HP में नौ वर्ष पूर्व धंसी थी सुरंग,10 दिन बाद तीन में दो ही श्रमिक जिंदा मिले

हिमाचल में भी हुई थी उत्तरकाशी टनल जैसी दुर्घटना, 10 दिन बाद जिंदा निकाले गए थे 2 मजदूर, तीसरे की हो गई थी मौत
हिमाचल प्रदेश में कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर यह टनल दुर्घटना हुई थी. 12 सितंबर 2015 की यह घटना है. बिलासपुर में इस फोरलेन पर टिहरा टनल पर यह दुर्घटना हुई थी. उत्तराखंड की ही तरह टनल का एक हिस्सा अंदर से ढह गया था और अंदर मजदूर फंस गए थे।
शिमला 21 नवंबर. उत्तराखंड के उत्तरकाशी में निर्माणाधीन टनल हादसे (Uttarakhand Tunnel Collapse) में 41 मजूदर फंसे हुए हैं. इन 41 मजदूरों में हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले का युवक भी शामिल है. हालांकि, राहत की बात है कि सभी मजदूर सुरक्षित हैं और 10वें दिन का रेस्क्यू अभियान शुरू होने से सभी मजदूरों की तस्वीरें भी सामने आई हैं.

गौरतलब है कि उत्तरकाशी टनल दुर्घटना ने हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में नौ साल पहले हुए टनल दुर्घटना की यादें ताजा कर दी हैं. हिमाचल में हुए टनल दुर्घटना में 10वें दिन दो मजदूरों को जिंदा निकाला गया था. लेकिन तीसरे मजदूर की मौत हो गई थी. ध्यान देने की बात यह है कि जिंदा निकाले गए श्रमिक दस दिन तक बिना खाने के जीवित रहे थे जबकि यहां पहले दिन से फंसे श्रमिकों को भोजन किसी न किसी रूप में जा रहा है।
हिमाचल प्रदेश में कीरतपुर-मनाली फोरलेन पर यह टनल हादसा हुआ था. 12 सितंबर 2015 की यह घटना है. बिलासपुर में इस फोरलेन पर टिहरा टनल पर यह दुर्घटना हुई हुआ थी. उत्तराखंड की ही तरह टनल का एक हिस्सा अंदर से ढह गया था और अंदर मजदूर फंस गए थे. तीन दिन तक यह पता नहीं चल पाया था कि कितने मजदूर अंदर फंसे हुए हैं.

यह पूरा रेस्क्यू अभियान तत्कालीन डीसी मानसी सहाय के नेतृत्व में चला था. अब वह हिमाचल में लेबर कमिश्नर हैं. मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि मानसी सहाय ने उत्तरकाशी टनल दुर्घटना को लेकर वहां की सरकार से भी बात की है और उस अभियान के बारे में जानकारी दी.

दोनों मजदूरों को बचाने के लिए 211 घंटे 47 मिनट का वक्त लगा था. सुरंग के ऊपर से ड्रिलिंग के जरिये इन दोनों मजदूरों को निकाला गया था. टनल दुर्घटना में मंडी जिले के बालीचौकी उप-तहसील की नलवागी पंचायत के करेरी गांव निवासी मणिराम को बचाया गया था. करीब 42 मीटर की ड्रिलिंग के बाद दोनों मजदूरों तक रेस्क्यू टीम पहुंची थी.

गंदा पानी पिया, कागज खाए…,हिमाचल में भी हुए उत्तरकाशी जैसे टनल हादसे में ऐसे जिंदा निकाले गए थे मजदूर!
पूरे अभियान के दौरान टनल के ऊपर और साथ साथ खुदाई की गई. उस दौरान आईएएस अफसर मानसी सहाय बिलासपुर की डीसी थी और उनके नेतृत्व में ही यह बचाव अभियान चला था. अब बताया जा रहा है कि उन्होंने उत्तराखंड के से भी बात की है और तकनीकी जानकारी सांझा की है.

12 सितंबर 2015 की यह घटना है, जब हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में कीरतपुर मनाली फोरलेन पर निर्माणाधीन टनल अंदर से ढह गई थी.
उत्तराखंड के उत्तरकाशी में सिल्क्यारा सुरंग (Uttarakhand Tunnel Collapse) में फंसे 41 मजदूरों को बचाने की कोशिशें जारी हैं. फिलहाल, सभी मजदूर सकुशल हैं और उन्हें खाना और पानी दिया जा रहा है. महत्वपूर्ण यह है कि सिल्क्यारा सुरंग की तरह ही हिमाचल प्रदेश में भी आज से 9 साल पहले ऐसा ही हादसा हुआ था, जिसमें दो मजदूर 10 दिन बाद बिना खाने के जिंदा निकले थे. इन दोनों मजदूरों ने दस दिन तक अंदर गंदा पानी और कागज खाए थे. बड़ी बात है कि तीन दिन तक टनल में फंसे हुए मजदूरों की संख्या का पता नहीं चल पाया था.

जानकारी के अनुसार, 12 सितंबर 2015 की यह घटना है, जब हिमाचल प्रदेश के बिलासरपुर जिले में कीरतपुर मनाली फोरलेन पर निर्माणाधीन टनल अंदर से ढह गई थी. इस दौरान तीन मजदूर अंदर फंस गए थे. सिरमौर और मंडी जिले के ये दोनों मजूदर थे. मंडी जिले के उप तहसील की नलवागी पंचायत के करेरी गांव निवासी मणिराम और सिरमौर के सतीश तोमर टनल में फंसे रहे थे. दोनों ने रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद बताया था कि टनल के अंदर गंदा पानी और कागज के टुकड़े उन्होंने खाए थे. हालांकि तीसरे मजदूर की मौत हो गई थी.

कैसे हुआ था बचाव अभियान 
गौरलतब है कि इस बचाव अभियान के दौरान जहां टनल के अंदर से ड्रिलिंग की गई. वहीं, टनल के ऊपर से भी आधुनिक ड्रिलिंग मशीन से छेद किया गया. टनल के ऊपर से लगभग 42 मीटर होल से एनडीआरएफ का जवान टनल में उतरा था और फिर दोनों मजदूरों को बारी-बारी रस्से से बांध कर ऊपर भेजा गया. 10वें दिन के बचान अभियान के दौरान एनडीआरएफ के सब इंस्पेक्टर नरेश ने 1.3 मीटर चौड़े होल से टनल में प्रवेश किया था. वह सुबह टनल में उतरे, लेकिन, कंकरीट के कारण वह टनल में नहीं जा सके. फिर दोबारा कोशिश में वह अंदर पहुंचने में कामयाब हुए थे.

पूरे अभियान के दौरान टनल के ऊपर और साथ साथ खुदाई की गई. उस दौरान आईएएस अफसर मानसी सहाय बिलासपुर की डीसी थी और उनके नेतृत्व में ही यह रेस्क्यू ऑपरेशन चला था. अब उत्तराखंड के उत्तरकाशी में भी मंडी हिमाचल प्रदेश का एक युवक फंसा हुआ है। बताया जा रहा है कि हिमाचल प्रदेश की आईएएस मानसी ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से बात कर तकनीकी जानकारी सांझा की है.

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