रेपिस्ट से शादी की इजाजत से पीडिता को सुप्रीम कोर्ट की इंकार

Supreme Court News :  पीड़िता ने  अपने रेपिस्ट  से ही शादी करने की इच्छा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- नहीं

पूर्व पादरी के अमित  ने कहा कि हाई कोर्ट ने इस मामले में शादी के संबंध में  निर्देश दिए हैं, जो एक मौलिक अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता को बलात्कारी से शादी करने की अनुमति नहीं दी
रेप पीड़िता ने उसी पूर्व पादरी से शादी की इच्छा जताई थी जो उसका गुनहगार था
शीर्ष अदालत ने पूर्व पादरी की भी अलग से दायर याचिका को खारिज कर दिया

नई दिल्ली 02 अगस्त।सुप्रीम कोर्ट ने केरल के कोट्टियूर में रहने वाली बलात्कार पीड़िता की उस याचिका को खारिज कर दिया है कि जिसमें उन्होंने उनके साथ दुष्कर्म करने वाले पूर्व पादरी से शादी करने की इजाजत मांगी थी। यह पूर्व पादरी 20 साल की कैद की सज़ा काट रहा है।शीर्ष अदालत ने पूर्व पादरी की अलग से दायर याचिका भी खारिज कर दी। इस याचिका में उसने बलात्कार पीड़िता से शादी करने के लिए जमानत देने का आग्रह किया था। पीड़िता घटना के वक्त नाबालिग थी और उसने एक बच्चे को जन्म दिया है।

हाई कोर्ट के फैसले में दखल नहीं देंगे: सुप्रीम कोर्ट

न्यायमूर्ति विनीत सरन और न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने पूर्व पादरी से कहा, ‘हाई कोर्ट ने सोच-समझकर फैसला दिया है और हम उसके निर्णय में दखल नहीं देना चाहेंगे।’ पीठ ने पीड़िता से कहा कि वह पूर्व पादरी से शादी करने की अपनी याचिका को लेकर निचली अदालत जा सकती हैं। पूर्व पादरी के वकील अमित जॉर्ज ने कहा कि हाई कोर्ट ने इस मामले में शादी के संबंध में व्यापक निर्देश दिए हैं, जो एक मौलिक अधिकार है। पीठ ने जॉर्ज से पूछा कि पीड़िता और पूर्व पादरी की क्या उम्र है? इस पर उन्होंने कहा कि पूर्व पादरी 49 वर्ष का है जबकि पीड़िता की उम्र 25 साल है। शीर्ष अदालत ने जॉर्ज से कहा, ‘आपने स्वयं हाई कोर्ट से व्यापक निर्देश मांगे हैं और वह हस्तक्षेप नहीं करना चाहेंगे

बलात्कार के दोषी कैथोलिक पादरी की याचिका को SC ने किया खारिज, पीड़िता से शादी के लिए कोर्ट से माँगी थी अंतरिम जमानत

ऊपर,पूर्व कैथोलिक पादरी रॉबिन वडक्कमचेरी (फ़ाइल फोटो: Livelaw)

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (2 अगस्त 2021) को केरल के पूर्व कैथोलिक पादरी रॉबिन वडक्कमचेरी की याचिका पर सुनवाई करने से इनकार कर दिया। याचिका में पूर्व कैथोलिक पादरी ने उस लड़की से शादी करने के लिए अंतरिम जमानत की माँग की थी, जिसके साथ उसने दुष्कर्म किया और उसे गर्भवती कर दिया था। वहीं, पीड़िता ने भी वडक्कुमचेरी की जमानत की याचिका का समर्थन किया था, ताकि दोनों की शादी हो सके।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अदालत ने केरल के कोट्टियूर बलात्कार मामले की पीड़िता द्वारा दायर उस आवेदन पर भी विचार करने से इनकार किया है, जिसमें उसने रॉबिन वडक्कमचेरी से शादी करने की इच्छा व्यक्त की थी। बताया जा रहा है कि पीड़िता ने पादरी की याचिका का समर्थन करते हुए कहा था कि वह सामाजिक कलंक से बचने और अपने बच्चे को वैधता देने के लिए यह शादी करना चाहती है।

