छानबीन: धर्मांतरण गैंग इस्तेमाल करता था कोड वर्ड्स इस्तेमाल,’कौम का कलंक’ नहीं हो पाया डिकोड

‘अल्लाह के बंदे, मुतक्की, सलात, रहमत..’: सामने आए धर्मांतरण गिरोह के कोड वर्ड्स, नहीं पता चला कौन है ‘कौम का कलंक’
इस्लामी धर्मांतरण गिरोह के सरगना ATS के शिकंजे में (फाइल फोटो साभार: Zee News)

मूक-बधिर बच्चों को बरगला कर उनके इस्लामी धर्मांतरण कराने वाले गिरोह ने अलग-अलग चीजों के लिए अलग-अलग कोड वर्ड्स भी बना रखे थे, जिन्हें डिकोड करने में यूपी पुलिस लगी हुई है। यूपी ATS ने बताया है कि अभी तक ऐसे 7 कोड वर्ड्स सामने आए हैं। इनमें से 6 को जहाँ डिकोड कर लिया गया है, एक को डिकोड करने का प्रयास जारी है। जिन कोड वर्ड्स का इस्तेमाल किया जाता था, वो हैं:

1. रिवर्ट बैक टू इस्लाम प्रोग्राम (इसका आशय धर्म-पिरवर्तन अभियान से है) – डेफ सोसाइटी की शिक्षक इसके तहत काम करती थी। छात्रों को धर्मांतरण की तरफ ले जाया जाता था।
2. मुतक्की (अपने अधिकार और सच्चाई की तलाश) – इसे बार-बार बोला जाता था बच्चों के बीच इस्तेमाल किया जाता था।
3. सलात (नमाज पढ़ना) – इस्लामी धर्मांतरण करने वाले को इसकी जिम्मेदारी दी जाती थी।
4. रहमत (विदेश से आने वाला फंड) – इससे किसी को शक नहीं होता था कि फंडिंग विदेश से आ रही है।
5. अल्लाह के बंदे (सोशल मीडिया पर डाले गए वीडियो को लाइक करने वाला) – सोशल मीडिया पर ऐसे लोगों को चिह्नित किया जाता था।
6. मोबाइल नंबर, जन्मतिथि (धर्म परिवर्तन करने वाले का नाम) – एक आईडी के रूप में इनका इस्तेमाल किया जाता था, ताकि पहचान बाहर न आए।
7. कौम का कलंक (इसे अभी तक डिकोड नहीं किया जा सका है)
मूक-बधिर बच्चों से बात करने के लिए और उन्हें बरगलाने के लिए भी सांकेतिक भाषा और इन कोड वर्ड्स का इस्तेमाल किया जाता था। भाजपा सांसद रवि किशन ने कहा है कि वो धर्मांतरण गिरोह के मुद्दे को संसद में भी उठाएँगे। वहीं उत्तर प्रदेश के 400 ऐसे मदरसे हैं, जिन पर पुलिस की नजर है क्योंकि ऐसे ही संस्थानों के जरिए इस गिरोह का नेटवर्क फैला हुआ था। फ़िलहाल गिरफ्तार हुए लोगों से और पूछताछ जारी है।

सोमवार (जून 28, 2021) को इस गिरोह के दो और लोगों को गिरफ्तार किया गया। अब तक इस मामले में 5 लोग दबोचे जा चुके हैं। मौलाना मोहम्मद उमर गौतम और काजी जहाँगीर इस मामले के मुख्य आरोपित हैं। इरफान शेख, मन्नू यादव उर्फ अब्दुल मन्नान और राहुल भोला के नाम भी इन्हीं दोनों से पूछताछ के दौरान सामने आए थे। इनके पास से इस्लामी धर्मांतरण से जुड़े दस्तावेज, विभिन्न बैंकों की चेक बुक, पासबुक, आधार कार्ड, पैन कार्ड, लैपटॉप और मोबाइल फोन बरामद किए गए हैं।

धर्मांतरण गिरोह के तार अब महाराष्ट्र भी पहुँच गए हैं। इरफ़ान शेख नामक व्यक्ति को यहीं से गिरफ्तार किया गया, जो केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्रालय में कार्यरत है। वो कमजोर और दिव्यांग बच्चों की सूची ‘इस्लामी दावा सेंटर’ को मुहैया कराता था, जिसके बाद गिरोह उन्हें निशाना बनाता था। बीड के रहने वाले इरफ़ान से पहले इसी मंत्रालय के एक और अधिकारी को गिरफ्तार किया गया था। इस तरह दोनों मौलानाओं को छोड़ दें तो 5 अन्य की गिरफ़्तारी हुई है।

विदेश से इस गिरोह को 1 करोड़ रुपए से भी अधिक की फंडिंग की बात पता चली है। मौलाना उमर ने अपने निजी, परिजनों और फातिमा चैरिटेबल ट्रस्ट के बैंक खातों में विदेश से बड़ी रकम मँगाई थी। IDC के बैंक खाते से 50 लाख रुपए मिले हैं। असम की संस्था मारकाजुल मारिफ ने भी डोनेशन दिया। क़तर, दुबई और अबुधाबी से बड़ी रकम आई। 27 जिलों के एसपी को पत्र लिख कर धर्मांतरण कराने वालों का सत्यापन कराने को कहा गया है।

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