वेंटिलेटर पर है उन्नाव रेप पीड़िता,लखनऊ में ही होगा इलाज,तिहाड़ जेल होगा शिफ्ट चाचा

नए मेडिकल बुलेटिन में अस्पताल ने दी ये जानकारी

लखनऊ। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल उन्नाव रेप पीड़िता का इलाज लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) अस्पताल में चल रहा है। केजीएमयू की ओर से शुक्रवार सुबह करीब 12 बजे पीड़िता का मेडिकल बुलेटिन जारी किया गया। ताजा मेडिकल बुलेटिन में अस्पताल की ओर से बताया गया कि 28 जुलाई से आईसीयू में भर्ती पीड़िता और उनके वकील की हालत नाजुक लेकिन स्थिर बनी हुई है। केजीएमयू की ओर से नया मेडिकल बुलेटिन जारी किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) अस्पताल की ओर से दी जानकारी के मुताबिक, उन्नाव रेप पीड़िता को अभी भी वेंटिलेटर पर रखा गया है। वहीं पीड़िता के वकील बिना वेंटिलेटर के स्वतः सांस ले रहे हैं। उन्हें ट्रैकियोस्टोमी ट्यूब के जरिए आक्सीजन लगी हुई है। पीड़िता की भी गुरुवार को ट्रैकियोस्टोमी की जा चुकी है। उन्हें गुरुवार रात बुखार की शिकायत शुरू हुई है। फिलहाल दोनों मरीजों की हालत नाजुक किंतु स्थिर बनी  है। अस्पताल ने बताया कि दोनों मरीजों का इलाज एक्सपर्ट चिकित्सकों की टीम के द्वारा निःशुल्क किया जा रहा है।  पीड़िता अभी भी वेंटिलेटर पर इस बीच उन्नाव रेप पीड़िता के मामले में गुरुवार को सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने सभी 5 केस को दिल्ली ट्रांसफर का आदेश दिया था। साथ ही ये भी कहा था कि अगर पीड़िता शिफ्ट करने लायक है तो उसे एयरलिफ्ट कर दिल्ली लाया जाए।  पीड़िता के परिवार ने कोर्ट से अपील की  कि अभी पीड़िता को लखनऊ में ही रखा जाए। सुप्रीम कोर्ट पीड़िता को दिल्ली एयरलिफ्ट करने के मामले पर सोमवार को सुनवाई करेगा।  परिवार की तरफ से कहा गया कि अगर भविष्य में कोई एमरजेंसी परिस्थिति आती है तो उन्हें सुप्रीम कोर्ट में मेंशन करने की इजाजत दी जाए। वहीं, यूपी सरकार की तरफ से कहा गया कि पीड़ित पहले से बेहतर है। सुप्रीम कोर्ट पीड़िता को दिल्ली एयरलिफ्ट करने के मामले पर अब सोमवार को सुनवाई करेगा, तब तक पीड़िता का इलाज लखनऊ में ही किया जाएगा।

उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता तथा वकील के घर व ट्रामा सेंटर लखनऊ में CRPF का पहरा

उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता तथा वकील के घर व ट्रामा सेंटर लखनऊ में CRPF का पहरा
सुप्रीम कोर्ट के गुरुवार को पीड़िता और उसके घायल वकील सहित उनके परिवार को सीआरपीएफ की सुरक्षा दिए जाने के निर्देश के बाद रात में ही दोनों के घरों पर सीआरपीएफ का पहरा लग गया।

 सुप्रीम कोर्ट का रुख कड़ा होने के बाद रायबरेली में सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल उन्नाव की दुष्कर्म पीड़िता तथा उसके वकील की सुरक्षा कड़ी कर दी गई है। लखनऊ में ट्रामा सेंटर के साथ ही उन्नाव में माखी गांव में इन दोनों के घर पर अब तो पीएसी के साथ सीआरपीएफ का पहरा लगा दिया गया है।