Livelaw के मुताबिक, कोर्ट ने कहा कि बलात्कार पीड़िता से शादी करने के लिए रॉबिन की सजा को कम करने से इनकार करने वाले हाईकोर्ट के आदेश पर रोक लगाने का कोई कारण नहीं दिखता है। जस्टिस विनीत सरन और जस्टिस दिनेश माहेश्वरी की पीठ ने अभियोजक से हाईकोर्ट के समक्ष अपनी बात रखने को कहा।

वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता किरण सूरी ने कहा कि पीड़िता बच्चे की वैधता के लिए आरोपित से शादी करना चाहती है। याचिका में पीड़िता ने कहा है कि उसका बच्चा स्कूल जाने की उम्र का है। ऐसे में उसे बच्चे के एडमिशन के लिए पिता के नाम का उल्लेख करना जरूरी है।

बताया जा रहा है कि 45 वर्षीय आरोपित रॉबिन ने पीड़िता से शादी करने की माँग वाली एक याचिका के साथ केरल हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन हाईकोर्ट ने रॉबिन की इस याचिका को ठुकरा दिया था।

गौरतलब है कि पादरी रॉबिन को फरवरी 2019 में एक अदालत ने पीड़िता से बलात्कार और उसे गर्भवती करने का दोषी पाते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। उसे वेटिकन की तरफ से पादरी के पद से भी बर्खास्त कर दिया गया था।

बता दें कि पादरी को 27 फरवरी, 2017 को कोच्चि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के पास से गिरफ्तार किया गया था, जब वह देश से बाहर जाने की तैयारी कर रहा था। यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण (पॉक्सो) अधिनियम के तहत मुकदमा चलाने के बाद पादरी को 17 फरवरी, 2019 को थालास्सेरी की एक अदालत ने 20 साल कैद की सजा सुनाई थी। सुनवाई के दौरान पीड़िता और उसकी माँ अपने बयान से मुकर गई थी। इसके बावजूद, अदालत पहले से एकत्र किए गए सबूतों के आधार पर आगे बढ़ी और अपना फैसला सुनाया।

 

ऐसे ही मामले में हो चुकी है किरकिरी

सुप्रीम कोर्ट को मार्च महीने में इसी तरह के एक मामले में कुछ वकीलों की आलोचना झेलनी पड़ी थी जब तत्कालीन चीफ जस्टिस एसए बोबडे की अगुवाई वाली एक बेंच ने बलात्कार के आरोपित से पूछ डाला कि क्या वह पीड़िता से शादी करने को तैयार है। मामला महाराष्ट्र इलेक्ट्रिक बोर्ड के एक सरकारी कर्मचारी से जुड़ा था। तब कुछ वकीलों ने यह कहकर सुप्रीम कोर्ट बेंच की आलोचना की थी कि उसने आरोपित से ही उसकी इच्छा पूछी है जो गलत है।
ध्यान रहे कि आरोपित ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट से गुहार लगाई थी तब सीजेआई की बेंच ने उससे पूछा था, ‘क्या आप उससे (पीड़िता से) शादी करने को तैयार हैं?’ कोर्ट ने कहा था कि अगर आरोपित शादी करने को तैयार होगा तो बेंच उसकी जमानत याचिका पर विचार कर सकती है। बेंच ने कहा, ‘नहीं तो आपको जेल जाना होगा और नौकरी गंवानी होगी।’ तब आरोपित के वकील ने बताया कि सरकारी कर्मचारी की शादी हो चुकी है, इसलिए वह पीड़िता से शादी नहीं कर सकता है। उसने कोर्ट को बताया कि आरोपित ने 2016 में लड़की से शादी करने को तैयार था, लेकिन तब लड़की 16 साल की थी और इस प्रस्ताव से मुकर गई थी।

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