सावधान! कश्मीर को ले बढ़ रहा अफवाहों का बाजार, शेयर करने से पहले फैक्ट चेक जरूरी

आर्टिकल 370 हटने के बाद कश्मीर को लेकर तमाम तरह की फर्जी खबरें आ रही हैं। फेसबुक, ट्विटर समेत हर प्लैफटफॉर्म पर भारत और पाकिस्तान, दोनों तरफ के लोग अफवाहें फैलाने में जुटे हैं। ऐसे में फैक्ट चेक का काम बढ़ गया है।

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नई दिल्ली : कश्मीर को लेकर सोशल मीडिया पर अफवाहों का बाजार गर्म है। घाटी में शुक्रवार को सुरक्षा पाबंदियों में थोड़ी ढील मिलने के बीच जुमे का नमाज पढ़ा गया। उसके बाद तो झूठी खबरों की बाढ़ सी आ गई। वीकेंड में ट्विटर पर #Kashmirwantsfreedom #Savekashmirfrommodi #Kashmirbanegapakistan, #UnsubscribeIndiansyoutubers और #BBCNews ट्रेंड कर रहे थे।शनिवार को गृह मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्वीट कर न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की एक खबर को बिल्कुल ‘मनगढ़ंत’ और ‘गलत’ बताया। रॉयटर्स ने खबर दी थी कि श्रीनगर में 10 हजार लोगों ने प्रदर्शन किया। गृह मंत्रालय ने बताया कि श्रीनगर/बारामूला में छोटे-छोटे प्रदर्शन हुए, जिनमें 20 से ज्यादा लोग नहीं थे।
फेक्ट चेक करने वाली वेबसाइट अल्ट न्यूज के फाउंडर प्रतीक सिन्हा कहते हैं, ‘यह बहुत समझ-बूझकर किया जाता है। फेसबुक और ट्विटर समते तमाम प्लैटफॉर्म से गलत सूचनाएं दी जा रही हैं और दोनों तरफ से अफवाहें फैलाई जा रही हैं। एक तरफ पाकिस्तानी यूजर्स पुराने विडियो डालकर उसे कश्मीर का ताजा हालात के रूप में पेश कर रहे हैं तो दूसरी तरफ भारत के लोग पुराने विडियो दिखाकर यह बताने की कोशिश कर रहे हैं कि भारत में मुसलमान आर्टिकल 370 हटाने का विरोध कर रहे हैं। कुछ विडियो में यह भी दिखाया जा रहा है कि आर्टिकल 370 हटने पर भारतीय मुसलमान खुश हैं। 370 हटने के बाद से हम फैक्ट चेक के कई आर्टिकल पब्लिश कर रहे हैं।’
फेसबुक के साथ फैक्ट चेक स्टोरीज करने वाली संस्था बूम के एमडी जेंसी जैकब ने कहा कि सोशल मीडिया यूजर्स फर्जी खबरों को बिना जांचे-परखे शेयर कर रहे हैं और भावनाएं चरम पर हैं। फेसबुक ने कहा कि वह कश्मीर को लेकर जारी बहस पर उसकी कड़ी नजर है और उसके कम्यूनिटी स्टैंडर्ड्स का उल्लंघन करने वाली हर सामग्री को हटाया जा रहा है। फेसबुक के प्रवक्ता ने कहा, ‘हमारे आठ अलग-अलग फैक्ट चेक पार्टनर हैं जो भारत में 10 भाषाओं में तथ्यों की जांच कर रहे हैं ताकि गलत जानकारियों की पहचान कर उन्हें हटाया जा सके।’
वहीं, ट्विटर ने बताया कि वह नियमों का उल्लंघन करने वाले हर कॉन्टेंट पर तुरंत ऐक्शन ले रहा है। उसके एक प्रवक्ता ने कहा, ‘ट्विटर अपने प्लैटफॉर्म पर किसी तरह का खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं देता है और कड़े नियम लागू करता है। यहां सभी यूजर्स की निष्पक्ष निगरानी करते हैं, चाहे उनकी राजनीतिक विचारधारा कुछ भी हो। इनमें आतंकवाद, घृणा फैलाने वाली गतिविधियां, गाली-गलौच और फर्जी सूचनाएं आदि शामिल हैं।’ हालांकि, इंस्टाग्राम और यूट्यूब ने खबर प्रकाशित होने तक हमारे सवालों पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।

कश्मीर को लेकर फर्जी खबरों की बाढ़। (सांकेतिक तस्वीर)कश्मीर को लेकर फर्जी खबरों की बाढ़। (सांकेतिक तस्वीर)

पटना का पुराना वीडियो कश्मीर के लोगों पर पुलिस द्वारा लाठी चार्ज बताकर शेयर

एक वीडियो, जिसमें पुलिस को लोगों की भीड़ पर लाठी चार्ज करते हुए देखा जा सकता है, सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से शेयर किया जा रहा है। इस वीडियो में कुछ लोगों को टोपी पहने हुए भी देखा जा सकता है। वीडियो के साथ साझा किया जा रहा संदेश है, “कश्मीर मे प्रसाद बांटना शुरू” जिससे यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि कश्मीर के लोगों को पुलिस बेरहमी से पीट रही है। पूरन थालौर कोलिया के पोस्ट को इस लेख के लिखे जाने तक 5700 से ज़्यादा बार देखा जा चूका है।

पुरानी तस्वीरें केंद्र सरकार द्वारा कश्मीर के मस्जिदों पर नियंत्रण के झूठे दावे से साझा

“केंद्र सरकार ने कश्मीर में सभी मस्जिदों को कब्ज़े में ले लिया है और आगे खुद देखें कि मस्जिद को कब्ज़े में क्यों लिया गया है”-(अनुवाद)।

कुछ तस्वीरों के साथ उपरोक्त दावा सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है। दावे के मुताबिक, कश्मीर की एक मस्जिद में से हथियारों के बड़े जत्थे को बरामद किया गया है।

कुछ व्यक्तिगत उपयोगकर्ताओं द्वारा फेसबुक पर भी इसे साझा किया गया है।

समान कथन के साथ यह तस्वीरें व्हाट्सअप पर भी वायरल है।

झूठा दावा, असंबधित तस्वीरें

यह दावा कि केंद्र सरकार ने कश्मीर की सभी मस्जिदों को अपने नियंत्रण में ले लिया है, सरासर गलत है। ऐसा कुछ भी नहीं हुआ है। इस दावे के साथ साझा की गई तस्वीरों के बारे में ऑल्ट न्यूज़ ने पाया कि ये तस्वीरें पुरानी और अन्य घटनाओं से संबधित है, ये तस्वीरें कश्मीर की नहीं है।

पहली तस्वीर

ऑल्ट न्यूज़ ने गूगल पर उपरोक्त तस्वीर को रिवर्स सर्च किया और इसे Tumblr पर मार्च 2019 को की गई एक पोस्ट में पाया।

दूसरी तस्वीर

ऑल्ट न्यूज़ ने इस तस्वीर को भी रिवर्स सर्च किया और इसे शामली पुलिस द्वारा किये गए ट्वीट में पाया। ट्वीट के मुताबिक, यह एक मदरसे में की गई छापेमारी की तस्वीर है, जिसमें एक मदरसे में से नाजायज़ दस्तावेज, देशी-विदेशी मुद्रा समेत कई मोबाईल फोन बरामद किये गए और गिरफ्तारी भी की गई थी। यह घटना जुलाई 2019 की है।

Shamli Police

@shamlipolice

शामली पुलिस ने 04 विदेशियों व तीन विभिन्न मदरसों से संबंधित 03 नफर मोहतमिम/मदरसा संचालक समेंत 07 संदिग्ध किये गिरफ्तार,नाजायज दस्तावेज,देशी-विदेशी मुद्रा समेत कई मोबाईल फोन बरामद। @Uppolice @policenewsup @adgzonemeerut @digsaharanpur

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तीसरी तस्वीर

उपरोक्त तस्वीर मार्च 2016 में अहमदाबाद राजकोट हाईवे पर एक होटल में की गई एक छापेमारी की तस्वीर है, जिसमें अवैध हथियार रैकेट चलाया जा रहा था।

चौथी तस्वीर

ऑल्ट न्यूज़ ने उपरोक्त तस्वीर को गूगल पर रिवर्स सर्च किया और हमें इंडिया टुडे द्वारा प्रकाशित एक लेख मिला। लेख के मुताबिक, यह तस्वीर पंजाब के पटियाला में स्थित ‘किरपान’ कारखाने की है। ऑल्ट न्यूज़ ने ‘खालसा किरपान’ कारखाने से संपर्क किया और पुष्टि की कि यह तस्वीर वास्तव में पटियाला के किरपान कारखाने की है।

अंत में सोशल मीडिया में किया गया दावा कि केंद्र सरकार ने कश्मीर की सभी मस्जिदों को अपने नियत्रण में ले लिया है, गलत है। इसके अलावा, साझा की गई तस्वीरें पुरानी और असंबधित है। पहले भी इन तस्वीरों को, एक अन्य झूठे दावे के साथ साझा किया गया था कि इन हथियारों को गुजरात के राजकोट शहर की एक मस्जिद से बरामद किया गया था।

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