छल: ईसाई मिशनरियों ने अब शुरू किया छलपूर्वक धर्मपरिवर्तन

Exposed: ईसाई मिशनरी ने धर्मांतरण का बदला तरीका, अब नाम हिंदू ही…

झूठ का पर्दाफाश विशेष

Exposed: ईसाई मिशनरी ने धर्मांतरण का बदला तरीका, अब नाम हिंदू ही रहता है और घरों से भगवान की मूर्ति हटाकर जीसस की प्रेयर कर बना रहे क्रिश्चियन

देश के सिर्फ पांच राज्यों में ही धर्म परिवर्तन कराना कानूनन अपराध होने के कारण इसकी विष-बेल लगातार फल-फूल रही ही है। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक कई राज्यों में जबरन या डरा-धमकाकर, प्रलोभन या लालच देकर धर्मांतरण का खेल मिशनियां और मुस्लिम बेखौफ चला रहे है। ईसाई मिशनरियों की बदमाशी दरअसल गैर भाजपाई राज्यों में ज्यादा चल रही है। इन राज्यों में सरकार द्वारा धर्मांतरण पर अंकुश लगाने के बजाए इस ओर के आंखे मूंदकर इन्हें समर्थन ही दिया जा रहा है। दूसरी ओर नेपाल बॉर्डर पर धर्मांतरण कराने का नया तरीका ही सामने आया है। ईसाई मिशनरियां पोल खुलने के डर से यहां दलित और गरीब हिंदुओं का धर्मांतरण तो कर रही हैं, लेकिन उनके नाम नहीं बदल रही हैं। ताकि पुलिस को कार्रवाई करने में मुश्किल आए। यहां लोगों के घरों के उनके इष्टदेव भगवान की मूर्तियों को हटा दी गईं हैं। इसके स्थान पर जन्म से हिंदुओं से भी जीसस की प्रेयर कराई जा रही है। मिशनरियों ने धर्मांतरण का ये नया तरीका निकाला है।

सनातन धर्म के प्रति नफरत के एजेंडे को आगे बढ़ाने में जुटी मिशनरी

 

सनातन धर्म से कांग्रेस और आम आदमी पार्टी किस कदर नफरत करती है यह कोई अनजानी बात नहीं है। कांग्रेस पार्टी ने देश पर 70 सालों तक शासन के दौरान सनातन धर्म को हर स्तर से नुकसान पहुंचाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी। वहीं आम आदमी के पार्टी के मंत्री राजेंद्र पाल गौतम ने तो 10 हजार लोगों को एक साथ हिंदू धर्म के खिलाफ शपथ दिलवाकर रिकार्ड ही बना डाला। छत्तीसगढ़ की भूपेश बघेल सरकार हो या राजस्थान की गहलोत सरकार, पंजाब में भगवंत मान सरकार हो या दूसरे कुछ राज्यों की सरकारों द्वारा पूरी तरह आंखें पूरी तरह से बंद कर लिए जाने के कारण धर्मांतरण का खेल ईसाई मिशनरियां खुलेआम खेल रही हैं। मिशनरियों की मंडलियां भोले-भाले आदिवासियों को कई तरह के प्रलोभन देकर, तो कभी बीमारी ठीक करने और शराब छुड़ाने के नाम पर धर्म परिवर्तन करा रही हैं। धर्मांतरण की करतूतों के खिलाफ कोई कार्रवाई न होने का ही दुष्परिणाम है कि मिशनरियों के हौसले इतने बुलंद हो गए हैं। छत्तीसगढ़ के नारायणपुर में तो ईसाई मिशनरी और आदिवासियों के बीच नौबत टकराव तक जा पहुंची है। सनातन धर्म के प्रति नफरत के अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने में मिशनरी जुटी हुई हैं और कांग्रेस व आप सरकार इनकी मदद कर रही हैं। यही वजह है कि कांग्रेस शासित राजस्थान में धर्मांतरण की कई घटनाएं हो चुकी हैं।

 

