देहरादून, । शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने नियम 310 में लोकायुक्त बिल पर चर्चा कराने की मांग की। विपक्ष के विधायकों ने प्रश्नकाल को रोक-कर बिल पर चर्चा कराने की मांग की। इस दौरान कांग्रेसी विधायक वेल पर पहुंच गए और हंगामा करने लगे। पीठ ने नियम 58 पर सुनने की बात कही। विपक्ष ने कहा कि इस पर इसी समय चर्चा हो। संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने कहा विपक्ष का एक भी प्रश्न नहीं है, इसलिए प्रश्नकाल रोक रहे है। लोकायुक्त सदन का विषय, पीठ ग्राह्यता पर सुनने को तैयार है। कांग्रेस ने कहा सरकार बताए कि कब होगी इस पर बैठक। अभी हंगामा जारी है।

वहीं सत्र के दौरान वित्त मंत्री प्रकाश पंत ने बजट मोबाइल एप का शुभारंभ भी किया।

विधानसभा में 2452.41 करोड़ का विनियोग विधेयक (प्रथम अनुपूरक) , उत्तराखंड जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम और उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक को पारित किया जाएगा। वहीं सदन में पदोन्नति में आरक्षण और पलायन रोकने के लिए भी चर्चा की जाएगी।

सदन पटल पर आए दो संशोधन विधेयक
बुधवार को विधानसभा में सरकार ने सदन पटल पर उत्तराखंड (उत्तरप्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम 1950)(अनुकूलन एवं उपांतरण आदेश, 2001) संशोधन विधेयक 2018 और उत्तराखंड आयुर्वेद विवि (संशोधन) विधेयक, 2018 पेश किया। इसके साथ ही लोकसेवा आयोग की वर्ष 2017-2018 और सेवा का अधिकार आयोग की एटीआर समेत 2016-17 की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की गई।

ये विधेयक बने कानून
– न्यायालय शुल्क(उत्तराखंड संशोधन) विधेयक, 2018
– उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश शीरा नियंत्रण अधिनियम, 1964) अनुकूलन एवं उपांतरण आदेश, 2002(संशोधन ) विधेयक, 2018
– उत्तराखंड माल एवं सेवाकर(संशोधन) विधेयक, 2018
– उत्तराखंड(उत्तरप्रदेश नगर निगम अधिनियम, 1959)(संशोधन) विधेयक, 2018
– उत्तराखंड नगर निकायों एवं प्राधिकरणों हेतु विशेष प्राविधान विधेयक, 2018
– उत्तराखंड सेवा निवृत्ति लाभ(संशोधन) विधेयक, 2018 शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन गुरुवार को सदन में विनियोग विधेयक समेत तीन विधेयक पारित किए जाएंगे। इसके अलावा सदन में पदोन्नति में आरक्षण और पलायन रोकने के लिए भी चर्चा की जाएगी। विधानसभा में गुरुवार को हुई कार्यमंत्रणा समिति की बैठक के बाद गुरुवार का कार्यक्रम तय किया गया। इसके तहत 2452.41 करोड़ का विनियोग विधेयक (प्रथम अनुपूरक) पेश कर पारित किया जाएगा। साथ ही उत्तराखंड जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम और उत्तराखंड आयुर्वेदिक विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक को पारित किया जाएगा। इसके अलावा सदन में पांच संकल्प प्रस्तुत किए जाएंगे और लंबित असरकारी संकल्पों पर चर्चा की जाएगी।

बता दें कि बुधवार को विपक्ष की गैरमौजूदगी में दो विधेयक सदन में प्रस्तुत किए गए। कांग्रेस ने उप नेता प्रतिपक्ष करन माहरा को मुख्य द्वार पर रोके जाने के विरोध में सदन की कार्रवाई का बहिष्कार किया। सदन में उत्तराखंड लोक सेवा आयोग और सेवा का अधिकार आयोग के वार्षिक प्रतिवेदन पटल पर रखे गए। पूर्व में पारित छह विधेयकों के राज्यपाल की अनुमति के बाद अधिनियम बनने की जानकारी सदन को दी गई।

इससे पहले, प्रश्नकाल के दौरान सफाईकर्मियों की नियुक्ति से संबंधित प्रश्न का सदस्य को उपलब्ध प्रति में अलग और सदन में अलग जवाब को लेकर शहरी विकास मंत्री अपनी पार्टी के विधायकों से ही घिर गए। इस पर पीठ ने दोनों जवाब विचार के लिए अपने पास ले लिए, लेकिन कोई टिप्पणी नहीं की। राज्य मंत्रिमंडल ने पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के उत्तराखंड से रहे विशेष लगाव के मद्देनजर उनकी स्मृति में जौलीग्रांट हवाई अड्डे का नामकरण उनके नाम पर करने का फैसला लिया था।

बुधवार को विस के शीतकालीन सत्र में सरकार की ओर से संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने इस संबंध में संकल्प पेश किया, जिसे विपक्ष की गैरमौजूदगी में सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। अब विस में पारित संकल्प और कैबिनेट के फैसले को केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। नामकरण के संबंध में निर्णय केंद्र सरकार द्वारा लिया जाना है। इससे पहले, सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही देर बाद नेता प्रतिपक्ष डॉ. इंदिरा हृदयेश ने पीठ को अवगत कराया कि उपनेता प्रतिपक्ष करन माहरा को विस के मुख्य द्वार पर रोका गया है।

विधायक को सदन में आने से रोकना विशेषाधिकार का हनन है। साथ ही पीठ से आग्रह किया कि विधायक सदन में पहुंचे, यह व्यवस्था होनी चाहिए। इस पर पीठ की ओर से बताया गया कि विधायक दूसरे वाहन से आ रहे थे, लेकिन उन्हें अनुमति दे दी गई है। अलबत्ता, विधायक के साथ मौजूद दो लोगों के पास न होने की जानकारी आई है। तब सदन में नेता प्रतिपक्ष समेत कांग्रेस के तीन विधायक ही थे और थोड़ी देर में वे भी सदन का बहिष्कार कर चले गए। हालांकि, पीठ की ओर से संसदीय कार्यमंत्री को भी मौके पर भेजा गया। विपक्ष की गैरमौजूदगी में सदन की कार्रवाई एक बजे तक बदस्तूर चली।

इस दौरान दो विधेयक उत्तराखंड (उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम, 1950) (अनुकूलन एवं उपांतरण आदेश, 2001) (संशोधन) विधेयक-2018 और उतराखंड आयुर्वेद विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक-2018 सदन में प्रस्तुत किए गए। इसके अलावा उत्तराखंड लोक सेवा आयोग और उत्तराखंड सेवा का अधिकार आयोग के वार्षिक प्रत्यावेदन पटल पर रखे गए। यही नहीं, विधायकों की ओर से कई याचिकाएं भी प्रस्तुत की गई।