बांसुरी कौशल है सुषमा स्वराज की इकलौती बेटी और हाको – सु को में हैं क्रिमिनल लॉयर

नई दिल्ली 07 अगस्त :भारत की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का मंगलवार रात हार्ट अटैक से निधन हो गया. उनकी उम्र 67 साल थी. हरियाणा के अंबाला कैंट में सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी, 1953 को हुआ था. उनके पिता हरदेव शर्मा आरएसएस से जुड़े थे और संगठन में उनकी बहुत अच्छी छवि थी. उन्होंने अंबाला छावनी के SSD कॉलेज से BA की पढ़ाई की. सुषमा एक होनहार छात्रा थीं और अंबाला छावनी के एसडी कॉलेज से उन्हें सर्वश्रेष्ठ छात्रा का पुरस्कार मिला था. इसके बाद उन्होंने पंजाब विश्वविद्यालय के कानून विभाग से LLB की डिग्री ली और 1973 से सुप्रीम कोर्ट में वकालत शुरू की. उनका राजनीतिक करियर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के साथ शुरू हुआ.

  • कौन हैं सुषमा स्वराज की इकलौती बेटी और क्या करती हैं काम?
    पूर्व विदेश मंत्री और भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज ने साल 1975 में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील स्वराज कौशल से शादी की. स्वराज कौशल तीन साल तक मिजोरम के गवर्नर भी रहे. सुषमा की ए‍क बेटी है जिसका नाम बांसुरी कौशल है.

    फोटो: ट्विटर (@chetan_patil13)

  • कौन हैं सुषमा स्वराज की इकलौती बेटी और क्या करती हैं काम?बांसुरी स्वराज सुषमा स्वराज की इकलौती बेटी हैं. उन्होंने ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से ग्रेजएशन की पढ़ाई की है. इनर टेम्पल से कानून में बैरिस्टर की डिग्री लेने के बाद अपने पिता की तरह क्रिमिनल लॉयर हैं.

    फोटो: ट्विटर (@chetan_patil13)

  • कौन हैं सुषमा स्वराज की इकलौती बेटी और क्या करती हैं काम?बांसुरी कौशल दिल्ली हाईकोर्ट और भारत के सुप्रीम कोर्ट में क्रिमिनल लॉयर हैं.

    फोटो: ट्विटर (@chetan_patil13)कौन हैं सुषमा स्वराज की इकलौती बेटी और क्या करती हैं काम?

    बांसुरी ने मीडिया का ध्यान उस समय आकर्षित किया था, जब यह खुलासा हुआ था कि सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी स्वराज IPL के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी की लीगल टीम में शामिल थीं.

  • कौन हैं सुषमा स्वराज की इकलौती बेटी और क्या करती हैं काम?आपको बता दें, ललित मोदी ने एक ट्वीट कर अपनी लीगल टीम को बधाई दी थी. लीगल टीम के जिन सदस्यों के नाम का जिक्र ललित मोदी ने अपने ट्वीट में किया था, उनमें सुषमा स्वराज की बेटी बांसुरी समेत 8 वकील और शामिल थे.
  • कौन हैं सुषमा स्वराज की इकलौती बेटी और क्या करती हैं काम?

    ललिल मोदी ने इन आठ लोगों के नाम का जिक्र अपने ट्वीट किया था, जिसमें महमूद अब्दी, बांसुरी स्वराज, रोजर ग्रेसन, डॉक्टर आर मराठा, बियांका हेमरिच, वेंकटेश दोंद, अभिषेक सिंह, अंकुर चावला के नाम शामिल थे.