देवी-देवताओं की पूजा के बजाए अब यहां लोग यीशू की प्रेयर करने लगे

अब ईसाई मिशनरियों ने अपने धर्मांतरण के मिशन का तरीका बदल लिया है। इनकी मंडलियों गरीब हिंदुओं को प्रलोभन देकर उनका धर्म परिवर्तन कराती हैं। पहले धर्म परिवर्तन के समय हिंदू व्यक्ति का नाम परिवर्तित कर क्रिश्चियन नाम दिया जाता था, लेकिन इससे धर्मांतरण की पोल खुलने और पकड़े जाने के डर से मिशनरियों ने पैटर्न बदल लिया है। वे धर्मांतरण तो उसी तरह कराती हैं। हिंदुओं के दिलों में उनके देवी-देवताओं के प्रति अनादर का भाव उत्पन्न करती हैं। यीशू की प्रार्थनाओं पर जोर देती हैं, लेकिन कुछ जगह धर्मांतरण के बाद उनके नाम नहीं बदलती हैं। नेपाल बॉर्डर पर धर्मांतरण के कई ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें जन्म से हिंदुओं के घरों से भगवान की मूर्तियां हटा दी गईं। देवी-देवताओं की पूजा के बजाए अब यहां लोग यीशू की प्रेयर करने लगे हैं। इनका ऐसा ब्रेनवाश किया है कि ये लोग दावा करते हैं कि यीशू की प्रेयर करने से ही इनकी शराब-सिगरेट की लत छूट गई है और रोजगार मिल रहा है।

हिंदू के घर में ही बनाया चर्च, इसमें 300 लोगों के प्रेयर करने की जगह

नेपाल बॉर्डर से सटे लखीमपुर जिले के निघासन कस्बे में धर्मांतरण के इस नए पैटर्न का खुलासा दैनिक भास्कर की पड़ताल में हुआ है। नेपाल से सटे उत्तर प्रदेश के कई जिलों में धर्मांतरण और क्रिश्चियन-मुस्लिम आबादी बढ़ने की खबरें अक्सर सामने आती हैं। इस दौरान पता चला था कि लखीमपुर के 30 गांवों में ईसाई मिशनरी एक्टिव हैं। ये गांव थारू जनजाति के हैं और चंदन चौकी से गौरीफंटा बॉर्डर के करीब बसे हैं। ये एरिया पलिया तहसील में आता है। यहां की 15 ग्राम पंचायतों में 50 हजार से ज्यादा थारू आबादी रहती है। यहां पास के नझौटा गांव में एक चर्च है, जो दूर से दिखता है। यह चर्च घर में ही है और रमाकांत कश्यप इसका पादरी भी हैं। यहां आसपास के 300 से 400 लोग प्रेयर के लिए आते हैं। पिछले साल ही लखीमपुर के तिकुनिया बॉर्डर से 25 किमी दूर निघासन में धर्मांतरण का मामला सामने आया था। इसमें कुछ लोगों की गिरफ्तारी भी हुई थी।

 

धर्म तो दंगे और अपराध करवाता है, हम तो यीशू को फॉलो करते हैं

यहां के अंबेडकरनगर में बने चर्च में रमाकांत कश्यप प्रेयर कर रहे हैं। उम्र 35 से 37 साल के बीच होगी। जन्म से हिंदू हैं, पर अब यीशू को मानने लगे हैं। रमाकांत की पत्नी भी यीशू को मानती हैं। वे कहते हैं कुछ साल पहले एक मलयाली पास्टर गिरीश सही रास्ते पर लेकर आए। मेरी हर गलत आदत खत्म हो गई। इसके बाद से ही यीशू को फॉलो करने लगा हूं। रमाकांत से कहा कि उसका नाम तो हिंदुओं की तरह है। जाहिर है आपने धर्म बदला है, लेकिन कैसे और क्यों? जवाब में रमाकांत ने अजब तर्क गढ़ा, ‘मैंने धर्म नहीं बदला। यीशू धर्म बदलने को नहीं कहते हैं। धर्म तो दंगा करवाता है, अपराध करवाता है। हम यीशू को फॉलो करता हूं।’ रमाकांत की शादी 2016 में हुई थी। रमाकांत की पत्नी लीना रायबरेली की हैं और यीशू को फॉलो करती हैं। वो बताती है पिता की तबीयत खराब रहती थी। तभी एक पास्टर के संपर्क में आई। उनकी चंगाई सभा में जाने लगी, इसके बाद पिता की तबीयत सुधरने लगी। उनके ठीक होते ही यीशू को फॉलो करने लगी।’

यीशू को फॉलो करने वालों में दलित ज्यादा, चंगाई सभा सक्रिय

चर्च में फास्ट प्रेयर करने आए जयराम निघासन के ही रहने वाले हैं। वे दलित समुदाय से हैं। मजदूरी करते हैं। 2017 में उनकी तबीयत खराब हुई, फिर बिस्तर नहीं छोड़ पाए। जयराम बताते हैं, ‘मुझे कुष्ठ रोग भी हो गया। मेरी बुआ को किसी ने निघासन में चल रहे इस चर्च के बारे में बताया था। वे मुझे यहां लाईं। इसके बाद मैं भी चर्च में आकर प्रार्थना करने लगा।’ यहीं हमारी मुलाकात शांति से हुई। शांति भी दलित हैं। वे बताती हैं कि परिवार में बहुत कलह होती थी। आए दिन पति से झगड़ा होता था। मेरी आंख में कोई दिक्कत थी। कई डॉक्टरों को दिखाया। सभी ने आंख निकालने की बात कही थी। इसी बीच मेरे पति की तबीयत भी खराब हो गई। वे भी ठीक नहीं हो रहे थे।’ ‘किसी के बताने पर मैं 2018 में यहां आई। चंगाई सभा में आने पर फायदा होने लगा। इसके बाद मैंने दवाइयां वगैरह छोड़ दीं। यहीं प्रार्थना करती रही। हमारी तबीयत में सुधार होता रहा।’

दो मंजिला मकान में चल रहा बगैर रजिस्ट्रेशन का चर्च, पुलिस को पता नहीं

रमाकांत ने दावा किया कि ‘यहां आने वाले अनुयायी जो दान-दक्षिणा चढ़ाते हैं, उसी से घर चल रहा है।’ लेकिन उनका घर देखकर ऐसा नहीं लगता। उसका दो मंजिला मकान बना हुआ है। ग्राउंड फ्लोर पर परिवार रहता है। अंदर बरामदा है, जिसमें सीढ़ियां बनी हैं। बरामदे से अंदर जाने के लिए गैलरी थी। गैलरी के दोनों तरफ कमरे थे। अंदर एक लॉबी है, जिसमें एक तरफ CCTV फुटेज देखने के लिए मॉनिटर लगा है। बीच में कालीन के ऊपर सोफा रखा है। कालीन के नीचे बेसमेंट है, रमाकांत ने उसे दिखाने से इनकार कर दिया। रमाकांत भले घर को चर्च बताएं, लेकिन चर्च का रजिस्ट्रेशन उनके पास नहीं है। यूपी सरकार ने नवंबर, 2020 को अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए कानून बनाया था। रमाकांत से पूछा कि धर्मांतरण कानून आने के बाद क्या आप लोगों को रोका नहीं गया। उन्होंने तर्क दिया कि हम धर्मांतरण नहीं कराते। देखिए सारे नाम हिंदू ही हैं। जो लोग यीशू में विश्वास करते हैं, हम बस उन्हें यीशू को याद करने का तरीका बताते हैं। इसलिए पुलिस हमें परेशान नहीं करती।

 

