भारत में बिजनेस और आसान, ईज ऑफ डूइंग रैकिंग में 77वें नंबर पर पहुंचा देश

वर्ल्ड बैंक आज ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रेटिंग जारी कर दी है. भारत की रैंकिंग में जबरदस्त उछाल आया है. भारत की 100 नंबर से चढ़कर अब 77वें पायदान पर पहुंच गया है.भारत में बिजनेस करना हुआ और आसान, ईज ऑफ डूइंग रैकिंग में 77वें नंबर पर पहुंचा देशसांकेतिक तस्वीर
 वर्ल्ड बैंक ने आज ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैकिंग जारी कर दी है. इस रैंकिंग में भारत ने पिछले साल के मुकाबले 23 पायदान की ऊंची छलांग लगाई है और अब 77वें स्थान पर पहुंच गया है. माना जा रहा है कि इससे भारत को और ज्यादा विदेशी निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी.पिछले दो सालों में भारत की रैकिंग में कुल 53 पायदान का सुधार आया है। माना जा रहा है कि इससे भारत को अधिक विदेशी निवेश आकर्षित करने में मदद मिलेगी।
नरेंद्र मोदी सरकार के लिए यह रैंकिंग कुछ राहत की बात है। अगले साल होने वाले आम चुनाव से पहले सरकार को विभिन्न मुद्दों पर विपक्षी दलों के कड़े विरोध का सामना करना पड़ रहा है। पीएम मोदी ने ट्वीट कर कहा, ‘ईज ऑफ डुइंग बिजनस में भारत की रैंकिंग की खबर सुनकर खुश हूं। आर्थिक तरक्की के प्रति हम प्रतिबद्ध हैं।’
पिछले साल भारत इस सूची में टॉप 100 में आ गया था. भारत को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की सूची में 100वां स्थान मिला था. इस सूची में इस साल जीएसटी और इनसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी कोड जैसे सुधारों का फायदा सरकार को मिल सकता है. पिछले साल भारत ने इस रैंकिंग में बड़ी छलांग लगाई थी.
आपको बता दें कि वर्ल्ड बैंक हर साल आसान कारोबार वाले देशों की सूची जारी करता है इसमें कुल 190 देश होते हैं. मोदी सरकार का सपना इस सूची में भारत को टॉप 50 में लाने का है. इस बार रैंकिंग में भारत का स्थान बहुत महत्वपूर्ण होगा.रेटिंग की बड़ी बातें 

>> विश्व बैंक द्वारा जारी इज ऑफ डूइंग बिज़नेस रैंकिंग में भारत की रैंकिंग 77 वें पायदान पर पहुंचा
>> पिछले साल 2017 के मुकाबले 2018 में भारत की रैंकिंग में 23 स्थान का सुधार
>> 190 देशों की रैंकिंग में भारत 77 वें स्थान पर
>> पिछले 2 साल में 53 रैंक और 2014-18 में 65 रैंक का सुधार
>> पिछले साल भी 30 पायदान ऊपर आया था भारत की रैंकिंग
>> 10 मापदंडों में से 6 मापदंडों में भारत की स्थिति में सुधार देखा गया
>> कंस्ट्रक्शन परमिट,सीमाओं में व्यापार,व्यवसाय की शुरुआत, क्रेडिट लेने,बिजली लेने जैसे 6 मापदंडों में बड़ा सुधार
>> विश्व बैंक ने माना है कि व्यवसाय करने के मामले में भारत सुधार करने वाले शीर्ष देशों में शामिल
>> ब्रिक्स और दक्षिण एशियाई देशों में भारत टॉप इम्प्रूवर
>> 2014 में भारत दक्षिण एशियाई देशो में भारत की स्थिति 6वें  स्थान पर था आज पहले पायदान पर पहुंच गया है.
किस आधार पर तय होती है रिपोर्ट- भारत ने 2003 से अब तक 37 बड़े सुधार लागू किए हैं. पिछले साल इस रिपोर्ट में दिल्ली और मुंबई को शामिल किया गया था. रिपोर्ट में किसी कारोबार को शुरू करना, कंस्ट्रक्शन परमिट, क्रेडिट मिलना, छोटे निवेशकों की सुरक्षा, टैक्स देना, विदेशों में ट्रेड, कॉन्ट्रैक्ट लागू करना और दिवालिया शोधन प्रक्रिया को आधार बनाया जाता है.
ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग में न्यूजीलैंड टॉर पर है. उसके बाद क्रमश: सिंगापुर, डेनमार्क और हांगकांग का नंबर आता है. इस लिस्ट में अमेरिका आठवें, चीन 46वें और पाकिस्तान 136वें स्थान पर है.

विश्व बैंक की यह रैंकिंग 10 मानदंडों मसलन कारोबार शुरू करना, निर्माण परमिट, बिजली कनेक्शन हासिल करना, कर्ज हासिल करना, टैक्स भुगतान, सीमापार कारोबार, अनुबंध लागू करना और दिवाला मामले का निपटान पर आधारित होती है।

इन मानदंडों में सुधार
विश्व बैंक की कारोबार सुगमता पर 2019 की वार्षिक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में कारोबार शुरू करने और उसमें सुगमता से संबंधित दस मानदंडों में से 6 में भारत की स्थिति सुधरी है। इन मानदंडों में कारोबार शुरू करना, निर्माण परमिट, बिजली की सुविधा प्राप्त करना, कर्ज प्राप्त करना, करों का भुगतान, सीमापार व्यापार, अनुबंधों को लागू करना और दिवाला प्रक्रिया से निपटना शामिल है।

4 साल में कहां से कहां पहुंचे

इंडिकेटर 2014 2018 4 साल में सुधार
कारोबार की शुरुआत 158 137 21
निर्माण परमिट 184 52 132
बिजली कनेक्शन हासिल करना 137 24 113
कर्ज हासिल करना 36 22 14
टैक्स भुगतान 156 121 35
सीमापार कारोबार 126 80 46
अनुबंध लागू करना 186 163 23
दिवाला मामले का निपटान 137 108 29


कुछ मानदंडों में अभी और सुधार की जरूरत: जेटली

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने रैकिंग की घोषणा के दौरान मीडिया से कहा कि जब केंद्र में मोदी सरकार बनी तो हम 142वें स्थान पर थे। पीएम ने टॉप 50 में पहुंचने का लक्ष्य रखा है। पिछले चार साल में देश की कारोबार सुगमता रैंकिंग 67 अंक बेहतर हुई। उन्होंने कहा कि ‘कारोबार की शुरुआत’सहित कुछ इंडिकेटर में अभी सुधार की जरूरत है। वित्त मंत्री ने कहा कि एनडीए सरकार ने भ्रष्टाचार और लालफीताशाही को खत्म किया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने इसे देश के लिए दिवाली का तोहफा बताया और कहा कि सरकार रैंकिंग में सुधार के लिए और प्रयास करेगी।
पहले नंबर पर कौन?
कारोबार सुगमता रैंकिंग में न्यू जीलैंड शीर्ष पर है। उसके बाद क्रमश: सिंगापुर, डेनमार्क और हांगकांग का नंबर आता है। सूची में अमेरिका 8वें, चीन 46वें और पाकिस्तान 136वें स्थान पर है। विश्व बैंक ने इस मामले में सबसे अधिक सुधार करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में भारत को दसवें स्थान पर रखा है।

(पीटीआई इनपुट के साथ)

रैकिंग सुधरने से आपको सीधे मिलेंगे ये 4 फायदेवर्ल्ड बैंक आज ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रेटिंग जारी हो गई है.भारत 100 नंबर से चढ़कर अब 77वें पायदान पर पहुंच गया है. अगर आसान शब्दों में समझे तो इसका मतलब साफ है कि भारत में अब व्यापार करना और आसान हो गया है. भारत की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैकिंग सुधरने से आपको सीधे मिलेंगे ये 4 फायदेभारत की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैकिंग सुधरने से आपको सीधे मिलेंगे ये 4 फायदे

अगर आसान शब्दों में समझे तो इसका मतलब साफ है कि भारत में अब व्यापार करना और आसान हो गया है.  एक्सपर्ट्स का कहना है कि जब भी किसी देश की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस की रैंकिंग में सुधार आता है, तो इसका सीधा फायदा वहां की इकोनॉमी को मिलता है. इससे न सिर्फ SMEs को फायदा मिलता है, बल्‍क‍ि रोजगार भी बढ़ता है.
(1) बढ़ेगा रोजगार- एक्सपर्ट्स का कहना है कि भारत में कारोबारी माहौल बेहतर होने से दुनियाभर की कंपनियां तेजी से भारत में निवेश बढ़ा सकती हैं. ऐसे में देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. वर्ल्ड बैंक की एनेट डिक्‍सन भी कहती हैं कि एसएमई के मजबूत होने का फायदा देश में रोजगार के मौके बढ़ने के तौर पर मिलेगा.
(2) शेयर बाजार में मिलेगा ज्यादा मुनाफा-अमेरिका-इंडिया बिजनेस काउंसिल (यूएसआईबीसी) की नई अध्यक्ष निशा देसाई बिस्वाल का कहना है कि वर्ल्ड बैंक का भारत की ईज ऑफ डूइंग बिजनेस रेटिंग सुधारना बड़ा महत्वपूर्ण है. इससे भारत को और अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आकर्षित करने में मदद मिलेगी. मतलब साफ है अगर ज्यादा विदेशी निवेशक भारत में पैसा लगाएंगे तो शेयर बाजार में तेजी आएगी. लिहाजा आपको म्युचूअल फंड्स में भी ज्यादा रिटर्न मिलेगा.
(3) महंगाई घटेगी- कैपिटल सिंडिकेट के मैनेजिंग पार्टनर सुब्रमण्यम पशुपति ने न्यूज18इंडिया को बताया कि विदेशी निवेश बढ़ने से भारत के रुपए को मजबूती मिलेगी. इससे इंपोर्ट करना सस्ता हो जाएगा. लिहाजा देशवासियों पर महंगाई बोझ कम हो जाएगा.
(4) छोटे कारोबारियों को मिलेगा फायदा-कारो‍बारियों को रैंकिंग सुधरने का सीधा फायदा मिलता है. दरअसल रैंकिंग सुधरना इस तरफ इशारा करता है कि देश में कारोबार के लिए माहौल सरल हो रहा है. इस माहौल से छोटे कारोबारियों को अपना कारोबार करने में आसानी होती है. इससे उनका व्‍यापार भी बढ़ता है. जिसका फायदा इकोनॉमी को मिलता है.

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