भाजपा विधायक कृष्णानंद राय की जघन्य हत्या में मुख्तार-अफजाल अंसारी का फैसला आज

UP: मुख्तार अंसारी और अफजाल की बढ़ेगी मुसीबत! अंसारी ब्रदर्स पर कल फैसले का दिन
गैंगेस्टर एक्ट में आरोपित अंसारी ब्रदर्स पर साल 2005 में तत्कालीन भाजपा विधायक कृष्णानन्द राय पर हत्या का आरोप है. यह हत्या मुहम्मदाबाद थाना क्षेत्र के बसनिया चट्टी पर हुई थी

माफिया डॉन मुख्तार अंसारी और उसका बसपा सांसद भाई अफजाल अंसारी

 

गाजीपुर 28 अप्रैल: उत्तर प्रदेश में शनिवार को अंसारी ब्रदर्स के लिए काफी महत्वपूर्ण दिन है. माफिया डॉन से राजनेता बने गैंगस्टर मुख्तार अंसारी और बसपा सांसद अफजाल अंसारी के भाग्य का फैसला होने वाला है. गाजीपुर की एमपी एमएलए कोर्ट में गैंगस्टर एक्ट में फैसला आना है. इस फैसले से अंसारी ब्रदर्स का भविष्य टिका है. सरकारी वकील नीरज श्रीवास्तव ने कहा कि उन्हें पूरा यकीन है कि अंसारी ब्रदर्स कोर्ट के फैसले के बाद सलाखों के पीछे होंगे.

दरअसल, मुख्तार अंसारी पर चंदौली में साल 1996 में कोयला कारोबारी नंदकिशोर रूंगटा अपहरण व हत्या कांड और कृष्णानंद राय हत्या कांड को जोड़कर गैंग चार्ट बनाया गया था. इसके गैंग का कोड IS 191 है. जिसका सरगना मुख्तार अंसारी है. वहीं, अफ़ज़ाल अंसारी पर कृष्णानंद राय हत्याकांड को लेकर गैंग चार्ट बनाया गया था.

क्या है MP-MLA कोर्ट में केस की स्थिति?

इस मामले में अदालत में बहस पूरी हो चुकी है. कोर्ट को बीते 15 अप्रैल को इस मामले में अदालत को फैसला लेना था. लेकिन उस दिन जज साहेब छुट्टी पर थे. ऐसे में मामला 29 अप्रैल के लिए टल गया. गैंगस्टर एक्ट में एमपी एमएलए कोर्ट में यह तय होगा की अंसारी ब्रदर्स दोषी हैं या नहीं.

साल 2012 में MP-MLA कोर्ट में शुरू हुआ था ट्रायल

गौरतलब है कि इस मामले साल 2012 में गाजीपुर की MP-MLA कोर्ट में ट्रायल शुरू हुआ था. गैंग चार्ट में अफजाल अंसारी पर कृष्णानन्द राय हत्याकांड का मामला है, जबकि मुख्तार अंसारी के खिलाफ इसके अलावा एक अन्य मामला रूंगटा अपहरण और हत्याकांड का भी चल रहा है.

Ghazipur Mukhtar Ansari Enmity With Krishnanand Rai How Bjp Mla Was Murdered Then 500 Round Firing Use Of Ak 47

500 राउंड फायरिंग छलनी शरीर… मुख्‍तार अंसारी से कृष्‍णानंद राय की दुश्‍मनी, फिर भाजपा विधायक की हत्‍या!

कृष्‍णानंद राय और मुख्‍तार अंसारी
2005 में तत्‍कालीन विधायक कृष्‍णानंद राय की हत्‍या ने पूरे उत्तर प्रदेश को हिला दिया था। उन पर 500 राउंड गोलियां चली थीं। कृष्‍णानंद के शरीर से 67 गोलियां निकली थीं। उनके साथ 7 लोगों की हत्‍या हुई थी। इस हत्‍याकांड में मुख्‍तार अंसारी के साथ उसका भाई अफजाल अंसारी मुख्‍य आरोपित हैं।

 

हाइलाइट्स
1-2005 में हुई थी तत्‍कालीन भाजपा विधायक कृष्‍णानंद राय की हत्‍या
2-500 राउंड हुई थी फायरिंग, हमले में हुआ था एके-47 का इस्तेमाल
3-हत्‍याकांड में मुख्‍तार और उसका भाई अफजाल अंसारी हैं आरोपित