संदिग्ध गांवों में कमेटियां बनाईं, ऑपरेशन कवच से क्राइम रोक रहे

बॉर्डर किनारे बसे थारू जनजाति के लोगों का धर्मांतरण हो रहा है। रमाकांत ने बताया, ‘हम निघासन में हैं। ये नेपाल बॉर्डर से थोड़ा दूर है। हमें इस बारे में कोई जानकारी नहीं है।’ निघासन थाना क्षेत्र के बम्हनपुर में 18 सितंबर 2022 को 2 लोगों के खिलाफ मुकदमा हुआ था। उन पर पैसे और नौकरी का लालच देकर 18 दलितों का धर्म परिवर्तन कराने का आरोप था। विश्व हिंदू परिषद के सह संयोजक सुमित जायसवाल और संयोजक आशीष की शिकायत पर पुलिस पहुंची। सुशील कुमार और राजकुमार को गिरफ्तार हुए। दोनों अभी जमानत पर हैं। सीओ राजेश कुमार के मुताबिक सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद नेपाल बॉर्डर पर ऑपरेशन कवच में निगरानी हो रही है। निघासन से सटे बॉर्डर पर ऑपरेशन कवच चल रहा हैं। इसमें जिस गांव को हम संदिग्ध मानते हैं, वहां 10 लोगों की कमेटी बनाई है। ये लोग हमें गांव में होने वाली संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी देते हैं।

 

जयपुर में नाबालिग को किडनैप करके जबरन धर्म परिवर्तन कराया

एक ओर नेपाल बॉर्डर पर खुलेआम धर्मांतरण का खेल चल रहा है तो राजस्थान भी इससे अछूता नहीं है। दलित हिंदुओं को ईसाई बनाने का मामला यहां सुर्खियों में रहा है। ताजा मामला राजधानी जयपुर का ही है, जहां एक नाबालिग हिंदू लड़की को किडनैप करके धर्म परिवर्तन कराने की कोशिश हुई। किसी तरह अपहर्ताओं के चंगुल से छूटकर घर वापस आई नाबालिग पागलों जैसी हरकत करने लगी। खुद को मुस्लिम बताने लगी। मानसरोवर थाने में पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट दर्ज करवाई है। पुलिस ने FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के मुताबिक मानसरोवर निवासी एक व्यक्ति ने बताया कि उसकी 15 साल की बेटी पिंकी (बदला हुआ नाम) को किडनैप कर धर्म परिवर्तन करवाने की कोशिश की जा रही है।

 

सोहेल बहला-फुसलाकर ले गया, अब वो अपना नाम इस्मायरा खान बताने लगी

पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 18 जून को नाबालिग बेटी सवाईमाधोपुर अपने मौसी के गई थी। मौसी की बेटी भी पिंकी के साथ जयपुर आ गई। सहेली के बर्थ-डे में जाने की कहकर दोनों बहनें घर से चली गई। उसके बाद पिंकी घर नहीं आई। ढूंढने में पता चला कि चौथ का बरवाड़ा सवाई माधोपुर निवासी सोहेल खान बहला-फुसलाकर पिंकी को किडनैप कर ले गया है। उसके बाद अब पिंकी घर वापस आई और पागलों जैसी हरकत करने लगी। खुद का नाम चिंकी की जगह इस्मायरा खान बताने लगी। वह खुद को मुस्लिम बता रही है। आरोप है कि किडनैप कर ले जाने वाला सोहेल खान ने नाबालिग बेटी को बहला-फुसलाकर धर्म परिवर्तन कराया है।

अब सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि जबरन धर्म परिवर्तन बेहद गंभीर समस्या

अब सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि जबरन धर्म परिवर्तन बेहद गंभीर समस्या है और इससे देश की सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने जबरन धर्म परिवर्तन  रोकने को दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की है। जबरन धर्म परिवर्तन रोकने को लेकर एडवोकेट अश्विनी उपाध्याय ने याचिका दायर की है। याचिका में मांग है कि प्रलोभन, दबाव बनाकर या फिर धमकी देकर धर्म परिवर्तन कराए जाने को संविधान के खिलाफ बताते हुए सख्त कदम उठाए जाएं। लॉ कमीशन को कहा जाए कि धर्म परिवर्तन कंट्रोल करने को रिपोर्ट पेश करे ताकि जबरन और धमकी और बहला फुसलाकर धर्म परिवर्तन मामले में कानून लाया जाए।

जबरन धर्म परिवर्तन को लेकर तमिलनाडु में एक नाबालिग लड़की ने आत्महत्या कर ली। लेकिन वहां की सरकार, समाज और कानून इस पर मौन है। आइए, पहले यह जान लें कि देश में कितने राज्यों में धर्मांतरण को लेकर क्या कानून हैं…?

