फैक्ट चैक:13 साल पहले हत्या से जुड़ा शव कोरोना से जोड़ वायरल कर रहे खुराफाती,मुकदमा

फैक्ट चेक
फैक्ट चेक: नदी के किनारे बिखरे शवों की खबरें सच हैं, लेकिन ये तस्वीर सालों पुरानी है
सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाली तस्वीर वायरल होने लगी है. तस्वीर में नदी के घाट पर एक कुत्ता नरकंकाल में बदल चुकी एक लाश को नोचते हुए दिख रहा है. तस्वीर के साथ तंज करते हुए इसे हाल फिलहाल का बताया जा रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की जा रही है
अर्जुन डियोडिया
नई दिल्ली,15 मई 2021,देश में कोरोना से मची तबाही को लेकर हर रोज ऐसी कहानियां आती हैं जो झकझोर कर रख देती हैं. कभी ऑक्सीजन के लिए तड़पते लोग तो कभी शमशान घाट पर लगी शवों की कतारें. हाल ही में एक और विचलित कर देने वाली खबर आई जिसने सबको हिला कर रख दिया. उत्तर-प्रदेश और बिहार में गंगा नदी में लावारिस लाशें बहती हुई पाई गईं. हालत इतनी खराब है कि कुछ जगह नदी के किनारे कुत्ते शवों को नोचते हुए नजर आए.

अब इसी के मद्देनजर सोशल मीडिया पर एक चौंकाने वाली तस्वीर वायरल होने लगी है. तस्वीर में नदी के घाट पर एक कुत्ता नरकंकाल में बदल चुकी एक लाश को नोचते हुए दिख रहा है. तस्वीर के साथ तंज करते हुए इसे हाल फिलहाल का बताया जा रहा है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की जा रही है. कुछ लोग कटाक्ष करते हुए कह रहे हैं कि ये तस्वीर “डिजिटल इंडिया” की ​सच्चाई दिखा रही है.

एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि ये तस्वीर 13 साल से ज्यादा पुरानी है और वाराणसी के घाट की है. तस्वीर का कोरोना महामारी से कोई लेना-देना नहीं है.

इस तस्वीर को शेयर करते हुए फेसबुक यूजर्स कैप्शन में लिख रहे हैं, “उसके मन की बकवास क्या सुनना जो गंगा में बहती लाशों पर खामोश है”. ट्विटर पर भी तस्वीर काफी वायरल हो रही है. वायरल पोस्ट का आर्काइव यहां देखा जा सकता है.

कैसे पता की सच्चाई?

तस्वीर को रिवर्स सर्च करने पर हमें ये तस्वीर स्टॉक इमेज वेबसाइट ‘Alamy’ पर मिली. यहां दी गई जानकारी के अनुसार तस्वीर को 20 फरवरी 2008 को बनारस के घाट पर लिया गया था जब ये कुत्ता एक लाश को नोच रहा था. Alamy की तरह ही ये तस्वीर हमें स्टॉक फोटो वेबसाइट ‘AGE’ पर भी मिली.हालांकि,यहां तस्वीर के साथ तारीख नहीं बताई गई है,लेकिन तस्वीर लेने वाले फोटोग्राफर के नाम का जिक्र है. इसके मुताबिक तस्वीर को “Dinodia Photo” के फोटोग्राफर रंजीत सेन ने वाराणसी में लिया था. “Dinodia Photo” मुंबई स्थित एक फोटो लाइब्रेरी है. “Dinodia Photo” की वेबसाइट पर भी तस्वीर मौजूद है.

जानकारी पुख्ता करने के लिए हमने “Dinodia Photo” के संस्थापक जगदीश अग्रवाल से भी बात की. जगदीश का कहना था कि ये तस्वीर अभी की नहीं बल्कि तकरीबन 20 साल पुरानी है.तारीख की पुष्टि होने के बाद फोटोग्राफर ज्ञरंजीत सेन से तो बात नहीं हो पाई लेकिन बाद में पुलिस तफ्तीश में यह मामला एक हत्या से जुडा पाया गया।
हम पुख्ता तौर पर नहीं कह सकते कि ये तस्वीर कब ली गई थी, लेकिन इतना स्पष्ट है कि ये सालों पुरानी है और वाराणसी की है.तस्वीर को कोरोना में हो रही दुर्दशा से जोड़कर शेयर किया जा रहा है.हालांकि,ये भी सच है कि पिछले कुछ दिनों में भी इससे भी भयानक तस्वीरें सामने आई हैं जिसमें नदी के किनारे बड़ी संख्या में शव बिखरे हैं और उन्हें कुत्ते नोचते नजर आ रहे हैं. लेकिन इस तस्वीर के साथ किये जा रहे दावे पर एतराज़ करते हुए बनारस पुलिस ने महामारी अधिनियम और आईटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

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सोशल मीडिया यूजर्स
दावा
तस्वीर में देखा जा सकता है कि कैसे कोरोना मरीजों के शवों को कुत्ते नोच रहे हैं.

निष्कर्ष-वायरल की जा रही तस्वीर 13 साल पुरानी है और कोरोना काल में इसे वायरल करने के पीछे राजनीतिक द्वेष के अलावा और कुछ नहीं।

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