चौतरफा मुश्किल में ममता: मंत्रीमंडल विद्रोह, राष्ट्रपति शासन खतरा, भाजपा के बाद औवेसी चुनौती

चुनाव से पहले मुश्किल में ममता:कैबिनेट मीटिंग से 5 मंत्री गायब रहे, एक ने तो कई कार्यक्रम किए पर तृणमूल के बैनर बिना

बंगाल के परिवहन मंत्री सुवेंदु अधिकारी पिछले कई महीने से पार्टी से दूरी बनाए हुए हैं।
पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले तृणमूल चीफ ममता बनर्जी के सहयोगियों के नाराज होने की खबर आई है। सरकार में परिवहन मंत्री सुवेंदु अधिकारी बुधवार को ममता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट मीटिंग में नहीं पहुंचे। अधिकारी पिछले कई महीने से पार्टी से दूरी बनाए हुए हैं। इस दौरान उन्होंने पार्टी के बैनर के बगैर ही कई कार्यक्रम किए हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुल पांच मंत्री कैबिनेट मीटिंग में नहीं पहुंचे।
सूत्रों ने बताया कि सुवेंदु अधिकारी के न आने की वजह किसी को नहीं मालूम है। अधिकारी के अलावा, शिक्षा मंत्री पार्थ चटर्जी भी कैबिनेट मीटिंग में शामिल नहीं हुए। हालांकि, उनकी तबीयत खराब होने की खबर मिली थी।

कैबिनेट मीटिंग में नहीं पहुंचे 20% मंत्री

सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट में 80% मंत्री ही शामिल हुए। सुवेंदु अधिकारी और पार्थ चटर्जी के अलावा राजीव बनर्जी, गौतम देव और रवींद्रनाथ घोष के कैबिनेट मीटिंग में न पहुंचने के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है। हालांकि पांच मंत्रियों की एक साथ गैर-मौजूदगी को लेकर ममता सरकार में चुनाव से पहले असंतोष की चर्चा शुरू हो गई है।

दुर्गापुर में आपस में भिड़े तृणमूल कार्यकर्ता

इधर बंगाल के दुर्गापुर में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कार्यकर्ता आपस में ही भिड़ गए। दो गुटों में हुई झड़प में एक कार्यकर्ता की गोली लगने से मौत हो गई। दो कार्यकर्ताओं के घायल होने की खबर है।

ममता के खिलाफ बगावत करने वाले शुभेंदु अधिकारी के घर पहुंचे प्रशांत किशोर, गैर मौजूदगी में सांसद पिता से ही हुई बात

ममता के खिलाफ बगावत करने वाले शुभेंदु अधिकारी के घर पहुंचे प्रशांत किशोर, जानें क्या हुई बात पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत का बिगुल फूंकने वाले कैबिनेट मंत्री शुभेंदु अधिकारी को मनाने की कोशिश तृणमूल कांग्रेस ने शुरू कर दी है. संभवत: इसी कवायद के तहत ममता बनर्जी की पार्टी के चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर शुभेंदु अधिकारी के घर पहुंचे. प्रशांत ने शुभेंदु के पिता शिशिर अधिकारी से मुलाकात की.
प्रशांत किशोर पूर्वी मेदिनीपुर स्थित शुभेंदु अधिकारी के आवास पर गये और उनके पिता एवं तृणमूल कांग्रेस के सांसद शिशिर अधिकारी से मुलाकात की. तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी के भविष्य की योजनाओं को लेकर चल रही अटकलों के बीच प्रशांत किशोर की पूर्वी मेदिनीपुर की इस यात्रा को बेहद अहम माना जा रहा है.

पार्टी के एक नेता ने बताया कि वर्ष 2019 के लोकसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन के बाद तृणमूल कांग्रेस ने किशोर को अपनी चुनावी रणनीति बनाने के लिए चुना है. हालांकि, गुरुवार को कोंटाई स्थित शुभेंदु अधिकारी के घर पहुंचने के बाद किशोर उनसे नहीं मिल सके. उन्होंने काफी देर उनके पिता से बातचीत की.
नेता ने बताया, ‘किशोर गुरुवार शाम को शुभेंदु अधिकारी के आवास पर गये थे. वह शुभेंदु से नहीं मिल सके, क्योंकि उस वक्त वह घर पर नहीं थे. उन्होंने अधिकारी के पिता, तृणमूल कांग्रेस से सांसद शिशिर अधिकारी से करीब आधे घंटे तक बातचीत की.’
सूत्रों ने बताया कि किशोर और शिशिर अधिकारी में से किसी ने भी इस मुलाकात के बारे में कोई सार्वजनिक खुलासा नहीं किया है. जिला तृणमूल कांग्रेस नेताओं के एक वर्ग को प्रशांत किशोर के श्री अधिकारी के आवास पर आने के संबंध में कोई जानकारी नहीं थी.