जानिए, जबरन या लालच देकर धर्मांतरण को रोकने के लिए किस राज्य में क्या है कानून?

1.ओडिशाः पहला राज्य है जहां जबरन धर्मांतरण रोकने को कानून आया था। यहां 1967 से इसे लेकर कानून है. जबरन धर्मांतरण पर एक साल की कैद और 5 हजार रुपये की सजा है। वहीं, एससी-एसटी के मामले में 2 साल  की कैद और 10 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।
2.मध्य प्रदेशः यहां 1968 में कानून लाया गया था. 2021 में इसमें संशोधन हुआ। इसके बाद लालच, धमकाकर, धोखे या जबरन धर्मांतरण कराया जाता है तो 1 से 10 साल तक की कैद और 1 लाख तक के जुर्माने की सजा  है।
3.अरुणाचल प्रदेशः ओडिशा और एमपी की तर्ज पर यहां 1978 में कानून लाया गया था कानून के तहत जबरन धर्मांतरण कराने पर 2 साल तक की कैद और 10 हजार रुपये तक के जुर्माने की सजा हो सकती है।
4.छत्तीसगढ़ः 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होने के बाद यहां 1968 वाला कानून लागू हुआ. बाद में इसमें संशोधन किया गया। जबरन धर्मांतरण कराने पर 3 साल की कैद और 20 हजार रुपये जुर्माना, जबकि नाबालिग या एससी-एसटी के मामले में 4 साल की कैद और 40 हजार रुपये जुर्माने की सजा का प्रावधान है।
5.गुजरातः यहां 2003 से कानून है। 2021 में इसमें संशोधन किया गया था. बहला-फुसलाकर या धमकाकर जबरन धर्मांतरण कराने पर 5 साल की कैद और 2 लाख रुपये जुर्माना, जबकि एससी-एसटी और नाबालिग के मामले में 7 साल की कैद और 3 लाख रुपये के जुर्माने की सजा है।

याचिकाकर्ता की कोर्ट से अपील, धर्म परिवर्तन रोकने के लिए अलग से बने कानून

अब बात करते हैं सुप्रीम कोर्ट में धर्मांतरण को रोकने के लिए दायर याचिका की। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और बीजेपी नेता अश्विनी उपाध्याय ने 23 सितंबर को याचिका दाखिल की थी। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमआर शाह और हिमा कोहली की बेंच ने जबरन धर्मांतरण के खिलाफ याचिका की सुनवाई करते हुए मौखिक टिप्पणी में इसे गंभीर मामला बताया। कोर्ट ने कहा कि जबरन धर्मांतरण न सिर्फ धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार के खिलाफ बल्कि देश की सुरक्षा के लिए भी खतरा हो सकता है। याचिका में धर्म परिवर्तनों के ऐसे मामलों को रोकने के लिए अलग से कानून बनाए जाने की मांग की गई है। या फिर इस अपराध को भारतीय दंड संहिता (IPC) में शामिल करने की अपील की गई है।

धर्मांतरण रोकने को सख्त कानून लाने को सरकार को निर्देश दिए जाएं

सुप्रीम कोर्ट ने जबरन धर्म परिवर्तन रोकने को दाखिल याचिका पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी करते हुए केंद्र सरकार से जवाब दाखिल करने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने इसके लिए केंद्र सरकार को नोटिस जारी करते हुए जवाब 22 नवंबर तक हलफनामा देने का आदेश दिया है। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील अश्विनी उपाध्याय ने याचिका दाखिल की थी। याचिका में यह भी कहा गया है कि यह मुद्दा किसी एक जगह से जुड़ा नहीं है, बल्कि पूरे देश की समस्या है जिस पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से जबरन और धोखा देकर धर्म परिवर्तन रोकने के लिए सख्त कानूनी प्रावधान लाने के लिए केंद्र सरकार को निर्देश दिए जाने की मांग की है। मामले की अगली सुनवाई 28 नवंबर को होगी।

