दो साल:कानून बनने पर 80% घटे तीन तलाक के मुकदमें,

देश में तीन तलाक के मामले 80% घटे:कानून लागू होने से पहले UP में 63 हजार केस थे, जो घटकर 221 बचे; बिहार में 49 मामले ही सामने आए

नई दिल्ली01 अगस्त।केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा है कि मुस्लिम महिला (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज) एक्ट लागू होने के बाद तीन तलाक के मामलों में 80% की कमी आई है। कानून के दो साल पूरे होने पर रविवार को दिल्ली में एक कार्यक्रम में उन्होंने यह बात कही। 1 अगस्त, 2019 को कानून लागू होने से पहले उत्तर प्रदेश में 63 हजार से ज्यादा मामले दर्ज थे, जो कानून लागू होने के बाद 221 रह गए। वहीं, एक्ट लागू होने के बाद बिहार में 49 मामले ही दर्ज हुए।

नकवी ने कहा कि अब तीन तलाक क्रिमिनल एक्ट बन गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में राम मंदिर का मुद्दा सुलझाया, जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल​​​ 370 हटाया और महरम कानून को खत्म किया। 3500 से ज्यादा मुस्लिम महिलाओं ने बिना महरम के हज की यात्रा की है।

मुस्लिम महिलाओं के संघर्ष को सलाम करने का दिन
कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने कहा कि मुस्लिम महिला अधिकार दिवस मुस्लिम महिलाओं की भावना और संघर्ष को सलाम करने के लिए है। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव भी शामिल हुए।

आरोपी पुरुष को तीन साल तक की सजा का प्रावधान
तीन तलाक (मुस्लिम महिला-विवाह अधिकार संरक्षण) बिल 30 जुलाई, 2019 को राज्यसभा में पास हुआ था। राज्यसभा में वोटिंग के दौरान बिल के पक्ष में 99 और विरोध में 84 वोट पड़े थे। बिल 25 जुलाई, 2019 को लोकसभा से पास हो चुका था। इसके अगले दिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने तीन तलाक बिल को मंजूरी दे दी थी। तीन तलाक कानून के तहत दोषी पुरुष को 3 साल की सजा सुनाई जा सकती है। साथ ही पीड़ित महिलाएं अपने और नाबालिग बच्चों के लिए गुजारे-भत्ते की मांग भी कर सकती हैं।

2017 में आया था सुप्रीम कोर्ट का फैसला

अगस्त 2017 में सुप्रीम कोर्ट ने एक बार में तीन तलाक (तलाक-ए-बिद्दत) की 1400 साल पुरानी प्रथा को असंवैधानिक करार दिया था और सरकार से कानून बनाने को कहा था।
सरकार ने दिसंबर 2017 में लोकसभा से मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक पारित कराया, लेकिन राज्यसभा में यह बिल अटक गया था।
विपक्ष ने मांग की थी कि तीन तलाक के आरोपित के लिए जमानत का प्रावधान भी हो।
2018 में विधेयक में संशोधन किए गए, लेकिन यह फिर राज्यसभा में अटक गया।
इसके बाद सरकार सितंबर 2018 में अध्यादेश लेकर आई। इसमें विपक्ष की मांग को ध्यान में रखते हुए जमानत का प्रावधान जोड़ा गया। अध्यादेश में कहा गया कि तीन तलाक देने पर तीन साल की जेल होगी।

 

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