चमोली आपदा में 12 शव और मिलने से मृतक संख्या 50,154 अभी भी लापता

LIVE Uttarakhand Glacier Burst: बचाव अभियान के दौरान सुरंग से पांच और रैणी से छह और रूद्रप्रयाग से एक शव मिला,161 लापता
टनल में जारी है बचाव अभियान, मलबा हटाते मिले पांच शव।
चमोली आपदा के बाद से अब तक कुल 50 शव बरामद किए गए हैं जबकि 154 लापता हैं। वहीं जिलाधिकारी  स्वाति सिंह भदौरिया और पुलिस अधीक्षक यशवंत सिंह भी मौके पर हैं और राहत-बचाव कार्यों का जायजा ले रहे हैं।

देहरादून 14 फरवरी ।  तपोवन में एनटीपीसी के निर्माणाधीन हाइड्रो प्रोजेक्ट की टनल में फंसे 34 व्यक्तियों तक पहुंचने में बचाव अभियान जारी है। मलबे के बैक फ्लो की वजह से उसे हटाने में टीम को खासी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा। पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार ने बताया कि मुख्य सुरंग के किनारे से पांच शव मिले हैं। उन्होंने बताया कि टीमें 130 मीटर तक पहुंच गई हैं और जल्द ही अगली सुरंग तक पहुंचने के लिए प्रक्रिया को तेज करने की कोशिश कर रही हैं। इसके बाद पांच और शव मिले है। उत्तराखंड पुलिस, आईटीबीपी,ए और एनडीआरएफ के जवानों ने शव निकाल लिए हैं।

वहीं, छह शव रैणी ऋषिगंगा पावर प्रोजेक्ट से मिले हैं। अब तक कुल 50 शव मिले हैं, जबकि 154 लापता हैं। वहीं, जिलाधिकारी स्वाति सिंह भदौरिया और पुलिस अधीक्षक यशवंत सिंह भी मौके पर हैं और राहत-बचाव कार्यों का जायजा ले रहे हैं। दूसरी ओर जोशीमठ पुलिस स्टेशन में अब तक 29 लापता लोगों के मामले दर्ज किए गए हैं। पहचान में सहायता के लिए परिवार के 55 सदस्यों के डीएनए नमूने लिए गए हैं।

चमोली जिले के तपोवन क्षेत्र में ऋषिगंगा की बाढ़ में तबाह हुई एनटीपीसी की 520 मेगावाट की तपोवन विष्णुगाड़ परिरयोजना की टनल में ड्रिलिंग कर चार शव निकाले गए  है। इनमें दो की पहचान इलैक्ट्रिक इंजीनियर आलम सिंह( पुत्र सुंदर सिंह निवासी ल्वैल गुल्लर नरेंद्रनगर, टिहरी उत्तराखंड) और वैल्डर अनिल ( पुत्र भगतू निवासी डाडवली समल्टा कालसी देहरादून उत्तराखंड ) के रूप में हुई है।

टनल के अंदर बचाव में जुटी एनडीआरएफ की टीम ने पहला शव तड़के 4:45 बजे व दूसरा शव सुबह 5:50 बजे परियोजना की इंटेक एडिट टनल से बरामद किया। इस टनल में सात फरवरी से ही बचाव अभियान चल रहा है। जिन व्यक्तियों के शव टनल से बरामद हुए हैं, उनकी घटना के दिन से ही मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही थी। बचाव टीम ड्रोन कैमरे की मदद से टनल के अंदर लापता व्यक्तियों की तलाश कर रही है।

चमोली की जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया व पुलिस कप्तान यशवंत सिंह चौहान ने टनल के अंदर जाकर बचाव कार्यों का जायजा लिया। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि टनल के अंदर बचाव कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। एनडीआरएफ सहित अन्य टीमें बचाव में जुटी हुई है। उन्होंने बताया कि टनल के अंदर फंसे व्यक्तियों के जीवित होने की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है।

यदि टनल के अंदर कोई जीवित व्यक्ति मिलता है तो उसका तत्काल उपचार कराने को यहां पर बनाए गए अस्थाई हेलीपैड में हेलीकाप्टर तैयार रखा गया है। घटनास्थल पर सात एंबुलेंस,  पोस्ट मार्टम टीम के अलावा उपचार को मेडिकल टीमों की भी तैनाती की गई है। ताकि यदि कोई घायल मिले को उसका यहीं पर प्राथमिक उपचार किया जा सके

सुबह से दोपहर ढाई बजे तक 12 शव बरामद

पुलिस महानिदेशक अशोक कुमार के अनुसार, सुरंग में बचाव कार्य जारी है।

जिलाधिकारी ने किया बैराज साइड का निरीक्षण

तपोवन में नये शव मिलने के बाद जिलाधिकारी स्वाति भदौरिया और पुलिस अधीक्षक यशवंत सिंह चौहान ने बैराज साइड का निरीक्षण किया। उनके साथ एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम भी मौजूद रहीं। जिलाधिकारी  का कहना है कि तलाश अभियान तेजी से चल रहा है। बैकअप में सात एंबुलेंस, पोस्टमार्टम टीम और एक हेलीकॉप्टर भी रखा गया है। अगर कोई भी व्यक्ति जिंदा बरामद किया जाता है तो उसे तुरंत उपचार देने के लिए पूरी व्यवस्था की गई हैं।

बता दें कि सुरंग के अंदर से मलबा हटाने का काम लगातार जारी है। रात में जमीन के अंदर सपोर्ट नहीं मिलने पर सुरंग में ड्रिल कार्य बंद कर दिया गया था। चमोली के पुलिस अधीक्षक यशवंत सिंह चौहान ने बताया कि निर्धारित दूरी तक ड्रिल के बाद पानी निकल रहा है। सम्भवतः नीचे पानी और मलबा घुसा है। बता दें कि आपदा में अब तक 164 लोग अभी भी लापता हैं। जबकि रैणी और तपोवन क्षेत्र से 38 व सुरंग से दो शव मिल चुके हैं।

धौली गंगा का रुख मोड़ने में जुटी मशीनें

सुरंग और बैराज साइट से मलबा हटाने के लिए अब धौली गंगा का रुख मोड़ा जा रहा है। बैराज साइट गेट नंबर एक से दो जेसीबी और सुरंग साइट से एक जेसीबी मलबे हटाने के लिए लगी है। यहां जेसीबी को नदी में उतारने के लिए एप्रोच सड़क का निर्माण भी शुरू कर दिया गया है।

पीड़ित परिवारों का कहना है कि जिस दिन धौली गंगा में सैलाब आया, उस दिन बैराज साइट में कई मजदूर काम कर रहे थे, जिनके बैराज में दबे होने की आशंका है। ऋषि गंगा में आई बाढ़ के बाद बैराज साइट पर स्थित मुख्य टनल में टनों मलबा घुसने के साथ ही बैराज भी मलबे से भर गया है।

बैराज में करीब बीस फीट तक मलबा जमा है, जिससे नदी के पानी से बैराज में दलदल बनी है। यहां मलबे में दबे मजदूरों को निकालने के लिए नदी का रुख मोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इसके लिए शनिवार से कार्य भी शुरू कर दिया गया है।

बैराज साइट का मलबा हटाने के लिए एप्रोच सड़क भी बनाई जा रही है। इस काम में तीन जेसीबी जुटी हुई हैं। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया ने बताया कि बैराज साइट का मलबा हटाने के लिए मशीनें लगा दी गई हैं। नदी का रुख मोड़कर मलबा हटाने का काम शुरू किया जाएगा।

बैराज साइट का मलबा हटाने के लिए मशीनें लगा दी गई हैं। नदी का रुख मोड़कर मलबा हटाने का काम शुरू किया जाएगा।
-स्वाति एस भदौरिया, जिलाधिकारी, चमोली

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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