महिला पुलिसकर्मी की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल,  आपको कर देगी भावुक

 हर कोई कांस्टेबल अर्चना की तारीफ कर रहा है.

कांस्टेबल अर्चना फिलहाल झांसी कोतवाली में तैनात हैं.
,झांसी: पिछले दिनों यूपी पुलिस का एक वीडियो सोशल मीडिया पर बहुत तेजी से वायरल हुआ था. ठांय-ठांय वाले उस वीडियो की वजह से यूपी पुलिस का बहुत मजाक उड़ाया गया. इस बीच यूपी पुलिस की एक महिला पुलिसकर्मी की तस्वीर भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. लेकिन, इस तस्वीर को देखने के बाद हर कोई महिला पुलिसकर्मी की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं. महिला पुलिसकर्मी एक तरफ अपना फर्ज निभा रही है तो दूसरी तरफ मां होने का भी फर्ज निभा रही है.

मिलिए यूपी की ‘मदर कॉप’ अर्चना से, ड्यूटी के साथ-साथ थाने में ही पाल रही हैं 6 माह की बेटी

यूपी डीजीपी के पूर्व पीआरओ राहुल श्रीवास्तव ने अर्चना की तस्वीर शेयर की
यूपी के झांसी जिले के थाना कोतवाली में आप जाएंगे तो दूर से ही आपकी नजरें महिला सिपाही अर्चना जयंत पर जरूर पड़ेंगी। एक टेबल के पास आगंतुक रजिस्टर पर कुछ काम करते हुए तल्लीन नजर आती हैं लेकिन जब थोड़ा करीब जाएंगे तो टेबल पर एक मासूम बच्ची को देखकर हैरान होंगे। दरअसल, यह बच्ची अर्चना की 6 महीने की बेटी अनिका है। अर्चना ड्यूटी के साथ-साथ थाने में ही अपनी बेटी को भी पाल रही हैं। एक तरफ मां का कर्तव्य और दूसरी तरफ सिपाही की टफ ड्यूटी, अर्चना दोनों को ही बखूबी निभाती हैं और बेहद संयमित नजर आती हैं। इन दिनों सोशल मीडिया पर अर्चना की यह तस्वीर खूब वायरल हो रही है। हर कोई उन्हें सलाम कर रहा है और मदर कॉप की उपाधि दे रहा है। बातचीत में अर्चना बताती हैं कि वह झांसी में एक किराये के मकान में रहती हैं।

अनिका के होने के बाद वह 6 महीने तक लीव पर थीं। पिछले महीने से ही वह ड्यूटी पर वापस लौटी हैं। चूंकि शहर में उनके साथ कोई और नहीं है इसलिए अर्चना अनिका को अपने साथ ही ड्यूटी पर ले जाती हैं। अर्चना की एक बड़ी बेटी भी है, जो कानपुर में दादा-दादी के पास रहकर पढ़ाई कर रही है। वहीं उनके पति गुड़गांव में रहकर प्राइवेट नौकरी करते हैं।

थाने का स्टाफ करता है मदद
दोनों ड्यूटी एक साथ निभाना कितना चैलेंजिंग है, इस पर वह बताती हैं, ‘मुश्किल तो है ही लेकिन मेरे लिए दोनों ही बेहद मायने रखती है, इसलिए मैं ड्यूटी के साथ-साथ अपनी बच्ची की देखरेख भी करती हूं।’ वह बताती हैं, ‘वैसे तो हमें किसी भी समय ड्यूटी के लिए तैयार रहना होता है, लेकिन स्टाफ के सपोर्ट की वजह से नौकरी के घंटे घट जाते हैं।’ अर्चना आगे कहती हैं, ‘हालांकि कभी-कभी ऐसी स्थिति भी सामने आती है जब किसी न होने पर होने पर ड्यूटी पर बुलाया जाता है। तो मैं अनिका को भी साथ लेकर जाती हूं।’

अर्चना ने अनिका के साथ रात की ड्यूटी भी की है। वह यह सब कैसे संभालती है, इसके जवाब में वह कहती हैं, ‘मैंने अनिका के लिए एक बैग तैयार किया है जिसमें सब कुछ पहले से तैयार होता है। मुझे उसमें बस दूध की बोतल रखनी होती है।’ अर्चना बताती हैं कि थाने का स्टाफ और उनकी सहेली भी अनिका की देखभाल में मदद करती हैं।


ट्रांसफर के लिए किया आवेदन

हालांकि अर्चना बताती हैं कि वह आगरा के लिए ट्रांसफर चाहती हैं जिसके लिए उन्होंने अगस्त में आवेदन किया था। बकौल अर्चना, ‘मेरे माता-पिता आगरा में रहते हैं, इसलिए मैं वहां ट्रांसफर चाहती हूं ताकि बच्ची की देखभाल भी हो सके और मैं अच्छे से ड्यूटी भी कर सकूं।’ अर्चना ने कहा कि आवेदन करने पर उन्हें कहा गया कि थानों से वैकेंसी की लिस्ट आने पर उन्हें बताया जाएगा।

