मणिपुर: हम कानून व्यवस्था अपने हाथ नहीं ले सकते: सुप्रीम कोर्ट वकील गोंजाल्वेज से

वकील बोले-मणिपुर में मौतों का आंकड़ा बढ़ा:सरकार ने हिंसा रोकने का भरोसा दिया था, सुप्रीम कोर्ट बोला- हम कानून-व्यवस्था नहीं चला सकते

मणिपुर में 3 मई से हिंसा जारी है। यहां अब तक करीब 150 लोगों की मौत हुई है।
नई दिल्ली 10 जुलाई। मणिपुर हिंसा पर सुनवाई के दौरान सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह राज्य की कानून-व्यवस्था अपने हाथ में नहीं ले सकता है। अदालत ने यह टिप्पणी मणिपुर ट्राइबल फोरम दिल्ली के एडवोकेट कोलिन गोंजाल्वेज की दलील पर की। गोंजाल्वेज ने कहा कि सरकार ने पिछली सुनवाई में हिंसा रोकने का भरोसा दिया था। मई में 10 मौतें हुई थीं, संख्या 110 पहुंची

हालांकि सरकार की तरफ से जारी की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि मणिपुर हिंसा में 142 लोगों की जान गई है। 5,995 केस दर्ज किए गए हैं।

गोंजाल्वेज की दलील पर चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा, “आपके अविश्वास के बावजूद हम राज्य की कानून-व्यवस्था अपने हाथ में नहीं ले सकते हैं। यह राज्य और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है।

अदालत ने याचिकाकर्ताओं से कहा कि आप हमारे पास ठोस समाधान लेकर आइए। अदालत मंगलवार को भी इस मामले की सुनवाई करेगी।

4 जुलाई को थोउबल के खंगाबोक में भीड़ ने IRB कैंप से हथियार चुराने की कोशिश की। एक घर को आग लगा दी गई। सुप्रीम कोर्ट में यह मुद्दा भी उठा।

आज अदालत में क्या-क्या हुआ…

1. मणिपुर सरकार ने स्टेटस रिपोर्ट पेश की

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मणिपुर सरकार की ओर से राज्य की स्टेटस रिपोर्ट पेश की। पिछली सुनवाई में अदालत ने उन्हें रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया था। SG मेहता ने कहा- हम यहां मणिपुर के लोगों के लिए मौजूद हैं। याचिकाकर्ताओं को बेहद संवेदनशीलता के साथ इस मामले को उठाना चाहिए, क्योंकि कोई भी गलत जानकारी राज्य के हालात को और बिगाड़ सकती है। राज्य और सरकार की कोशिशों के चलते स्थितियां सामान्य हो रही हैं।

2. अदालत ने रिपोर्ट वकीलों को सौंपी, कहा- ठोस सुझाव दीजिए

सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर ट्राइबल फोरम के वकील गोंजाल्वेज को रिपोर्ट सौंपी और कहा- आप इस रिपोर्ट को एक बार पढ़िए। हमें ठोस सुझाव दीजिए। हम आपके सुझाव SG को देंगे। उन्हें भी विचार करने दीजिए।

3. वकील बोले- मणिपुर में सभी कुकी के खिलाफ, SC ने की टिप्पणी

एडवोकेट गोंजाल्वेज ने कहा- मणिपुर में हर कोई कुकी समुदाय के खिलाफ है। इस पर CJI ने कहा- हम नहीं चाहते हैं कि इस अदालत का इस्तेमाल राज्य में जारी हिंसा को भड़काने या फिर मौजूदा समस्याओं को बढ़ाने के लिए किया जाए। हम सुरक्षा व्यवस्था या फिर कानून-व्यवस्था को नहीं चलाते हैं। अगर आपके पास कोई सुझाव है तो हमें बताइए। यह मानवीयता से जुड़ा मुद्दा है।

4. मणिपुर में इंटरनेट बैन पर भी कल सुनवाई होगी

राज्य में इंटरनेट बैन जारी रहेगा या नहीं, इस मामले में भी कल सुनवाई होगी। राज्य में हिंसा भड़कने के बाद 3 मई को इंटरनेट बैन किया गया था। मणिपुर हाईकोर्ट ने 7 जुलाई को राज्य सरकार को आदेश दिया था कि इंटरनेट बैन आंशिक तौर पर हटा दिया जाए। इसके जवाब में राज्य सरकार ने याचिका दाखिल की थी।

एक सवाल और 2 दलीलें

सवाल- सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर सरकार से पूछा कि बड़ी संख्या में हथियार पुलिस स्टेशनों से चुराए गए थे। क्या एक्शन लिया गया है?

पहली दलील- एडवोकेट गोंज्लावेज ने कहा- UAPA के तहत जिन ग्रुप्स की पहचान की गई है, वो हथियार बंद समूह ही हिंसा को बढ़ा रहे हैं। ये केस इसी संबंध में है। इनका इस्तेमाल सरकार कर रही है। ये ग्रुप आदिवासियों के खिलाफ हैं।

दूसरी दलील- SG तुषार मेहता ने एडवोकेट गोंजाल्वेज के व्यवहार पर चिंता जाहिर की। उन्होंने अपील की कि गोंज्लावेज को इंटरव्यू देने और पब्लिकली इस केस पर चर्चा करने से बचना चाहिए।

मणिपुर हिंसा केस 3 बार सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा। पढ़ें तीनों सुनवाई के अपडेट…

3 जुलाई : समर वेकेशन के बाद खुले सुप्रीम कोर्ट में कुकी समुदाय की ओर से आर्मी प्रोटेक्शन की मांग को लेकर सुनवाई हुई। इसके बाद ही कोर्ट ने एक हफ्ते के अंदर राज्य में हिंसा को लेकर स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी। साथ ही इंटरनेट बैन से जुड़ी याचिका को खारिज कर दिया था।
17 मई : सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मणिपुर सरकार हिंसा प्रभावित लोगों को दी जा रही राहत, सुरक्षा, पुनर्वास पर नई स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करे। सुरक्षा और कानून राज्य का विषय है, लेकिन सर्वोच्च अदालत के नाते यह देखना हमारी जिम्मेदारी है कि राजनेता आंखें ना मूंद लें। हम आरक्षण मुद्दे पर सुनवाई नहीं करेंगे। हाईकोर्ट में याचिकाएं लगी हैं। सभी लोग हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं।
8 मई : पहली बार हुई सुनवाई के दौरान CJI डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा था कि यह मानवीय संकट है। विस्थापितों के पुनर्वास, राहत कैंपों में दवाओं और खाने-पीने जैसी जरूरी चीजों का इंतजाम हो। साथ ही राज्य में धार्मिक स्थलों की हिफाजत के लिए भी कदम उठाए जाएं।
कांगपोकपी जिले में 1 पुलिसवाले की हत्या, 10 घायल

राज्य के कांगपोकपी इलाके में रविवार-सोमवार की दरम्यानी रात से चल रही हिंसक झड़प में सोमवार सुबह एक पुलिसवाला मारा गया, जबकि 10 लोग घायल हो गए। अधिकारियों ने बताया कि फायेंग और सिंगदा गांवों की तरफ से कांगचुप इलााके के गांवों की तरफ फायरिंग की गई थी। इन दोनों गांवों के बीच के इलाके में असम राइफल्स के जवान तैनात रहते हैं। अधिकारियों के मुताबिक, संभावना है कि इस झड़प में दोनों तरफ के और भी लोग मारे गए होंगे।

एक-दूसरे को निशाना बनाने क्वाडकॉप्टर का इस्तेमाल कर रहे कुकी-मैतेई

ANI के मुताबिक सुरक्षा बलों ने कांगवई बाजार और टोरबुंग को बफर जोन बनाया है।

आपस में भिड़ने वाले जातीय समूह एक-दूसरे को निशाना बनाने के लिए क्वाडकॉप्टर का इस्तेमाल कर रहे हैं। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक क्वाडकॉप्टर का इस्तेमाल मैतेई और कुकी एक-दूसरे की स्थिति जानने के लिए कर रहे हैं। मणिपुर के दक्षिण-पश्चिमी भाग में फौगाकचाओ, कांगवई बाजार और टोरबुंग बाजार को बफर जोन घोषित किया गया है।

अब जानिए क्या थी हिंसा की वजह…

मणिपुर की लगभग 38 लाख की आबादी में से आधे से ज्यादा मैतेई समुदाय के लोग हैं। मणिपुर के लगभग 10% क्षेत्रफल में फैली इंफाल घाटी मैतेई समुदाय बहुल है। मणिपुर हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि मैतेई समुदाय की डिमांड पर विचार करे और 4 महीने के भीतर केंद्र को रिकमेंडेशन भेजे।

इसी आदेश के बाद मणिपुर में मैतेई को अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग को लेकर 3 मई को ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन (एटीएसयू) मणिपुर ने एक रैली निकाली। जो बाद में हिंसक हो गई।

मैतेई क्यों आरक्षण मांग रहे:

मैतेई समुदाय के लोगों का तर्क है कि 1949 में भारतीय संघ में विलय से पूर्व उन्हें रियासतकाल में जनजाति का दर्जा प्राप्त था। पिछले 70 साल में मैतेई आबादी 62% से घटकर लगभग 50% के आसपास रह गई है। अपनी सांस्कृतिक पहचान के लिए मैतेई समुदाय आरक्षण मांग रहा है।

कौन हैं विरोध में:

मणिपुर की नगा और कुकी जनजाति मैतेई समुदाय को आरक्षण देने के विरोध में हैं। राज्य के 90% क्षेत्र में रहने वाले नगा और कुकी राज्य की आबादी का 34% हैं। इनका कहना है कि राज्य की 60 में से 40 विधानसभा सीटें पहले से मैतेई बहुल इंफाल घाटी में हैं।

राजनीतिक रूप से मैतेई समुदाय का पहले से ही मणिपुर में दबदबा है। नगा और कुकी जनजातियों को आशंका है कि एसटी वर्ग में मैतेई को आरक्षण मिलने से उनके अधिकारों में बंटवारा होगा। मौजूदा कानून के अनुसार मैतेई समुदाय को राज्य के पहाड़ी इलाकों में बसने की इजाजत नहीं है।

नाराजगी की एक और वजह- मणिपुर में हालिया हिंसा का कारण मैतेई आरक्षण को माना जा सकता है, लेकिन पिछले साल अगस्त में मुख्यमंत्री बीरेन सिंह की सरकार ने चूराचांदपुर के वनक्षेत्र में बसे नगा और कुकी जनजाति को घुसपैठिया बताते हुए वहां से निकालने के आदेश दिए थे। इससे नगा-कुकी नाराज चल रहे थे। मैतेई हिंदू धर्मावलंबी हैं, जबकि एसटी वर्ग के अधिकांश नगा और कुकी ईसाई धर्म को मानने वाले हैं।

 

 

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