हरिद्वार,: उत्तराखंड के उच्च शिक्षा विभाग और पतंजलि विश्वविद्यालय की ओर से पतंजलि योगपीठ हरिद्वार में आयोजित दो-दिवसीय राष्ट्रीय ज्ञानकुंभ राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उद्घाटन किया। ज्ञानकुंभ के आयोजन का मकसद उच्चतर शिक्षा में गुणात्मक सुधार और भविष्य की चुनौतियों का समाधान तलाशना है।राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद 9 बजकर 15 मिनट पर जौलीग्रांट एयरपोर्ट पहुंचे। जहां से वह एमआई-17 हेलीकॉप्टर से पतंजलि के लिए रवाना हो गए। जौलीग्रांट एयरपोर्ट पर राज्यपाल बेबी रानी मौर्य और मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने राष्ट्रपति का स्वागत किया। इसके बाद हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ पहुंचकर राष्ट्रपति ने ज्ञानकुंभ का उद्घाटन किया। मंच का संचालन श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विवि के कुलपति डॉ. यूएस रावत ने किया। राष्ट्रपति के साथ देश की प्रथम महिला सविता कोविंद भी हरिद्वार पहुंची हैं।

आयोजन में 18 राज्यों के उच्च शिक्षामंत्री व उच्च शिक्षा सचिव और 131 विश्वविद्यालयों के कुलपति भाग ले रहे हैं। इस दौरान राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि पतंजलि योगपीठ में आयोजित इस ज्ञान कुंभ 2018 में आकर मुझे अपार हर्ष का अनुभव होता है। इस देश में सदियों से धार्मिक कुंभ के आयोजन की परंपरा हरिद्वार के आयोजनों की पावन है। यह बहुत ही सार्थक पहल है देश के कोने-कोने से लोग यहां पहुंचे हैं।

योग में स्वामी रामदेव का योगदान है अभूतपूर्व

राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा योग में स्वामी रामदेव का योगदान अभूतपूर्व है। योग का अभ्यास पर्वतों कंदराओं और एकांतवास में जाकर किया जा सकता था, उन्होंने इसे घर घर पहुंचा दिया है। प्रति वर्ष 21 जून को अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के रूप में मनाया जाने का निर्णय लिया गया और इसे पूरे विश्व में मनाया जाता है। उत्तराखंड सरकार का यह महत्वपूर्ण और अच्छा प्रयास है।

संस्कारों के बीज बोना शिक्षकों की जिम्मेदारी है

राष्‍ट्रपति ने कहा कि कोई भी छात्र शिक्षा के अवसर से वंचित ना रह जाए। ज्ञान देने के साथ-साथ संस्कारों के बीज बोना शिक्षकों की जिम्मेदारी है। प्रेम और संस्कार भी वही शिक्षक दे सकता है। जिसमें स्वयं त्याग और संवेदनशीलता मौजूद हमारे देश में आदर्श शिक्षकों के अनेक उदाहरण उपलब्ध है। चाणक्य को राष्ट्र निर्माण में प्रमुख आचार्य माना जाता है। तक्षशिला विश्वविद्यालय में शिक्षा प्राप्त की अपनी प्रतिभा द्वारा वही प्राचार्य और बाद में कुलपति बने और अंततः मौर्य साम्राज्य के निर्माता और महामात्य बने।

अध्यापक ने अपना उपनाम आंबेडकर सदा के लिए दिया

राष्‍ट्रपति ने कहा कि भीमराव आंबेडकर ने अपने अध्यापक से आशीर्वाद की याचना की तो उक्त अध्यापक ने अपना उपनाम आंबेडकर सदा के लिए उन्हें दे दिया। साधारण परिवार से निकल एक सफल वैज्ञानिक और भारत के राष्ट्रपति बनने वाले डॉक्टर कलाम का पूरा जीवन शिक्षा और शिक्षक के महत्व की एक जीती जागती कहानी है। शिक्षा का इतिहास महामना मदन मोहन मालवीय के बिना पूरा नहीं हो सकता। उच्च शिक्षा में गुणवत्ता के लिए राष्ट्रपति ने उदाहरण देते हुए कहा कि जिस प्रकार विदेशों में इंडोलॉजी का अध्ययन कराया जा रहा है, वैसे ही रशियन स्टडीज, जर्मन स्टडीज, फ्रेंच स्टडीज जैसे सेंटर भारत में भी खोले जाएं। उन्होंने उम्मीद जताई की मानव संसाधन विकास मंत्रालय इस दिशा में पहल करेगा। राष्‍ट्रपति ने कहा कि देवियों और सज्जनों  मुझे इस कार्यक्रम का रिजल्ट जानने की उत्सुकता रहेगी। मैं आशा करता हूं कि इस आयोजन के परिणाम स्वरूप उत्तराखंड में ही नहीं, बल्कि पूरे देश में विश्व स्तर की शिक्षा उपलब्ध कराने में सहायता प्राप्त होगी उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने की सफलता के लिए हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं।

देश की दशा व दिशा को बदलने के लिए ज्ञानकुंभ में मंथन होगा: मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत

मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि ये ऐतिहासिक दिन है। निश्चित रूप से इस ज्ञानकुंभ से और यहां होने वाले मंथन से देशभर के शिक्षा संस्थानों के लिए एक नया रास्ता खुलेगा। यहां से कुछ ऐसा निकलकर आएगा जो हमारी आने वाली पीढ़ियों के लिए लाभकारी होगा। हमारे देश में 930 विवि, 39 हजार से ज्यादा कॉलेज हैं। देश मे उच्च शिक्षा का एनरोलमेंट 25.8% है। विदेशों में यह आंकड़ा कहीं अधिक है। ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना जरूरी है। भारत गांवों में बसता है। 930 विवि में से 39% विवि ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। क्षेत्र विशेष की भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक परिस्थितियों के मुताबिक हमें अपने शोधार्थियों से कुछ शोध कराने चाहिए जिसमें वहां के विकास पर फोकस होना चाहिए। इससे बदलाव आएगा। देश मे शोध को और अधिक बढ़ावा देने की जरूरत है। आईआईपी देहरादून ने चीड़ के पिरूल, गोंद से कोलतार आदि बनाने का शोध किया है। निश्चित तौर पर ऐसे ही शोधों से देश का विकास होगा। आईटी पर भी विशेष ध्यान देने की जरूरत है।ज्ञानकुंभ का शुभारंभ हुआ

उत्तराखंड की राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने कहा कि कुंभनगरी हरिद्वार में ज्ञानकुंभ का आयोजन निश्चित रूप से उच्च शिक्षा की परिपाटी बदलेगा। सैकड़ों वर्ष पूर्व भारत मे नालंदा जैसे विवि थे। आज तकनीक का समय है। आधुनिक शिक्षा पद्धति में भी तकनीक की जरूरत है। शिक्षा में हमें आधुनिक तकनीक को प्राथमिकता देनी होगी। पारंपरिक पाठ्यक्रम के साथ हमें पर्सनालिटी डेवलपमेंट को जोड़ना होगा। संस्कृत को भी महत्व देने की जरूरत है।

ये हस्तियां हैं शामिल

कार्यक्रम में करीब दो हजार से ज्यादा शिक्षाविद् भाग ले रहे हैं। ज्ञानकुंभ में केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावडे़कर, उत्तराखंड की राज्यपाल बेबीरानी मौर्य, मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत, यूपी के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा नागालैंड के राज्यपाल पद्मनाभ बालकृष्ण आचार्य, , हिमाचल के शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज, झारखंड की शिक्षा मंत्री नीरा यादव, मणिपुर के शिक्षा मंत्री थोक चौंग राधेश्याम, हरियाणा के शिक्षा मंत्री राम विलास शर्मा, हरिद्वार सांसद डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक, भारत सिंह कोश्यारी सहित योगगुरु बाबा रामदेव और पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण समेत अनेक अतिविशिष्ट और विशिष्ट अतिथि मौजूद हैं। रविवार को कार्यक्रम का समापन उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ करेंगे। यहा कार्यक्रम राज्य सरकार और पतंजलि योगपीठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित किया जा रहा है।

इस मौके पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि देश की दशा व दिशा को बदलने के लिए ज्ञानकुंभ में मंथन होगा। साथ ही उच्च शिक्षा के क्षेत्र की दिक्कतो को दूर करने पर भी विचार होगा। कहा कि उच्च शिक्षा में भारत अभी अन्य देशों से पिछड़ा हुआ है। खासकर ग्रामीण भारत में शिक्षा की स्थिति में सुधार की जरूरत है।

उन्होंने कहा कि देश में कुल 903 विश्वविद्यालय हैं। इनमें केवल 39 फीसद में ही शोध होता है। 39 हजार  महाविद्यालय में से केवल 40  फीसदी महाविद्यालयों में ही उच्च शिक्षा की व्यवस्था है। इन्हीं विषयों से संबंधित मामलों में ज्ञानकुंभ में चर्चा होगी।

इस अवसर  पर योग गुरु बाबा रामदेव ने कहा कि शिक्षा के जरिये हमें भारत विश्व गुरु बनाना है। कहा कि इसी उद्देश्य ज्ञान कुंभ का आयोजन हुआ है। प्रदेश में अपनी तरह का यह पहला आयोजन है।

ज्ञानकुंभ में पांच तकनीकी सत्रों को मिलाकर कुल नौ सत्र होंगे। समापन सत्र में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मुख्य अतिथि होंगे। पतंजलि योगपीठ के महामंत्री आचार्य बालकृष्ण ने कहा स्वास्थ्य के अलावा शिक्षा के क्षेत्र में भी पतंजलि महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। ज्ञानकुंभ के माध्यम से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार और नवीन विचारों का समावेश होगा। इस आयोजन से निकला संदेश भारतीय शिक्षा के लिए मील का पत्थर साबित होगा।

एम्स में दीक्षांत समारोह में भी होंगे शामिल

ज्ञानकुंभ के बाद राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ऋषिकेश स्थित एम्स के दीक्षांत समारोह में छात्रों को उपाधियां देंगे। इसके बाद राष्ट्रपति देहरादून के लिए रवाना होंगे। शनिवार रात दून स्थित प्रेजीडेंट बॉडीगार्ड, आशियाना में विश्राम करेंगे।