नई दिल्ली ! अयोध्या रामजन्म भूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट रोजाना सुनवाई कर रहा है। आज, मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में इस मसले पर पांचवें दिन सुनवाई हो रही है। बुधवार से सुप्रीम कोर्ट इस केस की लगातार सुनवाई कर रहा है। शुक्रवार को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था, क्या भगवान राम का कोई वंशज दुनिया में कहीं भी या अयोध्या में मौजूद है? इसके बाद प्रभु राम का वंशज होने के कई दावे सामने आ चुके हैं। राजसमंद से भाजपा सांसद और जयपुर राजघराने की सदस्य दीया कुमारी (Diya Kumari) का नाम भी इन दावेदारों में शामिल है। आपको जानकर हैरत होगी कि हिंदू ही नहीं मुस्लिम भी प्रभु राम के वंशजों में शामिल हैं। ये कोई दावा नहीं, बल्कि भारतीय वैज्ञानिकों द्वारा किया गया एक डीएनए शोध है।

विभिन्न मीडिया रिपोर्ट में राम के वंशजों की ढेरों कहानियां मौजूद हैं। सुप्रीम कोर्ट में ये मुद्दा उठने के बाद एक बार फिर से खुद को प्रभु राम का वंशज बताने वाले दावेदारों की कहानियां सामने आने लगी हैं। जयपुर राजघराने की भाजपा सांसद दीया कुमारी ने अपने पोथीखाने में उपलब्ध हस्तलिपि, वंशावली व दस्तावेजों के आधार पर वंशज होने के सुबूत पेश किए हैं। दीया कुमारी ने रविवार को ट्वीट कर दावा किया कि जयपुर राजपरिवार की गद्दी भगवान राम के पुत्र कुश के वंशजों की राजधानी है। इतना ही नहीं उन्होंने ये भी कहा कि दुनियाभर में प्रभु राम के वंशज मौजूद हैं। इसमें उनका परिवार भी शामिल है, जो श्रीराम के पुत्र कुश के वंशज हैं।

कुश का 309वां वंशज बताया है जयपुर राजघराना
दरअसल जयपुर राजघराने की महारानी पद्मिनी और उनके परिवार को राम के पुत्र कुश का वंशज माना जाता है। महारानी पद्मिनी ने एक अंग्रेजी चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा था कि उनके पति भवानी सिंह, कुश के 309वें वंशज थे। 21 अगस्त 1921 को जन्में महाराजा मानसिंह ने तीन शादियां की थीं। उनकी पहली पत्नी मरुधर कंवर, दूसरी पत्नी किशोर कंवर और तीसरी पत्नी गायत्री देवी थीं। भवानी सिंह पहली पत्नी के पुत्र थे। भवानी सिंह और पद्मिनी का कोई बेटा नहीं है। इनकी एक बेटी है, जिनका नाम दिया है, जिन्होंने रविवार को ट्वीट कर प्रभु राम के वंशज होने का दावा किया है। उनके पति का नाम नरेंद्र सिंह है।

लखनऊ के वैज्ञानिकों ने किया था शोध
दीया कुमारी का ये बयान कि श्रीराम के वंशज दुनिया भर में मौजूद हैं, डीएनए शोध करने वाले भारतीय वैज्ञानिकों के दावों से काफी मेल खाता है। एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार ऐसे कई राजा-महाराजा हैं, जिनके पूर्वज श्रीराम थे। इनमें राजस्थान के कुछ मुस्लिम समूह भी हैं, जो कुशवाहा वंश से ताल्लुक रखते हैं। मुगलकाल में इन्हें धर्म परिवर्तन करना पड़ा, लेकिन ये लोग आज भी खुद को प्रभु श्रीराम का वंशज ही मानते हैं। मेवात में दहंगल गोत्र के लोग भी भगवान राम के वंशज हैं। इन्हें छिरकोल गोत्र का मुस्लिम यदुवंशी माना जाता है।