तमिलनाडु की लड़की के मामले का हवाला, धर्मांतरण के बाद कर ली आत्महत्या

याचिकाकर्ता ने कहा कि 19 जनवरी को तामिलनाडु में 17 साल की लड़की ने आत्महत्या कर ली है। याची ने कहा कि लड़की ने मरने से पहले लिखे नोट में कहा है कि उसे धर्म परिवर्तन करने के लिए उस पर दबाव बनाया गया। उपाध्याय ने याचिका में मांग की है कि प्रलोभन देकर, दबाव बनाकर या फिर धमकी देकर धर्म परिवर्तन कराए जाने को संविधान के खिलाफ बताते हुए सख्त कदम उठाए जाएं। लॉ कमीशन को कहा जाए कि धर्म परिवर्तन को कंट्रोल करने के लिए रिपोर्ट पेश करे ताकि जबरन और धमकी और बहला फुसलाकर धर्म परिवर्तन मामले में कानून लाया जाए।प्रलोभन या जबरन धर्म परिवर्तन एक गंभीर विषय है।

याचिकाकर्ता ने केंद्र के साथ-साथ तमाम राज्यों को भी प्रतिवादी बनाया

सुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ता ने अर्जी दाखिल कर केंद्र और तमाम राज्यों को प्रतिवादी बनाया है। तामिलनाडु में 17 साल की लड़की की मौत के मामले में छानबीन की मांग को लेकर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता अश्विनी उपाध्याय ने अपनी अर्जी में कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 14, 21 एवं 25 के तहत धोखाधड़ी, धमकी या डराकर धर्म परिवर्तन कराया जाना अपराध घोषित किया जाए। याचिका में नैशनल इन्वेस्टिंग एजेंसी (NIA), सीबीआई (CBI) और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को 17 साल की लड़की की मौत के मामले में कारण बताओ नोटिस जारी करने की मांग की गई है। सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अर्जी में कहा गया है कि दबाव बनाकर कराए जाने वाले अवैध धर्म परिवर्तन को संविधान में अपराध घोषित किया जाए।

धर्म परिवर्तन गंभीर विषय है और इससे देश की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है

सुप्रीम कोर्ट ने इस दौरान कहा कि जो मुद्दे उठाए गए हैं और जबरन धर्म परिवर्तन के जो आरोप लगाए गए हैं, अगर वो सही हैं और उनमें सच्चाई है तो फिर यह गंभीर विषय है और इससे आखिरकार देश की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इससे देश की जनता के ‘धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार’ प्रभावित होते हैं। ऐसे में केंद्र सरकार को इस मामले में स्टैंड क्लियर करना चाहिए। इसलिए केंद्र सरकार हलफनामा देकर बताए कि वह कथित जबरन धर्म परिवर्तन रोकने के लिए क्या कदम उठा रहा है। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह इस मामले की अगली सुनवाई 28 नवंबर को करेगा। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि कई राज्य सरकारों ने इसे रोकने के लिए कानून बनाए हैं। उन्होने यह भी कहा कि कई उदाहरण हैं जहां चावल और गेंहू देकर धर्म परिवर्तन कराए जा रहे हैं। तब बेंच ने कहा कि आप बताएं कि आप क्या कदम उठा रहे है?

कोर्ट ने याचिका की दलीलों से जताई सहमति, सरकार जल्द उठाए कदम

सुप्रीम कोर्ट ने भी याचिका में दी गई दलीलों से सहमत होकर जबरन धर्मपरिवर्तन को गंभीर विषय माना और केंद्र सरकार से कहा है कि अगर यह सच है तो वह इसे रोकने के लिए गंभीरता से कदम उठाए। उच्चतम न्यायालय ने सरकार को चेतावनी भी दी कि यह एक कठिन स्थिति है जिस पर काबू नहीं पाया गया तो देश की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा होगा और नागरिकों के ‘धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार’ प्रभावित होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि इस पर एहतियाती कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि जल्द कदम उठाना होगा, ताकि इसे रोका जा सके। अगर ऐसा नहीं किया गया तो कठिन समय आ जाएगा।

