सीतापुर के बाद ‘हनीमून-हनुमान होटल’ में भी जमानत, लेकिन रहेगा ज़ुबैर जेल में ही

‘हनीमून-हनुमान’ वाले ट्वीट में मोहम्मद जुबैर को जमानत, लेकिन जेल से नहीं आ पाएगा बाहर: UP में दर्ज मामलों में अभी राहत नहीं

मोहम्मद ज़ुबैर (तस्वीर-हिंदुस्तान)

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने ऑल्ट न्यूज के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर को आपत्तिजनक ट्वीट ‘हनुमान होटल’ के मामले में जमानत दे दी है। अदालत ने जुबैर को 50 हजार रुपए के निजी मुचलके एवं इतने ही रुपए मूल्य के जमानती के आधार पर बेल मंजूर की है। इससे पहले जुबैर को उत्तर प्रदेश के सीतापुर मामले में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत मिली थी। हालाँकि इसके बाद भी मोहम्मद ज़ुबैर की रिहाई नहीं हो पाएगी क्योंकि उस पर उत्तर प्रदेश में कई मामलों में केस दर्ज है।

बता दें कि पटियाला हाउस कोर्ट ने गुरुवार 14 जुलाई, 2022 आपत्तिजनक ट्वीट के मामले में सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था जिसके बाद अब उन्हें जमानत देने का फैसला सुनाया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने बीते माह 27 जून को मोहम्मद जुबैर को दुश्मनी को बढ़ावा देने और धार्मिक भावनाओं को आहत करने, सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक अशांति फैलाने के आरोप में गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस ने जुबैर के खिलाफ आईपीसी की धारा 153/295 में केस दर्ज किया था।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, उसे जुबैर के खिलाफ ट्विटर के जरिए एक शिकायत मिली थी, जिसमें जुबैर के एक ट्वीट का जिक्र किया गया था। पुलिस ने इस संबंध में आईपीसी की धारा 153ए और 295ए में केस दर्ज कर जुबैर को पूछताछ को बुलाया था। इसके बाद जुबैर के खिलाफ पर्याप्त सबूतों पर उसे गिरफ्तार कर लिया गया था।

गौरतलब है कि यह मामला ट्विटर हैंडल हनुमान भक्त @balajikijaiin की एक पोस्ट के आधार पर दर्ज किया गया था, जहाँ उन्होंने, “2014 से पहले: हनीमून होटल” और “2014 के बाद: हनुमान होटल” पोस्ट के संबंध में मोहम्मद जुबैर के नाम से एक अन्य ट्विटर हैंडल के खिलाफ अपना गुस्सा जाहिर करते हुए शिकायत दर्ज कराई थी।

दिल्ली पुलिस ने कहा था कि एक फोटो (ट्वीट में) दिख रहा है जहाँ होटल के साइनबोर्ड ‘हनीमून होटल’ को बदलकर ‘हनुमान होटल’ कर दिया गया है। हनुमान भक्त @balajikijaiin ने ट्वीट किया, “हमारे भगवान हनुमान जी को हनीमून से जोड़ना हिंदुओं का सीधा अपमान है क्योंकि वह ब्रह्मचारी हैं। कृपया इस आदमी के खिलाफ कार्रवाई करें।”

पुलिस ने बताया कि एक विशेष धार्मिक समुदाय के खिलाफ तस्वीर और भड़काऊ बयान वाली मोहम्मद जुबैर की उक्त पोस्ट जानबूझकर की गई है, जो लोगों के बीच नफरत भड़काने को पर्याप्त है, जो सार्वजनिक शांति बनाए रखने को हानिकारक हो सकती है। पुलिस अधिकारी ने बताया कि उक्त पोस्ट के आधार पर उपरोक्त मामला दर्ज किया गया था। इसके अलावा भी मोहम्मद ज़ुबैर हिन्दुओं की धार्मिक भावना भड़काने के कई मामलों में लिप्त रहा है।

इससे पहले सात जुलाई को उच्चतम न्यायालय ने धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में ‘ऑल्ट न्यूज’ के सह-संस्थापक मोहम्मद जुबैर के खिलाफ उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले में दर्ज प्राथमिकी के संबंध में उन्हें पांच दिन के लिए अंतरिम जमानत दी, लेकिन वह एक अन्य मामले में दिल्ली की एक अदालत के आदेशानुसार हिरासत में रहने का आदेश हुआ था।

शीर्ष अदालत ने जुबैर से मामले को लेकर कुछ भी ट्वीट नहीं करने और किसी सबूत, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या सामग्रियों से छेड़छाड़ नहीं करने को कहा।

न्यायालय ने स्पष्ट किया कि अंतरिम जमानत से जुड़ा आदेश सीतापुर में दर्ज प्राथमिकी के संबंध में है और इसका दिल्ली में जुबैर के खिलाफ दायर एक अन्य मामले से कोई लेना-देना नहीं है। जुबैर इस समय दिल्ली में न्यायिक हिरासत में हैं।

