गिलोय, बकरी का दूध और पपीते के पत्तों से करें डेंगू का उपचार

डेंगू होने पर अस्‍पताल ही एकमात्र विकल्‍प नहीं होता, बल्कि बकरी का दूध,गिलोय और पपीते के पत्‍ते से भी इसका उपचार हो सकता है, इस लेख में हम बता रहें इनके प्रयोग और फायदे के बारे में।
डेंगू ने आजकल कोहराम मचाया हुआ है। लोग मच्छरों से ऐसे डरे हुए हैं, मानो कोई शैतान हो। ऐसा होना लाज़मी भी है, क्‍योंकि डेंगू जानलेवा भी हो सकता है। यही कारण है कि डेंगू के फैलते ही अस्पतालों में बैड मिलना भी मुश्किल हो जाता है। डेंगू के कारण प्लेटलेट्स कम होना, बुखार होना, पेट की गड़बड़ी, उल्टी और दस्त और लीवर का काम ठीक नहीं होना, आदि समस्याएं होती हैं। लेकिन क्या कोई ऐसा घरेलू उपचार नहीं जिससे अस्पताल जाना ही न पड़े। जी हां, इसका उपचार मौजूद है गिलोय और पपीते के पत्तों से डेंगू का उपचार किया जा सकता है। इन पत्तों का कैसे सेवन करें, आइए हम बताते हैं।
क्यों है पपीता फायदेमंद
पपीते की पत्तियों में कायमोपापिन (chymopapin ) और पापेन (papain) जैसे ज़रूरी एंजाइम होते हैं, विशेषज्ञों के मुताबिक, ये तत्व प्लेटलेट्स काउंट को सामान्य बनाते हैं। इससे ब्‍लड क्‍लॉटिंग सामान्‍य रहता है, और लिवर भी ठीक से काम करता है। इस तरह से डेंगू के मरीज़ को जल्दी ठीक होने में मदद मिलती है।
कैसे करें पपीते के पत्तों का सेवन
भारत में पाए जाने वाले रेड लेडी पपीते के पेड़ की पत्तियां अधिक प्रभावशाली होती हैं। पूरे लाभ के लिये ऐसे पत्तों का इस्तेमाल करना चाहिए जो न ज्यादा नए हो और न ही ज्यादा पुराने। इस्तेमाल के लिये सबसे पहले पत्तों को साफ पानी से धोएं। इसके बाद लकड़ी की ओखली में पत्तों को बिना पानी, नमक या चीनी डाले कूटें, और फिर कुटी हुई पत्तियों से जूस निकालकर दो बार दिन में पियें। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, वयस्क को दिन में दो बार 10 एमएल जूस पीना चाहिए और 5 से 12 साल के बच्चे को दिन में दो बार 2.5 एमएल तक इसका जूस देना चाहिए।
गिलोय का जूस
आयुर्वेद विशेषज्ञों के अनुसार गिलोय एक रसायन है, यह रक्तशोधक, ओजवर्धक, ह्रुदयरोग नाशक, शोधनाशक और लीवर टॉनिक भी है। यह पीलिया और जीर्ण ज्वर को ठीक करती है करती है। गिलोय एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है, डेंगू में भी इसके पच्चों के रस का सेवन लाभदायक होता है। गिलोय (टीनोस्पोरा कार्डीफोलिया) की एक बहुवर्षीय लता होती है।
कैसे करें गिलोय का सेवन
डेंगू के कारण 5 से 6 दिन के अंदर यह बुखार अपना असर दिखाना शुरू करता है। इसमें शरीर के रक्त में तेजी से प्लेटलेट्स का स्तर कम होता है। गिलोय और 7 तुलसी के पत्तों का रस पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह रक्त के प्लेटलेट्स का स्तर भी बढ़ाता है। गिलोय की कड़वाहट को कम करने के लिए इसे किसी अन्य जूस में मिलाकर पी सकते हैं।
डेंगू, पीलिया और आंखों के रोगों समेत कई अन्‍य रोगों में रामबाण औषधि है जीवन्तिका
गिलोय की पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन और फास्‍फोरस तने में स्टार्च पाया जाता है। गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है।
