नरेंद्र मोदी के बॉडीगार्ड रहे रॉ एजेंट लक्ष्मण लकी बिष्ट का जीवन रहा रोमांचक

Biopic: अब आ रही एनएसजी कमांडो की बायोपिक, एक्स रॉ एजेंट लकी बिष्ट की बायोग्राफी लिखी एस.हुसैन जैदी ने

RAW Hitman: अभी तक आपने अक्षय कुमार, सलमान खान या शाहरुख खान को काल्पनिक कहानियों में रॉ एजेंट के रूप में देखा. लेकिन जल्द ही देश के सर्वश्रेष्ठ एनएसजी कमांडो सम्मान से पुरस्कृत एजेंट लीमा की कहानी बायोपिक में आने को तैयार है. हालांकि इससे पहले यह कहानी किताब के रूप में पाठकों तक पहुंचेगी.

Agent Lima: बायोपिक फिल्मों के क्रम में खिलाड़ियों, राजनेताओं और फिल्मी हस्तियों की कहानियां पर्दे पर आ रही हैं. लेकिन जल्द ही आपको अब एक रीयल लाइफ एनएसजी कमांडों तथा रॉ एजेंट की असली कहानी भी पर्दे पर दिखेगी. एजेंट लीमा के नाम से चर्चित लकी बिष्ट की कहानी पहले किताब के रूप में आई और इस पर बायोपिक की भी तैयारियां साथ-साथ चल रही हैं. प्रसिद्ध क्राइम जर्नलिस्ट और राइटर एस. हुसैन जैदी ने एजेंट लीमा की यह कहानी लिखी. अमेरिका के सबसे प्रतिष्ठित प्रकाशकों में शामिल साइमन एंड शूस्टर ने पिछले महीने एजेंट लीमा की बायोग्राफ की घोषणा कर किताब का पोस्टर लॉन्च किया.

मोदी ने दिया था सर्वश्रेष्ठ कमांडो का सम्मान 

जैदी की इस किताब का नाम है  रॉ हिटमैनः द रीयल स्टोरी ऑफ एजेंट लीमा.    किताब चार जुलाई को मार्केट में आई. उल्लेखनीय है कि साल 2009 में लकी बिष्ट को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के सर्वश्रेष्ठ एन एस जी कमांडो का पुरस्कार दिया गया. लकी बिष्ट को लोग लक्ष्मण सिंह बिष्ट के नाम से भी पहचानते हैं. खास यह कि लकी बिष्ट एक दौर में, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, उनके निजी सुरक्षा अधिकारी रह चुके बिष्ट ने नवंबर 2010 में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा को भी सुरक्षा प्रदान की थी.

रहस्य और तथ्य

किताब में लकी बिष्ट के निजी जीवन और करियर के तमाम-उतार चढ़ाव दर्ज हैं. जिसमें वह दौर भी है, जब उन्हें 2011 में उत्तराखंड के दो शातिर अपराधियों के डबल मर्डर के आरोप में गिरफ्तार किया गया. लेकिन पूरे मामले का रहस्य क्या था, यह इस किताब में है. जैदी ने लकी बिष्ट से बातचीत और तथ्यों के आधार किताब लिखी है. बिष्ट को पांच साल इस हत्याकांड के आरोप में जेल में बिताने पड़े. इस दौरान उन्होंने बहुत कुछ देखा. उनकी इस बायोग्रफी के रिलीज होने के बाद बायोपिक बनाने की भी तैयारियां हैं. हालांकि यह किसी ओटीटी पर वेब सीरीज के रूप में होगी या फिल्म के रूप में पर्दे पर आएगी और कौन इसे डायरेक्टर करेगा, कौन एक्टर होगा, इनकी घोषणा जल्द ही आधाकारिक कार्यक्रम में होगी.

 

LoC के उस पार अकेले ही सेफ होते हैं… नरेंद्र मोदी के बॉडीगार्ड रहे जासूस की रोमांचक कहानी

Indian Spy: पूर्व एनएसजी कमांडो, रॉ के जासूस रहे उत्तराखंड के लाल लक्ष्मण लकी बिष्ट पर एक किताब आई है। RAW हिटमैन किताब एस. हुसैन जैदी ने लिखी है। बिष्ट नरेंद्र मोदी के पर्सनल सिक्योरिटी गार्ड रहने के साथ ही जासूस भी रहे हैं। वह विदेश में भी मिशनों में गए और भारत में कई एजेंसियों में तैनात रहे।

मुख्य बिंदु
पिथौरागढ़ के रहने वाले बिष्ट एनएसजी कमांडो और जासूस भी रहे
तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के पर्सनल सिक्योरिटी गार्ड रहे हैं
16 साल में भर्ती हुए थे सेना में, अब उनके जीवन पर आई किताब

जासूस अगर दुश्मन के एरिया में है तो उसे उसकी सरकार बचाने नहीं आने वाली। आपका सेंस ही काफी मायने रखता है। आपको पता होना चाहिए कि जिस कमरे या जिस जगह आप हैं वह सेफ है या नहीं। अगर आपको 20 लोग देख रहे हैं तो यह अनुमान लगाना आना चाहिए कि उनमें से सबसे खतरनाक दो आंखें कौन हैं… यह लाइनें हैं 34 साल के पूर्व एनएसजी कमांडो, जासूस और रॉ एजेंट रहे लक्ष्मण लकी बिष्ट की। उनके दादा और पिता भी सेना में रहे हैं। 16 साल की उम्र में लकी ने आर्मी जॉइन की। कई एजेंसियों में तैनात रहे। एक समय उत्तराखंड के गैंगस्टरों की हत्या में उनका नाम आया। 2011 में जेल हुई, बाद में क्लीन चिट मिल गई। उन्होंने दोबारा स्पेशल फोर्सेज जॉइन की। बाद में लेखक बन हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में आ गए। हाल में उन पर एक किताब भी आई है।

एलओसी के पार तैनाती

बिष्ट LoC के उस पार भारत के जासूस रहे। इंटरव्यू में उन्होंने बताया, ‘जब आप अपने देश में होते हैं तो पता होता है कि जरूरत पड़ने पर आपके पास मिनटों में सेना, एयरफोर्स और बैकअप आ जाएगा। लेकिन आप दूसरी तरफ जासूस या स्पेशल एजेंट बनते हैं तो आप बिल्कुल अकेले होते हैं। जरूरत भी होगी तो कोई बचाने नहीं आएगा। पकड़े गए तो मौत मिलेगी और सरकार भी मुंह मोड़ लेगी। एजेंट्स को ये बातें पता होती हैं कि जिन लोगों के लिए आप जान देने जा रहे हैं वो कभी याद नहीं करेंगे।’

RAW एजेंट के तौर पर क्या सीखा?

बिष्ट कहते हैं कि सबसे महत्वपूर्ण बात जासूस या किसी एजेंट के लिए यह होती है कि आप अकेले हैं तो सेफ हैं। जब तक आपको कोई नहीं जानता, आपके सीक्रेट छिपे  हैं। जैसे ही आपके बारे में लोग जानने लगते हैं, आप खतरे में होते हैं। ऐसे समय में सर्वाइवल को फौरन फैसला लेना आना चाहिए। बिष्ट को 2009 में भारत का बेस्ट एनएसजी कमांडो का अवॉर्ड मिला था।

एनएसजी में तैनाती के दौरान वह तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी, एलके आडवाणी, राजनाथ सिंह समेत कई वीआईपी के पर्सनल बॉडीगार्ड रहे। लकी बिष्ट कुल 17 वीआईपी के पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर रहे हैं। उनकी ड्यूटी हमेशा ऑपरेशन में ही रही थी। 7-8 साल बाद वह NSG में आए। वह चंद्रबाबू नायडू के पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर थे तो साउथ के कई ऐक्टर्स के संपर्क में आए। इंडियन आर्मी पर मूवीज बनती देख उन्हें लगा कि वह खुद लिख सकते हैं। इसके बाद उनकी जिंदगी ने नई करवट ली।

बिष्ट ने ढाई साल भारत के बाहर स्पेशल फोर्स की ट्र्रेनिंग ली है। उन्हें सिखाया गया कि एलओसी को अगर क्रॉस करके कभी जाना पड़े तो दुश्मन के ठिकाने को कैसे तबाह करेंगे। इंडियन कमांडो, एनएसजी, स्नाइपर, एक्सप्लोसिव इंजीनियर के कोर्स करने के बाद वह पूरे कमांडो बने। ज्यादातर समय वह नॉर्थ ईस्ट के अशांत क्षेत्र में तैनात रहे। यूएन की तरफ से ऑपरेशनों में भी गए।

जब मैं मोदी जी के साथ था…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री रहने के दौरान बिष्ट उनके पर्सनल सिक्योरिटी ऑफिसर रहे तो अहमदाबाद में मोदी जी का एक घंटे का कार्यक्रम था और उन्हें सुरक्षा की जिम्मेदारी मिली। घर के दरवाजे से उन्हें रिसीव करने से लेकर वापस वहीं छोड़ने तक साथ रहना था लेकिन वे 17 दिन उनके साथ रहे। बिष्ट के पास उस समय केवल एक ही कपड़ा था। वह कहते हैं, ‘जब मैं मोदी जी से पहली बार मिला था तो मैं सीक्रेट सर्विस में था। सर को यकीन ही नहीं हुआ कि मैं 21 साल का हूं। मैं पिथौरागढ़ से हूं और हम पहाड़ी हमेशा यंग दिखते हैं।’ मेरे दादा 1971 की लड़ाई में बलिदान हुए थे। बिष्ट ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जिससे मिलते हैं, उसे कभी नहीं भूलते।

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