  • उस समय खुलासा हुआ था कि सुषमा की बेटी ललित मोदी की मदद कर रही हैं.  27 अगस्त 2014 में हाईकोर्ट ने ललित मोदी का पासपोर्ट बहाल कर दिया था. तब बांसुरी अदालत में मौजूद थीं, जिसके बाद पासपोर्ट मामले में राहत मिलने के बाद ललित मोदी ने अपनी लीगल टीम को बधाई दी थी.आपको बता दें, बीजेपी ने बांसुरी का बचाव करते हुए कहा था कि सुषमा स्वराज की बेटी का अपना प्रोफेशन है और वह अपने काम के लिए आजाद हैं.
  • कौन हैं सुषमा स्वराज के पति

    सुषमा स्वराज और उनके पति स्वराज कौशल की शादी 1975 में हुई. कौशल भारत में एक क्राइम वकील हैं. वह 34 वर्ष की आयु में भारत के सबसे युवा एडवोकेट जनरल थे, और 1990 से 1993 तक मिजोरम के गवर्नर थे. आज वे भारत के सर्वोच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता हैं, और 1998 से 2004 तक संसद सदस्य रहे.

  • कौन हैं सुषमा स्वराज की इकलौती बेटी और क्या करती हैं काम?सुषमा परिवार के परिवार में 

    सुषमा स्वराज के परिवार में एक भाई, एक बहन, एक बेटी हैं. सुषमा स्वराज की एक बेटी हैं. सुषमा के पिता का नाम हरदेव शर्मा और माता का नाम लक्ष्मी देवी था. भाई का नाम गुलशन शर्मा है. बहन का नाम वंदना शर्मा है.
    कौन हैं सुषमा स्वराज की इकलौती बेटी और क्या करती हैं काम?

    बहन वंदना शर्मा हरियाणा के एक कॉलेज में प्रोफेसर हैं और भाई गुलशन शर्मा आयुर्वेद के डॉक्टर हैं.

कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमा

  • कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमाभारतीय जनता पार्टी की महत्वपूर्ण स्तंभ और अपनी प्रखर बुद्धि के साथ वाकपटुता में माहिर रहीं सुषमा स्वराज देश की महिलाओं के लिए हमेशा एक आदर्श रहेंगी. छोटी उम्र में राजनीति में आकर न सिर्फ उन्होंने राजनीतिक पेचोखम समझे, बल्कि बीजेपी में खुद को स्थापित किया. भाजपा में उनका कद अटल आडवाणी के बाद बीजेपी में वो दूसरी पंक्ति की सबसे ताकतवर नेता थीं. राजनीति में आने वाली लड़कियों की तमाम पीढ़ियां सुषमा स्वराज के व्यक्तित्व और कामों से सीखती रहेंगी.
  • कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमाइंदिरा के बाद देश की ताकतवर महिला नेता

    देश की राजनीति में महिला राजनेताओं की कतार में इंदिरा गांधी के बाद सबसे ज्यादा ताकतवर महिला नेता के तौर पर उन्हीं का नाम आता है. चाहे फिर वो राजनीतिक समझ हो या लोगों से मेलजोल, वो सबमें माहिर थीं. शब्दों की जादूगर सुषमा ने विदेश मंत्री रहते हुए सोशल मीडिया में लोगों के दिल जीतने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी थीं. इंदिरा गांधी के बाद वो देश की दूसरी महिला विदेश मंत्री भी बनी थीं.

  • कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमासबसे कम उम्र की मंत्री का रिकॉर्ड

    महज 27 वर्ष की छोटी उम्र में ही सन 1979 में सुषमा स्वराज जनता पार्टी से हरियाणा की प्रदेश अध्यक्ष बनी थीं. सबसे कम उम्र की कैबिनेट मिनिस्टर बनने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के नाम है. सुषमा ने बीते साल 2018 में ही कह दिया था कि वो 2019 का चुनाव नहीं लड़ेंगी. इसके पीछे अपने स्वास्थ्य कारण ही बताए थे.कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमा

  • मोदी से पहले था उनका नाम
    देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जब राजनीति में आना हुआ तब सुषमा स्वराज एक स्थापित नेता बन चुकी थीं. कहा जाता है कि मोदी सरकार में मुस्लिम देशों खासकर सऊदी अरब और कुवैत आदि के साथ अच्छे संबंध बनाने की पहल उन्होंने ही की. संसद के छठे सत्र में सांसद के तौर पर 15वीं लोक सभा में वो विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा थीं. सन 1977-1982 और 1987-1909 के दौरान दो बार हरियाणा से और 1998 में एक बार दिल्ली से विधायक बनीं. अक्टूबर 1998 में इन्होंने दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री का पद संभाला. सुषमा स्वराज सत्ताधारी पार्टी की सदस्य और विपक्ष की सदस्य दोनों ही भूमिकाओं में अपनी मजबूत पहचान दर्ज करा चुकी हैं.

  • कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमा

    सुषमा स्वराज ने भारतीय राजनीति में साल 1970 में छात्र नेता के तौर पर कदम रखा. वो इंदिरा गांधी की सरकार के विरोध में हुए आंदोलनों में भी शामिल हो चुकी थीं. जनता पार्टी में शामिल होने के बाद वो आपातकाल के खिलाफ मुखर होकर सामने आईं. सुषमा स्वराज के नाम दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री और विपक्ष की पहली महिला नेता के रिकॉर्ड भी दर्ज हैं.

  • कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमा

    ये हैं उनके नाम रिकॉर्ड
    25 साल की उम्र में देश की सबसे कम उम्र की कैबिनेट मंत्री (हरियाणा विधान सभा) बनी.
    27 साल की उम्र में, हरियाणा में जनता पार्टी की प्रदेश अध्यक्ष
    नेशनल पार्टी की पहली महिला प्रवक्ता रहीं
    पहली महिला मुख्यमंत्री, पहली महिला केंद्रीय कैबिनेट मंत्री, विपक्ष की पहली महिला नेता

  • कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमा

    ये मिले सम्मान
    सुषमा स्वराज को हरियाणा राज्य विधानसभा द्वारा सर्वश्रेष्ठ वक्ता पुरस्कार दिया गया था. इसके अलावा उन्हें वर्ष 2008 और 2010 में दो बार सर्वश्रेष्ठ संसदीय पुरस्कार मिला था. उत्कृष्ट संसदीय पुरस्कार को प्राप्त करने वाली पहली और एकमात्र महिला सांसद का खिताब उनके नाम है.

  • कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमा

    ये है उनका राजनीतिक सफर
    सबसे पहले जनता पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्या
    फिर हरियाणा राज्य में जनता पार्टी की अध्यक्षा रहीं
    भारतीय जनता पार्टी की अखिल भारतीय सचिव रहीं
    1977 में हरियाणा में कैबिनेट मंत्री बनीं
    1977 से 1979 तक सामाजिक कल्याण, श्रम और रोजगार जैसे आठ पद संभाले
    1987 में सुषमा स्वराज को हरियाणा विधान सभा से दोबारा चुना गया
    1987 से 1990 तक सिविल आपूर्ति, खाद्य और शिक्षा के पदों पर कैबिनेट मंत्री रहीं
    अप्रैल 1990 में राज्य सभा की सदस्य के रूप में निर्वाचित हुईं

  • कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमा1996 में सुषमा स्वराज 11वीं लोकसभा के दूसरे कार्यकाल की सदस्य बनी

    1996 में अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व में 13 दिन की सरकार में सूचना और प्रसारण की केंद्रीय कैबिनेट मंत्री बनीं
    1998 में तीसरी बार 12वीं लोकसभा की सदस्या के रूप में फिर से निर्वाचित किया गया
    13 अक्टूबर से 3 दिसंबर 1998 तक दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री रहीं
    1998 में इन्हें दिल्ली विधानसभा के हौज खास विधानसभा से जीतीं
    लोकसभा सीट के लिए विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया
    अप्रैल 2000 में सुषमा स्वराज को दोबारा राज्यसभा की सदस्या के रूप में निर्वाचित किया गया
    30 सितंबर 2000 से 29 जनवरी 2003 तक सूचना एवं प्रसारण मंत्री के पद पर सेवा की

  • कानून की डिग्री, जेपी आंदोलन से राजनीति, कमाल की वक्ता थीं सुषमा

    19 मार्च से 12 अक्टूबर 1998 तक सूचना एवं प्रसारण और दूरसंचार (अतिरिक्त प्रभार) विभाग में केंद्रीय कैबिनेट मंत्री रहीं.
    29 जनवरी 2003 से 22 मई 2004 तक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री व संसदीय मामलों की मंत्री रहीं.
    अप्रैल 2006 में इन्हें पांचवे सत्र के लिए राज्य सभा की सदस्य के रूप में निर्वाचित किया गया था.
    16 मई 2009 को सुषमा स्वराज को छठी बार 15वीं लोकसभा की सदस्य के रूप में चुना गया था.
    लोकसभा में 3 जून 2009 को विपक्ष की उप नेता बनी.

