आर्यसमाज ने लोहा लिया तो जेल की हवा खा रहा है पाखंडी रामपाल

देहरादून 12 मई। कुछ समय पहले की बात है कि मैं तत्कालीन जिला सूचना अधिकारी प्रेम सिंह भंडारी के पास बैठा था तो जोशी नाम का एक स्थानीय युवक परमीशन लेकर अंदर आया और किताबों का एक सैट देकर उन्हें आध्यात्म के नाम पर पढ़ने और बांटने को कहने लगा। भंडारी टालमटोल करने लगा तो बंदा आध्यात्म का नाम लेकर उन्हें शर्मिंदा करने पर उतर आया। उत्सुकता से मैंने किताबें देखी तो वो कबीरपंथी रामपाल की निकली। मेरे मुंह से अनायास निकल गया कि इस जेलयात्री हत्यारे की किताब सरकारी अफ़सर को देने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हो गई? सकपकाया युवक वहां से खिसक लिया। इसी तरह हम एनयूजेआई की ओर से दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना दे रहे थे तो वहां भी रामपाल के चेले पम्पलेट बांटने आ गये कि रामपाल को रिहा करो। मैंने वहां भी उन्हें भगाया। इन उदाहरणों से मैंने पाया कि पाखंडी हत्यारे रामपाल के बारे में लोग कितना कम जानते हैं।

 

जान की बाजी लगाकर आर्य समाज ने की बहन बेटियों की रक्षा

-भारत की जनता मूल रूप से भक्ति परायण रही है। लेकिन बार-बार भक्ति की आड़ में उनके साथ धोखा भी होता रहा है। भारत में जनता को लूटने के लिए अवतारवाद,पाप माफ करने का की गारंटी देना, सब दुखों को दूर करने का ठेका लेना -यह तीन ऐसे फार्मूले हैं जिनकी आड़ में भारत की जनता हमेशा से लुटती आई है। ऐसा ही केस दुराचारी रामपाल का है। जब करोंथा के आसपास के गांवों के शोषित पीड़ित लोगों ने हर तरफ से न्याय की आशा खो दी, तब उन्होंने आर्य प्रतिनिधि सभा हरियाणा के पूज्य पाद आचार्य बलदेव जी से गुहार लगाई। बहन बेटियों माताओं की पुकार को सुनकर वयोवृद्ध आचार्य बलदेव जी ने इस पाखंडी के खिलाफ आंदोलन छेड़ा, जिसके फलस्वरूप प्रशासन को रामपाल दास को गिरफ्तार करना पड़ा। रामपाल दास की सत्ता तक तथा प्रशासन तक सीधी पहुंच थी। भक्तों द्वारा दिए गए पैसे की भी कमी नहीं थी। कुछ साल जेल में रहने के बाद रामपाल दास ने वापस आकर बरवाला से अपनी कुकृत्य फिर शुरू कर दिए।
इस बार फिर आर्य समाज को ही इससे लोहा लेना पड़ा। रामपाल दास ने भारत के संविधान को चुनौती दी, प्रशासन को चुनौती दी और बड़ी मेहनत के पश्चात सन 2014 में हरियाणा सरकार ने इसे गिरफ्तार कर लिया। इस आंदोलन में आचार्य उदयवीर जी आर्य तथा बहन प्रोमिला आर्य का बलिदान हुआ । यह दुराचारी अभी भी जेल में है, लेकिन पिछले वर्ष से इसने अपने कुकृत्यों को छुपाने के लिए तथा जनता को फिर से धोखा देने के लिए रक्तदान शिविर, सामूहिक विवाह का आयोजन और अपना जन्म”दिवस इत्यादि मनाने शुरू कर दिए और भारत की जनता विशेष तौर पर नई पीढ़ी के युवक युवती- जिन्होंने करोंथा कांड और बरवाला कांड खूनी कांड नहीं देखा है, वे इसे भगवान मानकर पूज रहे हैं।

इसलिए कहना पड़ता है
जागो तो इक बार, जागो जागो तो।।

तेरी गठरी में लागे चोर,
मुसाफिर जाग जरा।।

आर्य समाजी इतिहास के भीष्म पितामह प्राध्यापक राजेंद्र जिज्ञासु जी ने लिखा है-

” हाय हिंदू कब तुझे इस दुर्दशा का बोध होगा।
आत्मघाती प्रवृत्तियों पर, अरे कब शोध होगा ?
पल रहा अज्ञान तेरा,मर रहे अरमान तेरे।
घट रही संतान तेरी,बढ रहे भगवान तेरे।।
शूरवीरों के ओ वंशज , क्यों तेज अपना खो रहा है!
लुट रहा धन माल तेरा,और तू सो रहा है??

इस दुराचारी रामपाल के कुकृत्यों की एक झलक मात्र,उस समय के समाचार पत्रों में, नीचे देखिए और सोचिए।

 

 

 

रामपाल के चौंकाने वाले तहखाने और महिला टॉयलेट्स में सीसीटीवी कैमरे की कहानी


7 वर्ष पहले
चंडीगढ़. संत रामपाल की बाबा बनने की कहानी जितनी दिलचस्प है। उतनी है उनकी गिरफ्तारी के बाद तहखानों से मिली सामग्री भी। जी हां, पिछले साल 20 नवंबर को हत्या के आरोप में रामपाल की गिरफ्तारी के बाद जब सतलोक आश्रम में सर्च अभियान चलाया गया था तो वहां से करोड़ों रुपए की खाद सामग्री मिली थी। जैसे, 7000 किलो देसी घी, 99 कार्टून सरसों का तेल, 186 कार्टून पारले बिस्कुट, 45 कैन सोयाबीन रिफाइंड तेल, 154 कट्टे मिल्क पाउडर, 600 कट्टे आटा और 600 कट्टे चीनी आदि । तलाशी के दौरान पुलिस को कई चौंकाने वाली चीजों का पता चला था। रामपाल का आश्रम किसी फाइव स्टार होटल से कम नहीं था। इसके अंदर स्विमिंग पूल, एलईडी टीवी से लेकर अस्पताल तक थे।

कैमरे का मुंह भी टॉयलेट के अंदर की ओर था…

सर्च के दौरान देशद्रोह व हत्‍या के आरोपी कबीरपंथी बाबा रामपाल के बरवाला (हिसार, हरियाणा) स्थित सतलोक आश्रम में महिला टॉयलेट में सीसीटीवी कैमरा लगा था। इतना ही नहीं, कैमरे का मुंह भी टॉयलेट के अंदर की ओर था। रामपाल खुद सिंहासन पर बैठता था और लिफ्ट से मंच पर प्रकट होता था। 5 लाख रुपए का मसाजर भी उसके कमरे से मिला था। इसके अलावा, कंडोम और अश्लील साहित्य भी बरामद किया गया था।

नरबलि का भी लगा आरोप

बरवाला के सतलोक आश्रम संचालक रामपाल की मुसीबतें तब और बढ़ गई थी जब हाईकोर्ट में उनके खिलाफ नरबलि का आरोप लगाया गया था। दरअसल, जींद निवासी हरिकेश ने याचिका दायर कर कहा था कि अगस्त 2014 में उनके बेटे का शव आश्रम में मिला था। आशंका है कि उसकी बलि दी गई है, लेकिन पुलिस ने आत्महत्या का केस दर्ज किया था। जिस पर पीडि़त ने सीबीआई जांच की मांग की थी।

गिरफ्तारी से बचने फेंके थे पेट्रोल बम…

गिरफ्तारी से बचने रामपाल और उसके कमांडोज ने तरह-तरह के हथकंडे अपनाए थे, लेकिन बच नहीं पाए। गिरफ्तारी से पहले आश्रम के बाहर हिंसा भड़क उठी थी और रामपाल को गिरफ्तार करने पहुंची पुलिस को समर्थकों व कमांडोज ने फायरिंग कर बाहर ही रोक दिया था। करीब 90 राउंड फायरिंग की गई थी और पेट्रोल बम भी फेंके गए थे। इस हिंसा में लगभग 75 पुलिस कर्मी और 200 से ज्यादा लोग जख्मी हो गए थे। इतना ही नहीं, पांच महिलाओं की मौत का दावा भी किया गया था।

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