गिलोय की एक बहुवर्षिय लता होती है। इसके पत्ते पान के पत्ते की तरह होते हैं। आयुर्वेद साहित्य में इसे ज्वर की महान औषधि माना गया है एवं जीवन्तिका नाम दिया गया है। गिलोय की लता जंगलों, खेतों की मेड़ों, पहाड़ों की चट्टानों आदि स्थानों पर सामान्यतः कुण्डलाकार चढ़ती पाई जाती है। नीम, आम्र के वृक्ष के आस-पास भी यह मिलती है। जिस वृक्ष को यह अपना आधार बनाती है, उसके गुण भी इसमें समाहित रहते हैं। इस दृष्टि से नीम पर चढ़ी गिलोय श्रेष्ठ औषधि मानी जाती है। इसका काण्ड छोटी अंगुली से लेकर अंगूठे जितना मोटा होता है। बहुत पुरानी गिलोय में यह बाहु जैसा मोटा भी हो सकता है। इसमें से स्थान-स्थान पर जड़ें निकलकर नीचे की ओर झूलती रहती हैं। चट्टानों अथवा खेतों की मेड़ों पर जड़ें जमीन में घुसकर अन्य लताओं को जन्म देती हैं।
इसकी पत्तियों में कैल्शियम, प्रोटीन, फास्‍फोरस और तने में स्टार्च पाया जाता है। यह वात, कफ और पित्तनाशक होती है। गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है। साथ ही इसमें एंटीबायोटिक और एंटीवायरल तत्‍व भी होते है। औषधीय गुणों के आधार पर नीम के वृक्ष पर चढ़ी हुई गिलोय को सर्वोत्तम माना जाता है क्योंकि गिलोय की बेल जिस वृक्ष पर भी चढ़ती है वह उस वृक्ष के सारे गुण अपने अंदर समाहित कर लेती है तो नीम के वृक्ष से उतारी गई गिलोय की बेल में नीम के गुण भी शामिल हो जाते हैं अतः नीमगिलोय सर्वोत्तम होती है।
डेंगू में प्लेटलेट बढ़ाने के लिए गिलोय
गिलोय की बेल का सत्व मरीज को दिन में 2-3 बार दें, या गिलोय के 7-8 पत्‍तों को लेकर पीस लें उसमें 4-5 तुलसी की पत्तियां लेकर एक गिलास पानी में मिला कर उबालकर काढा बना लीजिए और इसमें पपीता के 3-4 पत्तों का रस मिला कर लेने दिन में तीन चार लेने से रोगी को प्लेटलेट की मात्रा में तेजी से इजाफा होता है। प्लेटलेट बढ़ाने का इस से बढ़िया कोई इलाज नहीं है। यदि गिलोय की बेल आपको ना मिले तो किसी आयुर्वेदिक स्‍टोर से आप गिलोय घनवटी लेकर एक एक गोली रोगी को दिन में 3 बार दे सकते हैं।
पीलिया में फायदेमंद
गिलोय का सेवन पीलिया रोग में भी बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए गिलोय का एक चम्मच चूर्ण, काली मिर्च अथवा त्रिफला का एक चम्मच चूर्ण शहद में मिलाकर चाटने से पीलिया रोग में लाभ होता है। या गिलोय के पत्तों को पीसकर उसका रस निकाल लें। एक चम्‍मच रस को एक गिलास मट्ठे में मिलाकर सुबह-सुबह पीने से पीलिया ठीक हो जाता है।
आंखों के लिए फायदेमंद
गिलोय का रस आंवले के रस के साथ मिलाकर लेना आंखों के रोगों के लिए लाभकारी होता है। इसके सेवन से आंखों के रोगों तो दूर होते ही है, साथ ही आंखों की रोशनी भी बढ़ती हैं। इसके लिए गिलोय के रस में त्रिफला को मिलाकर काढ़ा बना लें। इस काढ़े में पीपल का चूर्ण और शहद मिलकर सुबह-शाम सेवन करें।
जलन दूर करें
अगर आपके पैरों में जलन होती है और बहुत उपाय करने के बाद भी आपको कोई फायदा नहीं हो रहा है तो आप गिलोय का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए गिलोय के रस को नीम के पत्ते एवं आंवला के साथ मिलाकर काढ़ा बना लें। प्रतिदिन 2 से 3 बार इस काढ़े का सेवन करें इससे हाथ पैरों और शरीर की जलन दूर हो जाती है।
चिकनगुनिया में फायदेमंद