डीआईजी करेंगे सम्मानित
उधर मदरकॉप अर्चना से प्रभावित होकर डीआईजी सुभाष सिंह बघेल ने अर्चना को पुरस्कृत करने का ऐलान किया है। यूपी डीजीपी के पूर्व पीआरओ राहुल श्रीवास्तव ने अर्चना की तारीफ में ट्वीट कर लिखा, ‘मदरकॉप अर्चना से मिलिए। कोतवाली झांसी में तैनात अर्चना मातृत्व और विभाग की ड्यूटी साथ-साथ निभाती हैं, उन्हें सलाम।’  ये वो महिला सिपाही हैं जो एक ही समय मे दो फर्जों को निभाने का काम कर रही हैं. पहला तो पुलिस की ड्यूटी, दूसरा मां होने का. अर्चना अपने 6 महीने के बच्चे के साथ अपने फर्ज को अंजाम देती हैं जो अपने आप मे एक अनोखा काम है.  फिलहाल, उन्हें रिसेस्पशन की ड्यूटी पर तैनात किया गया है. रिसेप्शन पर ड्यूटी के दौरान बेटी हर वक्त सामने रहती है.

ट्रांसफर के लिए अर्जी दी है
कोतवाली में बच्ची अनिका की परवरिश होती देख आम नागरिक और पुलिस अधिकारी अर्चना की तारीफ कर रहे हैं. सिपाही अर्चना का कहना है कि वह परेशान तो बहुत रहती है, लेकिन वह दोनों जिम्मेदारियों को बखूबी निभा लेती हैं.

सिपाही का बेटा बना IPS ऑफिसर, बेटे के अंडर में पिता को करनी होगी ड्यूटी

पिता अब अपने ही आईपीएस बेटे के मातहत के रूप में काम करेंगे. उन्नाव से तबादले पर लखनऊ के एएसपी (उत्तरी) बनाए गए आईपीएस अनूप सिंह के पिता जनार्दन विभूतिखंड थाने में सिपाही के पद पर तैनात हैं.

सिपाही का बेटा बना IPS ऑफिसर, बेटे के अंडर में पिता को करनी होगी ड्यूटी
IPS अनूप की पत्नी ने बताया कि वह बेहद सख्त ऑफिसर हैं.

लखनऊ: भगवान किसी भी शख्स मं टैलेंट उसकी हैसियत या जाति-बिरादरी देखकर नहीं देते हैं. यह बात एक बार फिर से उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सच साबित हुई है. यूपी राजधानी के विभूतिखंड थाने में तैनात एक सिपाही का बेटा आईपीएस बन गया है. दिलचस्प बात यह है कि इस आईपीएस की नियुक्ति भी लखनऊ जिले में हुई है. जरा सोचिए जिले में पिता पुलिस महकमे के छोटे पद पर तैनात है और वहीं उसका बेटा उसी विभाग में ऑफिसर बनकर आया है. एक पिता के लिए इससे ज्यादा गर्व की बात और क्या हो सकती है.

पिता अब अपने ही आईपीएस बेटे के मातहत के रूप में काम करेंगे. उन्नाव से तबादले पर लखनऊ के एएसपी (उत्तरी) बनाए गए आईपीएस अनूप सिंह के पिता जनार्दन विभूतिखंड थाने में सिपाही के पद पर तैनात हैं.

उनकी माता कंचन सिंह ने खास बातचीत में बताया कि उनका परिवार खुशनसीब है. उसके बेटे ने अपनी मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है. सरकार ने पिता-पुत्र को एक ही जिले में तैनाती देकर पूरे परिवार को एक अलग तरह के अनुभव में जीने का मौका दिया है.

IPS अनूप की मां कंचन कहती हैं कि पुत्र के अंडर में पिता को काम करना गर्व की बात है.

एक पिता के लिए काफी गर्व की बात होगी कि वह अपने बेटे को सैल्यूट करेंगे. ड्यूटी के दौरान बाप-बेटे के बजाय सीनियर जूनियर का रिश्ता निभाएंगे वहीं घर पर बेटा पिता के पैर छूएगा.

आईपीएस अनूप की पत्नी ने बताया कि उसके पति काफी सख्त ऑफिसर हैं. जो अपनी ड्यूटी में किसी भी प्रकार की ढिलाई बर्दाश्त नहीं करते हैं. आईपीएस अनूप को नॉनवेज खाना काफी पसंद है. मां कंचन ने बताया कि अनूप के पिता बचपन से ही कहते थे कि उनका बेटा आईपीएस बनेगा. इसके लिए वे बचपन से ही अनूप के मन में पुलिस की नौकरी के लिए उत्साह पैदा करते रहते थे.

अनूप बचपन से पढ़ाई के साथ खेल-कूद में अच्छा करते थे. ग्रेजुएशन के बाद जब अनूप को दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में दाखिला हुआ तो परिवार वालों की उम्मीदें और बढ़ गई. अनूप ने भी अपनी लगन और मेहनत के दम पर यूपीएससी की परीक्षा में सफल होकर आई्पीएस बने.