गौरतलब है कि शुभेंदु अधिकारी पिछले कुछ महीनों से ममता बनर्जी से नाराज चल रहे हैं और पार्टी एवं कैबिनेट की बैठकों से दूर रह रहे हैं. वह पूर्वी मेदिनीपुर जिला में रैलियां कर रहे हैं और इनमें वह पार्टी के बैनरों और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के पोस्टरों का उपयोग नहीं कर रहे हैं।
शुभेंदु अधिकारी ने अपनी रैलियों में कहा है कि बहुत कम उम्र से कठिन परिश्रम करके वह जमीनी स्तर से यहां तक पहुंचे हैं और उन्हें कभी किसी ने कुछ भी थाली में सजाकर नहीं दिया.हालांकि,उन्होंने कभी किसी का नाम नहीं लिया है. उनके इन कदमों की पार्टी के कुछ नेताओं ने आलोचना भी की है.

चुनाव से पहले बंगाल में राष्ट्रपति शासन? क्यों उठी मांग,ममता सरकार से कहां चूक,गवर्नर के चुभते सवाल… इतना बवाल क्यों?

इस वक्त पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा चरम पर है। इसी के साथ राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने की चर्चा भी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल बीजेपी ने राष्ट्रपति शासन लागू करने की वकालत की। वहीं राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी राजनीतिक हिंसा पर सवाल उठाए हैं और संविधान के हिसाब से कदम उठाने की बात कही।

हाइलाइट्स:
पश्चिम बंगाल में इस समय जिस तरीके के हालात हैं उससे विधानसभा चुनाव में राजनीतिक हिंसा का मुद्दा बनना तय
पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा चरम पर होने के साथ राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने की चर्चा भी तेज हो गई है
जगदीप धनखड़ ने भी राजनीतिक हिंसा पर सवाल उठाए हैं और संविधान के हिसाब से कदम उठाने की बात कही
पश्चिम बंगाल में इस समय जिस तरीके के हालात हैं उससे आगामी विधानसभा चुनाव में राजनीतिक हिंसा का मुद्दा बनना तय है। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा चरम पर होने के साथ राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू किए जाने की चर्चा भी तेज हो गई है। पश्चिम बंगाल बीजेपी ने राष्ट्रपति शासन लागू करने की वकालत की। वहीं राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी राजनीतिक हिंसा पर सवाल उठाए हैं और संविधान के हिसाब से कदम उठाने की बात कही।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही इसका जिक्र करके ममता सरकार को इशारों-इशारों में चेतावनी दे चुके हैं। पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं और बीजेपी ने ममता सरकार को घेरने की पूरी तैयारी कर ली है। पार्टी में गुटबाजी से परेशान ममता के लिए राष्ट्रपति शासन नया सिरदर्द साबित हो सकता है। हालांकि बीजेपी का यह भी कहना है कि ममता इसके जरिए विक्टिम कार्ड खेलने वाली हैं।

‘बंगाल में विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है’

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा, ‘बंगाल में राजनीतिक हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। यहां विपक्ष की आवाज को दबाया जा रहा है। पश्चिम बंगाल में अफसर राजनीतिक कार्यकर्ता बन गए हैं। ये प्रजातंत्र में ठीक नहीं है। पश्चिम बंगाल में सुरक्षा देने में भी राजनीति की जा रही है। राजनीतिक विरोधियों की सुरक्षा वापस ली जा रही है।’

धनखड़ बोले- संविधान के हिसाब से उठाएंगे कदम

धनखड़ ने आगे कहा, ‘मैं बंगाल की हालत को लेकर चिंतित हूं। मैं नहीं चाहता कि पश्चिम बंगाल की जनता यह विश्वास खो दे कि बंगाल में निष्पक्ष चुनाव भी हो सकता है। मैं राष्ट्रपति शासन लगाने पर तो कुछ नहीं बोलूंगा लेकिन भारत के संविधान के तहत जो शक्तियां मुझे मिली हैं, जनता के हित में संविधान के हिसाब से ही कदम उठाएंगे। एक राज्यपाल के तौर पर मैं सिर्फ संविधान के आदेश का पालन करता हूं। मैं सिर्फ संविधान का एजेंट हूं।’

बंगाल पुलिस टीएमसी कैडर की तरह काम करती है-बीजेपी
उधर पश्चिम बंगाल बीजेपी ने भी पार्टी कार्यकर्ताओं की हत्या और उनपर हो रहे हमलों के बाद राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की। गुरुवार को बंगाल में बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष के काफिले पर पत्थरबाजी हुई। इसका विरोध करने वाले तकरीबन 40 बीजेपी कार्यकर्ताओं को पुलिस ने हिरासत में ले ले लिया। बंगाल बीजेपी चीफ दिलीप घोष ने आरोप लगाया कि पुलिस टीएमसी की कैडर की तरह काम कर रही है।
पश्चिम बंगाल बीजेपी प्रमुख दिलीप घोष की टीएमसी कार्यकर्ताओं की चेतावनी, कहा- अपना तरीका बदलिये या हाथ तुड़वाइये

‘निष्पक्ष चुनाव के लिए बंगाल में लागू हो राष्ट्रपति शासन’

दिलीप घोष ने कहा, ‘पुलिस के सामने नेताओं पर हमले होते हैं लेकिन एक एफआईआर नहीं होती। उल्टा हमारे कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया जाता है।’ दिलीप घोष ने आगे कहा, ‘ममता बनर्जी खुद चाहती हैं कि राज्य में 356 लागू हो जाए। वह केंद्र सरकार को इसके लिए मजबूर कर रही हैं ताकि चुनाव के दौरान विक्टिम कार्ड खेल सकें। हालांकि बंगाल के लोग भी कह रहे हैं कि जब तक यह सरकार रहेगी तब तक निष्पक्ष चुनाव नहीं हो पाएंगे। इसलिए राष्ट्रपति शासन जरूरी है।’

बंगाल में ममता से कहां हुई चूक?

दरअसल बंगाल में जारी राजनीतिक हिंसा और केंद्र से तनातनी के चलते ममता सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर हैं। पश्चिम बंगाल में एक और बीजेपी कार्यकर्ता की हत्या का आरोप लगा है। कांथी की भगवानपुर विधानसभा क्षेत्र के इटाबेड़िया अंचल में बीजेपी के सक्रिय कार्यकर्ता की हत्या का आरोप है। बीजेपी अब तक अपने 89 कार्यकर्ताओं की हत्या का आरोप लगा चुकी है। वहीं बंगाल में कोयला माफियाओं का मुद्दा भी गर्माया हुआ है। गुरुवार को कोयला माफियाओं ने कथित रूप से टीएमसी कार्यकर्ता की गोली मारकर हत्या कर दी। इस पर घेरते हुए बीजेपी ने कहा कि पश्चिम बंगाल में जिस तरह से अवैध कोयला खनन हो रहा है अब इस राज्य को भगवान ही बचाए।

ममता ने लगाया बीजेपी पर धमकाने का आरोप

बिहार चुनाव में एनडीए को बहुमत और सबसे बड़ी पार्टी बनने के बाद बीजेपी के हौसले इन दिनों बुलंद है। बीजेपी का अगला मिशन बंगाल है और इसके लिए रणनीति भी तैयार कर ली है जिसे ममता खेमे की टेंशन बढ़ गई है। ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर धमकाने का आरोप लगा चुकी हैं। पिछले दिनों ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया था कि वह बंगाल में काम कर रहे आईपीएस अधिकारियों को धमका रही है कि अगर उन्होंने उसके निर्देशों का पालन नहीं किया तो उन्हें आयकर या सतर्कता से संबंधित मामलों में फंसाया जा सकता है।

ममता बनाम केंद्र: लंबी है लड़ाई

बता दें कि केंद्र सरकार और ममता बनर्जी के बीच काफी समय से तनातनी चल रही है। पिछले साल सारदा चिट फंड घोटाले की जांच को सीबीआई जब कोलकाता के पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के घर पर छापेमारी के लिए पहुंची थी तो कोलकाता पुलिस और सीबीआई के बीच झड़प की बात सामने आई। जब इसकी भनक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को लगी तो वह फौरन राजीव कुमार के घर पहुंच गईं और उन्हें बचाने को खुलकर मैदान में आ गईं। ममता बनर्जी कोलकाता के मेट्रो चैनल इलाके में धरने पर बैठ गई थीं।

बंगाल में क्यों लग सकता है राष्ट्रपति शासन?

बंगाल में राजनीतिक हिंसा और केंद्र सरकार से खींचतान के कारण वहां राष्ट्रपति शासन लागू करने की बात कही जा रही है। चलिए जान लेते हैं कि किन मामलों में राज्यों में राष्ट्रपति शासन (अनुच्छेद 356) लगाया जाता है-

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 356 राष्ट्रपति को राज्यों में राष्ट्रपति शासन लगाने का अधिकार देता है। कोई राज्य सरकार संविधान के अनुसार काम नहीं कर रही है या फिर वहां सरकार गठन में कोई समस्या आ रही है तो राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है। अगर राष्ट्रपति इस तर्क से संतुष्ट हैं कि राज्य सरकार संविधान के प्रावधानों के मुताबिक काम नहीं कर रही है तो कैबिनेट की सहमति राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है।

कब लगता है राष्ट्रपति शासन-

*राज्य का संवैधानिक तंत्र पूरी तरह फेल होने पर
*राज्य सरकार के संवैधानिक दायित्वों का निर्वाह न करने पर
विधानसभा चुनाव के बाद किसी भी दल या गठबंधन को बहुमत न मिलने पर
*विधानसभा के मुख्‍यमंत्री का चुनाव न कर पाने पर
*सबसे बड़ी पार्टी के सरकार बनाने से इनकार करने पर
*सत्तारूढ़ गठबंधन के टूटने या सरकार के बहुमत खोने पर
*राज्य सरकार के शांति व्यवस्था को संभालने में नाकाम रहने पर
*अपरिहार्य कारणों से राज्य में समय से चुनाव न हो पाने पर

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