संयुक्त राष्ट्र संघ की स्थापना और उर्दू साहित्यकार इस्मत चुग़ताई का निधन हुआ था आज

इतिहास में आज: 24 अक्टूबर

ग्रेगोरी कैलंडर के अनुसार 24 अक्टूबर वर्ष का 297 वाँ (लीप वर्ष में यह 298 वाँ) दिन है। साल में अभी और 68 दिन शेष हैं।

  • 1577 – चौथे सिख गुरु रामदास ने अमृतसर शहर की स्थापना की, शहर का नाम तालाब अमृत सरोवर के नाम पर रखा गया।
  • 1579 – जेसुइट पादरी एस जे थामस भारत आने वाले पहले अंग्रेज थे,वह पुर्तग़ाली नौका से गोवा पहुंचे।
  • 1605 – मुग़ल शासक जहाँगीर ने आगरा में गद्दी संभाली थी।
  • 1657 – कल्याण और भिवंडी के शासन के अाधीन आए।
  • 1945 – द्वितीय  विश्व युद्ध की समाप्ति के एक महीने बाद ही विश्व में शांति कायम करने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ (यूएनओ) की स्थापना की गई।अंतरराष्ट्रीय सहयोग, सुरक्षा, आर्थिक विकास, मानवाधिकार, सामाजिक प्रगति और विश्व शांति के सबसे बड़े तंत्र की स्थापना आज ही के दिन हुई थी.24 अक्टूबर 1945 को 50 देशों के हस्ताक्षर के साथ संयुक्त राष्ट्र की स्थापना हुई. द्वितीय विश्व युद्ध के बाद अंतरराष्ट्रीय संघर्ष की स्थिति में हस्तक्षेप के उद्देश्य से संयुक्त राष्ट्र को खड़ा किया गया. इस समय 193 देश इसके सदस्य हैं.

    प्रथम विश्वयुद्ध के बाद 1929 में राष्ट्र संघ का गठन किया गया था जो प्रभावशाली नहीं हो सका और दूसरा विश्व युद्ध हो गया. दूसरे विश्वयुद्ध के खत्म होने पर, 25 अप्रैल 1945 को अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन हुआ. यहां मौजूद 50 देशों की सरकारों और कुछ गैर सरकारी संगठनों ने मिलकर संयुक्त राष्ट्र अधिकार पत्र पर सहमति जताई. सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी देशों फ्रांस, चीन, सोवियत संघ, ब्रिटेन और अमेरिका के हस्ताक्षर के बाद 24 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र अस्तित्व में आया.संयुक्त राष्ट्र का मुख्यालय अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में है. इसकी छह आधिकारिक भाषाएं हैं जिनमें अंग्रेजी, फ्रेंच, रूसी, चीनी, अरबी और स्पेनी शामिल हैं.

  • 1946 – रॉकेट द्वारा पहली बार धरती का अंतरिक्ष से चित्र लिया गया।
  • 1948 – बर्नार्ड बारूक ने सीनेट युद्ध की जांच समिति के समक्ष एक भाषण में पहली बार ‘शीत युद्ध’ शब्द का इस्तेमाल किया।
  • 1975 – बंधुआ मजदूर प्रथा को समाप्त करने के लिए एक अध्यादेश लाया गया और अगले दिन से यह प्रभाव में आ गया।
  • 1982 – सुधा माधवन मैराथन में दौड़ने वाली पहली महिला एथलीट बनी।
  • 1984 – काेलकाता में एस्प्लेनेड और भवानीपुर के बीच पहली मेट्रो ट्रेन (भूमिगत ट्रेन) शुरु।
  • 2000 – दक्षिण कोरिया द्वारा लम्बी दूरी की मिसाइलों का परीक्षण न करने की घोषणा।
  • 2001 – नासा के 2001 मार्स ओडिसी अंतरिक्ष यान ने सफलतापूर्वक मंगल ग्रह के चारों ओर कक्षा में प्रवेश किया।
  • 2004 – ब्राजील ने अंतरिक्ष में पहला सफल राकेट परीक्षण किया।
  • 2005 – न्यूजीलैंड-भारत नया हवाई सेवा समझौता करने पर सहमत।