पति, बेटी, पार्टी… कुछ ऐसे एक साथ सब संभालती गईं सुषमा

  • पति, बेटी, पार्टी... कुछ ऐसे एक साथ सब संभालती गईं सुषमा
  • पति, बेटी, पार्टी... कुछ ऐसे एक साथ सब संभालती गईं सुषमासुषमा स्वराज पढ़ाई के साथ एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटी में बहुत आगे रहीं. वह शास्त्रीय संगीत के अलावा ललित कला और नाटक देखने आदि में काफी रुचि लेती थीं. वह तीन वर्षों तक लगातार SD College के NCC की सर्वश्रेष्ठ सैनिक छात्रा घोषित की गईं. हरियाणा के भाषा विभाग में राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में उन्हें लगातार 3 वर्षों तक सर्वश्रेष्ठ हिंदी वक्ता का पुरस्कार दिया गया.
  • पति, बेटी, पार्टी... कुछ ऐसे एक साथ सब संभालती गईं सुषमासुप्रीम कोर्ट के वकील से की थी शादी, बेटी भी हैं वकील

    साल 1975 में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील स्वराज कौशल से उनकी शादी हुई थी. स्वराज कौशल तीन साल तक मिजोरम के गवर्नर भी रहे.

  • पति, बेटी, पार्टी... कुछ ऐसे एक साथ सब संभालती गईं सुषमासुषमा स्वराज लंबे समय से किडनी की समस्या से परेशान चल रही थीं. कुछ दिनों पहले उनका किडनी ट्रांसप्लांट भी हुआ था. मोदी सरकार 2.0 में शामिल न हो पाने की वजह भी यही थी. उन्होंने न तो 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा और न ही कैबिनेट में कोई पद लिया था.
  • पति, बेटी, पार्टी... कुछ ऐसे एक साथ सब संभालती गईं सुषमा
    साल पहले जब उनको किडनी की समस्या आई थी पूरे देश से लोग उनके लिए दुआएं कर रहे थे. यही नहीं देश भर से तमाम लोगों ने सोशल मीडिया सहित पर उन्हें किडनी दान करने की पेशकश की थी. उनके स्वभाव और त्वरित प्रतिक्रिया के कारण उन्हें लोग बहुत पसंद करते थे. कई बार व्यक्तिगत जीवन की तमाम यादें भी वो सोशल मीडिया पर साझा करती थीं.
  • पति, बेटी, पार्टी... कुछ ऐसे एक साथ सब संभालती गईं सुषमामहिला राजनेताओं में इंदिरा गांधी के बाद उनका नाम हमेशा आदर से लिया जाएगा. विशुद्ध भारतीय लिबास और बड़ी लाल बिंदी में उनकी एक छवि सभी के दिमाग में दर्ज है. उनके बारे में कहा जाता है कि एक महिला नेता होने के साथ साथ वह बेहतरीन विदेश मंत्री भी रहीं.
  • पति, बेटी, पार्टी... कुछ ऐसे एक साथ सब संभालती गईं सुषमासंसद के छठे सत्र में सांसद के तौर पर 15वीं लोक सभा में वह विपक्ष का सबसे मजबूत चेहरा थीं. सन 1977-1982 और 1987-1909 के दौरान दो बार हरियाणा से और 1998 में एक बार दिल्ली से विधायक बनीं. अक्टूबर 1998 में इन्होंने दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री का पद संभाला. सुषमा स्वराज मौजूदा समय में केंद्र में सत्ताधारी भाजपा और विपक्ष की सदस्य दोनों ही भूमिकाओं में अपनी मजबूत पहचान दर्ज करा चुकी हैं

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