प्रशांत किशोर के छह लाइन के इंकार में है कांग्रेस की समस्या और समाधान

प्रशांत किशोर के इनकार की 6 लाइनों में 600 स्‍लाइड का सार… क्या कांग्रेस अब भी कुछ ले पाएगी सबक?

प्रशांत किशोर ने कांग्रेस में शामिल होने से इनकार कर दिया है। उन्‍होंने छह लाइनों का ट्वीट कर कांग्रेस की समस्याओं को अंडरलाइन

Prashant Kishor refuses to join Congress: प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलों पर मंगलवार को विराम लग गया। उन्‍होंने 137 साल पुरानी पार्टी से जुड़ने के ऑफर को ठुकरा दिया है। प्रशांत किशोर को यह ऑफर पसंद नहीं आया है। इसका संकेत उन्‍होंने अपने इनकार में दिया भी है। पार्टी चीफ सोनिया गांधी (Sonia Gandhi) चाहती थीं कि वह एम्‍पावर्ड एक्‍शन ग्रुप (EAG) के हिस्‍से के तौर पर कांग्रेस में शामिल हों। साथ ही चुनावों की जिम्‍मेदारी लें। यह और बात है कि पीके पूरा ठीकरा अपने सिर नहीं लेना चाहते थे। छह लाइनों के इनकार में उन्‍होंने पार्टी को दोबारा खोई जमीन पाने के लिए अपनी राय भी दी है। इसमें मजबूत नेतृत्‍व और सामूहिक इच्‍छाशक्ति का जिक्र है। सुधारों की ओर बढ़ने की बात है। गहरी जड़ें बना चुकी समस्‍याओं को सही करने का फॉर्मूला भी है। पीके के इनकार की हर लाइन पर कांग्रेस को गौर फरमाना चाहिए। ये सिर्फ लाइनें नहीं, उसका रिवाइवल प्‍लान (Congress Revival Plan) भी हैं।

पिछले कई दिनों से चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर के कांग्रेस में शामिल होने की अटकलें थीं। हाल में पांच राज्‍यों में हुए चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद से वह लगातार हाईकमान के संपर्क में थे। पार्टी प्रेसिडेंट सोनिया गांधी से उनकी कई दौर की बैठकें हो चुकी थीं। हाल में उन्‍होंने पार्टी में जान फूंकने के लिए 600 स्‍लाइड की प्रजेंटेशन भी दी थी। बताया जाता है कि इसमें उन्‍होंने पार्टी को कई महत्‍वपूर्ण इनपुट दिए थे। इसी दौरान पूर्व और दक्षिण की 200 सीटों पर फोकस करने की जरूरत की बात भी कही थी।

प्रशांत किशोर की एंट्री दुर्दिनों से गुजर रही पार्टी में जान फूंक सकती थी। हालांकि, उन्‍हें शामिल करने को लेकर पार्टी के अंदर दो धड़े बन गए थे। राजस्‍थान के मुुख्यमंत्री अशोक गहलोत और वीरप्‍पा मोइली जैसे द‍िग्‍गज नेता पीके के खुले समर्थन में थे। गहलोत ने तो उनकी तारीफ करते हुए यहां तक कहा था कि वो ब्रांड हैं। इसी तरह वीरप्‍पा मोइली बोले थे कि पार्टी में किशोर की एंट्री का विरोध करने वाले सुधार विरोधी हैं। इसके उलट एक धड़े को पार्टी में उनके शामिल होने पर आपत्ति थी। इसकी वजह तमाम प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक दलों के साथ उनके संबंध थे।

प्रशांत किशोर ने कांग्रेस में शामिल न होने के संदर्भ में जो ट्वीट किया है, वो कई मायनों में बहुत महत्‍वपूर्ण है। शायद 600 स्‍लाइड के प्रजेंटेशन में जो कुछ बचा रह गया था, छह लाइन के इनकार में उन्‍होंने वो सब कुछ कह दिया है। कांग्रेस को इन छह लाइनों में अपना रिवाइवल प्‍लान मिल जाएगा।

मुझसे ज्‍यादा पार्टी को नेतृत्‍व की जरूरत…

पीके की हर लाइन गौर करने वाली है। उन्‍होंने पार्टी में शामिल होने से इनकार की बात कहते हुए राय भी दी है। किशोर ने इसमें कहा है कि कांग्रेस को उनसे ज्‍यादा लीडरशिप की जरूरत है। यह कहने के पीछे किशोर का स्‍पष्‍ट मैसेज है। उन्‍होंने साफ किया है कि कांग्रेस का मौजूदा नेतृत्‍व उसे मुश्किलों से बाहर नहीं निकाल सकता है। एक तरह से उन्‍होंने गांधी परिवार की नेतृत्‍व क्षमता पर हमला भी किया है। पिछले कुछ चुनावों में यह बात साफ तौर पर देखी भी जा चुकी है।

राहुल, प्रियंका या सोनिया, कोई भी कांग्रेस की नैया पार लगा पाने में सफल साबित नहीं हुआ। प्रियंका गांधी को तो कांग्रेस ‘ब्रह्मास्‍त्र’ मानती थी। लेकिन, उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्‍यों के चुनाव में पार्टी ने इस ब्रह्मास्‍त्र का भी इस्‍तेमाल कर लिया। हार पर हार के बावजूद पार्टी पर गांधी परिवार की पकड़ बनी हुई है। जब कभी गांधी परिवार को चुनौती दी जाती है तो पार्टी के अंदर ही हंगामा शुरू हो जाता है। ऐसा करने वाले नेता हाशिये पर चले जाते हैं। जी-23 इसका उदाहरण है। यह पार्टी में सुधारों की पुरजोर पैरवी करता रहा है। यहां तक नेतृत्‍व में बदलाव की मांग करते हुए इसने पार्टी प्रमुख सोनिया गांधी को चिट्ठी तक लिखी थी।

सामूहिक इच्‍छाशक्ति का जिक्र…

प्रशांत किशोर ने अपनी राय जताते हुए पार्टी में सामूहिक इच्‍छाशक्ति की भी जरूरत पर बल दिया है। निश्चित तौर पर कांग्रेस आज पूरी तरह से बिखरी हुई दिखती है। शायद एक के बाद एक पराजय इसकी बड़ी वजह है। हर चुनाव से पहले पार्टी के अंदर से विरोध के सुर सुनाई देने लगते हैं। बेशक दूसरी पार्टियों में भी नेता दल बदलते हैं, लेकिन कांग्रेस में ये हालात बेकाबू से दिखते हैं। पंजाब इसका हालिया उदाहरण है। अमरिंदर और सिद्धू की आपसी रस्‍साकशी में किस तरह से पार्टी को नुकसान हुआ। पार्टी में टीमवर्क का स्‍पष्‍ट अभाव दिखता है। कांग्रेस को इस पर काम करने की जरूरत है।

बड़े सुधारों से बनेगी बात…

किशोर ने पार्टी में परिवर्तनकारी सुधारों की बात कही है। उनके मुताबिक, इसी के जरिये कुछ गहरी जड़ें जमा चुकी समस्‍याओं का समाधान किया जा सकता है। इस तरह उन्‍होंने पार्टी में बदलाव की ओर इशारा किया है। काफी समय से पार्टी में अध्‍यक्ष पद के चुनाव लंबित हैं। सोनिया गांधी अंतरिम अध्‍यक्ष बनी हुई हैं। इससे बाहर भी गलत मैसेज जाता है। यह भाजपा को उस पर हमला करने का मौका देता है। वह वंशवादी टैग से चिपकी दिखती है। नेतृत्‍व और छवि में बदलाव कर कांग्रेस को फायदा हो सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *