100 करोड़ से ज्यादा समेट विदेश भागते एयरपोर्ट पर पकडा गया मोन्टी चड्डा

मोन्टी की रियल एस्टेट कंपनी हाईटेक डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड पर फ्लैट खरीदारों से धोखाधड़ी करने का आरोप है

Killed Liquor Baron Ponty Chadha's Son Arrested At Delhi Airport
  • उसे आज अदालत में पेश किया जाएगा

नई दिल्ली. दिल्ली पुलिस की इकॉनोमिक ऑफेंस विंग (EOW) ने शराब कारोबारी रहें पोन्‍टी चड्डा के बेटे मनप्रीत उर्फ मोन्टी चड्डा को गिरफ्तार कर लिया है।  बुधवार रात मोंटी को दिल्ली एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया. पेशे से बिल्डर मोंटी पर फ्लैट बॉयर्स के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप है. मोटी की  रियल एस्टेट कंपनी हाईटेक डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड पर फ्लैट खरीदारों से धोखाधड़ी करने का आरोप है.आरोपी की लुक ऑउट सर्कुलर (एलओसी) खुली हुई थी.मोन्टी को आज अदालत में पेश किया जाएगा। मोन्टी की रियल एस्टेट कंपनी हाईटेक डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड पर फ्लैट खरीदारों से धोखाधड़ी करने का आरोप है। पुलिस के मुताबिक शिकायतकर्ताओं ने मॉन्‍टी के खिलाफ शिकायत दी थी कि उसने कई निर्माण कंपनियां बनाकर लोगों से पैसे ऐंठे और फ्लैट देने का वादा किया ! गाजियाबाद और नोएडा में पीड़‍ितों को 8 महीने के अंदर फ्लैट आवंटन का वादा करने के बाद अभी तक न तो फ्लैट मिला और न ही पैसा वापस मिला है। गाजियाबाद और नोएडा के होम बायर्स  को उनके फ्लैट न मिलने से वे कई महीनों से परेशान हैं। इसे लेकर उन्‍होंने कई बार धरना-प्रदर्शन भी किया है। बता दें कि मनपीत सिंह चड्डा शराब कारोबारी पोन्टी चड्ढा का बेटा है। मनप्रीत के पिता पोन्टी चड्ढा की हत्या हो चुकी है।

100 करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप

शिकायतकर्ताओं ने एफआईआर में मोन्टी चड्डा पर करीब 100 करोड़ रुपए से ज्‍यादा की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। लोगों का कहना है कि 11 साल के बाद भी उन्‍हें  फ्लैट नहीं मिले हैं। लिहाजा मोन्टी पर कार्रवाई करने की मांग की गई है। मोन्टी ने महज 19 लाख रुपए में नोएडा में फ्लैट देने की घोषणा की थी।

फुकेट भागने के फिराक में थे मोन्टी चड्डाबड़ी टाउनशिप वेव सिटी गाज़ियाबाद के लिए इमेज परिणाम

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, एयरपोर्ट से विदेश में फुकेट भागने से पहले इसकी गिरफ्तारी हुई। 2005-06 में चड्डा परिवार गाज़ियाबाद में बड़ी टाउनशिप बनाने के लिए वेवसिटी नाम का एक बड़ा प्रोजेक्ट लेकर आया। ग्राहकों से बताया गया कि ये 1500 एकड़ में फैला होगा। इसमें स्कूल, स्‍वीमिंग पूल, क्लब, अस्पताल और हेलिपैड जैसी सभी आधुनिक सुविधाएं होंगी। शिकायतकर्ताओं के मुताबिक आज भी जहां वेवसिटी बननी थी, वहां जानवर चरते हैं और किसान खेती कर रहे हैं। पता चला है कि ऐसा कोई प्रोजेक्ट सरकार से अप्रूव ही नहीं हुआ है।

लोगों का कहना है कि 11 साल के बाद भी उन्‍हें प्लॉट नहीं मिले हैं। 2012 में पिता पोंटी चड्ढा और चाचा हरदीप की आपसी गोलीबारी में हुई मौत के बाद मनप्रीत चड्ढा ने कारोबार की जिम्मेदारी संभाली थी।

बता दें कि वर्ष-2012 में दक्षिणी दिल्ली के छतरपुर स्थित एक फार्म हाउस में शराब कारोबारी पोंटी चड्ढा और उसके भाई हरदीप चड्ढा की आपसी गोलाबारी में मौत हो गई थी।  दोनों भाई के बीच संपत्ति के स्वामित्व को लेकर विवाद था। उस दौरान उत्तराखंड अल्‍पसंख्‍यक आयोग के अध्‍यक्ष के गार्ड ने हरदीप को गोली मारी थी। गार्ड के पास कुल 25 राउंड गोलियां थी। हत्या के बाद पुलिस ने शराब कारोबारी पोंटी चड्ढा के पहले पोस्टमॉर्टम के गड़बड़ी पाए जाने के बाद उसका दोबारा पोस्टमॉर्टम करवाया। 

उत्तराखंड का हल्द्वानी ही वह शहर था, जहां शराब कारोबारी पोंटी चड्ढा को बदरफुट का ठेका मिला था। यह चड्ढा परिवार का सबसे बड़ा जैकपॉट था। इसके बाद पोंटी ने नेताओं और अफसरों में मजबूत पकड़ का फायदा उठाकर उत्तर प्रदेश के ही ललितपुर में ग्रेनाइट की खान का ठेका ले लिया। प्रदेश की सरकारों में इस परिवार की काफी मजबूत पकड़ रही। आलम यह था कि सरकारें बदलती गईं लेकिन, इस चड्ढा परिवार के रुतबे में कोई कमी नहीं आई। हर सरकार में इनका कारोबार बढ़ता गया, जो विदेश तक फैल गया।

चड्ढा परिवार के कारोबार को गुरदीप सिंह उर्फ पोंटी ने ही ऊंचाईयों तक पहुंचाया। पोंटी चड्ढा की हत्या के बाद तीन संतानों में इकलौते बेटे मोंटी चड्ढा ने उनकी विरासत को संभाला। वह रियल एस्टेट में विदेश में भी काम कर रहे हैं। पोंटी के छोटे भाई राजिंदर सिंह उर्फ राजू शराब का कारोबार देख रहे हैं। पोंटी के दादा गुरुबचन सिंह चड्ढा के छह बेटे हुए- कुलवंत सिंह, हरभजन सिंह, सुरिंदर सिंह, गुरुबख्श सिंह, सुरजीत सिंह और हरिंदर सिंह। कुलवंत सिंह, हरभजन सिंह और सुरिंदर सिंह का परिवार मुरादाबाद में रहता है। बाकी भाई मुंबई चले गए थे। इनमें कुलवंत सिंह के तीन बेटे हुए गुरुदीप सिंह उर्फ पोंटी, राजिंदर सिंह उर्फ राजू और हरदीप सिंह उर्फ सतनाम। खूनी संघर्ष में पोंटी और सतनाम की जान चली गई। उनके पिता कुलवंत एक साल पहले ही बीमारी के कारण चल बसे थे। अब कुलवंत के परिवार में एक बेटा राजू और पोता (पोंटी के बेटे) मनप्रीत सिंह उर्फ मोंटी चड्ढा ही बचे हैं। सुरिंदर सिंह के परिवार के पास गिन्नी बार एंड रेस्टोरेंट है।

प्रदेश में ओवर रेट बिकती रही शराब

प्रदेश की मायावती सरकार में शराब नीति बदली और पोंटी को शराब की दुकानों का ठेका मिला। इसी शराब नीति को अखिलेश सरकार ने भी रेगुलर रखा। प्रदेश में शराब ओवर रेट बिकती रही। लोगों ने शोर भी मचाया लेकिन, किसी ने एक नहीं सुनी। पुलिस सूत्रों का कहना है कि इन दिनों चड्ढा परिवार का कारोबार कई देशों में फैला है। मोंटी का समय तो कारोबार के सिलसिले में इन दिनों विदेश में ही गुजरता है। दिल्ली से दुबई तक उनका कारोबार फैला है।

पाकिस्तान से भारत आया था परिवार

भारत विभाजन के बाद पोंटी चड्ढा के दादा गुरुबचन सिंह अपने दो बेटों कुलवंत सिंह चड्ढा और हरभजन सिंह चड्ढा के साथ पाकिस्तान से पहले पीरूमदारा (रामनगर) फिर मुरादाबाद पहुंचे थे। इन दो बेटों ने दूध बेचने से कारोबारी शुरुआत की थी। सबसे पहले उन्हें ताड़ीखाना पर भांग की दुकान मिली। इसके बाद पोंटी के पिता ने गुरहट्टी पर देसी शराब का ठेका भी ले लिया। फिर धीरे-धीरे शराब की दुकानें बढ़ाईं और ट्रक-ट्रांसपोर्ट, फाइनेंस कंपनी, सिनेमा, होटल तक का काम बढ़ाया। रियल एस्टेट में भी कदम रखा।

पंजाब में अकाली नेता का आधिपत्य तोड़ा 

चड्ढा परिवार का पंजाब से पुश्तैनी रिश्ता है और वहां उनके सगे संबंधी भी रहते हैं। वहां शराब के व्यवसाय पर एक अकाली नेता का कब्जा था। कांग्रेस जब सत्ता में आई तो चड्ढा परिवार ने अकाली आधिपत्य को तोडऩे की जुगत लगाई। इसमें पूरा बाजार चड्ढा परिवार को सौंप दिया गया। इसके चलते अमरिंदर सिंह को बदनामी भी मिली। लोग सुप्रीम कोर्ट तक गए। नीलामी की नई प्रक्रिया बनी। रातोंरात चड्ढा के हजारों कर्मचारियों के पैन कार्ड बन गए। अलग-अलग लोगों को ठेका मिला। फिर शुरू हुआ शराब की दुकानों पर निर्धारित मूल्य से ज्यादा वसूलने का धंधा।

सगी बहनें हैं चाचा-भतीजे की पत्नियां

चड्ढा परिवार के हरभजन सिंह शुरू से कुलवंत सिंह के साथ ही रहे। दोनों भाईयों में अच्छा तालमेल रहा। इसलिए उनका दखल शराब व रीयल एस्टेट कारोबार में तो था ही अन्य कारोबार भी साथ ही किया। पोंटी की हत्या के बाद कुछ कारोबार को बांट लिया गया। हरभजन पोंटी के चाचा ही नहीं, इनमें एक रिश्ता और भी है। इनकी पत्नियां आपस में बहनें हैं।

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