42 हजार पदों के लिए हुई परीक्षा में सेंध की कोशिश नाकाम

यूपी पुलिस भर्ती एवं प्रोन्नति बोर्ड के माध्यम से सिपाहियों के 42 हजार पदों पर भर्ती के लिए दो दिनों में कराई गई आफलाइन लिखित परीक्षा में सेंध लगाने की कोशिश इस बार नाकाम रही। एसटीएफ ने इलाहाबाद व आगरा में परीक्षा में नकल कराने की कोशिश कर रहे अलग-अलग गिरोहों को दबोच लिया। दूसरे दिन दो पालियों में परीक्षा के दौरान कहीं कोई गड़बड़ी नहीं हो पाई। डीजीपी ओपी सिंह के अलावा पुलिस के कई आला अफसरों ने खुद परीक्षा केंद्रों का जायजा लिया।

सिपाही भर्ती परीक्षा दरअसल जून 2018 में ही कराई गई थी। इसमें पहली पाली की परीक्षा सकुशल हो गई थी लेकिन दूसरी पाली में इलाहाबाद व एटा जिले में एक-एक परीक्षा केंद्र पर कुछ गड़बड़ी हो गई थी। इस कारण बाद में दूसरी पाली की परीक्षा निरस्त कर दी गई थी। यही परीक्षा 25 अक्टूबर को एक पाली में व 26 अक्टूबर को दो पालियों में कराई गई। इसके लिए प्रदेश के 16 जिलों में 482 केंद्र बनाए थे। भर्ती बोर्ड का दावा है कि दो दिनों में तीनों पालियों में कराई गई परीक्षा में कोई गड़बड़ी नहीं होने पाई है। डीजीपी ओपी सिंह ने दूसरे दिन की पहली पाली की परीक्षा का खुद भी जायजा लिया। उनके निर्देश पर अन्य जिलों में परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। नकल माफिया गैंग पर निगरानी के लिए एसटीएफ को लगाया गया था।

परीक्षा पास कराने को दो-दो लाख में लिया था नकल का ठेका
आगरा। सिपाही भर्ती परीक्षा में गुरुवार को दो-दो लाख रुपये में नकल कराने का ठेका लिया गया था। कक्ष निरीक्षक और कॉलेज प्रबंधक ने एक कोचिंग संचालक से सेटिंग कर वारदात को अंजाम दिया था। एसटीएफ आगरा यूनिट ने इस मामले में छह आरोपियों को पकड़ा है। आरोपियों में कॉलेज संचालक, कक्ष निरीक्षक, एक अभ्यर्थी और तीन साल्वर शामिल हैं। सभी को जेल भेज दिया गया है। आरोपियों के कब्जे से 2.46 लाख रुपये बरामद दिखाए गए हैं। सिपाही भर्ती की परीक्षा गुरुवार को द्वितीय पाली में दोपहर तीन से पांच बजे तक थी।

पुलिस भर्ती परीक्षा में एथलीट सुधा सिंह पर भी पूछा गया सवाल

पुलिस भर्ती की लिखित परीक्षा में एशियन गेम्स 2018 में सिल्वर मेडल जीतने वाली एथलीट सुधा सिंह से संबंधित सवाल भी पूछा गया। प्रदेश सरकार ने पुलिस भर्ती शुरू की है अलग अलग केंद्रों पर पुलिस भर्ती के लिए लिखित परीक्षा कराई गई। इसमें एक सवाल एथलीट सुधा सिंह से भी संबंधित था।

पूछा गया कि एशियन गेम्स 2018 में 3000 मीटर बाधा  दौड़  में रजत पदक विजेता एथलीट सुधा सिंह उत्तर प्रदेश में किस जिले    से संबंधित है। चार अप्शन मैं कानपुर, लखनऊ , उन्नाव, रायबरेली दिए  गए थे। अमेठी की  मूलनिवासी एथलीट सुधा सिंह इस समय रायबरेली के शिवाजी नगर मोहल्ले में रह रही हैं। एशियन गेम्स 2018 में 3000 मीटर बाधा दौड़ में सिल्वर मेडल के बाद से वह काफी चर्चा में है।  इसके पहले वह वर्ष 2010 में 3000 मीटर बाधा दौड़ में गोल्ड मेडल भी जीत चुकी है। उन्होंने दो बार ओलंपिक गेम्स में भी भारतीय टीम की तरफ से प्रतिभाग किया है।

पुलिस वर्दी में भी नजर आ सकती हैं सुधा सिंह 
रायबरेली। जिन एथलीट सुधा सिंह से संबंधित सवाल पुलिस भर्ती परीक्षा में पूछा गया है निकट भविष्य में वह स्वयं एक पुलिस अधिकारी के रूप में नजर आ सकती हैं। राज्य सरकार ने एशियन गेम्स 2018 में रजत पदक जीतने के बाद सुधा सिंह को नौकरी का ऑफर दिया है। सुधा ने पहली वरीयता खेल विभाग और दूसरी पुलिस विभाग को दी है। खेल विभाग में जो पद वह चाहती हैं संभवत वहां नियम आड़े आ रहे हैं इसलिए बहुत संभव है कि निकट भविष्य में सुधा सिंह पुलिस उपाधीक्षक के पद पर कार्य करती दिखने लगें।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *