सोशल मीडिया पर अफवाहों के बाद जम्मू के 5 जिलों में मोबाइल-नेट फिर बंद

जम्मू कश्मीर के 22 में से 12 जिलों में कामकाज सामान्य ढंग से चल रहा है.

जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) के 17 टेलीफोन एक्सचेंज में लैंडलाइन सेवाएं बहाल कर दी गई हैं. इन एक्सचेंज से 50 हजार से अधिक लैंडलाइन फोन जड़े हुए थे. सोशल मीडिया पर अफवाहों के बाद जम्मू में एक बार फिर मोबाइल-इंटरनेट सेवाएं बंद

जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाला संविधान का अनुच्छेद 370 को समाप्त करने और जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख नाम से दो केंद्र शासित प्रदेश बनाये जाने के फैसले से पहले चार अगस्त से स्थगित टूजी मोबाइल इंटरनेट सेवा को शुक्रवार रात बहाल कर दिया गया था।

एक अधिकारी ने कहा, “मोबाइल इंटरनेट सेवा को कुछ कारण से फिर से अस्थायी तौर पर स्थगित कर दिया गया है। स्थिति की समीक्षा के बाद इसे बहाल किया जाएगा।” जिला प्रशासन जम्मू-कश्मीर तथा लद्दाख में जमीनी स्थिति और सोशल मीडिया पर बारीकी से नजर बनाये हुए है और यदि कोई स्थिति को बिगाड़ने की कोशिश करते या शांति तथा सौहार्द को बिगाड़ने के लिए अवांछित सामग्री प्रसारित करने पाया गया, तो उसके खिलाफ संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जाएगी।

जम्मू कश्मीर (Jammu Kashmir) में आर्टिकल 370 (Article 370) हटाए जाने के बाद फैलाई जा रही अफवाहों को देखते हुए रविवार को एक बार फिर पांच जिलों में शुरू की गई 2जी मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी गई है. शनिवार सुबह ही टेलीफोन और इंटरनेट सेवा को बहाल किया गया था. अधिकारियों ने बताया कि अफवाहों को फैलने से रोकने और शांति बनाए रखने के लिए यह फैसला लिया गया.
पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि संबंधित अधिकारियों ने सभी कंपनियों से इंटरनेट सेवाएं रोकने का निर्देश दिया था. करीब एक पखवाड़े बाद शनिवार सुबह जम्मू, सांबा, कठुआ, उधमपुर और रियासी जिलों में कम गति की मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बहाल की गई थी. केंद्र द्वारा जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में विभाजित करने से एक दिन पहले चार अगस्त को जम्मू क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवाएं निलंबित कर दी गई थीं.
इस कदम से कुछ वक्त पहले राज्य में कर्फ्यू लगा दिया गया था. हालांकि, बाद में पाबंदियों में ढील दे दी गई थी. जम्मू क्षेत्र के पांच जिलों में 2जी मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बहाल करने के फौरन बाद जम्मू के पुलिस महानिरीक्षक मुकेश सिंह ने चेतावनी दी कि सोशल मीडिया पर फर्जी संदेश या वीडियो प्रसारित करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी.राजौरी जिले में दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 144 के तहत लगायी गयीं पाबंदिया हटा ली गयी हैं, लेकिन रात नौ बजे से सुबह पांच बजे तक पाबंदियां लगी रहेंगी।
घाटी के 100 में से 17 टेलीफोन एक्सचेंज बहाल
कश्मीर घाटी के 17 टेलीफोन एक्सचेंज में लैंडलाइन सेवाएं बहाल कर दी गई हैं. इन एक्सचेंज से 50 हजार से अधिक लैंडलाइन फोन जड़े हुए थे. वहीं जम्मू के पांच जिलों में कम गति वाली (2जी) मोबाइल इंटरनेट सेवाएं बहाल कर दी गईं हैं. अधिकारियों ने बताया कि 100 से अधिक टेलीफोन एक्सचेंज में से 17 में सेवाएं बहाल कर दी गईं. ये एक्सचेंज मुख्यत: सिविल लाइन्स क्षेत्र, छावनी क्षेत्र, श्रीनगर जिले के हवाई अड्डे के पास हैं. अधिकारियों ने बताया कि अन्य 20 एक्सचेंज भी जल्द काम करने लगेंगे. सेवाएं बहाल किए जाने के बाद मध्य कश्मीर में बडगाम, सोनमर्ग और मनिगम में लैंडलाइन फोन ने काम करना शुरू कर दिया है. उत्तर कश्मीर में गुरेज, तंगमार्ग, उरी, केरन, करनाह और तंगधार इलाकों में सेवाएं बहाल हुई हैं. दक्षिण कश्मीर में काजीगुंड और पहलगाम इलाकों में लैंडलाइन सेवाएं बहाल की गई हैं.जम्मू-कश्मीर में एक सप्ताह में स्थिति होगी सामान्य

केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री जी कृष्ण रेड्डी ने शनिवार को कहा कि एक सप्ताह में जम्मू-कश्मीर की स्थिति सामान्य हो जायेगी। रेड्डी ने यहां  21 वें वार्षिक वाइएसीए कारगिल स्पोट्र्स महोत्सव के उद्घाटन से इतर पत्रकारों को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सोमवार से जम्मू-कश्मीर के कुछ को  छोड़कर सभी जिलों से धारा 144 हटा ली गयी है और सोमवार से सभी शिक्षण संस्थान खुल जायेंगे।

उन्होंने कहा,“जम्मू-कश्मीर में एतिहातन लगाये गये प्रतिबंधों को धोरे-धीरे हटाया जा रहा है और दिन-ब-दिन स्थिति सामान्य हो रही है। हमने सुरक्षा के  सभी आवश्यक कदम उठाये हैं।”

उन्होंने कहा,“ पाकिस्तान भड़काउ बयान देकर जम्मू-कश्मीर में स्थिति खराब करना चाहता है लेकिन हम सभी आवश्यक कदम उठा रहे हैं।” जम्मू-कश्मीर के कई नेताओं को हिरासत में लिये जाने के प्रश्न पर रेड्डी ने कहा कि यह केवल अभी नहीं हो रहा है। कांग्रेस के समय भी जम्मू-कश्मीर के कई नेताओं को हिरासत में लिया गया था। नेताओं को उनकी सुरक्षा के मद्देनजर एतिहातन गिरफ्तार किया गया है।

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