यह शरीर को ठंडा रखता है जिससे बुखार कम करने में मदद मिलती है। साथ ही क्रोनिक फीवर जैसे डेंगू और चिकनगुनिया के लिए भी प्रभावी है। गिलोय का सेवन वाइट ब्‍लड सेल्‍स को रेगुलेट करने में मदद करते है। गिलोय में मौजूद एंटी-इंफ्लेमेंटरी और अल्‍कालाइन गुण पाचन में मदद करते हैं। इसके अलावा यह अर्थराइटिस और अस्‍थमा के उपचार और टाइप -2 डायबिटीज के लिए ब्‍लड ग्लूकोज के स्तर को कम करने में मदद करता है।
खून की कमी दूर करें
गिलोय शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है और शरीर में खून की कमी को दूर करता है। इसके लिए प्रतिदिन सुबह-शाम गिलोय का रस घी या शहद मिलाकर सेवन करने से शरीर में खून की कमी दूर होती है।
कान दर्द में लाभकारी
गिलोय के पत्तों के रस को गुनगुना करके कान में डालने से कान का दर्द ठीक होता है। साथ ही गिलोय को पानी में घिसकर और गुनगुना करके दोनों कानों में दिन में 2 बार डालने से कान का मैल निकल जाता है।
उल्टियां में फायदेमंद
गर्मियों में कई लोगों को उल्‍टी की समस्‍या होती हैं। ऐसे लोगों के लिए भी गिलोय बहुत फायदेमंद होता है। इसके लिए गिलोय के रस में मिश्री या शहद मिलाकर दिन में दो बार पीने से गर्मी के कारण से आ रही उल्टी रूक जाती है।
बुखार में फायदेमंद
गिलोय एक रसायन है जो रक्तशोधक, ओजवर्धक, हृदयरोग नाशक ,शोधनाशक और लीवर टोनिक भी है। गिलोय के रस में शहद मिलाकर लेने से बार-बार होने वाला बुखार ठीक हो जाता है। या गिलोय के रस में पीपल का चूर्ण और शहद को मिलाकर लेने से तेज बुखार तथा खांसी ठीक हो जाती है।
पेट के रोगों में लाभकारी
गिलोय के रस या गिलोय के रस में शहद मिलाकर सेवन करने से पेट से संबंधित सभी रोग ठीक हो जाते है। इसके साथ ही आप गिलोय और शतावरी को साथ पीस कर एक गिलास पानी में मिलाकर पकाएं। जब उबाल कर काढ़ा आधा रह जाये तो इस काढ़े को सुबह-शाम पीयें।
खुजली दूर भगाएं
खुजली अक्‍सर रक्त विकार के कारण होती है। गिलोय के रस पीने से रक्त विकार दूर होकर खुजली से छुटकारा मिलता है। इसके लिए गिलोय के पत्तों को हल्दी के साथ पीसकर खुजली वाले स्थान पर लगाइए या सुबह-शाम गिलोय का रस शहद के साथ मिलाकर पीएं।
इसे शोध भी करते हैं प्रमाणित
कुछ अध्ययन बताते हैं कि पपीते के पत्तों व गिलोय का जूस शरीर के लिए लाभदायक होता है। यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा के शोध केंद्र में कार्यरत डॉ. नाम डैंग ने अपने एक अध्ययन के आधार पर पपीते के पत्तों के जूस के फायदों के बारे में बताया है। डॉ. डैंग ने अपने अध्ययन में पाया कि पपीते के पत्तों का जूस कैंसर से लड़ने में प्रभावी भूमिका निभा सकता है, साथ ही यह इम्यूनिटी को भई बढ़ा सकता है। इन पत्तों से मलेरिया और कैंसर जैसी बीमारियों का इलाज भी किया जा सकता है। श्रीलंकन जर्नल ऑफ फैमिली फिज़िशियन में साल 2008 में प्रकाशित अपने पेपर के अनुसार श्रीलंका के फीज़िशियन डॉ. सनथ हेट्टिज बताते हैं कि पपीते के पत्ते का जूस डेंगू का इलाज कर सकता है।
इस लेख में डेंगू से बचने के घरेलू उपाय के बारे में बताने की कोशिश की गई है, हालांकि ये उपाय विशेषज्ञों की सलाह पर हैं लेकिन डेंगू की स्थिति में जल्द से जल्द डॉक्टरी मदद भी लेना जरूरी है।
डेंगू के उपचार में बहुत प्रभावी है बकरी का दूध
डेंगू के उपचार में बकरी का दूध बहुत उपयोगी है, इस लेख में हम आपको बता रहे हैं आखिर किन गुणों के कारण बकरी का दूध डेंगू के लिए ‘रामबाण’ माना जाता है।
डेंगू का कहर सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के कई देशों में महामारी बन चुका है। विकसित और विकासशील देश इसकी चपेट में आ रहे हैं। भारत के कई राज्‍य इसकी चपेट में आ चुके हैं, खासकर राजधानी दिल्‍ली। डेंगू के उपचार के लिए लोग महंगे हॉस्‍पीटल का रुख कर रहे हैं लेकिन इसके लिए वे सस्‍ते और अच्‍छे विकल्‍प की तलाश नहीं कर रहे। डेंगू के उपचार के लिए सबसे प्रभावी और जल्‍द से जल्‍द घटती प्‍लेटलेट्स को बढ़ाने वाले विकल्‍पों में से एक है बकरी का दूध। इस लेख में हम आपको बता रहे हैं आखिर कैसे बकरी के दूध से डेंगू का उपचार होता है।
कैसे होता है डेंगू
डेंगू के बारे में शायद सभी जानते हैं। यह बीमारी एडीज मच्छर द्वारा काटने से होती है। डेंगू के बारे में सबसे खास बात यह है कि इसके मच्छर दिन के समय काटते हैं तथा यह मच्छर साफ पानी में पनपते हैं। डेंगू के दौरान रोगी के जोड़ों और सिर में तेज दर्द होता है। बड़ों के मुकाबले यह बच्चों में ज्यादा तेजी फैलने वाली बीमारी है। डेंगू बुखार में प्लेटलेट्स का स्तर तेजी से नीचे गिरता है, इसलिए इसका उपचार तुरंत कराने की जरूरत होती है नहीं तो यह जानलेवा भी हो सकता है।
बकरी का दूध और डेंगू


बकरी के दूध से बहुत फायदे हैं खासकर डेंगू में। औषधीय गुणों के कारण यह विशेष गंध वाला होता है। डेंगू के लिए तो यह रामबाण ही है। दरअसल बकरियां जंगल में औषधीय पौधों को ही अपना आहार बनाती हैं और उनके दूध में इसकी सुगंध हो जाती है। इस दूध में औषधीय गुणों की मात्रा भी बहुत होती है। बकरी का दूध मधुर, कसैला, शीतल, ग्राही, हल्का, रक्त-पित्त, अतिसार, क्षय, खांसी एवं बुखार को दूर करता है। डेंगू बुखार के दौरान बकरी के दूध की उपयोगिता साबित हुई है।
बकरी के दूध में विटामिन बी 6, बी 12, सी एवं डी की मात्रा कम पाई जाती है। इसमें फोलेट बाइंड करने वाले अवयव की मात्रा ज्यादा होने से फोलिक एसिड नामक आवश्यक विटामिन होता है। बकरी के दूध में मौजूद प्रोटीन गाय, भैंस की तरह जटिल नहीं होता। इसके चलते यह हमारे प्रतिरोधी रक्षा तंत्र पर कोई प्रतिकूल असर नहीं डालता। इसे एक साल से छोटे बच्‍चों को नहीं पिलाना चाहिए, क्‍योंकि इससे उनको एलर्जी हो सकती है। गाय का दूध पचने में जहां 8 घंटे लगते हैं वहीं बकरी का दूध मात्र 20 मिनट में पच जाता है।
बकरी के दूध के अन्‍य फायदे
जो व्यक्ति लैक्टोज को पचाने की पूर्ण क्षमता नहीं रखते हैं वे भी बकरी का दूध आसानी से पचा सकते हैं। बकरी का दूध अपच की समस्‍या दूर करता है और आलस्य को भगाता है। इस दूध में क्षारीय भस्म पाए जाने के कारण आंत्रीय तंत्र में अम्ल नहीं बनाता। थकान, सिर दर्द, मांस पेशियों में खिंचाव, अत्यधिक वजन आदि विकार दूर होते हैं। इसके दूध के सेवन से म्यूकस नहीं बनता है। शरीर के लिए जरूरी सेलेनियम तत्व बकरी के दूध में अन्य पशुओं के दुग्ध से ज्यादा होता है। यह तत्व एण्टीऑक्सीडेंट के अलावा प्रतिरोधी रक्षा तंत्र को उच्च व निम्‍न करने का काम करता है। एचआईवी आदि रोगों में इसे कारगर माना जाता है।
डेंगू से बचने के लिए बकरी के दूध के अलावा अपने आसपास की सफाई का विशेष ध्‍यान दें। अगर इस मौसम में आपको बुखार भी हो तो चिकित्‍सक से तुरंत संपर्क करें।

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