फैक्ट चैक: झूठ है अंबानी की जियो का चौगुने दाम पर गेहूं बेचने का दावा

फेक न्यूज एक्सपोज:किसानों से गेहूं खरीदकर बाजार में चार गुना ज्यादा दाम में बेच रही अंबानी की जियो? पड़ताल में सामने आया सच
क्या हो रहा है वायरल : सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस jio किसानों से 18 रुपए किलो गेहूं खरीद कर 50-60 रुपए किलो में बेच रही है।

दिलचस्प है कि फोटो में दिख रही बोरियों में मटर जैसा दिख रहा है जबकि दावा गेहूं को लेकर किया गया है. इस पोस्ट को कई यूजर्स ने शेयर किया है.
इसी तरह की तस्वीर को एडिट करके Aijaj Malik नाम के एक यूजर ने अपने फेसबुक टाइमलाइन पर वीडियो अपलोड किया है.

इस वीडियो के कैप्शन में उन्होंने घनश्याम गोयल की तरह की दावा किया है. इसकी जब पड़ताल की गई तो पता चला कि यह दावा पूरी तरह फेक है.

फैक्ट चेक: ‘रिलायंस जियो’ नहीं बेच रहा गेहूं, लोकल मार्केट में बनती हैं ये बोरियां

किसान आंदोलन में हो रहे अंबानी-अडानी के विरोध के बीच सोशल मीडिया पर अचानक जियो के लोगो वाली अनाज की बोरियों की तस्वीरों की बाढ़-सी आ गई है. किसी पर ‘जियो बेस्ट शरबती गेहूं’ लिखा है तो किसी पर ‘जियो फाइनेस्ट क्वॉलिटी इंडियन पल्सेज’. कुछ लोग हैरत में हैं तो कुछ इसे किसानों के खिलाफ साजिश करार दे रहे हैं.
सोशल मीडिया में वायरल फोटो

किसान आंदोलन में हो रहे अंबानी-अडानी के विरोध के बीच सोशल मीडिया पर अचानक जियो के लोगो वाली अनाज की बोरियों की तस्वीरों की बाढ़-सी आ गई है. किसी पर ‘जियो बेस्ट शरबती गेहूं’ लिखा है तो किसी पर ‘जियो फाइनेस्ट क्वॉलिटी इंडियन पल्सेज’. रिलायंस जियो जैसी देश की नामी-गिरामी कंपनी का नाम अनाज की बोरियों पर देखकर कुछ लोग हैरत में हैं तो कुछ इसे किसानों के खिलाफ साजिश करार दे रहे हैं.

बहुत सारे लोग आरोप लगा रहे हैं कि कृषि कानून रिलायंस जियो के मालिक मुकेश अंबानी जैसे लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए ही लाया गया है.

नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष मनोज लुबना ने भी जियो के लोगो वाली बोरियों में भरे जा रहे गेहूं की फोटो शेयर करते हुए लिखा, “कानून बाद में बने है और थैले पहले.”


इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है. आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया टीम की सदस्य आरती ने भी जियो गेहूं को बाजार में उतारने की तैयारियों से जुड़े एक ट्वीट को रीट्वीट किया.

एक फेसबुक यूजर ने जियो के लोगो वाली बोरियों में भरे जा रहे गेहूं की तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा, “रिलायंस को मोदी जी पर पूरा भरोसा है.. Jio का अनाज गोदाम ही तैयार नहीं हुआ बल्कि बोरियों पर भी नाम छप चुका है. #FarmersProtests”

इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां देखा जा सकता है.

एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि सोशल मीडिया पर जियो के लोगो वाली अनाज की बोरियों की जो तस्वीरें शेयर हो रही हैं, उनसे रिलायंस जियो का कुछ लेना-देना नहीं है. ये बोरियां बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं और कई थोक व्यापारी इनमें अनाज भरकर बेचते हैं.

फेसबुक और ट्विटर, दोनों जगह जियो के लोगो वाली अनाज की बोरियों वाली ये तस्वीरें वायरल हैं. ऐसी ही एक वायरल तस्वीर पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा, “जियो डाटा के बाद अब जियो आटा.”

क्या है सच्चाई हमने पाया कि एक वायरल तस्वीर में जियो के लोगो वाली एक अनाज की बोरी के नीचे गुजराती भाषा में कुछ लिखा हुआ है. इस फोटो को रिवर्स सर्च करने पर हमने पाया कि कई शॉपिंग वेबसाइट्स में गुजरात के उन अनाज व्यापारियों के नाम हैं जो ‘जियो बेस्ट शरबती गेहूं’ वाली बोरियों में अनाज बेचते हैं.