राजस्थान के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली समेत कई राज्यों में ऐसे कई मुस्लिम इलाके या समूह हैं जो राम के वंश से संबंथ रखते हैं। डीएनए शोधानुसार उत्तर प्रदेश के 65 प्रतिशत मुस्लिम, ब्राह्मण बाकी राजपूत, कायस्थ, खत्री, वैश्य और दलित वंश से ताल्लुक रखते हैं। एसजीपीजीआई, लखनऊ के वैज्ञानिकों ने फ्लोरिडा और स्पेन के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर किए गए अनुवांशिकी शोध के आधार पर ये निष्कर्ष निकाला था।

भारत ही नहीं पाकिस्तान में भी है राम राज्य
तमाम कहानियों-कथाओं और ग्रंथों के अनुसार प्रभु श्रीराम का राज्य पूरे अखंड भारत में था, जिसमें उस वक्त भारत का हिस्सा रहा पाकिस्तान भी शामिल है। माना जाता है कि पाकिस्तान के लाहौर का ऐतिहासिक नाम लवपुरी था, जिसकी स्थापना प्रभु राम के पुत्र लव ने की थी। ये नगरी उनकी राजधानी हुआ करती थी। बाद में इसका नाम लौहपुरी हुआ और फिर इसे लाहौर कहा जाने लगा। दावा किया जाता है कि लौहार के एक किले में लव का मंदिर भी है। प्रभु राम ने कुश को दक्षिण कौशल, कुशस्थली (कुशावती) और अयोध्या सौंपा था, जबकि लव को पंजाब दिया था। कुश की राजधानी कुशावती थी, जो आज छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में स्थित है। माना जाता है कि लव से राघव और सिसोदिया राजपूतों का जन्म हुआ। राघव राजपूतों में बड़गुजर, जयास, सिकरवार का वंश चला और सिसोदिया राजपूतों से बैछला (बैसला) और गैहलोत (गुहिल) का वंश आगे बढ़ा। इसी तरह कुश से कुशवाहा राजपूतों का वंश चला।

राजस्थान विश्वविद्यालय में हुआ शोध
जयपुर राजघराने की दिया कुमारी ने अपने बयान के समर्थन में एक प्राचीन नक्शा भी पेश किया है। इस नक्शे पर राजस्थान विश्विविद्यालय के प्रोफेसर व वरिष्ठ इतिहासकार आर नाथ ने विस्तृत शोध और जांच की है। शोध के बाद वह इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि जयपुर राजघराने के महाराज जय सिंह ने राजस्थान में जयसिंहपुरा बसाया था। उन्होंने जहां-जहां मुगलों ने आतंक मचाया था, उन सभी जगहों को खरीद लिया था। उसी दौर में उन्होंने अयोध्या को भी महज 5 रुपये में खरीदा था। उस वक्त अयोध्या पर औरंगजेब का कब्जा था। 1725 में महाराजा जय सिंह ने राम मंदिर का दोबारा निर्माण कराया था।

शोध में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि राम मंदिर वहां पहले से बना हुआ था। मस्जिद का उस जगह से कोई लेना-देना नहीं था। मस्जिद को मुगलों द्वारा मंदिर का बदला हुआ स्वरूप बताया गया था। शोध में जयपुर राजघराने के पास उनके स्वामित्व और रामजन्म स्थान से जुड़े अयोध्या के पट्टे, परवान, चक-नमस, चिट्ठियों और अन्य दस्तावेजों को भी शामिल किया गया है। इसी शोध के आधार पर प्रोफेसर आर नाथ ने हाईकोर्ट में दावा किया था कि अयोध्या की जमीन जयपुर राजघराने की है। इस संबंध में उन्होंने भाजपा के वरिष्ठ मंत्री अरुण जेटली को भी पत्र लिखा था।

जयपुर घराने के पास मौजूद वंशावली
जयपुर घराने के पास मौजूद वंशावली के रिकॉर्ड में विष्णु, ब्रम्हा की उत्पत्ति से लेकर राजा दशरथ, प्रभु श्रीराम, उनके पुत्र कुश, महाराजा जय सिंह और फिर भवानी सिंह से लेकर उनके पुत्र पद्मनाभ तक का पूरा चरणबद्ध रिकॉर्ड मौजूद है। इसमें वंशावली में शुरुआत से अभी तक प्रभु राम के बाद और पहले के वंशजों का पूरा जिक्र है। जयपुर राजघराना कच्छवाहा वंश का शासक है, जिसकी उत्पत्ति श्रीराम के बड़े बेटे कुश से मानी जाती है।

कांग्रेसी नेता ने भी किया है दावा
भाजपा सांसद दिया कुमारी के बाद जयपुर के बढ़ गुर्जर राजपूत सत्येंद्र सिंह राघव ने भी खुद के भगवान राम का वंशज होने का दावा पेश किया है। वह कांग्रेस के प्रवक्ता हैं और पेशे से वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। उन्होंने भी रविवार को ही अपने परिवार को प्रभु राम के पुत्र लव का वंशज होने का दावा किया है। उन्होंने दावा किया कि आज का अयोध्या लव के राज क्षेत्र में आता था। उन्होंने श्रीमद् वाल्मीकि रामायण का जिक्र करते हुए दावा किया था कि लव का राज्य उत्तर कौशल था, जो आज अयोध्या है।

दावों पर विवाद
राम के वंशज के तौर पर राजस्थान के दो राजघरानों के सामने आने से इस पर विवाद भी शुरू हो गया है। कांग्रेस नेता सत्येंद्र सिंह राघव का कहना है कि भगवान राम के दूसरे पुत्र कुश थे, जयपुर राजघराना जिनका वंशज होने का दावा करता है। कुश को दक्षिण कौशल राज्य मिला था, जो आज छत्तीसगढ़ है।

मेवाड़ के राजपरिवार ने भी किया दावा
मेवाड़ के राजपरिवार ने भी खुद के श्रीराम का वंशज होने का दावा किया है। मेवाड़ के पूर्व महाराज महेंद्र सिंह मेवाड़ ने दावा किया कि उनका राजघराना राम के पुत्र लव का वंशज है। मेवाड़ में उनकी 76 पीढ़ियों का इतिहास दर्ज है। मेवाड़ राजघराने के ही लक्ष्यराज ने बताया कि कर्नल जेम्स टार्ड की पुस्तक में बताया गया है कि लव के वंशज कालांतर में गुजरात होते हुए मेवाड़ आए थे। उन्होंने यहां सिसोदिया साम्राज्य की स्थापना की थी। उनका दावा है कि श्रीराम भगवान शिव के उपासक थे। मेवाड़ राजपरिवार भी शिवजी का उपासक है। उनके परिवार का राज प्रतीक सूर्य है। ये समानताएं उन्हें प्रभु राम का वंशज बनाती हैं। कुछ अन्य जगहों पर भी मेवाड़ राजपरिवार के राम का वंशज होने का जिक्र मिलता है।

करणी सेना ने भी ठोंका दावा
राजस्थान के दो राजघरानों और मेवाड़ राजघराने के अलावा श्रीराजपूत करणी सेना ने भी भगवार राम का वंशज होने का दावा किया है। संस्था के एक गुट ने दावा किया है कि वह भगवार राम के पुत्र लव के वंशज हैं। करणी सेना के संयोजक लोकेंद्र सिंह कालवी ने मीडिया से बातचीत में दावा किया था कि वह सिसोदिया राजपूत हैं, जो लव के वंशज माने जाते हैं। उन्होंने जयपुर राजघराने की दिया कुमारी के उस बयान का समर्थन किया है, जिसमें उन्होंने खुद को कुश का वंशज बताया है। लोकेंद्र सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में चल रहे श्रीराम जन्म भूमि केस में हिस्सा बनने की भी इच्छा जाहिर की है।

थाईलैंड के राजा कहलाते थे भगवान राम के वंशज !राम के वंशज

आज तक हम सभी को लगता था कि हमारे भगवान राम के वंशज केवल भारत और नेपाल तक सीमित हैं लेकिन हाल ही में थाईलैंड के राजा कि मृत्यु पर ये बात सामने आई है कि वह भी प्रभु राम के वंशज थे.थाईलैंड के राजा के अंतिम संस्कार को तो वैसे काफी समय हो चुका है लेकिन हाल ही में यह खुलासा सामने आया है कि वह भारत के महान राजा और भगवान श्री राम के वंशज थे.तो आईए जानते हैं आखिर कैसे थाईलैंड के राजा का इतिहास भारत से जुडा है.

राम के वंशज

हमेशा से ही राजाओं का ठाट-बाट सुर्खियों में रहा है और इस बार थाईलैंड के राजा किंगपूमीपोनअदून्‍यदेत के अंतिम संस्‍कार की खबरें चर्चा में बनी हुई हैं. इस किंग की मौत अक्‍टूबर 2016 में हो गई थी लेकिन उनका शाही अंतिम संस्‍कार अब जाकर बैंकॉक में हुआ है.

मृत्‍यु के बाद पिछले एक साल से किंग के शाही अंतिम संस्‍कार की तैयारियां चल रहीं थीं.थाईलैंड के लोग इन्‍हें पिता मानते थे और वे बड़े दयालु स्‍वभाव के थे. इसी वजह से उनकी मृत्‍यु पर पूरे थाईलैंड में शोक था. कहा जा रहा है कि अंतिम संस्‍कार के लिए 6 अरब रुपए खर्च किए गए थे. जो कि आज तक किसी भी राजा के अंतिम संस्कार में सबसे अधिक में आता है.

राम के वंशज

भारत की बात करें तो भगवान राम के वंशज कहे जाने वाले भूमिगोल के देहांत के एक साल बाद उनका राष्‍ट्रीय शोक घोषित किया गया था.इस शोक के बाद बौद्ध परंपरा के अनुसार भूमिगोल को आखिरी विदाई दी गई थी. उनकी अंतिम सवारी सोने के रथ पर निकली थी और उनके सम्‍मान में 500 प्रतिमाओं का निर्माण किया गया था. किंग पूमीपोन थाईलैंड के एक प्रिय राजा था जिनका सभी देशवासी बेहद सम्मान करते थे.

पूमीपोन संवैधानिक रूप से बनाए गए राजा थे और उनकी शक्‍तियां भी सीमित थीं. थाईलैंड में उन्‍हें भगवान का दर्जा दिया गया था. उनका जन्‍म 5 दिसंबर, 1927 को मैसाचुसेट्स में हुआ था और उनके पिता माहिडोल अदुन्‍यदेत भी एक राजा थे.जब वो 2 साल के थे तभी उनके पिता का देहांत हो गया. इसके बाद उनकी मां उन्‍हें स्विट्जरलैंड ले गई और वहीं पर पूमीपोन की पढ़ाई पूरी हुई.

राम के वंशज

उनके जन्‍म के समय उनके पिता हावर्ड में पढ़ाई कर रहे थे और इसके बाद उनका पूरा परिवार थाईलैंड में आकर बस गया.पूमीपोन से पहले उनके बड़े भाई ने राजगद्दी संभाली थी लेकिन एक दुर्घटना में उनके देहांत के कारण 18 साल की उम्र में पूमीपोन को गद्दी पर बैठना पड़ा था. दुनिया के इस महान राजा को संगीत और फोटोग्राफी का बहुत शौक था.वोसैक्‍सोफोन बजाते थे और गीत भी लिखा करते थे.

किंग भुमिभोल की मृत्यु के बाद अब उनके सबसे बड़े बेटे महा वजीरालॉकोर्न हैं जिन्होंने उनकी जगह सन 2016 से अब तक बखूबी निभायी है. राजा महा वजीरालॉकोर्न को भी थाईलैंड के लोगों से उतना ही प्यार और सम्मान मिला है जितना कि उनके पिता को मिला था.

हाँ लेकिन शायद आने वाले समय में भी थाईलैंड अपने किसी राजा को पिता का दर्जा नहीं दे पाएंगे.