सुप्रीम कोर्ट के गुरुवार को पीड़िता और उसके घायल वकील सहित उनके परिवार को सीआरपीएफ की सुरक्षा दिए जाने के निर्देश के बाद रात में ही दोनों के घरों पर सीआरपीएफ का पहरा लग गया। लखनऊ ट्रामा सेंटर में भी पुलिस को हटा दोनों की सुरक्षा में सीआरपीएफ को तैनात कर दिया गया। कई वर्ष से पीड़िता के परिवार से दूर बांगरमऊ में रह रहे पीडि़ता के ताऊ गुड्डू सिंह की पत्नी की सुरक्षा में भी सीआरपीएफ के तीन जवानों को तैनात किया गया है।

वहीं पीड़िता के मुकदमों की पैरवी करने वाले वकील अजेंद्र अवस्थी और अशोक द्विवेदी की सुरक्षा में भी रात को ही तीन-तीन सीआरपीएफ जवानों को तैनात कर दिया गया। परिवार के मददगार उनके ही गांव माखी निवासी देवेंद्र सिंह को भी सीआरपीएफ की सुरक्षा दी गई है। अजेंद्र और देवेद्र को स्थानीय पुलिस ने एक दिन पहले ही सुरक्षा प्रदान कर दी  थी।

सीबीआई गवाह को भी मिली सुरक्षा

सीबीआई के गवाह देवेंद्र सिंह को भी पुलिस ने सुरक्षा उपलब्ध कराई है। विधायक पक्ष से लगातार मिल रही धमकी पर गवाह की ओर से कई बार सुरक्षा की मांग की गई थी। देर रात आईजी के निर्देश पर एसपी ने सुरक्षा के तौर पर एक गनर तैनात किया है।

पीड़िता के घर की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। इससे पहले लगी डेढ़ सेक्शन पीएसी व चार महिला सिपाहियों के अलावा  प्रतिदिन एक एसओ को उनके चार हमराह सिपाहियों के साथ तैनात किया गया है।

सीआरपीएफ की टीम गुरुवार रात को ही लखनऊ के ट्रामा सेंटर पहुंची और पूरी व्यवस्था अपने हाथों में ले लिया। सुरक्षाकर्मी आने जाने वालों पर निगाह बनाए हुए हैं।

पीडि़ता का लखनऊ में ही होगा इलाज, चाचा को दिल्‍ली तिहाड़ जेल किया जाएगा शिफ्ट

उन्‍नाव दुष्‍कर्म पीडि़ता और वकील के परिवार की ओर से कोर्ट को बताया गया कि वे अभी उन्हें लखनऊ के अस्पताल से शिफ़्ट नहीं करना चाहते हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने उन्‍नाव दुष्‍कर्म पीड़िता के चाचा को तिहाड़ जेल शिफ्ट करने का आदेश दिया। पीड़िता को दिल्ली एयरलिफ्ट करने पर फिलहाल रोक लगा दी गई है, इस पर फैसला सोमवार को किया जाएगा। पीड़िता की मां ने सुप्रीम कोर्ट में जानकारी दी कि वह अपनी बेटी का उपचार लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज में ही जारी रखना चाहती है। वह उसे उपचार के लिए दिल्ली शिफ्ट नहीं करना चाहती। सॉलिसिटर जनरल ने कोर्ट को बताया कि वकील का परिवार भी उन्‍हें अभी दिल्‍ली शिफ्ट नहीं करना चाहता है। परिवार का कहना है कि जब तक उनकी स्थिति सामान्‍य नहीं हो जाती, तब तक उन्‍हें दिल्‍ली शिफ्ट न किया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने इलेक्ट्रॉनिक और प्रिंट मीडिया से पीड़िता की पहचान छुपाने को कहा है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभी लखनऊ में ही पीड़िता का इलाज होने दें, अगर जरूरत पड़ती है तो पीड़िता की तरफ रजिस्ट्री आकर ट्रांसफर के लिए कहा जा सकता है।

