भाजपा में पर्दे के पीछे के पांच महारथी: संजीव बालियान ने जीता पश्चिमी उत्तर प्रदेश

बीजेपी के पर्दे के पीछे काम करने वाले 5 चेहरे:पश्चिमी UP में संजीव बालियान ने अकेले बाजी पलट दी, बंसल कैंडिडेट्स को बताते रहे- कहां पिछड़ रहे हो

BJP ने 403 सीटों में 273 सीटें जीतकर एक बार फिर से सत्ता हासिल कर ली। 10 मार्च की शाम 6.49 बजे CM योगी ने ट्वीट में लिखा, “यह प्रचंड बहुमत प्रधानमंत्री जी की लोक कल्याणकारी नीतियों पर आमजन के अटूट विश्वास की मुहर है।” 12 मिनट बाद योगी ने एक दूसरे ट्वीट में लिखा, “UP की जीत गृह मंत्री अमित शाह के ऊर्जावान मार्गदर्शन, कुशल रणनीति का प्रतिफल है।”

तीसरे ट्वीट में जेपी नड्डा, चौथे में राजनाथ सिंह और पांचवें ट्वीट में जीत का श्रेय स्वतंत्र देव सिंह को दिया। इसके बाद उन्होंने छठे ट्वीट में पार्टी कार्यालय पर मनाए जा रहे जश्न का वीडियो पोस्ट करते हुए पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं को बधाई दी, लेकिन BJP की इस जीत में 5 नाम और हैं, जिनकी चर्चा नहीं होती, वो चुपचाप अपना काम करते हैं और निकल जाते हैं किसी और राज्य में कमल का फूल खिलाने। आइए एक-एक करके उन्हें जानते हैं…

1. सुनील बंसलः जातीय सर्वे कराया, उम्मीदवारों को फोन पर बताते रहे- कहां पिछड़ रहे हो


सुनील बंसल UP के नहीं हैं। वह राजस्थान के जयपुर के हैं। 2013 से UP में प्रदेश महामंत्री संगठन के पद पर हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद जितने भी प्रदेशों में BJP जीती वहां बैकरूम रणनीति में सुनील बंसल जरूर नजर आए। BJP का जनाधार बूथ लेवल पर किए गए काम की वजह से बढ़ा। जब बूथ मैनेजमेंट की कल्पना की गई तब इसका जिम्मा सुनील बंसल को ही सौंपा गया था।

100 दिन-100 काम योजना


सुनील बंसल ने प्रत्याशियों के नामों की घोषणा से पहले सर्वे करवाया। जातीय समीकरण को देखा। विधानसभाओं के पदाधिकारियों से बात किया। उसके बाद जाकर टिकट क्लियर किया। कई बार उन्होंने पार्टी के विधायकों को फोन करवाकर कहा था कि, “तुम्हारा कैंपेन पिछड़ रहा है, उसे और ताकत चाहिए।” चुनाव से पहले ‘100 दिन-100 काम’ योजना बंसल के ही दिमाग की उपज बताई जाती है।

सुनील बंसल UP के जिलों में घूमकर पदाधिकारियों को ट्रेनिंग देते थे। यह तस्वीर उनके ट्विटर हैंडल से मिली है। वह मऊ में कार्यकर्ताओं से बात कर रहे थे।

विस्तारक बनाया

सुनील बंसल ने बूथ लेवल पर दलित, OBC और महिलाओं को पार्टी से जोड़ा। नियमित समय पर उनकी मीटिंग करवाई। इन सबको मैनेज करने के लिए विस्तारक नियुक्त किए गए। नतीजा ये रहा कि जिन सीटों पर प्रत्याशियों के नामों का ऐलान देर में हुआ या फिर किसी दूसरी विधानसभा में उन्हें प्रत्याशी बनाया गया, वहां भी पार्टी ने जीत हासिल की।

2. संजीव बालियानः पश्चिम उत्तर प्रदेश में नाराज जाटों को मनाने की जिम्मदारी उठाई


चुनाव से ठीक पहले किसान आंदोलन बड़ी चुनौती था। हाथरस में राष्ट्रीय लोकदल के प्रमुख जयंत सिंह को लाठी मारी गई थी। इससे जाटों में BJP को लेकर नाराजगी थी। उन्हें मनाने का जिम्मा दिया गया मुजफ्फरनगर जिले के रहने वाले केंद्रीय मंत्री संजीव बालियान को। संजीव ने पश्चिमी UP की 136 सीटों की गुणा-गणित को अपने हिसाब से सेट किया। चुनाव से ठीक पहले 25 जनवरी को प्रमुख 50 जाट नेताओं के साथ अमित शाह की बैठक करवाई। उन्हें अपने भरोसे में लिया।

संजीव बालियान ने जाट बाहुल्य सीटों पर छोटी-छोटी मीटिंग करके पदाधिकारियों को अपने पक्ष में किया।

10 मार्च को नतीजे आए तो हैरान करने वाले थे। पहले चरण की जिन 58 सीटों पर वोट हुआ, वहां की 46 सीटें BJP ने जीत ली। दूसरे चरण की जिन 55 सीटों पर मतदान हुआ वहां भी 30 सीट जीत ली। पहले और दूसरे चरण के बाद कहा जा रहा था कि सपा ने दोनों चरणों में ही 80 सीट जीत ली पर नतीजे आए तो यह संख्या 37 थी।

3. लक्ष्मीकांत वाजपेयीः किसी रैली में नहीं जाते, लेकिन प्रेस कॉन्फ्रेंस में मौजूद रहते हैं


इस पूरे चुनाव में मेरठ जिले के लक्ष्मीकांत वाजपेयी की भूमिका सबसे जुदा थी। उन्हें पार्टी ने जॉइनिंग कमेटी का अध्यक्ष बनाया। लक्ष्मीकांत ने दूसरे दलों के नेताओं को अपनी पार्टी में शामिल किया। खास ये कि उन्होंने पार्टी में शामिल हो रहे नेताओं को इस शर्त पर नहीं शामिल किया कि उन्हें चुनाव में प्रत्याशी बनाया जाएगा। मुलायम सिंह की बहू अपर्णा यादव इसका उदाहरण हैं।

CM योगी और लक्ष्मीकांत वाजपेयी के रिश्ते बेहतर हैं। दोनों अक्सर एक साथ नजर आते हैं।

लक्ष्मीकांत किसी रैली में नहीं जाते, लेकिन CM योगी के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में अक्सर नजर आते हैं। संगठन की मजबूती के लिए जिलों का दौरा किया। प्रभावी चेहरों को पार्टी में शामिल किया। नतीजा ये रहा कि पार्टी को दोबारा बड़ी जीत मिली। BJP के ही एक वरिष्ठ पदाधिकारी की मानें तो लक्ष्मीकांत वाजपेयी को योगी सरकार नई कैबिनेट में जगह दे सकती है।

4. धर्मेंद्र प्रधानः CM योगी को केशव प्रसाद के घर पहुंचाया


ओडिशा के धर्मेंद्र प्रधान को एक साल पहले UP का प्रभारी बनाया गया। जब प्रभारी बने तो पार्टी के अंदर खेमेबाजी की खबर थी। प्रधान ने इसे खत्म किया। 2017 में CM योगी CM बने लेकिन डिप्टी CM केशव प्रसाद मौर्य के घर 22 जून 2021 को पहली बार गए। जबकि CM योगी और केशव का आवास 5 कालीदास मार्ग पर स्थित है, सिर्फ एक आवास की दूरी पर है। इस मुलाकात के जरिए “सब कुछ बेहतर है” का जो संदेश दिया गया उसके पीछे भी धर्मेंद्र प्रधान को बताया जाता है।

UP में जीत के बाद दिल्ली में BJP मुख्यालय में जश्न मनाया गया। इस दौरान धर्मेंद्र प्रधान सहित कई मंत्री वहां पहुंचे।

धर्मेंद्र प्रधान UP के हर हिस्से में गए। माइक्रो मैनेजमेंट पर काम बांटने की रणनीति बनी। काशी, गोरक्ष, अवध, कानपुर-बुंदेलखंड, ब्रज, और पश्चिम क्षेत्र में प्रभारी तय किए। मैजिक पांच की शुरूआत की। यानी चुनाव रणनीति से लेकर चुनाव प्रबंधन तक, जो भी जिम्मेदारी होगी एक क्षेत्र में 5 लोगों को नियुक्त किया जाएगा। इस काम में धर्मेंद्र प्रधान के साथ बिहार के राधा मोहन सिंह भी लगे रहे।

5. अंकित सिंह चंदेलः लोगों के वाट्सऐप पर पहुंचाया BJP का वीडियो


अयोध्या जिले के अंकित सिंह चंदेल UP BJP के सोशल मीडिया हेड हैं। कोरोना के चलते जब लोगों के बीच पहुंचकर प्रचार कर पाना मुश्किल था, तब उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक BJP की उपलब्धियों और बातों को पहुंचाया। BJP IT सेल की केंद्रीय टीम को गुरूग्राम से लखनऊ शिफ्ट किया गया। किसानों से जुड़े पोस्ट की संख्या बढ़ा दी गई। ग्राफिक और वीडियो को वॉट्सऐप के जरिए लोगों तक पहुंचाया गया।

UP चुनाव जीतने के बाद अंकित सिंह ने यह फोटो 10 मार्च को ट्वीट की थी। उन्होंने लिखा, “टीम की मेहनत रंग लाई।”

BJP IT सेल ने चुनाव से 6 महीने पहले “फर्क साफ है” नाम से हैशटैग चलाया। इसके जरिए पुरानी सरकारों से योगी सरकार की तुलना की जाती थी। यह बहुत पॉपुलर हैशटैग रहा। इसके पीछे अंकित सिंह का नाम बताया जाता है। इसके अलावा BJP के नेता इस बार सोशल मीडिया पर सबसे अधिक एक्टिव दिखे, लाइव आकर लोगों के सामने अपनी बात रखी। इस फैसले के पीछे भी अंकित का नाम आता है।

 

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