भीड़ हिंसा रोकने में नाकाम राज्यों  पर कार्रवाई की मांग, सुको का  सुनवाई से  इनकार

सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी कि जो राज्य भीड हिंसा रोकने में नाकाम रहे उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इनकार कर दिया है।
नई दिल्ली,एजेंसी। देश में हो रही भीड़ की हिंसाओं (Mob lynching) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई है। कोर्ट ने फिलहाल, इस मामले में तत्काल सुनवाई करने से इंकार कर दिया है। दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई थी जिसमें उन राज्यों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने की मांग की गई थी जो भीड़ हत्या की घटनाओं पर लगाम लगाने में विफल रहे।प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा कि अवमानना की याचिका पर तत्काल सुनवाई की कोई जरूरत नहीं है। पीठ ने वकील को यह तर्क देने की अनुमति नहीं दी कि शीर्ष अदालत के फैसलों पर कई राज्य सरकारों ने अमल नहीं किया है और ऐसी घटनाएं बढ़ती जा रही हैं।

इन फैसलों में न्यायालय ने देश में भीड़ हिंसा एवं गो रक्षा के नाम पर होने वाली घटनाओं से निपटने के लिए विस्तृत दिशानिर्देश दिए थे।

पिछले साल 17 जुलाई को तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा था कि भीड़तंत्र के भयानक कृत्यों को कानून को अपने हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जा सकती।

अदालत ने साथ में लिंचिंग एवं गो रक्षा के नाम पर हिंसा करने वालों से निपटने के लिए दिशा-निर्देश जारी किए थे। पीठ ने यह भी कहा था कि केंद्र को ऐसी घटनाओं से सख्ती से निपटने के लिए नया कानून लाने पर विचार करना चाहिए।

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और जस्टिस दीपक गुप्ता और अनिरुद्ध बोस की खंडपीठ ने कहा कि अवमानना ​​याचिका पर सुनवाई करने की कोई जल्दबाजी नहीं है। वकील ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि कई राज्यों में भीड़ की हिंसा को रोकने के लिए जो दिशानिर्देश जारी किए गए हैं उनका पालन नहीं किया जा रहा है। इस वजह से यह घटनाएं बढ़ रही है। तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए, पीठ ने पाया कि मामलें में तत्काल सुनवाई की मांग करने वालें वकीलों के 50 प्रतिशत बयान गलत है।

पिछले साल 17 जुलाई को, तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली एक पीठ ने कहा था कि ‘भीड़तंत्र की हरकत’ को ज़मीन के कानून को खत्म करने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। साथ कहा कि लिंचिंग और गाय से जुड़ी घटनाओं से निपटने के लिए दिशानिर्देश जारी किए हैं। साथ ही तब पीठ ने केंद्र से इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए एक नया कानून बनाने पर विचार करने को भी कहा था।

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