कांग्रेसी हार के साइड-इफेक्ट: हरीश रावत ने हार का ठीकरा फोड़ा देवेंद्र यादव और प्रीतमसिंह पर

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का कांग्रेस की करारी हार पर फूटा गुबार, प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव-नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह पर उठाए सवाल, कहीं ये बातें

देहरादून 13 मार्च।विधानसभा चुनाव-2022 में करारी हार के सदमे से जूझ रही कांग्रेस में शीर्ष नेताओं के बीच कोल्ड वॉर फिर से शुरू हों गई। चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत के अप्रत्याशित रूप से रामनगर सीट से दावेदारी पर बीते रोज नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने सवाल उठाए थे। आज रावत ने पलटवार करते हुए प्रीतम को तो नसीहत की ही साथ में प्रदेश प्रभारी देवेंद्र यादव पर भी परोक्ष रूप से हमला बोला।

रावत ने कहा कि प्रीतम ने एक बहुत सटीक बात कही कि आप जब तक किसी क्षेत्र में 5 साल काम नहीं करेंगे तो आपको वहां चुनाव लड़ने नहीं पहुंचना चाहिए। फसल कोई बोये काटने कोई और पहुंच जाए। लेकिन मैं तो चुनाव लड़ने के बजाय चुनाव प्रचार करना चाहता था। स्क्रीनिंग कमेटी की मीटिंग में राय दी गई कि मुझे चुनाव लड़ना चाहिए।

इसके बाद मैंने रामनगर से चुनाव लड़ने की इच्छा व्यक्त की। वर्ष 2017 में भी वहीं से लड़ना चाहता था, पर रणजीत रावत की गुजारिश पर किच्छा चला गया था।मुझे रामनगर से चुनाव लड़ाने का फैसला भी पार्टी का था और मुझे रामनगर के बजाय लालकुआं विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ाने का फैसला भी पार्टी का ही था।

रावत ने खुलासा किया कि लालकुआं के हालत देख जब वहा से चुनाव लड़ने की अनिच्छा जाहिर की तो पार्टी प्रभारी देवेंद्र यादव ने पार्टी के सम्मान का हवाला देते हुए पीछे न हटने का अनुरोध करते हुए असहमति जता दी। आगे रावत ने कहा कि वो किसी क्षेत्र में पांच साल काम करने के बाद ही चुनाव लड़ने की बात से सहमत हैं। लेकिन इस विषय पर सार्वजनिक बहस के बजाय पार्टी के अंदर विचार मंथन कर लिया जाए तो मुझे अच्छा लगेगा।

यूनिवर्सिटी की मांग करने वाले को, सचिव, उपाध्यक्ष बनाने की भी जांच हो

हरीश रावत ने विवादित यूनिवर्सिटी बनाने की कथित मांग करने वाले आकिल अहमद को पदाधिकारी बनाने की जांच पर भी जोर दिया। बकौल रावत, उस व्यक्ति के नामांकन से मेरा दूर-दूर तक कोई वास्ता था। वह व्यक्ति कभी भी राजनीतिक रूप से मेरे नजदीक नहीं रहा था।

लेकिन उस व्यक्ति को राजनीतिक रूप से उपकृत करने वालों को भी सब लोग जानते हैं। उसे किसने सचिव बनाया, फिर महासचिव बनाया और उम्मीदवार चयन प्रक्रिया में उसे किसका समर्थन हासिल था, यह भी सबको पता है। उस व्यक्ति के विवादास्पद मूर्खतापूर्ण बयान के बाद मचे हल्ले-गुल्ले के दौरान उसे हरिद्वार ग्रामीण विधानसभा का प्रभारी बनाने में किसका हाथ रहा है, यह अपने आप में जांच का विषय है।

मैं सभी उम्मीदवारों की हार का उत्तरदायित्व अपने सर पर ले चुका हूं। सभी को मुझ पर गुस्सा निकालने, खरी खोटी सुनाने का हक है। पर सत्य की अनदेखी भी नहीं होनी चाहिए।
हरीश रावत, पूर्व मुख्यमंंत्री

हरीश रावत का राजनीतिक भविष्य: हार की जिम्मेदारी स्वीकार कर भावुक हरदा बोले- लालकुआं के लोगों से माफी मांगता हूं

लालकुआं विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी एवं पूर्व सीएम हरीश रावत ने हार के बाद सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश जारी किया है।

