू किया तो कट्टर इस्लामियों ने उनके वीडियो पर हजारों की संख्या में लॉफिंग की इमोजी लगाकर इसका मजाक उड़ाया, जिससे उनकी भावनाएँ आहत हुईं।

इस मामले पर ट्विटर यूजर प्रतीश विश्वनाथ ने कहा कि मलयालम के प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक अली अकबर हिंदू धर्म अपना रहे हैं और अपना नाम बदलकर रामसिम्हन रख रहे हैं। इस्लाम की वर्तमान पीढ़ी को देखकर बहुत अच्छा लगा, जिनके पूर्वजों को बलपूर्वक परिवर्तित किया गया था, वे वापस जड़ों की ओर आ रहे हैं।

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