राजस्थान: जानकारी के बावजूद चुप्पी साधकर बैठे रहे अधिकारी

प्रदेश में धर्मांतरण को लेकर हिंदू जागरण मंच आक्रोशित है। मंच का आरोप है कि मिशनरी के संपर्क में आकर ईसाई धर्म के प्रचारक बने पास्टर धर्मपाल बैरवा व उनकी टीम ने क्षेत्र में धर्म के प्रचार के लिए वर्किंग कर रही है। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में जयपुर के सांगानेर में धर्मांतरण को लेकर एक बड़ा आयोजन था। धार्मिक सभा के आयोजन के नाम पर इसके पोस्टर पर भी लगाए गए थे। धर्म जागरण मंच के संजय सिंह शेखावत ने जांच स्थानीय नेता अमित शर्मा से कराई। मामला खुलता चला गया। फिर हिंदू संगठनों की आपत्ति के बाद यह कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया। सांगानेर सदर के थानेदार बृजमोहन कविया खोखली दलील देते हैं कि आयोजकों ने कार्यक्रम की इजाजत ली थी। कार्यक्रम से दो-तीन दिन पहले आकर उन्होंने बताया कि अब कार्यक्रम नहीं कराना है। ईसाई धर्म के प्रचार के नाम पर ये लोग एससी या गरीब व्यक्ति को आर्थिक मदद या काम-धंधे का लालच देते हैं।

बारां: बैथली नदी में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां और तस्वीरें प्रवाहित कर दीं

राजधानी से पहले राजस्थान के बारां जिले में धर्म परिवर्तन का एक बड़ा मामला सामने आया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गाँव में मां दुर्गा आरती का आयोजन कराने वाले दलित युवकों से मारपीट की गई। पूरे घटनाक्रम से गुस्साए दलितों ने सामूहिक रूप से धर्म परिवर्तन कर लिया। बताया जा रहा है कि 250 दलितों ने बौद्ध धर्म अपनाने से सनसनी फैल गई। वहीं, पुलिस अधिकारी पूजा नागर ने बताया कि बारां जिले के बापचा थाना क्षेत्र के भुलोन गांव बौद्ध धर्म ग्रहण किया गया है। हालाँकि पुलिस ने धर्म परिवर्तन करने वालों की संख्या काफी कम बताई है। गाँव में दलितों ने जुलूस निकालते हुए धर्मांतरण की शपथ ली और गांव की बैथली नदी में हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियां और तस्वीरें प्रवाहित कर दीं।

अलवर: ईसाई धर्म अपनाने के लिए दवाब, हिंदू देवी-देवताओं के पोस्टर्स फाड़े

कांग्रेस सरकार जब राजधानी में ही धर्मांतरण को नहीं रोक पा रही है, तो जिलों में ऐसे मामलों में उससे कार्रवाई की क्या ही उम्मीद करें। जयपुर और बारां की तरह अलवर में भी धर्मांतरण का मामला पिछले माह ही आ चुका है। राजस्थान के अलवर जिले में माता-पिता पर अपने बेटे-बहू का धर्मांतरण कराने का आरोप लगा है। पीड़ित दंपति सोनू और उनकी पत्नी रजनी ने पिछले माह 19 अक्टूबर को इस मामले में शिकायत दर्ज कराई। इन दोनों ने शिकायत देते हुए पुलिस से कहा है कि सोनू के माता-पिता ने घर में रखी मूर्तियों को तोड़ दिया और हिंदू देवी-देवताओं के पोस्टर्स को फाड़ दिया है। वे लोग, इन पर ईसाई धर्म अपनाने के लिए लगातार दवाब बना रहे हैं।