नई दिल्‍ली 28 अप्रैल: पूर्व बसपा विधायक मुख्‍तार अंसारी को आज शायद ही नींद आए। 29 अप्रैल को भाजपा विधायक कृष्‍णानंद राय हत्‍याकांड में गाजीपुर एमपीएमएलए कोर्ट अपना फैसला सुनाने वाली है। इस हत्‍याकांड में गाजीपुर से बसपा सांसद अफजाल अंसारी और उनके भाई मुख्‍तार अंसारी मुख्‍य आरोपित हैं। कोर्ट का फैसला बसपा सांसद की सांसदी को खतरे में डाल सकता है। कोर्ट से किसी भी मामले में दो साल से ज्‍यादा की सजा मिलने पर मुजरिम की सांसदी- विधायकी रद्द किए जाने का कानून है। 2005 में तत्‍कालीन भाजपा विधायक कृष्‍णानंद राय की हत्‍या ने मुख्‍तार अंसारी के आपराधिक इतिहास का रुख बदल दिया था। उस दिन कृष्‍णानंद राय पर 500 राउंड फायरिंग हुई थी। कृष्‍णानंद राय गोलियों से छलनी-छलनी हो गए थे। क्‍या है मुख्‍तार अंसारी से कृष्‍णानंद राय की दुश्‍मनी और फिर हत्‍या की कहानी? आइए, यहां हम आपको बताते हैं।

यह कहानी बदले और रसूख की है। इसने मुख्‍तार को अपराध की दुनिया का नामी चेहरा बना दिया था। घटना 29 नवंबर 2005 की है। गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद से तत्‍कालीन भाजपा विधायक कृष्णानंद राय समेत 7 लोगों को गोलियों से भून दिया गया था। कृष्णानंद राय पर 500 राउंड फायरिंग हुई थी। इस हमले में एके-47 का इस्तेमाल हुआ था। उस दिन गाजीपुर जिले के गोडउर गांव में शाम होने वाली थी। थोड़ी बारिश भी हुई थी। कृष्णानंद राय पड़ोस के सियारी गांव में जाने की तैयारी कर रहे थे। एक क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन करने के लिए उन्हें मुख्य अतिथि बनाया गया था। बगल के गांव जाना था। इसलिए राय बेफिक्र थे। बुलेटप्रूफ गाड़ी घर में ही छोड़ दी थी। वह दूसरी गाड़ी से निकले। यह उनकी जिंदगी की आखिरी भूल साबित हुई थी।

 

एक-47 से बरसाई गई थीं गोलियां

कृष्णानंद राय के भाई रामनारायण राय ने पूरी घटना पर कोर्ट में बयान दिया था। उन्‍होंनें बताया था कि टूर्नामेंट का उद्घाटन करने के बाद राय शाम करीब चार बजे अपने गनर निर्भय उपाध्याय, ड्राइवर मुन्ना राय, रमेश राय, श्याम शंकर राय, अखिलेश राय और शेषनाथ सिंह के साथ कनुवान गांव की ओर जा रहे थे। राम नारायण राय के अनुसार, वह खुद दूसरे लोगों के साथ कृष्‍णानंद राय की गाड़ी से पीछे चल रही गाड़ी में सवार थे। बसनियां चट्टी गांव से डेढ़ किलोमीटर आगे जाने पर सिल्वर ग्रे कलर की एसयूवी सामने से आई। उसमें से सात-आठ लोग निकले। उन्‍होंने एके-47 से गोलियों की बौछार कर दी। इसमें विधायक समेत सात लोगों की हत्‍या हुई। मामला गाजीपुर के मुहम्‍मदाबाद थाना क्षेत्र के अंतर्गत दर्ज किया गया। इसमें करीब 500 राउंड फायरिंग हुई। पोस्‍टमार्टम में अकेले कृष्णानंद राय के शरीर से 67 गोलियां निकली थीं। यह घटना उत्‍तर प्रदेश के इतिहास में सबसे सनसनीखेज राजनीतिक हत्‍याओं में दर्ज हो गई।

