‘कुछ तुम ठने कुछ हम ठने ‘ …. डॉ. क्षमा कौशिक की 25 प्रातः नमन कविताएं

भूल कर कल की बातें
नव प्रभात सजाते हैं
जीवन है दिन चार इसे
हंसी खुशी बिताते है।

++++++++++++++++++++++++
प्रेम का पौधा वहीं पर खिलखिलाता है
विश्वास का जल जहां वह नित्य पाता है
प्रेम में विश्वास की महती जरूरत है
दर के सहारे बेल परवान चढ़ती है।

+++++++++++++++++++
ईश्वर के प्यारे उपहार हैं बच्चे
घर _आंगन की बहार हैं बच्चे
खुशियों भरा हो जीवन उनका
माता – पिता का संसार हैं बच्चे।

+++++++++++++++++++
हर दिन त्यौहार लगता है
जीवन खुशियों की बहार लगता है
साथ अपनों का हो अगर
तप्त मौसम भी ठंडी फुहार लगता है।

+++++++++++++++++++++
हम समझे थे क्या,क्या तुमने जता दिया
खुद को तराशने का ,रास्ता दिखा दिया
अच्छा हुआ मुझको ,मुझसे मिला दिया
मित्र! सच का तुमने आइना दिखा दिया।

+++++++++++++
त्यौहार की उमंग में सच्चाई ये
न भूलें
घात लगाये बैठा है कोराेना ये
न भूलें
जिस जतन से रोक रक्खा है
अभी तक
वो सावधानी अभी जरूरी है
न भूलें।

सावधान रहें, स्वस्थ रहें।
++++++++++++++++++++
शांत झील में किसने आ कंकर फेंकी है
यादों की कितनी लहरें बरबस मचली हैं
अक्स उतरते डूब रहे पल पल में कितने
मानो सुंदर स्वप्न कोई मैं देख रही हूं।

++++++++++++++++++++
पहाड़ों से लड़ते झगड़ते ये बादल
अपनी ही धुन में उमगते से बादल
हवाओं के संग- संग उड़े जा रहे हैं।
न जाने कहां बे परवाह ये बादल।

प्रात: नमन
+++++++++++++++++
चित्त प्रफुल्लित हो सदा
लक्ष्मी हो अनुकूल
स्वास्थ्य सम्पदा भरपूर हो
दुख दारिद्रय हो दूर।

धन तेरस की अनेकशः शुभकामनाएं
++++++++++++++++++++

नव प्रभास नव चेतना
नवल आस विश्वास
लेकर आए जीवन में
खुशियों का अंबार।

प्रातः नमन।
++++++++++++++

राम आयेंगे आज घर
पुलकित सारा धाम
जगह – जगह दीपक जले
आलोकित हर द्वार
सजी वीथियां चौपालें
मन में है उल्लास
सिया राम के स्वागत को
उत्सुक है संसार।

दीपावली की मंगल कामनाएं
++++++++++++++++
दीप मन का भी जले तो बात हो
तिमिर अंतर का छंटे तो बात हो
स्वच्छ सुंदर हो सकल परिवेश भी
कलुष मन का भी हटे तो बात हो।

दीपावली का आलोक आपके
जीवन को अनंत प्रकाश से भर दे।

+++++++++++++++++
भंग घमंड इंद्र का
किया कृष्ण ने आज
छप्पन भोग बनाकर
किया गोवर्धन सम्मान
पूजा होती गाय की
जो है मातृ समान
अन्न धन से पुष्ट करे
देती भव सागर पार।

गोवर्धन पर्व की अनेकशः शुभकामनाएं
++++++++++++++++++++
भाई हो समृद्ध सब बहनें सब खुशहाल
सुख में मिल प्रसन्न हो विपदा में हों साथ।

भाई दूज की शत शत मंगल कामनाएं।
+++++++++++++++++++++
चादर ओढ़े श्याम वर्ण
उषा चली है घर से
आलिंगन रवि ने किया
सहर्ष रश्मि फैलाकर
दिशा हो गई लाल
उषा की सकुचाहट से
सूर्य हो गया प्रखर
मधुर स्पंदन पाकर

प्रातः नमन।
+++++++++
काश! तुम आते
दीवाली और सजती
पास तुम होते
बात कुछ और होती
दूर तक फैली
सितारों की सी झिलमिल
चांद! तुम होते
बात कुछ और होती।

प्रातः नमन ।
+++++++++++++++++
कृष्ण की वंशी सुनी गोपी चली घर छोड़ कर
हो गई तन्मय, सकल बंधन भुवन के तोड़ कर।
श्याम रंग में रम गई ऐसी रमी जग भूल कर
कृष्णमय गोपी हुई पहचान अपनी भूल कर।

प्रातः नमन।
++++++++

है चार दिन की जिंदगी
हंस कर गुजार लो
गर हो सके जीवन
किसी का संवार दो
कल क्या हो जिंदगी में
किसको कहां पता
बस आज ही है जिंदगी
इतना विचार लो।

प्रातः नमन ।
++++++++++++++++++
निशा हूं ,मैं छुपाए दिल में सौ सौ राज रहती हूं
किसी का प्यार और नफरत, सभी मैं
मौन सहती हूं
कभी गुलजार होती हूं, कभी आंसू
बहाती हूं।
मगर चंदा सितारों संग सभी के साथ
रहती हूं।

प्रातः नमन।
++++++++++++++++
डाल पर जब तक रहे हंसते रहे
खिलते रहे
डाल से होकर विलग तुम
मुस्कुराते ही रहे
जब तलक सुषमा रही ऊष्मा रही
निज देह में
सौंदर्य से ,निज गंध से सबको
लुभाते ही रहे।

प्रातः नमन।
++++++++++++++++
कलाकार वह धन्य है रचा जिसने
संसार
हरे रंग में रंग दिया सब वृक्षों का
संसार
कहने को तो एक रंग,दिखते रंग
अनेक
एकत्व का भाव सुंदर भरता भाव
अनेक।

प्रातः नमन।
++++++++++++
कोई तो है,पकड़ उंगली सही रस्ता दिखाता है
लगी ठोकर जहां कोई, वो आ मुझको
उठाता है
कहूं कैसे, अकेली हूं , न कोई साथ है
मेरे
जहां जब याद करती हूं खड़ा वो साथ होता है।

प्रातः नमन।
++++++++++++++++
नव प्रभा उल्लास नव ले आ रही है
नव उमंग नव चेतना ले आ रही है।
पत्र पुष्पों में अभिनव रंग भरती
चित्र सा जग को सजाती आ रही है।

प्रातः नमन।
++++++++++++++
काम न आए किसी के,तो जिए तो
क्या भला
नाम सिमरन न किया प्रभु का भला तो
क्या किया
जिंदगी एक बार ही मिलती है सोचो
तो जरा
जिंदगी पाकर भी मित्रों न जिए तो
क्या किया?

प्रातः नमन।
++++++++++++++
कुछ तुम ठने कुछ हम ठने
बात ठन गई
कुछ तुम झुके कुछ हम झुके
बात बन गई।
बात की ही बात है ,संभाल लीजिए
नम्र होने में नहीं संकोच कीजिए।

प्रातः नमन।
@डॉक्टर क्षमा कौशिक, देहरादून

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *