सैयद शाहनवाज हुसैन पर होगा रेप का केस, हाईकोर्ट ने जांच को दिये तीन माह

शाहनवाज हुसैन को दिल्ली HC से बड़ा झटका, BJP नेता के खिलाफ दर्ज होगा रेप का केस

दिल्ली हाई कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि दिल्ली पुलिस इस मामले में 3 महीने में अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट निचली अदालत के सामने रखे.
शाहनवाज हुसैन को दिल्ली HC से बड़ा झटका, BJP नेता के खिलाफ दर्ज होगा रेप का केस

नई दिल्ली 18 अगस्त। दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र और बिहार सरकार में मंत्री रहे बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन को बड़ा झटका दिया है. दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने 2018 के एक मामले में शाहनवाज हुसैन की याचिका को खारिज कर दिया है.

इस याचिका में निचली अदालत के उस आदेश को चुनौती दी गई थी, जिसमें उनके खिलाफ यौन शोषण के आरोप में एफआईआर दर्ज करने को कहा गया था. हाईकोर्ट ने दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि इस मामले में 3 महीने में अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट निचली अदालत के सामने रखे.

ये है मामला

साल 2018 में एक महिला ने केंद्र और बिहार सरकार में मंत्री शाहनवाज हुसैन पर आरोप लगाया था कि उसके साथ छतरपुर फॉर्महाउस में रेप किया. इसके अलावा जान से मारने की धमकी भी दी थी. इसी मामले पर पुलिस ने निचली अदालत (Lower Court) में कहा था कि शाहनवाज के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता. हालांकि उस वक्त भी कोर्ट ने पुलिस के तर्क को खारिज करते हुए कहा था कि की ये संज्ञेय अपराध का मामला है.

बिहार से एमएलसी हैं शाहनवाज हुसैन

शाहनवाज हुसैन बिहार से एमएलसी हैं. वे बिहार में जदयू-बीजेपी गठबंधन सरकार में मंत्री भी थे. शाहनवाज अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्र में मंत्री बने थे. उस समय उन्‍हें सबसे युवा मंत्री होने का गौरव प्राप्‍त हुआ था. सैयद शाहनवाज हुसैन वर्ष 2014 में भागलपुर लोकसभा में चुनाव हार गए थे. 2019 में उन्‍हें भाजपा ने कहीं से भी टिकट नहीं दिया. लेकिन लगातार वे पार्टी के लिए कार्य करते रहे. उनकी प्रारंभिक शिक्षा विलियम्स हाईस्कूल सुपौल में हुई. कुछ दिन पूर्व वे बिहार में विधान परिषद सदस्‍य बने और फिर उद्योग मंत्री.

 शाहनवाज हुसैन का दिल्ली हाईकोर्ट के रेप का केस दर्ज करने के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख, अगले हफ्ते सुनवाई होगी

शाहनवाज हुसैन (Syed Shahnawaz Hussain) ने दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) के रेप का केस (Rape Case) दर्ज करने के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। हुसैन ने सुप्रीम कोर्ट में जल्द सुनवाई की मांग की। हालांकि कोर्ट ने जल्द सुनवाई से इनकार कर दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने मामले की अगले हफ्ते सुनवाई तय की। दरअसल, दिल्ली हाईकोर्ट ने हाल ही में कथित 2018 रेप केस में भाजपा (BJP) नेता सैयद शाहनवाज हुसैन के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है।

कोर्ट ने देखा कि शहर की पुलिस की ओर से एफआईआर दर्ज करने की पूरी तरह से अनिच्छा दिखाई दे रही है। जस्टिस आशा मेनन ने निर्देश दिया था कि मामले की जांच पूरी की जाए और सीआरपीसी की धारा 173 में एक विस्तृत रिपोर्ट तीन महीने की अवधि के भीतर एमएम के समक्ष प्रस्तुत की जाए। अदालत ने पूर्व केंद्रीय मंत्री की 12 जुलाई, 2018 के विशेष न्यायाधीश के आदेश को चुनौती देती याचिका खारिज कर दी, जिसमें मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट के एफआईआर दर्ज करने के आदेश के खिलाफ उनकी पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी गई थी।

हुसैन के खिलाफ जून 2018 में आईपीसी की धारा 376, 328, 120बी और 506 में अपराध करने का आरोप लगाते हुए एक शिकायत दर्ज की गई थी। शिकायतकर्ता ने बाद में सीआरपीसी की धारा 156(3) में एक आवेदन दायर कर शहर की पुलिस को प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश देने की मांग की थी। नगर पुलिस ने 4 जुलाई, 2018 को एमएम के समक्ष कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) दायर की थी, जिसमें निष्कर्ष था कि जांच के अनुसार, शिकायतकर्ता के आरोप प्रमाणित नहीं पाए गए।

हुसैन का मामला है कि एटीआर मिलने के बावजूद एमएम ने एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया। इस आदेश को विशेष न्यायाधीश ने बरकरार रखा, जिसमें पाया गया कि 2013 के आपराधिक संशोधन अधिनियम ने पुलिस के लिए बलात्कार के मामलों में पीड़िता का बयान दर्ज करना अनिवार्य कर दिया था। इसके अलावा, प्राथमिकी दर्ज करने के संबंध में यह निष्कर्ष निकाला गया कि जो जांच की गई, वह केवल एक प्रारंभिक जांच थी और एमएम ने एटीआर को रद्द करने की रिपोर्ट के रूप में सही नहीं माना था।

अपील में, हाईकोर्ट ने पाया कि पुलिस आयुक्त को भेजी गई शिकायत ने स्पष्ट रूप से बलात्कार के संज्ञेय अपराध के कमीशन का खुलासा किया। यह भी कहा कि जब शिकायत एसएचओ को भेजी गई, तो कानून में उन्हें एफआईआर दर्ज करने के लिए बाध्य किया गया। अदालत ने कहा था, “मौजूदा मामले में, पुलिस की ओर से प्राथमिकी दर्ज करने के लिए पूरी तरह से अनिच्छा प्रतीत होती है। प्राथमिकी के अभाव में, जितना संभव हो, पुलिस, जैसा कि विशेष न्यायाधीश द्वारा सही ढंग से देखा गया, आयोजित किया जा सकता था। केवल प्रारंभिक जांच क्या है। तथ्य यह है कि यह केवल एक जवाब था जो पुलिस ने एमएम के समक्ष दायर किया था, यह पर्याप्त रूप से स्थापित करता है कि यह अंतिम रिपोर्ट नहीं थी जो पुलिस ने प्रस्तुत की थी।” इसमें कहा गया था, “एफआईआर शिकायत में दर्ज अपराध की जांच का आधार है। जांच के बाद ही पुलिस इस निष्कर्ष पर पहुंच सकती है कि अपराध किया गया था या नहीं और यदि ऐसा है तो किसके द्वारा किया गया है।”

कोर्ट ने निर्देश दिया कि पुलिस को जांच पूरी होने पर सीआरपीसी की धारा 173 में निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट देनी होगी। कोर्ट ने कहा था कि एमएम यह निर्धारित करने के लिए कानून के अनुसार आगे बढ़ेगा कि क्या अंतिम रिपोर्ट को स्वीकार करना है या तो संज्ञान लेकर मामले को आगे बढ़ाना है या यह मानते हुए कि कोई मामला सामने नहीं आया है और शिकायतकर्ता को सुनवाई देने के बाद प्राथमिकी रद्द कर दी जाएगी।

केस टाइटल: सैयद शाहनवाज हुसैन बनाम राज्य एंड अन्य।

मीटू केम्पेन के समय 2018 में भाजपा नेता शाहनवाज़ हुसैन पर महिला ने लगाए थे रेप के आरोप, कहा ‘नहीं हो रही कार्रवाई

 

मी टू केम्पेन में केन्द्रीय मंत्री एमजे अकबर पर यौन शोषण का आरोप लगने के बाद शुरू हुआ विवाद पूरी तरह से थमा भी नहीं था कि उसी कड़ी  में बीजेपी के एक और बड़े नेता का नाम इस विवाद में जुड गया था।

एक महिला ने मी टू केम्पेन पर बोलते हुए बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन पर रेप का आरोप लगाते हुए कहा था कि उसने कई बार शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई।

उसने शाहनवाज हुसैन प्रकरण में पूरी बीजेपी पर सवाल खड़े किये गये। साथ ही सोशल मीडिया के जरिये लोगों से अपनी आप बीती भी शेयर की । तो आइये जानते है क्या था ये पूरा मामला:-

ट्विटर पर लिखी है ये बातें

दिल्ली की रहने वाली एक महिला पूनम पाण्डेय ने ट्विटर पर लिखा है, बीजेपी नेता शाहनवाज हुसैन ने मेरा बलात्कार किया । उसने सवाल उठाया कि उसका केस क्यों दबाया जा रहा है, उनकी सरकार में सत्ता है इसलिए # MeToo India

उसने एक के बाद एक कई ट्वीट कर शाहनवाज हुसैन पर हमला बोला। महिला ने आखिर में लिखा है कि उसने कई जगह पर शिकायत दर्ज कराई लेकिन उसकी सुनवाई नहीं हुई। प्लीज हेल्प मी। #MeToo India

ये था पूरा मामला

दिल्ली में एनजीओ का संचालन करने वाली महिला पूनम पाण्डेय के मुताबिक वह बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शाहनवाज हुसैन के भाई के जरिये एक काम के सिलसिले में अप्रैल 2018 में उनसे मिली थी।

उसका आरोप है कि शाहनवाज ने उन्हें अपने फार्म हाउस पर फोन करके बुलाया था और वहीं पर उन्होंने और उनके भाई दोनों ने मिलकर महिला का बारी –बारी से रेप किया था।

उसके बाद से महिला ने थाने से लेकर बीजेपी हाई कमान तक को लेटर लिखकर अपनी शिकायत दर्ज कराने की कोशिश की लेकिन उसकी बात नहीं सुनी गई। उसके बाद से वह न्याय के लिए अभी भी भटक रही है।

दिल्ली हाईकोर्ट ने एफआईआर पर लगा रखी थी रोक

12 अप्रैल 2018 को इस मामले में न्याय के लिए पीड़िता ने दिल्ली हाईकोर्ट की शरण ली थी। लेकिन दिल्ली हाईकोर्ट ने महिला की शिकायत पर भाजपा नेता शाहनवाज हुसैन के खिलाफ दिल्ली पुलिस को एफआईआर दर्ज करने के निचली अदालत के आदेश पर रोक लगा दी थी।

निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली हुसैन की याचिका पर जस्टिस ए.के. पाठक ने कथित पीड़िता और पुलिस को नोटिस जारी किए और उनसे जवाब भी मांगा था।

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