अफजाल और मुख्‍तार अंसारी हैं आरोपित

इस मामले में पुलिस ने 2007 में गैंगस्‍टर एक्‍ट में अफजाल अंसारी, मुख्‍तार अंसारी और उनके बहनोई एजाजुल हक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। गाजीपुर एमपीएमएलए कोर्ट में इस केस पर 1 अप्रैल को बहस पूरी हुई थी। कोर्ट ने 15 अप्रैल का दिन फैसले के लिए नियत किया था। फिर मामले में फैसला सुनाने को 29 अप्रैल की तारीख दी गई। कोर्ट का फैसला दोनों भाइयों का राजनीतिक भविष्‍य भी तय करेगा।

दरअसल, 2013 में सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद मामले का ट्रायल दिल्ली की कोर्ट ट्रांसफर हुआ था। आरोपित एजाजुल हक की तरफ से कोर्ट में एडवोकेट आरएस मलिक ने तर्क दिया था कि उनका मुवक्किल शारीरिक रूप से अक्षम है। अपने पैरों पर खड़ा तक नहीं हो सकता। वह वारदात में इस्तेमाल एके-47, एके-56 या 7.62 एसएलआर जैसे हथियार कैसे चला सकता है। अदालत ने इस गवाही को स्वीकार किया था।

क्‍यों हुई थी कृष्‍णानंद राय की हत्‍या?

अब आपके मन में यह सवाल जरूर उठा रहा होगा कि आखिर कृष्णानंद राय की हत्‍या हुई क्‍यों? इसके लिए 2002 में जाना होगा। 2002 में गाजीपुर की मोहम्‍मदाबाद सीट से कृष्णानंद राय ने मुख्तार के भाई अफजाल अंसारी को हरा दिया था। इसे दोनों भाइयों ने अपनी आन पर ले लिया। कहते हैं कि इसके बाद मुख्तार ने अपनी जिंदगी का उद्देश्य बना लिया कि कैसे भी करके कृष्णानंद को रास्ते से हटाना है।

मुन्ना बजरंगी ने BJP विधायक कृष्णानंद राय को किया था AK-47 से छलनी, खुद बागपत जेल में हुआ गोलियों का शिकार

कृष्णानंद राय (बाएं), मुन्ना बजरंगी Photo: File

बागपत जेल में माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या के बाद उत्तर प्रदेश में एक बा​र फिर गैंगवार शुरू होने की आशंका जताई जा रही है. उत्तर प्रदेश में अपराध की दुनिया में मुन्ना बजरंगी एक खूंखार हत्यारा माना जाता रहा. मुन्ना बजरंगी का नाम भाजपा विधायक कृष्णानंद राय हत्याकांड के बाद भी चर्चा में आया. हत्याकांड के पीछे माफिया मुख्तार अंसारी का हाथ था. मुख्तार के ही कहने पर मुन्ना बजरंगी ने कृष्णानंद राय पर एके-47 से 400 गोलियां दागीं. इस हत्याकांड ने पूरे पूर्वांचल को दहला कर रख दिया था।

आरोप है कि 90 के दशक के आखिर में पूर्वांचल में सरकारी ठेकों और वसूली के कारोबार पर मुख्तार अंसारी का कब्जा था, लेकिन इसी दौरान तेजी से उभरते भाजपा के विधायक कृष्णानंद राय उनके लिए चुनौती बनने लगे. कहा जाता है कि कृष्णानंद राय और मुख्तार के दुश्मन माफिया डॉन ब्रजेश सिंह काफी करीबी थे. कृष्णानंद राय की अगुवाई में ब्रजेश तेजी से अपने गैंग की ताकत बढ़ा रहा था. यही नहीं इनकी धमक मुंबई अंडरवर्ल्ड भी महसूस करने लगा था. मुख्तार अंसारी धीरे-धीरे कृष्णानंद राय को बड़ी चुनौती मानने लगा.  उसने कृष्णानंद राय को खत्म करने की जिम्मेदारी मुन्ना बजरंगी को सौंपी.

7 शवों से मिली थीं 67 गोलियां!

गाजीपुर में 29 नवंबर 2005 की शाम भांवरकोल क्षेत्र के बसनिया पुलिया के पास अपराधियों ने स्वचालित हथियारों से भाजपा विधायक कृष्णानंद राय व उनके छह साथियों मुहम्मदाबाद के पूर्व ब्लाक प्रमुख श्यामाशंकर राय, भांवरकोल ब्लाक के मंडल अध्यक्ष रमेश राय, अखिलेश राय, शेषनाथ पटेल, मुन्ना यादव व उनके अंगरक्षक निर्भय नारायण उपाध्याय की हत्या कर दी.

मुहम्मदाबाद विधानसभा क्षेत्र के भांवरकोल ब्लॉक के सियाड़ी गांव में आयोजित क्रिकेट प्रतियोगिता का उद्घाटन करने के बाद सियाड़ी से बसनिया के लिए निकलते समय भाजपा विधायक कृष्णानंद राय व उनके साथ को लोगों ने भी यह नहीं सोचा था कि अपने ही इलाके में लट्ठूडीह-कोटवा मार्ग पर मौत खड़ी है.

जब राय का काफिला बसनिया चट्टी से आगे बढ़ा. उसी समय घात लगाकर बैठे अपराधियों ने अचानक उनके काफिले पर अंधाधुंध गोलियों की बौछार कर दी. कहते हैं कि हमलावरों ने 6 एके-47 राइफलों से 400 से ज्यादा गोलियां चलाई थीं. मारे गए सातों लोगों के शरीर से 67 गोलियां मिली. यही नहीं मुखबिरी इतनी सटीक थी कि अपराधियों को पता था कि कृष्णानंद राय अपने बुलेट प्रूफ वाहन में नहीं हैं.

कृष्णानंद राय की हत्या के विरोध में जल उठा पूर्वांचल

विधायक कृष्णानंद राय समेत सात लोगों की एक साथ हत्या से गाजीपुर जनपद दहल उठा था. इस हत्याकांड से पूरे उत्तर प्रदेश सहित बिहार में भी हड़कंप मच गया था. हत्याकांड के विरोध में लगभग एक सप्ताह तक गाजीपुर, बलिया, आजमगढ़, वाराणसी के साथ ही आगजनी, तोड़फोड़ आंदोलनों का दौर चलता रहा. उस समय पूरा पूर्वांचल सहमा हुआ था. आंदोलन की कमान पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह संभाले हुए थे. तत्कालीन सपा सरकार प्रदेश की जांच एजेंसी की रिपोर्ट को सही ठहरा रही थी, जबकि भाजपा पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने पर अड़ी थी.

कोर्ट ने सीबीआई जांच के दिए आदेश

वहीं कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय की ओर से हाईकोर्ट में दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पूरे प्रकरण की सीबीआई जांच का आदेश दिया गया था. बाद में अलका राय की ओर से सुप्रीम कोर्ट में याचिका दे आशंका की कि अपराधियों को सत्ता का संरक्षण है. ऐसे में सुनवाई में गवाहों के जान का भय बना हुआ है. इसलिए पूरे मामले की सुनवाई गैर प्रदेश की कोर्ट में की जाए. अलका राय के वकील के तर्कों से सहमत हो सुप्रीम कोर्ट ने पूरे प्रकरण की सुनवाई गैर प्रदेश की कोर्ट में स्वीकार की.

भाजपा हर साल मनाती है बलिदान दिवस

वहीं उत्तर प्रदेश भाजपा ने अपने विधायक कृष्णानंद राय का बलिदान याद करने को हर साल 29 नवंबर को बलिदान दिवस मनाने का निर्णय लिया गया. तब से अब तक स्वर्गीय  कृष्णानंद राय व उनके सहयोगियों को याद करने के लिए शहीद पार्क मुहम्मदाबाद में श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया जाता है. स्वर्गीय कृष्णानंद राय की प्रथम पुण्यतिथि उनके पैतृक गांव गोड़उर में मनाई गई थी, जिसमें भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण अडवाणी, राजनाथ सिंह सहित कई दिग्गजों ने भाग लिया था.

हत्यारोपित अताउर रहमान अब तक फरार, इंटरपोल से ली जा रही मदद

इस हत्याकांड में पूर्व सांसद अफजाल अंसारी, मउ के बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी, माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी, अताउर रहमान उर्फ बाबू, संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा, फिरदौस, राकेश पांडेय उर्फ हनुमान, मुहम्मदाबाद नगर पालिका चेयरमैन एजाजुल हक सहित अन्य लोगों को आरोपी बनाया गया है. मामले की सुनवाई दिल्ली की सीबीआई कोर्ट में चल रही है. केस में अफजाल अंसारी को कोर्ट से जमानत मिल चुकी है, जबकि फिरदौस मुंबई में पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है. वहीं अताउर रहमान उर्फ बाबू खां अभी भी फरार चल रहा है, उस पर सीबीआई ने ईनाम घोषित कर रखा है. साथ ही अताउर रहमान की तलाश करने की जिम्मेदारी इंटरपोल को भी दी गई है. बाकी सभी आरोपित जेल में बंद हैं.

 

फिर अंसारी बंधुओं ने कानून में उलझाई पूरी कहानी

अंसारी भाइयों ने ताकत और रुतबे के बल पर कहानी को उलझा दिया। कानूनी लड़ाई के दौरान गवाह टूटे। मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी कहते रहे हैं कि उनके भाई के खिलाफ मीडिया गलत जानकारी देता रहा है। मुख्तार के खिलाफ सिर्फ 13 मामले हैं। उनमें भी गंभीर अपराध के सिर्फ दो या तीन हैं।

 

कृष्णानंद राय मर्डर केस: कब क्या हुआ?

29 नवंबर 2005– गाजीपुर जिले के मोहम्मदाबाद से भाजपा विधायक कृष्णानंद राय सहित सात लोगों की गोलियों से भूनकर हत्‍या। कृष्णानंद राय पर 500 राउंड फायरिंग हुई थी। इस हमले में एके-47 का इस्तेमाल हुआ।

21 फरवरी 2006– भाजपा विधायक हत्याकांड में उत्तर प्रदेश पुलिस की तरफ से पहली चार्जशीट फाइल हुई। इसमें एजाजुल हक, अफजाल अंसारी, प्रेमप्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी, अताउररहमान और फिरदौस का नाम शामिल।

15 मार्च 2006– उत्तर प्रदेश पुलिस ने इस मामले में दूसरी चार्जशीट दाखिल की। इसमें मुख्तार अंसारी को भी आरोपित बनाया गया।

मई 2006– इलाहाबाद हाई कोर्ट ने भाजपा विधायक हत्याकांड की सीबीआई जांच का आदेश दिया। कृष्णानंद राय की पत्नी अलका राय की याचिका पर फैसला।

30 अगस्त 2006– सीबीआई ने हत्याकांड में तीसरी चार्जशीट फाइल की, इसमें संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा को भी आरोपित बनाया।

12 दिसंबर 2006– सीबीआई ने चौथी चार्जशीट फाइल करते हुए राकेश पाण्डेय और रामू मल्लाह को भी आरोपित बनाया।

20 मई 2007– सीबीआई ने पांचवीं चार्जशीट दाखिल करते हुए बाहबुली विधायक मुख्तार अंसारी को भी आरोपित बनाया गया।

22 अप्रैल 2013-सुप्रीम कोर्ट ने कृष्णानंद हत्याकांड की गाजीपुर जिला अदालत में चल रही सुनवाई को सेशंस कोर्ट दिल्ली में सुनवाई के लिए ट्रांसफर कर दिया।

15 मार्च 2014- सीबीआई ने कृष्णानंद हत्याकांड में छठीं चार्जशीट प्रेमप्रकाश सिंह उर्फ मुन्ना बजरंगी के खिलाफ दाखिल की।

22 मई 2019– सीबीआई कोर्ट ने इस हत्याकांड में फैसले को सुरक्षित रखा।

3 जुलाई 2019– गवाहों के मुकरने के बाद सीबीआई अदालत ने मुख्तार अंसारी सहित सात लोगों को इस हत्याकांड के आरोप से मुक्त कर दिया।

1 अप्रैल 2023 – गाजीपुर एमपीएमएलए कोर्ट में इस केस पर बहस पूरी हुई। फैसला सुनाने के लिए 15 अप्रैल की तारीख मुकर्रर हुई।

15 अप्रैल 2023 – मामले पर फैसला नहीं आया। अगली तारीख 29 अप्रैल दी गई।

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