जुबैर के वकील कॉलिन गोंजाल्वेस ने पत्रकार की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कहा कि यह विडम्बना है कि जो घृणा फैलाने वाले भाषण देते हैं, वे जमानत पर हैं, जबकि उनके ऐसे भाषणों का खुलासा करने वाला याचिकाकर्ता हिरासत में है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह देश क्या बन गया है?’’ गोंजाल्वेस ने कहा कि घृणा फैलाने वाली इस प्रकार की सामग्रियों और फर्जी खबरों का खुलासा करना जुबैर का काम है।

न्यायमूर्ति इंदिरा बनर्जी और न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी की अवकाशकालीन पीठ ने जुबैर की याचिका पर उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया और मामले को 12 जुलाई को आगे की सुनवाई के लिए नियमित पीठ के समक्ष सूचीबद्ध कर दिया।

पीठ ने स्पष्ट किया कि उसने सीतापुर में दर्ज मामले में जांच पर रोक नहीं लगाई है और जरूरत पड़ने पर पुलिस लैपटॉप एवं अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त कर सकती है।

उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जुबैर एक अन्य मामले में दिल्ली में न्यायिक हिरासत में है। शीर्ष अदालत ने इस दलील पर गौर करते हुए कहा कि इस चरण पर उसका उत्तर प्रदेश में दर्ज मामले के अलावा किसी अन्य प्राथमिकी से कोई लेना-देना नहीं है और उत्तर प्रदेश के मामले में उसके समक्ष सुनवाई हो रही है।

हिंदू शेर सेना की सीतापुर जिला इकाई के अध्यक्ष भगवान शरण द्वारा जुबैर के खिलाफ उत्तर प्रदेश में की गई शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 295 ए (धार्मिक भावनाओं को आहत करने के इरादे से जानबूझकर और दुर्भावनापूर्ण कार्य करना) और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 67 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

जुबैर को एक ट्वीट के जरिये कथित तौर पर धार्मिक भावनाएं आहत करने के आरोप में 27 जून को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था।

मामले की सुनवाई की शुरुआत में मेहता ने जुबैर को अग्रिम जमानत देने से इनकार करने के इलाहाबाद उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर प्रारंभिक आपत्ति जताई और कहा कि जुबैर ने तथ्यों को जानबूझकर छिपाया कि सीतापुर अदालत ने बृहस्पतिवार को उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी और वह अदालत के मौखिक आदेश के तहत पुलिस हिरासत में हैं।

मेहता ने कहा कि जुबैर दिल्ली की अदालत के आदेशानुसार न्यायिक हिरासत में रहेंगे।

उत्तर प्रदेश मामले में जांच अधिकारी की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस. वी. राजू ने कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 295 (ए) और धारा 152 ए (समूहों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देना) के तहत प्रथम दृष्ट्या मामला बनता है।

उन्होंने कहा कि जुबैर द्वारा सार्वजनिक रूप से संतों को ‘‘घृणा फैलाने वाले’’ कहने से एक विशेष समुदाय की धार्मिक भावनाएं उद्वेलित हो सकती हैं और हिंसा भड़क सकती हैं, क्योंकि उन्होंने जिस व्यक्ति के खिलाफ ट्वीट किया है, वह ‘‘सम्मानित’’ हैं और उसके बड़ी संख्या में उनके अनुयायी हैं।

गोंजाल्वेस ने कहा कि उनके मुवक्किल ने ट्वीट करने की बात स्वीकार की है, लेकिन इन ट्वीट से कोई अपराध नहीं हुआ है और उन्होंने घृणा पैदा करने वाले भाषण देने के अपराधों का केवल जिक्र किया था और पुलिस ने बाद में अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई की।

मेहता ने कहा कि यह एक या दो ट्वीट की बात नहीं है, बल्कि सवाल यह है कि वह एक ऐसे ‘सिंडिकेट’ का हिस्सा हैं, जिसने देश को अस्थिर करने के इरादे से नियमित रूप से इस प्रकार के ट्वीट किए हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘हम अधिक खुलासा नहीं कर सकते, क्योंकि जांच लंबित है, लेकिन इस मामले में धन की संलिप्तता का सवाल है। उन्हें उन देशों ने धन अनुदान में दिया है, जो भारत के विरोधी हैं।’’

गोंजाल्वेस ने कहा कि उनके मुवक्किल के जीवन को खतरा है और उनकी रक्षा की जानी चाहिए, क्योंकि यह उनके जीवन के अधिकार का प्रश्न है।

पीठ ने निर्देश दिया कि उत्तर प्रदेश सरकार का अंग्रेजी में अनुवाद किया गया आदेश सुनवाई की अगली तारीख से पहले अन्य दस्तावेजों के साथ दाखिल किया जाए।