24 अक्टूबर को जन्मे व्यक्ति

24 अक्टूबर को हुए निधन

  • 2000 – सीताराम केसरी – भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राजनीतिज्ञों में से एक थे।
  • 1996 – ग्लेडविन जेब – संयुक्त राष्ट्र के प्रथम महासचिव के चुनाव तक कार्यवाहक महासचिव थे।
  • 1991 – इस्मत चुग़ताई – भारत की प्रसिद्ध उर्दू साहित्यकार !इस्मत चुग़ताई (उर्दूعصمت چغتائی)
    इस्मत चुग़ताई
    عصمت چغتائی
    IsmatChughtaiPic.jpg
    जन्म 21 अगस्त 1915 
    बदायूं, ब्रिटिश भारत
    (अब उत्तर प्रदेशभारत)
    मृत्यु मुंबईभारत
    अक्टूबर 24, 1991 (उम्र 76)
    व्यवसाय लेखिका
    भाषा उर्दू
    राष्ट्रीयता भारतीय
    विधा कहानी
    साहित्यिक आन्दोलन प्रगतिशील लेखक आंदोलन
    उल्लेखनीय सम्मान ग़ालिब सम्मान (1984)
    फिल्मफेयर वेस्ट स्टोरी एवार्ड (1975)

    भारत से उर्दू की एक लेखिका थीं। उन्हें ‘इस्मत आपा’ के नाम से भी जाना जाता है। वे उर्दू साहित्य की सर्वाधिक विवादास्पद और सर्वप्रमुख लेखिका थीं, जिन्होंने महिलाओं के सवालों को नए सिरे से उठाया। उन्होंने निम्न मध्यवर्गीय मुस्लिम तबक़ें की दबी-कुचली सकुचाई और कुम्हलाई लेकिन जवान होती लड़कियों की मनोदशा को उर्दू कहानियों व उपन्यासों में पूरी सच्चाई से बयान किया है।

    जीवन-परिचय

    उनका जन्म 21 अगस्त 1915 को उत्तर प्रदेश के बदायूं में हुआ।  उनकी कहानी लिहाफ़ के लिए लाहौर हाईकोर्ट में उन पर मुक़दमा चला। जो बाद में ख़ारिज हो गया। उर्दू साहित्य की दुनिया में ‘इस्मत आपा’ के नाम से विख्यात इस लेखिका का निधन 24 अक्टूबर 1991 को हुआ। उनकी वसीयत के अनुसार मुंबई के चन्दनबाड़ी में उन्हें अग्नि को समर्पित किया गया।

    साहित्य सृजन

    उनकी पहली कहानी- गेन्दा, जिसका प्रकाशन 1949 में उस दौर की उर्दू साहित्य की सर्वोत्कृष्ट साहित्यिक पत्रिका ‘साक़ी’ में हुआ और पहला उपन्यास- ज़िद्दी 1941 में प्रकाशित हुआ।

    कहानी संग्रह

    • चोटें
    • छुईमुई
    • एक बात
    • कलियाँ
    • एक रात
    • दो हाथ दोज़खी
    • शैतान

    उपन्यास

    • टेढी लकीर
    • जिद्दी
    • एक कतरा ए खून
    • दिल की दुनिया
    • मासूमा
    • बहरूप नगर
    • सैदाई
    • जंगली कबूतर
    • अजीब आदमी
    • बांदी

    आत्मकथा

    • ‘कागजी हैं पैराहन’

    चलचित्र के क्षेत्र में

    उन्होंने अनेक चलचित्रों की पटकथा लिखी और जुगनू में अभिनय भी किया। उनकी पहली फिल्म “छेड़-छाड़” 1943 में आई थी। वे कुल 13 फिल्मों से जुड़ी रहीं। उनकी आख़िरी फ़िल्म “गर्म हवा” (1973) को कई पुरस्कार मिले।

    रचनात्मक वैशिष्ट्य

    इस्मत का कैनवास काफी व्यापक था जिसमें अनुभव के विविध रंग उकेरे गए हैं। ऐसा माना जाता है कि “टेढी लकीरे” उपन्यास में उन्होंने अपने ही जीवन को मुख्य प्लाट बनाकर एक स्त्री के जीवन में आने वाली समस्याओं और स्त्री के नजरिए से समाज को पेश किया है। वे अपनी ‘लिहाफ’ कहानी के कारण खासी मशहूर हुइ’। 1941 में लिखी गई इस कहानी में उन्होंने महिलाओं के बीच समलैंगिकता के मुद्दे को उठाया था। उस दौर में किसी महिला के लिए यह कहानी लिखना एक दुस्साहस का काम था। इस्मत को इस दुस्साहस की कीमत अश्लीलता को लेकर लगाए गए इलजाम और मुक़दमे के रूप में चुकानी पड़ी।