उत्तर प्रदेश: जिहाद की हिंसात्मक विचारधारा अलकायदा से प्रभावित और पोषित

उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में अवैध धर्मांतरण गिरोह चलाने वालों के तार पाकिस्तानी आतंकी संगठन अलकायदा से जुड़ रहे हैं। ये गिरोह पैसे का लालच देकर मूक-बधिर और मामूली दिव्यांग लोगों को अपना पहला टारगेट बनाता था। इस गिरोह के सदस्य प्रतिबंधित संगठन सिमी (Student’s Islamic movement of India) से तो पहले से ही जुड़े हुए थे। अब यूपी एटीएस के हत्थे चढ़े अवैध धर्मांतरण में संलिप्त आरोपियों के पास के ऐसे साक्ष्य मिले हैं, जिससे इनका कनेक्शन अलकायदा से भी जुड़ रहा है।यूपी में एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार ने दावा किया है कि इस मामले में पूर्व में महाराष्ट्र से गिरफ्तार एडम और कौसर आलम के पास से जो साक्ष्य मिले हैं, उससे पता चला है कि दोनों जिहाद की हिंसात्मक विचारधारा अलकायदा से प्रभावित और पोषित हैं।

अब्दुल्ला धर्मांतरण गिरोह के लिए फंडिंग जुटाने का काम करता था

उत्तर प्रदेश एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (UP ATS) की टीम ने अवैध धर्मांतरण मामले में मुख्य आरोपी मोहम्मद उमर गौतम के बेटे अब्दुल्लाह को भी गौतम बुद्ध नगर से गिरफ्तार कर लिया। अब्दुल्ला पर धर्मांतरण गिरोह की फंडिंग करने का आरोप है। यूपी एटीएस के मुताबिक जहांगीर आलम और कौसर के सीधे संपर्क में रहकर अब्दुल्ला धर्मांतरण गिरोह के लिए फंडिंग जुटाने का काम करता था। अब्दुल्ला अपने पिता मौलाना उमर गौतम के अल फारुकी मदरसा व मस्जिद एवं इस्लामिक सेंटर का काम भी देख रहा था।

धर्मांतरण के बड़ा सिंडिकेट, 16 गिरफ्तार, उमर-कलीम के ट्रस्ट को विदेशी फंडिग

एटीएस ने धर्मांतरण के बड़े सिंडिकेट का खुलासा किया था। मुख्य सरगना मौलाना उमर गौतम और कलीम सिद्दीकी समेत 16 आरोपियों को अलग अलग दिनों में अलग-अलग जगहों से गिरफ्तार किया जा चुका है। उमर का बेटा अब्दुल्ला इस सिंडिकेट में शामिल जहांगीर आलम, कौसर व फराज शाह से सीधे व सक्रिय रूप से संपर्क में रहा है। एडीजी ने बताया कि पूर्व में गिरफ्तार उमर गौतम और कलीम सिद्दीकी के खातों में 79 करोड़ रुपये की फंडिंग के साक्ष्य मिले हैं। इसमें उमर गौतम के खातों से 57 करोड़ और कलीम के खातों से 22 करोड़ रुपये मिले हैं। उमर और कलीम दोनों को ही लगभग एक जैसे संगठनों से ही फंडिंग हुई है।

आप की दिल्ली: मदर टेरेसा और ईसाई मिशनरी के रास्ते पर चल रहे शिष्य केजरीवाल

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ईसाई संत मदर टेरेसा के शिष्य रहे हैं। इससे सहज अंदाजा लगाया जा सकता है कि वो किस विचारधारा से प्रेरित है। आम तौर पर माना जाता है कि शिष्य पर गुरु के उपदेशों का असर होता है। केजरीवाल पर भी उनके गुरु के उपदेश का असर दिखाई दे रहा हैे। वो उन्हीं के बताये रास्ते पर चल रहे हैं। जिस तरह मदर टेरेसा ने गरीबों की मुफ्त सेवा के बहाने दलितों और आदिवासियो के बीच पैठ बनाई। उसके बाद ईसाई मिशनरियों ने चमत्कारिक मुफ्त इलाज, मुफ्त शिक्षा और पैसे का लालच देकर और ऊंच-नीच, जात-पात का एहसास दिलाकर गरीब दलितों और आदिवासियों का धर्मांतरण कराया। उसी तरह केजरीवाल भी मुफ्त रेवड़ी कल्चर के जरिए गरीब दलितों, आदिवासियों, सिखों में पैठ बनाकर उनके बौद्ध और ईसाई धर्म में धर्मांतरण को बढ़ावा दे रहे हैं।

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