मोहम्‍मद जुबैर किसी बड़े षडयंत्र का हिस्‍सा तो नहीं, जांच जरूरी है… सुप्रीम कोर्ट में बोली यूपी सरकार

 

यूपी सरकार की तरफ से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि मोहम्‍मद जुबैर किसी बड़े षडयंत्र का हिस्‍सा है या नहीं, इसकी ‍पुख्ता जांच की जरूरत है।

हाइलाइट्स
1-सीतापुर में दर्ज मुकदमे में मोहम्‍मद जुबैर को पांच दिन की अंतरिम जमानत
2-जुबैर के वकील ने कहा, ट्वीट उसके हैं मान लिए, फिर आगे की जांच क्‍यों?
3-सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जुबैर को लेकर सघन जांच की मांग रखी
4-दिल्‍ली में दर्ज FIR में जुडिशल कस्‍टडी मिली है, रिहा नहीं हो पाएंगे जुबैर
क़्ट्स्प्स
SC on Mohammed Zubair:सुप्रीम कोर्ट से राहत तो मिल गई फिर भी जेल में क्यों रहेगा ‍मोहम्मद जुबैर

सुप्रीम कोर्ट ने ऑल्‍ट न्‍यूज के मोहम्मद जुबैर को 5 दिन की अंतरिम जमानत दे दी। जुबैर के खिलाफ सीतापुर में दर्ज FIR खारिज करने की याचिका पर अब 12 जुलाई को सुनवाई होगी। शुक्रवार को अदालत में उत्‍तर प्रदेश सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता पेश हुए। उन्‍होंने कहा कि जुबैर के खिलाफ दर्ज मुकदमों में विस्‍तृत जांच की जरूरत है। मेहता ने कहा कि ‘केवल ट्वीट्स किए, यह मान लेना ही जांच का अंत नहीं है। उसने (जुबैर) सालों तक एक खास हिस्‍से की धार्मिक भावनाएं भड़काने की नीयत से ट्वीट्स किए हैं। क्‍या वह किसी बड़े षडयंत्र का हिस्‍सा है या उसके पीछे भारत विरोधी ताकतें हैं, इसकी सघन जांच होनी चाहिए। इसके लिए पुलिस को फोन्‍स और अन्‍य डिवाइसेज चाहिए होंगे जिनसे वह अपना एजेंडा चलाता था।’ एसजी ने यह भी साफ किया कि दिल्‍ली में दर्ज FIR में जुबैर पहले से जुडिशल कस्‍टडी में है। ऐसे में सीतापुर केस में बेल के बावजूद वह रिहा नहीं हो पाएगा।

…तो जुबैर भी हेटमॉन्‍गर?

अदालत में जुबैर के वकील कॉलिन गोंजाल्‍वेस ने कहा कि उनके मुवक्किल ने अपने ट्वीट्स में तीन हिंदू नेताओं जिन्‍हें हेट स्‍पीच के लिए गिरफ्तार किया जा चुका है, ‘हेटमॉन्‍गर्स’ कहा था। जुबैर की तरफ से दलील दी गई, ‘अगर कोई अपनी फोरेंसिक स्किल्‍स का प्रयोग करके सोशल मीडिया पर हेटमॉन्‍गर्स को बेनकाब करता है और उसे ही अरेस्‍ट कर लिया जाए वह भी तब जब असली हेटमॉन्‍गर्स जमानत पर हों तो इस देश में सच और सेक्‍युलरिज्‍म चाहने वालों के लिए कुछ नहीं बचेगा।’
जुबैर के वकील तीन धमगुरुओं को FIR के आधार पर ‘हेटमॉन्‍गर’ करार दे रहे थे जबकि अभी तक उन्‍हें दोषी नहीं ठहराया गया है। सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि इस लॉजिक से तो जुबैर भी ‘हेटमॉन्‍गर’ कहे जा सकते हैं क्‍योंकि उनके खिलाफ भी FIRs दर्ज हुई हैं।

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‘जुबैर ने कोर्ट से तथ्‍य छिपाए’

एसजी ने कहा कि 10 जून को जुबैर की अग्रिम जमानत याचिका खारिज हुई। उसने 15 जून को सुप्रीम कोर्ट में अपील की और तत्‍काल सुनवाई की मांग की। उसे तीन हफ्ते बाद समझ आया कि उसे धमकियां मिल रही हैं। मेहता ने कहा कि जुबैर ने यह तथ्‍य भी छिपाया कि सीतापुर की अदालत ने उसकी जमानत याचिका खारिज करते हुए पुलिस को कस्‍टडी दी थी।

जुबैर को सीतापुर वाले केस में शर्तों के साथ सुप्रीम कोर्ट ने जमानत दी है। वह केस से जुड़ा कोई ट्वीट पोस्ट नहीं करेंगे। कहीं और किसी भी सबूत, इलेक्ट्रॉनिक या अन्यथा के साथ छेड़छाड़ नहीं करेंगे।

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