इससे पहले गुरुवार को उन्नाव दुष्कर्म कांड में जल्द और पूर्ण न्याय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने पीड़ित की चिट्ठी और उसकी मां की स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई करते हुए मामले से जुड़े सभी पांचों मुकदमे लखनऊ की सीबीआइ अदालत से दिल्ली की अदालत स्थानांतरित कर दिए हैं। इसके साथ ही कोर्ट ने रविवार को हुई दुर्घटना मामले की जांच सीबीआइ को सात दिन में पूरी करने का आदेश दिया है।

हालांकि, बहुत जरूरत पड़ने पर जांच अधिकारी सात दिन और ले सकते हैं, लेकिन इसे अपवाद समझा जाए। कोर्ट ने पांचों मुकदमों का ट्रायल रोजाना सुनवाई कर 45 दिन में पूरा करने का आदेश दिया है। इतना ही नहीं, कोर्ट ने पीड़िता की मां को 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने के साथ ही पीड़िता और उसके परिवार को सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (सीआरपीएफ) सुरक्षा देने का भी आदेश दिया।

इसके बाद देर रात लखनऊ के जिलाधिकारी कौशल नाथ शर्मा और एसएसपी कलानिधि नैथानी ट्रॉमा सेंटर पहुंचे और 25 लाख रुपये का चेक पीड़िता की मां को सौंप दिया। अधिकारियों ने कहा कि शुक्रवार को पीड़िता के परिवार को सीआरपीएफ सुरक्षा भी प्रदान कर दी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट मामले पर शुक्रवार को फिर सुनवाई करेगा।

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की पीठ ने गुरुवार को मामले पर सुनवाई के बाद ये आदेश दिए। उन्नाव दुष्कर्म कांड में विधायक कुलदीप सिंह सेंगर सहित कई अभियुक्त हैं। गत रविवार को सड़क दुर्घटना में उन्नाव दुष्कर्म कांड की पीड़िता के दो रिश्तेदारों की मौत हो गई थी जबकि पीड़िता और वकील गंभीर रूप से घायल हो गए थे।

दुर्घटना से पहले पीड़िता और उसके परिवार ने प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई को चिट्ठी भेजकर अभियुक्तों पर धमकी देने और सुलह के लिए दबाव डालने की शिकायत की थी। इसी चिट्ठी पर संज्ञान लेते हुए शीर्ष कोर्ट ने गुरुवार को विस्तृत आदेश जारी किए।

तीसहजारी में जिला जज धर्मेश की अदालत में स्थानांतरित

कोर्ट ने पीड़ित परिवार की ओर से मुकदमों का स्थानांतरण उत्तर प्रदेश के बाहर स्थानांतरित करने की मांग स्वीकारते हुए दुर्घटना सहित मामले से जुड़े सभी पांचों मुकदमे दिल्ली की तीसहजारी में जिला जज धर्मेश शर्मा की अदालत में स्थानांतरित कर दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि मामले की विशेष परिस्थितियों को देखते हुए एकतरफा सुनवाई में ये आदेश दिए गए हैं। ऐसे में अभियुक्तों को आदेश में बदलाव कराने की मांग कोर्ट के सामने रखने की छूट होगी।

परिवार चाहे तो पीड़िता व वकील को इलाज के लिए दिल्ली भेज सकते हैं
कोर्ट ने दुर्घटना में घायल पीड़िता और वकील का इलाज कर रहे लखनऊ के किंग जार्ज मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों से पूछा था कि क्या दोनों की हालत ऐसी है कि उन्हें इलाज के लिए दिल्ली स्थानांतरित किया जा सके। कोर्ट को बताया गया कि इसकी जरूरत नहीं है, लेकिन फिर भी उन्हें एयर लिफ्ट करके स्थानांतरित करने की स्थिति है। कोर्ट ने दोनों को बेहतर इलाज के लिए स्थानांतरित करने पर पीड़िता और घायल वकील के परिवार की राय पूछी है। राय जानने के बाद कोर्ट इस पर आदेश देगा।

आज दाखिल होगी सीआरपीएफ सुरक्षा पर अनुपालन रिपोर्ट
कोर्ट ने सीआरपीएफ को आदेश दिया है कि वह पीड़िता, उसकी मां और भाई-बहनों के अलावा चाचा महेश सिंह के परिवार को भी पर्याप्त सुरक्षा दे। सुरक्षा तत्काल दी जाए और आदेश के अनुपालन की रिपोर्ट शुक्रवार को कोर्ट को दी जाए।

पीड़िता के चाचा को दिल्ली जेल स्थानांतरित करने पर जवाब आज
प्रदेश सरकार शुक्रवार को कोर्ट को बताएगी कि क्या सुरक्षा कारणों से पीड़िता के चाचा को रायबरेली की जेल से दिल्ली जेल स्थानांतरित किया जा सकता है। पीड़िता के चाचा को अभियुक्तों के साथ मार पिटाई के 2001 के विवाद में हत्या के प्रयास के आरोप में सजा हुई है। उसकी पत्नी की भी रविवार को हुई दुर्घटना में मौत हो गई है और उसके अंतिम संस्कार के लिए वह फिलहाल पैरोल पर है।

पीड़िता को न्याय देने के लिए कोर्ट सुबह से दिखा तत्पर
पीड़िता के साथ न्याय करने के लिए कोर्ट कितना तत्पर था इसकी झलक सुबह कोर्ट शुरू होते ही दिखी। जैसे ही अदालत मुकदमों की सुनवाई के लिए बैठी प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने अदालत कक्ष में बैठे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह सीबीआइ निदेशक से बात करें और 12 बजे सीबीआइ का कोई जिम्मेदार अधिकारी पेश होकर कोर्ट को मामले की जांच स्थिति बताए। इसके थोड़ी देर बाद मेहता फिर कोर्ट में पेश हुए और उन्होंने कहा कि उनकी सीबीआइ निदेशक से बात हुई है जिन्होंने कहा है कि मामले की जांच लखनऊ में हो रही है इसलिए सारे रिकॉर्ड लखनऊ में हैं। जैसे ही पहली फ्लाइट मिलेगी, रिकॉर्ड दिल्ली मंगाया जाएगा।

मेहता ने कोर्ट से सुनवाई शुक्रवार तक टालने का अनुरोध किया, लेकिन कोर्ट इसके लिए राजी नहीं हुआ। प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि सीबीआइ निदेशक जांच अधिकारी से जांच की प्रगति पता करके आज ही कोर्ट बताएं। इस बीच, उत्तर प्रदेश सरकार ने कोर्ट को बताया कि दुर्घटना की जांच भी सीबीआइ को सौंप दी गई है। इसके बाद 12 बजे सीबीआइ की संयुक्त निदेशक संपत मीणा कोर्ट में पेश हुईं और जांच की स्थिति कोर्ट को बताई गई।

जब कोर्ट ने पूछा कि दुर्घटना की जांच पूरी होने में कितना समय लगेगा तो मेहता ने कहा, एक महीना। लेकिन कोर्ट ने दो टूक कहा- नहीं, सात दिन में जांच पूरी होनी चाहिए। फिर कोर्ट ने पीड़िता की सेहत और दुष्कर्म कांड से जुड़े मुकदमों की स्थिति जानी। कोर्ट ने गुरुवार को इस मामले की तीन बार सुनवाई की।

