सुप्रीम कोर्ट की आजम को जमानत को ‘न’, सिब्बल को कहा, राजनीति झाड़ने की जगह जाओ हाईकोर्ट

UP Elections 2022: Supreme Courts Blow To Azam Khan, No Interim Bail For SPs Campaign

आजम खान को सुप्रीम कोर्ट का झटका, अंतरिम जमानत के लिए हाईकोर्ट जाने का निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चूंकि यह मामला इलाहाबाद हाई कोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए यह अर्जी भी वहीं दायर की जाए।
नई दिल्ली 07 फरवरी। समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान को मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट से झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने आजम खान की अंतरिम जमानत की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। आजम खान ने यूपी विधानसभा चुनाव में पार्टी के प्रचार के लिए अंतरिम जमानत मांगते हुए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।

जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि आखिर संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत दायर इस तरह की याचिका पर सुनवाई कैसे की जा सकती है। पीठ ने आजम खान की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल से कहा, ‘हम याचिका की सुनवाई के इच्छुक नहीं हैं। आपको हाईकोर्ट जाना चाहिए। आजम खान हाईकोर्ट जाकर जल्द सुनवाई की मांग कर सकते हैं।’

सिब्बल बोले-आखिर हम कहां जाएं

जवाब में सिब्बल ने कहा, ‘हम हाईकोर्ट भी गए थे। किसी न किसी वजह से सुनवाई टल गई। तीन बार जल्द सुनवाई की मांग भी की। महीनों से सुनवाई नहीं हुई है। आखिर हम कहां जाएं।’

सिब्बल ने कहा कि खान पर 87 मुकदमे दर्ज हैं। 83 मामलों में जमानत मिल चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि आजम खान ने कुछ नहीं किया है, फिर भी वह जेल में हैं। रातोंरात 25 मुकदमे दर्ज किए गए। राज्य नहीं चाहता है कि आजम खान चुनाव प्रचार करें।

अदालत में राजनीति न लाएं

इस पर जस्टिस राव ने सिब्बल से कहा,’कृपया राजनीति को अदालत में न लाएं।’ जवाब में सिब्बल ने कहा, ‘राजनीति आपके सामने हैं।’ पीठ ने कहा कि हम इस पर सुनवाई नहीं कर सकते।

याचिकाकर्ता जमानत के लिए संबंधित अदालत से संपर्क कर सकते हैं और जल्द सुनवाई करने की मांग कर सकते हैं।

फर्जीवाड़े और भूमि पर अवैध कब्जे के आरोपों में घिरे आजम खान दो साल से उत्तर प्रदेश की सीतापुर जेल में बंद हैं। आजम खान उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैैं।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव प्रचार में भाग लेने के लिए उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में रामपुर से समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार मोहम्मद आजम खान द्वारा दायर अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। जस्टिस एल नागेश्वर राव और जस्टिस बी.आर. गवई ने भारत के संविधान के अनुच्छेद 32 में दायर एक रिट याचिका में राहत देने से इनकार करते हुए याचिकाकर्ता से इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने को कहा। पीठ ने हाईकोर्ट से याचिकाकर्ता की चिंताओं पर विचार करने और मामले को तेजी से निपटाने के लिए कहा।

पीठ ने कहा, “याचिकाकर्ता संबंधित हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने और आवेदन के शीघ्र निपटान की मांग करने के लिए स्वतंत्र है। कहने की आवश्यकता नहीं कि न्यायालय याचिकाकर्ता की चिंताओं को ध्यान में रखेगा और मामले का शीघ्र निपटारा करेगा।” कई मामलों में आरोपों का सामना कर रहे रामपुर से लोकसभा सांसद खान 26.02.2020 से सीतापुर जेल में बंद हैं। उन्हें ज्यादातर मामलों में जमानत मिल चुकी है। लेकिन भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी, जालसाजी, सार्वजनिक विश्वास का आपराधिक उल्लंघन, आपराधिक साजिश, आपराधिक मानहानि, सबूतों से छेड़छाड़ और विभिन्न वर्गों के बीच शत्रुता, घृणा या दुर्भावना पैदा करने या बढ़ावा देने के आरोप वाले तीन मामले हैं, जिनमें जमानत मांगी गई है। खान ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश की भाजपा नीत सरकार ने कार्यवाही को रोकने के लिए ‘सभी उपलब्ध साधनों को अपनाया’ है। एक विशेष सांसद/विधायक अदालत ने 27.01.2022 को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी, यह देखते हुए कि उनके द्वारा प्रकाशित कुछ तथ्यों में शांति और सद्भाव को बाधित करने को जनता या समुदाय के सदस्यों को उकसाने की क्षमता है।

आजम खान ने रामपुर के लिए उम्मीदवार के रूप में सीतापुर जेल से अपना नामांकन पूरा कर लिया है, जहां उत्तर प्रदेश चुनाव के दूसरे चरण में 14.02.2021 को मतदान होगा। याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने प्रस्तुत किया कि याचिकाकर्ता के खिलाफ 87 एफआईआर दर्ज की गई हैं। याचिकाकर्ता ने कहा, “मैं इस मामले को समझ नहीं पा रहा हूं। मेरे खिलाफ 87 एफआईआर दर्ज की गई। मुझे 84 में जमानत मिल गई है।” बेंच ने पूछा, “आप जमानत के लिए आर्टिकल 32 में आवेदन कैसे दे सकते हैं? आप हाईकोर्ट जा सकते हैं।

सिब्बल ने पीठ को सूचित किया कि हाईकोर्ट इस मामले को नहीं उठा रहा है। उन्होंने कहा, “कहां जाएं हम? चुनाव चल रहा है।” पीठ ने टिप्पणी की, “राजनीति को अदालत में मत लाओ।” सिब्बल ने कहा कि उन्होंने व्यक्तिगत रूप से तीन बार इस मामले का उल्लेख किया था, लेकिन व्यर्थ। उन्होंने कहा, “तीन बार मैंने व्यक्तिगत रूप से उल्लेख किया है। न्यायाधीश कहते हैं कि मैं मामले की सुनवाई करूंगा, फिर मामला दूसरे न्यायाधीश के सामने आता है। उनका कहना है कि फाइल नहीं है और फिर वह दोपहर के भोजन के बाद नहीं बैठते हैं। यह तीन-चार महीने से चल रहा है। मैं बिना किसी कारण के जेल में हूं।”

इलाहाबाद हाईकोर्ट से मामले को शीघ्र निपटाने के लिए कहते हुए खंडपीठ ने दर्ज किया, “जमानत देने के लिए रिट याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने प्रस्तुत किया कि बहुत पहले हुई घटनाओं से संबंधित मामलों में याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है … जमानत के लिए दायर आवेदन नहीं लिया गया। रिट याचिकाकर्ताओं को स्थगित किया जा रहा है। याचिकाकर्ता संबंधित हाईकोर्ट से संपर्क करने और आवेदन के शीघ्र निपटान को कहने के लिए स्वतंत्र है। कहने की जरूरत नहीं कि अदालत याचिकाकर्ता की चिंताओं को ध्यान में रखेगी और मामले को तेजी से निपटाएगी।” [मामले का शीर्षक: मोहम्मद आजम खान बनाम यू.पी. राज्य। WP(Crl.) संख्या 39 2022 का] TAGSSUPREME COURT AZAM KHAN UP ASSEMBLY ELECTIONS UP GOVT

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