विधानसभा चुनाव में पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत की हार के साथ ही उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों का दौर भी शुरू हो गया है। हरीश की यह हार उत्तराखंड में कांग्रेस पार्टी के लिए भी बड़ा झटका मानी जा रही है। उनके राजनीतिक भविष्य के साथ उन मुद्दों पर भी बहस शुरू हो गई है, जिन्हें वह उठाते रहे हैं। हरीश की मानें तो वह इस पर मंथन करेंगे।

आगे क्या करेंगे, यह कहना जल्दबाजी होगा, लेकिन जो भी करेंगे, नई पारी ग्रास रूट से ही शुरू करेंगे। फिलहाल वह जनादेश को स्वीकार करते हुए हार की जिम्मेदारी लेते हैं। हरीश रावत को पार्टी ने चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष बनाया था। अघोषित तौर पर वह मुख्यमंत्री पद का चेहरा भी थे, लेकिन इस बार भी भाजपा की आंधी में वह लालकुआं का किला नहीं बचा पाए।

 

नए सिरे से करना पड़ेगा मंथन

वह वर्ष 2017 में दो-दो सीटों से अपनी हार का बदला लेना चाहते थे, लेकिन कामयाब नहीं हो पाए। हरीश की मानें तो अब इन बातों पर मंथन करने का समय आ गया है कि जिन मुद्दों को उठाते रहे हैं, क्या वह उत्तराखंड की जनता के वास्तविक सवाल हैं भी या नहीं। हरीश ने कहा कि उन्होंने उत्तराखंडियत के मुद्दे उठाए, उन्होंने रोजगार, भ्रष्टाचार और गैरसैंण का मुद्दा उठाया। वह राज्य में चकबंदी की बात करते हैं।

वह उत्तराखंड के गाड़ गदेरों की बात करते हैं। वह उन तमाम चीजों को आगे बढ़ाना चाहते हैं, जिससे उत्तराखंड के विकास के साथ उत्तराखंडियत भी बची रहे। बकौल हरीश, वर्ष 2017 में मैंने किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण से चुनाव लड़ा था। दोनों ही सीटों पर पर्वतीय और मैदानी परिवेश के मिले-जुले लोग रहते हैं, लेकिन इस बार तो उन्होंने विशुद्ध रूप से पर्वतीय परिवेश वाली लालकुआं सीट को चुना था।

वहां के लोगों ने भी उनके मुद्दों को नकार दिया। हरीश ने कहा कि अब समय आ गया है, जब उन्हें नए सिरे से मंथन करना पड़ेगा। वह जिन मुद्दों को लेकर आगे बढ़ रहे थे, वह उसमें कितने सही थे। आगे क्या करेंगे, इस सवाल पर हरीश ने यह सोचने या इस पर कुछ बोलने का उचित समय नहीं है। आगे जो भी करेंगे, ग्रास रूट से शुरू करेंगे। फिलहाल कार्यकर्ताओं के मनोबल को बनाए रखना है।

हार के बाद ‘हरदा’ का सोशल मीडिया पर भावुक संदेश

लालकुआं विधानसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी एवं पूर्व सीएम हरीश रावत ने हार के बाद सोशल मीडिया पर एक भावुक संदेश जारी किया है। उन्होंने लिखा,‘ मैं लालकुआं क्षेत्र के लोगों से (बिंदुखत्ता, बरेली रोड के सभी लोगों से) क्षमा चाहता हूं कि मैं उनका विश्वास अर्जित नहीं कर पाया और जो चुनावी वादे मैंने उनसे किए, उनको पूरा करने का मैंने अवसर खो दिया है।

बहुत अल्प समय में आपने मेरी ओर स्नेह का हाथ बढ़ाने का प्रयास किया और मैं अपने आपको आपके बढ़े हुए हाथ की जद में नहीं ला पाया। कांग्रेसजनों ने अथक परिश्रम कर मेरी कमजोरियों को ढंकने और जनता के विश्वास को मेरे साथ जोड़ने का प्रयास किया।

उसके लिए मैं अपने सभी कार्यकर्ता साथियों को बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं। एक बार राजनीतिक स्थिति में स्थायित्व आ जाए, लोगों का ध्यान अपने दैनिक कार्यों पर आ जाए तो मैं, लालकुआं क्षेत्र के लोगों को धन्यवाद देने के लिए उनके मध्य पहुंचूंगा।’ हरीश रावत ने विजयी प्रत्याशी को बधाई और शुभकामनाएं भी दीं।

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