    उन्होंने आज से करीब 70 साल पहले पुरुष प्रधान समाज में स्त्रियों के मुद्दों को स्त्रियों के नजरिए से कहीं चुटीले और कहीं संजीदा ढंग से पेश करने का जोखिम उठाया। उनके अफसानों में औरत अपने अस्तित्व की लड़ाई से जुड़े मुद्दे उठाती है। साहित्य तथा समाज में चल रहे स्त्री विमर्श को उन्होंने आज से 70 साल पहले ही प्रमुखता दी थी। इससे पता चलता है कि उनकी सोच अपने समय से कितनी आगे थी। उन्होंने अपनी कहानियों में स्त्री चरित्रों को बेहद संजीदगी से उभारा और इसी कारण उनके पात्र जिंदगी के बेहद करीब नजर आते हैं।

    स्त्रीयों के सवालों के साथ ही उन्होंने समाज की कुरीतियों, व्यवस्थाओं और अन्य पात्रों को भी बखूबी पेश किया। उनके अफसानों में करारा व्यंग्य मौजूद है।

    भाषा-शैली

    उन्होंने ठेठ मुहावरेदार गंगा जमुनी भाषा का इस्तेमाल किया जिसे हिंदी उर्दू की सीमाओं में कैद नहीं किया जा सकता। उनका भाषा प्रवाह अद्भुत है और इसने उनकी रचनाओं को लोकप्रिय बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने स्त्रियों को उनकी अपनी जुबान के साथ अदब में पेश किया।

    उनकी रचनाओं में सबसे आकर्षित करने वाली बात उनकी निर्भीक शैली थी। उन्होंने अपनी रचनाओं में समाज के बारे में निर्भीकता से लिखा और उनके इसी दृष्टिकोण के कारण साहित्य में उनका खास मुकाम बना।

    उर्दू साहित्य में स्थान

    उर्दू साहित्य में सआदत हसन मंटो, इस्मत, कृष्ण चंदर और राजेन्दर सिंह बेदी को कहानी के चार स्तंभ माना जाता है। इनमें भी आलोचक मंटो और चुगताई को ऊंचे स्थानों पर रखते हैं क्योंकि इनकी लेखनी से निकलने वाली भाषा, पात्रों, मुद्दों और स्थितियों ने उर्दू साहित्य को नई पहचान और ताकत बक्सी।

     इस्मत साहित्य पर अन्य काम

    हिंदी में “कुँवारी” व अन्य कई कहानी-संग्रह तथा अंग्रेजी में उनकी कहानियों के तीन संग्रह प्रकाशित हुए। इनमें “काली” काफ़ी मशहूर हुआ।

    कहानीकार शबनम रिज़वी ने इस्मत की दर्जनों कहानियों के हिन्दी अनुवाद तथा उपन्यास “टेढ़ी लकीर” का लिप्यन्तरण किया है। उर्दू में उनकी पुस्तक ‘इस्मत चुग़ताई की नावेलनिगारी’ 1992 में दिल्ली से प्रकाशित हुई। वे हिन्दी में इस्मत चुग़ताई ग्रन्थावली की तैयारी कर रही हैं।

    पुरस्कार/सम्मान

    • 1974- गालिब अवार्ड, टेढ़ी लकीर पर
    • साहित्य अकादमी पुरस्कार
    • ‘इक़बाल सम्मान’,
    • मखदूम अवार्ड
    • नेहरू अवार्ड
  • 1954 – रफ़ी अहमद क़िदवई, स्वतंत्रता सेनानी और राजनीतिज्ञ
  • 2006 – धरमपाल – भारत के एक महान् गांधीवादी, विचारक, इतिहासकार एवं दार्शनिक।
  • 2013 – मन्ना डे – भारत सरकार ने इन्हें सन 2005 में कला के क्षेत्र में पद्म भूषण से सम्मानित।
  • 2017 – गिरिजा देवी – प्रसिद्ध ठुमरी गायिका थीं।

24 अक्टूबर के महत्त्वपूर्ण अवसर एवं उत्सव

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