तो सुब्रह्मण्यम स्वामी भी ‘वाट्स एप यूनिवर्सिटी’ के छात्र निकले

 

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ सुब्रमण्यम स्वामी (फाइल फोटो)

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा आम बजट पेश करने के ठीक एक दिन बाद ही भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सरकार पर तंज कसने के प्रयास में अपने ‘व्हाट्सऐप ग्रुप्स’ से निकालकर पेट्रोल और डीजल के मूल्य को लेकर बेहद भ्रामक और फेक ‘तथ्य’ ट्वीट किए हैं।

मंगलवार (फरवरी 02, 2021) को सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्विटर पर एक फोटो शेयर की। इस फोटो में दूसरे पड़ोसी देशों, नेपाल और श्री लंका से पेट्रोल के दामों की तुलना करते हुए स्वामी ने लिखा है कि राम के देश भारत में पेट्रोल के दाम 93 रुपए, सीता के देश नेपाल में पेट्रोल 53 रुपए प्रति लीटर और रावण के देश श्री लंका में पेट्रोल 51 रुपए प्रति लीटर है।


हालाँकि, भाजपा नेता ने निश्चित तौर पर व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी से मिले ज्ञान के आधार पर ही यह तस्वीर ट्वीट की है। यह संदेह तब यकीन में बदल जाता है जब आप देखते हैं कि सुब्रमण्यम स्वामी लगातार ही आम बजट को लेकर नकारात्मक मार्केटिंग कर रहे हैं।

भारत में पेट्रोल और डीजल के दाम तुलनात्मक रूप से अधिक हैं यह कोई छुपी हुई बात नहीं है। मगर इसके साथ ही, और भी ऐसे अनेक पहलू हैं, जिन्हें सामने रखा जाना आवश्यक है। जैसे कि पड़ोसी देशों की कर नीति और मौजूदा वक़्त में टैक्स के प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष स्रोत का स्टेटस, जो कि कोरोना की महामारी के बीच बड़े स्तर पर प्रभावित हुए हैं।

यदि श्री लंका की बात करें तो वहाँ पर वर्तमान में पेट्रोल की कीमत ₹61 प्रति लीटर (भारतीय मुद्रा में बदलने के बाद) है। जबकि, ‘नेपाल ऑयल कॉर्पोरेशन’ के अनुसार, गत 19 जनवरी तक, नेपाल के ही एक शहर बिरगंज में पेट्रोल की कीमत नेपाली रुपए (NRs) में 108.50 थी। उस तारीख को, भारत के रक्सौल (भारत-नेपाल सीमा पर स्थित) में, यह मूल्य NRs 140.76 था। यानि, भारतीय मुद्रा के अनुसार, नेपाल में, ₹67.95 और भारत में ₹88.15 प्रति लीटर। इसके मुकाबले, दिल्‍ली में इन दिनों पेट्रोल के दाम ₹86 प्रति लीटर हैं। वहीं, डीजल के दाम भी ₹76 रुपए हैं। जबकि मुंबई जैसे शहरों में यह इससे भी अधिक है।

नेपाल में पेट्रोल मूल्य

अब इन आँकड़ों को एक ओर रखते हुए, जरा सा ध्यान भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी के सरकार विरोधी नजरिए पर देना भी जरुरी है। इस बात पर भी, कि सरकार विरोधी प्रपंचों के लिए स्वामी एक साधारण से व्हाट्सऐप संदेश को भी इतनी गंभीरता से नहीं लेते कि नेपाल और लंका के तेल के वास्तविक दामों की तुलना एक बार वर्तमान और वास्तविक मूल्य से करने के बाद ही उसे सार्वजानिक मंच पर ट्वीट करें।

नेपाल में पेट्रोल का वर्तमान मूल्य ₹67.95 प्रति लीटर है, जबकि स्वामी जिस व्हाट्सऐप सन्देश के आधार पर सत्ता विरोध का प्रपंच तैयार करना चाह रहे हैं, उसमें नेपाल में पेट्रोल का मूल्य 53 रुपए प्रति लीटर बताया गया है। वहीं, स्वामी ने श्री लंका में पेट्रोल 51 रुपए प्रति लीटर बताई है जबकि लंका में पेट्रोल का मूल्य ₹61 प्रति लीटर है। इसके अलावा, इन पड़ोसी देशों में तेल पर राज्यवार अलग-अलग टैक्स आरोपित नहीं किया जाता।

इन आँकड़ों की तुलना करने पर प्रथम दृष्ट्या तो यही साबित होता है कि सुब्रमण्यम स्वामी तथ्यों को लेकर कितने जागरूक हैं। अब यदि बात करें कि भारत अपने नागरिकों को अधिक मूल्य पर क्यों पेट्रोल बेचता है तो इसके कई कारण हैं। जिनमें से एक है भारत की आय के सीमित श्रोत, जिसका कि राजस्व ही एक बड़ा हिस्सा है। ऐसे में, केंद्र और राज्य, दोनों ही सरकारें राजस्व के लिए पेट्रोल और डीज़ल से मिलने वाले टैक्स पर काफ़ी हद तक निर्भर हैं।

इसके अलावा, कोरोना काल की ही यदि बात करें तो देशव्यापी लॉकडाउन के दौरान भारत में पेट्रोल और डीज़ल की खपत घटने के कारण इसकी माँग में भी तेज़ी से गिरावट देखी गई। और आखिरकार सरकारी राजस्व में भी तेज़ी से गिरावट आई।

यह भी स्वाभाविक है कि कोरोनाकाल में देशव्यापी बंद के कारण आर्थिक गतिविधियाँ बड़े स्तर पर प्रभावित हुईं और इसका नतीजा यह हुआ कि देश की आमदनी भी बुरी तरह प्रभावित हुई है। अब भारत सरकार के सामने दो में से कोई एक फैसला लेना आवश्यक है- पहला ये कि महँगाई को नजरअंदाज कर राजस्व जुटाने पर ध्यान दे, जिससे कि एक कल्याणकारी राज्य की स्थपना में निवेश किया जा सके। इसके लिए तेल के दाम बढ़ाया जाना ही एक विकल्प है और दूसरा ये कि तेल के दामों को न्यूनतम रखते हुए अन्य सभी प्रोजेक्ट्स, जो कि मूल रूप से राजस्व पर ही निर्भर हैं, उन्हें ठप्प कर दिया जाए।

इसके अलावा, एक वास्तविकता यह भी है कि जब कच्चे तेल का मूल्य कम हो और टैक्स (कर) अधिक हों, तब खुदरा मूल्य अधिक होना स्वाभाविक है। अब यदि यह टैक्स अधिक ना हो, तो कोई भी सरकार शायद ही अपने तमाम प्रोजेक्ट्स की बलि चढ़ाने का खतरा मोल लेना चाहेगी। क्या यह किया जा सकता है कि सिर्फ तेल की कीमतों से समझौता करने के लिए सरकार द्वारा एविएशन, सड़क, परिवहन, रेलवे, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, स्पेस मिशन, रक्षा, आयात-निर्यात और तमाम चीजों को स्थगित कर दिया जाए?

मगर भाजपा नेता सुब्रमन्यम स्वामी का उद्देश्य ना ही राजस्व का चिंतन हैं ना ही उन्हें किसी कल्याणकारी राज्य की स्थापना से ही फर्क पड़ता है। उनके लिए सर्वोपरी बस एक ही चीज है, वह है राष्ट्रविरोधी टार का प्रचुर आयात-निर्यात, ताकि इस नकारात्मक विचारधारा के खाद-पानी से कम से कम अन्य विपरीत राजनीतिक उद्देश्यों की पूर्ति की जा सके।

आखिर में तथ्य कुछ भी हों, कुछ लोगों की राय श्रीराम, सीता और रावण के देशों के तेल के दाम बताने वाले विभीषण को लेकर कुछ ठीक नहीं है –


उल्लेखनीय है कि सोमवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में 2021-22 का आम बजट पेश किया। बजट के दौरान वित्त मंत्री ने डीजल और पेट्रोल पर कृषि सेस लगाने की घोषणा की। इसके अनुसार, सरकार ने डीजल पर प्रति लीटर 4 रूपए कृषि सेस और पेट्रोल पर प्रति लीटर 2.5 रूपए कृषि सेस लगाया और यह भी स्पष्ट किया कि कि इससे लोगों की जेब पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि पेट्रोल और डीजल पर कृषि सेस को बढ़ाने के साथ ही बेसिक एक्‍साइज ड्यूटी और एडीशन एक्‍साइज ड्यूटी के रेट को कम कर दिया गया है। इसके कारण ग्राहकों पर कृषि सेस का कोई अतिरिक्‍त भार नहीं पड़ेगा।

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