हमने ऐसी ही एक कंपनी ‘राधाकृष्ण ट्रेडिंग कंपनी’ के मालिक भरत भाई से बात की. उन्होंने बताया कि वे एक अनाज व्यापारी हैं और जो व्यापारी उन्हें अनाज बेचते हैं वे ‘जियो बेस्ट शरबती गेहूं’ के प्रिंट वाली ऐसी बोरियों में कई तरह के अनाज की पैकेजिंग करते हैं. भरत भाई के मुताबिक, “गुजरात में जियो के लोगो वाली बोरियों में अनाज भरकर बेचने का चलन पिछले कई सालों से है. कई बार जिस बोरी पर गेहूं लिखा होता है, उसमें व्यापारी चावल, बाजरा या दाल भरकर भी बेच देते हैं. जियो के लोगो की वजह से ये बोरियां देखने में आकर्षक लगती हैं और इनमें अनाज बेचने से बिक्री भी अच्छी होती है. इन बोरियों को बनाने वाली कोई एक कंपनी नहीं है. ऐसी बोरियां कई कंपनियां बनाती हैं.”

हमें इंडियामार्ट वेबसाइट पर सात रुपये प्रति पीस की दर से बिकती जियो के लोगो वाली बोरी भी मिल गईं.

हमने रिलायंस जियो कंपनी की पीआर टीम से भी बात की. जियो की पीआर टीम की तरफ से बताया गया कि सोशल मीडिया पर जियो के लोगो वाली जो अनाज की बोरियों की तस्वीरें वायरल हैं, उनका रिलायंस जियो कंपनी से कोई संबंध नहीं है.

हमें रिलायंस जियो की वेबसाइट में कहीं ऐसा जिक्र नहीं मिला कि ये कंपनी अनाज के व्यापार में उतरने वाली है. किसी मीडिया वेबसाइट में भी ऐसी कोई खबर हमें नहीं मिली.

जियो के नाम से और भी कंपनियां हमने पाया कि ऐसी और भी कंपनियां हैं जिनके नाम में जियो शब्द आता है. महाराष्ट्र की ‘श्री जियो एग्रो फूड प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड’ और ‘जियो फ्रेश’ ऐसी ही कंपनियां हैं. हमने श्री जियो एग्रो फूड प्रोडक्ट्स के उत्पादों की जानकारी पाने के लिए कमल बांकीवाल से संपर्क भी किया. उनका जवाब आने पर हम उसे स्टोरी में अपडेट करेंगे.

पड़ताल से साफ है कि स्थानीय फैक्ट्रियों में बनने वाली जियो के लोगो वाली अनाज की बोरियों के जरिये ऐसा भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है कि रिलायंस जियो ने अपना अनाज बाजार में उतारने की तैयारी कर ली है.

फैक्ट चेक सोशल मीडिया यूजर्स

दावा
रिलायंस जियो अपना अनाज बाजार में उतारने के लिए तैयार है, अनाज की पैकिंग वाली बोरियों पर जियो का लोगो भी छप चुका है.

निष्कर्ष
रिलायंस जियो का अनाज के व्यवसाय से कोई लेना-देना नहीं है. जियो के लोगो वाली जिन बोरियों की फोटो सोशल मीडिया वायरल है, वे बाजार में आसानी से उपलब्ध हैं और कई थोक व्यापारी उनमें अनाज भरकर बेचते हैं.

और सच क्या है ?

इंटरनेट पर हमें ऐसी कोई खबर नहीं मिली, जिससे पुष्टि होती हो कि रिलायंस जियो ने टेलीकॉम के अलावा अनाज की बिक्री और खरीदी से जुड़ा कोई वेंचर भी शुरू किया है।
चूंकि वायरल मैसेज में जियो के नाम से अनाज बेचे जाने का दावा है, इसलिए हमने पड़ताल की शुरुआत में जियो मार्ट की वेबसाइट चेक की।
जियो मार्ट की वेबसाइट पर हमें ऐसा कोई प्रोडक्ट नहीं मिला, जिसमें जियो के नाम की पैकिंग हो, जैसा कि वायरल मैसेज में दावा किया जा रहा है।
वेबसाइट के About US सेक्शन में ऐसा कहीं उल्लेख नहीं है कि जियो अनाज से जुड़े उत्पादनों की खरीद और बिक्री का काम भी करती है।
साफ है कि सोशल मीडिया पर किया जा रहा ये दावा फेक है कि जियो किसानों से अनाज खरीदकर बाजार में चार गुना दाम पर बेच रही है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *