‘बटालियन ने किए 10000 राउंड फायर …दुश्‍मन तबाह करना ही था लक्ष्‍य ‘

कारगिल विजय दिवस के मौके पर उस जंग में हिस्‍सा लेने वाले कई सैनिकों ने अपने अनुभवों को साझा किया.

द्रास (जम्‍मू-कश्‍मीर): कारगिल विजय दिवस के मौके पर उस जंग में हिस्‍सा लेने वाले कई सैनिकों ने अपने अनुभवों को साझा किया. इस कड़ी में कारगिल की 1889 मिसाइल रेजीमेंट के नायक दीपचंद ने कहा, ”मेरी बटालियन ने युद्ध के दौरान 10000 राउंड फायर किए. मुझे इस बात पर गर्व है. उस वक्‍त हमारे सामने बस एक ही लक्ष्‍य था-दुश्‍मन को तबाह करना. मैं यहां उन वीरों को श्रद्धांजलि देने आया हूं जो जंग में शहीद हुए.”

इसी तरह आर्मी के डीजी एविएशन लेफ्टिनेंट जनरल कंवल कुमार और 14 कार्प कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाईके जोशी एक साथ तोलोलिंग टॉप पर पहुंचे. कारगिल युद्ध के दौरान टोलोलिंग टॉप पर उन्‍होंने एक साथ उड़ान भरी थी.

जनरल बिपिन रावत ने कहा…
कारगिल विजय दिवस के मौके पर आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि हम पाकिस्‍तानियों को वापस खदेड़ने के लिए इस जंग के लिए मजबूर हुए. उन्‍होंने कहा कि तत्‍कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने सेना से कहा कि इन घुसपैठियों को हटाइए. बस फिर क्‍या था, उन लोगों को हटा दिया गया. ये दर्शाता है कि प्रधानमंत्री ने किस कदर सेना पर भरोसा जताया और सेनाओं ने उनको निराश नहीं किया. आज का दिन उन शहीदों को श्रद्धांजलि देने का है. इसके साथ ही देश को आश्‍वस्‍त करते हुए उन्‍होंने कहा कि भारतीय सैनिकों को चाहें जितना कठिन लक्ष्‍य दिया जाए, वह पूरा किया जाएगा. हमें बस आपके सहयोग की जरूरत है.
पाकिस्‍तान का जिक्र करते हुए उन्‍होंने कहा कि आप जानते हैं कि पाकिस्‍तान किस हालात से गुजर रहा है ,उनके यहां निर्देश कौन देता है, आप वाकिफ हैं. उनकी माली हालत बुरी है और पैसे के लिए कुछ भी करने को तैयार हैं और एक बार उन्हें पैसा मिल गया तो क्या करेंगे आप जानते हैं?

कारगिल के वीरों को नमन
प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और भारतीय सेना ने शुक्रवार को ऑपरेशन विजय में भाग लेने वाले सैनिकों की वीरता को याद करते हुए कारगिल युद्ध की 20वीं वर्षगांठ मनाई. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ट्वीट किया, “कारगिल विजय दिवस, हमारे कृतज्ञ राष्ट्र के लिए 1999 में कारगिल की चोटियों पर अपने सशस्त्र बलों की वीरता का स्मरण करने का दिन है. हम इस अवसर पर, भारत की रक्षा करने वाले योद्धाओं के धैर्य व शौर्य को नमन करते हैं. हम सभी शहीदों के प्रति आजीवन ऋणी रहेंगे. जय हिन्द.”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कारगिल के शहीदों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, “कारगिल विजय दिवस पर मां भारती के सभी वीर सपूतों का मैं हृदय से वंदन करता हूं. यह दिवस हमें अपने सैनिकों के साहस, शौर्य और समर्पण की याद दिलाता है. इस अवसर पर उन पराक्रमी योद्धाओं को मेरी विनम्र श्रद्धांजलि, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया. जय हिंद.”

भारतीय वायु सेना ने कहा, “कारगिल शहीदों को नमन और हमारे वीर सैनिकों के साहस, वीरता और बलिदान को सलाम. भारत की अखंडता को बनाए रखने और उसकी रक्षा करने वाले बहादुर सैनिकों की शहादत को याद करें.”

रक्षा मंत्रालय (सेना) के जन सूचना के अतिरिक्त महानिदेशक ने ट्वीट किया, “साल 1999 में मई-जुलाई तक हुए कारगिल युद्ध के बाद 26 जुलाई कारगिल विजय दिवस के रूप में देश की शानदार जीत की अमरकथा बन गया. भारतीय सेना के सैनिकों ने द्रास, काकसार, बाटलिक और टरटोक सेक्टरों में शानदार युद्ध किया. हमारे शहीदों और नायकों के साहस, वीरता और बलिदान को सलाम.”

2 महीने से ज्यादा चला संघर्ष,  पूरा घटनाक्रम

कारगिल युद्ध में विजय को 20 साल हो गए हैं। हर साल 26 जुलाई को देश में कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। यहां पढ़ें कारगिल युद्ध का पूरा घटनाक्रम।

kargil vijay diwas

कारगिल विजय दिवस

मुख्य बातें

  • कारगिल संघर्ष 2 महीने से ज्यादा समय तक चला
  • कारगिल की ऊंचाई पर घुसपैठियों ने किया था कब्जा
  • भारत ने घुसपैठियों को खदेड़ने के लिए ऑपरेशन विजय चलाया भारत ने 1999 में मई-जुलाई के बीच पाकिस्तान से कश्मीर के करगिल में ये युद्ध लड़ा। 26 जुलाई 1999 को भारत ने कारगिल युद्ध में विजय हासिल की। कारगिल में करीब 18 हजार फीट की ऊंचाई पर ये लड़ाई लड़ी गई। इस जंग में देश ने लगभग 527 से ज्यादा योद्धाओं को खोया वहीं 1300 से ज्यादा घायल हुए थे।

ये संघर्ष 2 महीने से ज्यादा चला। इसकी कैसे शुरुआत हुई, किस दिन क्या-क्या हुआ। कैसे आखिरकार भारत ने विजय हासिल की। जहां जाने कारगिल युद्ध का घटनाक्रम:

3 मई

कारगिल की ऊंची पहाडि़यों पर 5,000 सैनिकों के साथ घुसपैठ।

8-15 मई

सेना के गश्ती दल ने कारगिल की ऊंचाई पर घुसपैठियों का पता लगाया। सेना ने कहा कि 100 घुसपैठिए भारतीय क्षेत्र में 25 किलोमीटर तक कब्जा कर रहे हैं।

25 मई

सेना ने स्वीकार किया कि सुदूर कारगिल-द्रास-बटालिक सेक्टरों में 600-800 पाक घुसपैठियों को रखा गया है। भारत ने दुश्मन पर हमला किया, हवाई हमले किए।

27 मई

भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ मिग-27 और मिग-29 का इस्तेमाल किया। इस दौरान फ्लाइट लेफ्टिनेंट नचिकेता को बंदी बना लिया गया। बचाव मिशन पर LoC पर घूम रहे मिग-21 को गिरा दिया गया। स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा कार्रवाई में शहीद हो गए। श्रीनगर एयरपोर्ट बंद कर दिया गया।

28 मई 

मिग-17 हैलीकॉप्टर पाकिस्तान द्वारा मार गिराया गया और 4 भारतीय फौजी शहीद हुए।

31 मई

प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी कहते हैं कि कारगिल में युद्ध जैसी स्थिति है।

1 जून

कूटनीतिक प्रयास शुरू हुए। फ्रांस, अमेरिका कश्मीर ने घुसपैठ के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराया और नियंत्रण रेखा का सम्मान करने के लिए कहा।

3 जूनपाकिस्तान ने फ्लाइट लेफ्टिनेंट के नचिकेता का भारत को सौंप दिया। उन्हें पाकिस्तान में रेड क्रॉस की अंतरराष्ट्रीय समिति को सौंप दिया गया था और बाद में लाहौर-अमृतसर रोड पर वाघा में भारतीय सीमा चेक पोस्ट पर वापस भेज दिया गया था। तनाव बढ़ रहा था, भारत ने नौसेना को हाई अलर्ट पर रखा था।

6 जून

सेना ने कारगिल और द्रास सेक्टरों में बड़े हमले किए। हवाई हमले भी किए गए। इसके पीछे का कारण श्रीनगर-लेह राजमार्ग को किसी भी पाकिस्तानी खतरे से मुक्त रखने का था।

10 जून

पाकिस्तान ने जाट रेजिमेंट के छह सैनिकों के क्षत-विक्षत शवों को वापस लौटाया। भारत में कोहराम मच गया।

12 जून

नई दिल्ली में पाकिस्तान के विदेश मंत्री सरताज अजीज की प्रधानमंत्री वाजपेयी और विदेश मंत्री जसवंत सिंह के साथ बातचीत हुई। अजीज ने दृढ़ता से कहा कि घुसपैठियों को जाना होगा।

13 जून

भारतीय सेना ने तोलोलिंग चोटी पर कब्जा कर लिया। यह पहली महत्वपूर्ण विजय थी। भारी गोलाबारी के बीच वाजपेयी ने कारगिल का दौरा किया।

15 जून

अमेरिकी राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्रा नवाज शरीफ से कारगिल से बाहर निकलने का आग्रह किया, भारत के संयम की प्रशंसा की। जसवंत ने चीनी नेताओं को जानकारी दी।

20 जून

सैनिकों ने प्वाइंट 5140 पर कब्जा कर लिया, पूरी तोलोलिंग जीत ली गई। जी-8 घुसपैठ को समाप्त करना चाहता थे, उन्होंने पाकिस्तान की निंदा की।

23-27 जून

अमेरिकी जनरल जिन्नी ने इस्लामाबाद का दौरा किया। शरीफ को पीछे हटने का आग्रह किया। चीन और पश्चिम से मदद की उम्मीद करने के बजाय, पाकिस्तान को फटकार लगाई गई। घायल 8 सिख जवानों को टाइगर हिल ऑपरेशन के दौरान गुमरी अस्पताल ले जाया गया।

जुलाई 4

सेना टाइगर हिल से घुसपैठियों को हटाती है। शरीफ वाशिंगटन में क्लिंटन से मिले। कहा जाता है कि घुसपैठियों को तुरंत बाहर निकालें और बातचीत के लिए जाएं। सहमत दिखाई देती है। संयुक्त बयान जारी होता है।

11 जुलाई

पाकिस्तानी घुसपैठिए कारगिल से पीछे हटने लगते हैं। भारत ने बटालिक में प्रमुख चोटियों पर कब्जा कर लिया, कुल निकासी के लिए 16 जुलाई की समय सीमा निर्धारित की गई।

14 जुलाई

भारत ने ऑपरेशन विजय की सफलता की घोषणा की।

26 जुलाई

कारगिल युद्ध का अंत हो गया। भारत ने पाकिस्तानी सैनिकों के पूर्ण निष्कासन की घोषणा की।

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