दिनेश अग्रवाल और सुहिर्द पाल सिंह ने भी छोड़ी कांग्रेस, समर्थकों समेत भाजपा का रुख

देहरादून 06 अप्रैल 2024। अविभाजित उत्तर प्रदेश में देहरादून जिला कांग्रेस अध्यक्ष और हरिद्वार संसदीय क्षेत्र में धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक, उत्तरांखड सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे दिग्गज दिनेश अग्रवाल ने अंततः कांग्रेस को विदा कह ही दिया। उनकी कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष करन सिंह माहरा से अनबन की चर्चाओं के बीच उन्हें मनाने की भी कोई कोशिश नहीं हुई। इसका प्रमाण है कि पहले के दूसरे ऐसे प्रकरणों के विपरीत उनका त्यागपत्र विधिवत रिसीव्ड है। समझा जा रहा है कि वे समर्थक कुछ पूर्व पार्षद नगर निगम देहरादून समेत भाजपा की सदस्यता लेंगें। याद रहे, दिनेश अग्रवाल को तत्कालीन मुख्यमंत्री नित्यानंद स्वामी को चुनाव में हराने का श्रेय है। वे सालों तक देहरादून बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और मंत्री भी रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस नेतृत्व पर वरिष्ठ जनों को अपमानित करने का आरोप लगाया है। उन्हें पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का नजदीकी माना जाता है और चुनाव के 13 दिन पहले कांग्रेस छोड़ने का सबसे बड़ा धक्का भी हरीश रावत को ही लगना है क्योंकि उनका प्रभाव क्षेत्र हरिद्वार लोकसभा क्षेत्र का ही हिस्सा है।

कुछ पत्रकारों के पूछने पर अग्रवाल ने कहा कि जहां वरिष्ठ जनों का सम्मान नहीं, वहां रहने का कोई मतलब भी नहीं है।


इसी के साथ परवादून कांग्रेस का स्तंभ रहे पूर्व राज्यमंत्री स्तर सुहिर्द पाल (एसपी) सिंह ने भी कांग्रेस छोड़ दी है। उन्होंने भी भाजपा में शामिल होने से पहले कांग्रेस जिलाध्यक्ष मोहित उनियाल को त्यागपत्र भेजा है।

श्री मोहित उनियाल, अध्यक्ष जिला कांग्रेस कमेटी, परवादून, देहरादून।

आपको अवगत कराना चाहूँगा कि मैं कुछ निजी कारणों से कांग्रेस पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से त्याग पत्र दे रहा हूँ।

पिछले तीन दशकों में कांग्रेस पार्टी में रहते हुए मुझे कांग्रेस कार्यकर्ताओं का असीम स्नेह एवं वरिष्ठ नेताओं की अपार सहानुभूति प्राप्त हुई, जिसका मैं आभार व्यक्त करता हूँ। आशा करता हूँ कि भविष्य में यह स्नेह व सहानुभूति मुझे व्यक्तिगत रूप से मिलती रहेगी।

सादर

आपका अपना,

6.4.24 (एस पी सिंह) कांग्रेस कार्यकर्ता, देहरादून, उत्तराखण्ड ।

उधर, पूर्व कैबिनेट मंत्री हीरा सिंह बिष्ट की नाराजी भी सामने आ रही है। वें पार्टी के स्टार प्रचारकों की सूची देख कर भड़क गए थे। उनकी नाराज़ी की भी पार्टी ने परवाह की हो, लगता नहीं है।

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