सीजेआइ बोले- यह क्या हो रहा है, हम अपनी ड्यूटी में फेल हैं
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआइ) ने पूरी घटना पर नाराजगी जताते हुए गुरुवार को सुनवाई के दौरान कहा कि यह क्या हो रहा है। हम अपनी ड्यूटी में फेल हैं। कोर्ट ने यह बात उस वक्त कही जब सुनवाई के दौरान मुआवजा देने के सुझाव पर कोर्ट रजिस्ट्रार ने इस बारे में विधायी नीति का जिक्र करना चाहा। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि विधायी नीति से आपका क्या मतलब है। यह क्या घटित हो रहा है और आप कोर्ट से कानून के चौखाने में फिट मुआवजे का आदेश देने की बात कर रहे हैं।

सपा नेता के ट्रक ने मारी थी उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की कार को टक्कर, षडयंत्र से किया इनकार

उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की कार कुछ इस तरह ट्रक में भिड़ी थी

 

रायबरेली-लालगंज हाईवे पर उन्नाव के चर्चित दुष्कर्म मामले की पीड़िता की कार में टक्कर मारने वाला ट्रक फतेहपुर के सपा नेता व पूर्व जिला सचिव नंदू पाल का निकला। सपा नेता का कहना है कि इसे षडयंत्र बता अकारण तूल दिया जा रहा है, जबकि यह महज दुर्घटना है। सपा नेता का कहना है कि ट्रक के नंबर प्लेट में कालिख पोतने की वजह केवल फाइनेंसर की नजरों से बचना था।

उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की कार में ट्रक की टक्कर

 

फतेहपुर ललौली कस्बे के सातआना मोहल्ला निवासी सपा नेता नंदकिशोर पाल उर्फ नंदू पाल की पत्नी रामाश्री पाल सपा से असोथर ब्लॉक की प्रमुख रह चुकी हैं। सपा नेता चार भाई हैं। दूसरे नंबर पर देवेंद्र किशोर पाल, तीसरे नंबर मुन्ना पाल और सबसे छोटा दिलीप पाल है। दिलीप का मकान लालगंज में है। तीन भाइयों के ललौली के साथ शहर के नई तहसील के सामने पाल नगर में अलग-अलग मकान हैं।

हादसे के बाद कार के परखच्चे उड़ गए थे

 

 हादसे के बाद कार के परखच्चे उड़ गए थे-

चारो भाइयों के बीच 27 ट्रक हैं। इसके अलावा लखनऊ रोड पर्र ईंट-भट्ठा है। सपा नेता नंदू पाल का कहना है कि पूरा कारोबार संयुक्त रूप से चलता है। कारोबार की निगरानी वह खुद करते हैं। उन्होंने बताया कि दुर्घटना करने वाला ट्रक दूसरे नंबर के भाई देवेंद्र किशोर पाल के नाम पर है। यह ट्रक मोरंग रायबरेली में उतारने के बाद फतेहपुर लौट रहा था।

ट्रक चालक व क्लीनर सीबीआई कोर्ट में पेश, जांच अधिकारियों ने मांगी सात दिन की रिमांड

accident
उन्नाव रेप पीड़िता के साथ हुए सड़क दुर्घटना में गिरफ्तार ट्रक ड्राइवर आशीष पाल व क्लीनर मोहन श्रीवास को शुक्रवार को सीबीआई कोर्ट में किया गया। इस दौरान सीबीआई दोनों को सात दिन की रिमांड पर दिए जाने की अर्जी अदालत के सामने रखी जिसपर कोर्ट विचार कर रही है।
रिमांड पर लिए जाने के बाद सीबीआई की कोशिश होगी कि सच्चाई सामने आ जाए कि यह दुर्घटना है या हत्या। बताया गया कि कड़ी सुरक्षा में पुलिस आरोपितों को रायबरेली से लखनऊ सीबीआई कोर्ट ले गई है। इसके साथ ही सीबीआई और फॉरेंसिक टीम घटना स्थल पर सीन रिक्रिएशन करने भी पहुंचेगी। इस दौरान ट्रक नंबर up:33AT 6501 और  स्विफ्ट कार नंबर up:33 R 6566 के बीच हुई टक्कर का डेमो कराकर देखा जाएगा।

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