राम मंदिर: संघ ने कहा- सुको हिंदू समाज की भावनाओं को समझे, देर हुई तो आंदोलन

 राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने आज कहा कि आवश्यकता पड़ी तो राम मंदिर के लिए फिर से आंदोलन करेंगे. पिछले 30 सालों से आंदोलन चल रहा है. मंदिर बनाने में बहुत देरी हो चुकी है. RSS Leader Bhaiyyaji Joshi on Ayodhya's Ram Mandir and Supreme Court's order

मोहन भागवत और भैय्याजी जोशी

मुंबई: राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) ने आज राम मंदिर पर बड़ा बयान दिया है. सुप्रीम कोर्ट में मामला जनवरी तक टलने को लेकर संघ ने कहा कि यह हिंदू समाज का अपमान है. आरएसएस की अखिल भारतीय कार्यकारी मंडल की 3 दिवसीय बैठक खत्म होने के बाद संघ के सरकार्यवाहक भैय्याजी जोशी ने कहा, ”कोर्ट के फैसले में देरी हो रही है कोर्ट ने अनिश्चितकाल के लिए टाल दिया. वह उनका अधिकार क्षेत्र है. लेकिन जब पूछा गया कि इस मामले पर आगे सुनवाई कब होगी? तो कोर्ट ने कहा कि उसके पास और भी प्राथमिकताएं हैं.”

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भैय्याजी ने कहा कि भगवान राम हर जगह हैं, कोई इस बात को माने या फिर न माने. राम मंदिर निर्माण के मुद्दे पर बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि राम मंदिर निर्माण मामले में कोर्ट को हिंदू पक्ष की भावनाओं को समझना चाहिए.

दिवाली से पहले राम मंदिर की उम्मीद थी
सुप्रीम कोर्ट द्वारा मामले की सुनवाई टालने के सवाल का जवाब देते हुए कहा किए उन्हें उम्मीद थी कि दिवाली तक इस पर फैसला आ जाएगा. 2018 की दिवाली से राम मंदिर निर्माण का कार्य शुरू हो जाएगा.

उन्होंने आगे कहा, ”कोर्ट की इस टिप्पणी से हिंदू समाज अपमानित महसूस कर रहा है. हम अदालत ने विनती करते हैं कि वह इस पर फिर से विचार करे. हिंदू भावना और आस्था का ख्याल रखे.”

आरएसएस ने कहा कि आवश्यकता पड़ी तो फिर से आंदोलन करेंगे. पिछले 30 सालों से आंदोलन चल रहा है. मंदिर बनाने में बहुत देरी हो चुकी है. अगर कोई रास्ता नहीं बचता है तो कानून ही आखिरी रास्ता है.

मुंबई में हुई आरएसएस कार्यकारिणी की बैठक में अमित शाह ने भी आज शिरकत की. शाह संघ प्रमुख अमित शाह से भी मिले. जोशी ने कहा कि अमित शाह से सुबह मुलाकात हुई. इस दौरान राम मंदिर समेत कई विषयो पर गंभीर चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि जब तक न्यायालय फैसला नहीं देता है, सरकार के सामने भी चुनौती रहेगी. भैय्याजी जोशी ने कहा कि सरकार या बीजेपी पर दबाव की बात नहीं है, यहां आपसी सहमति जरूरी है.

ध्यान रहे कि 29 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के राम मंदिर-बाबरी मस्जिद विवाद को लेकर कहा था कि हम इसपर अब जनवरी में सुनवाई करेंगे. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा था, “हमारी अपनी प्राथमिकताएं हैं. मामला जनवरी, फरवरी या मार्च में कब आएगा, यह फैसला उचित पीठ को करना होगा.” साफ है कि अयोध्या मामले का निर्णय 2019 लोकसभा चुनाव से पहले नहीं हो पाएगा.

सुप्रीम कोर्ट के रुख के बाद आरएसएस, वीएचपी, शिवसेना और बीजेपी के कुछ नेताओं ने सरकार से कानून लाए जाने की मांग की है. वहीं अन्य पार्टियों का कहना है कि सरकार और आंदोलनकारियों को कोर्ट के फैसले का इंतजार करना चाहिए.

आपको बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2010 के अपने फैसले में विवादित स्थल को तीन भागों -रामलला, निर्मोही अखाड़ा व मुस्लिम पक्षकारों- में बांटा था. इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है.

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