फैक्ट चैक ,ग्राऊंड रिपोर्ट;’जयश्रीराम’ न कहने पर हुई अब्दुल खालिक की हत्या?

क्या ‘जय श्री राम’ ना बोलने पर हुई अब्दुल ख़ालिक़ की हत्या?: ग्राउंड रिपोर्ट

मॉब लिंचिंग

सोशल मीडिया पर जली हुई हालत में अपनी तहरीर देते एक मुस्लिम युवक का वीडियो इस दावे के साथ शेयर किया जा रहा है कि ‘जय श्री राम का नारा नहीं लगाने पर एक उन्मादी गुंडों ने इस लड़के पर तेल छिड़ककर आग लगा दी’.

इस वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा युवक 16 वर्षीय अब्दुल ख़ालिक़ अंसारी है, जिसकी गंभीर रूप से जलने के कारण वाराणसी (उत्तर प्रदेश) के ट्रॉमा सेंटर में मंगलवार को मौत हो गई.

ख़ालिक़ के पिता ज़ुल्फ़िकार अंसारी के वीडियो भी सोशल मीडिया पर लाखों बार देखे जा चुके हैं जिनमें सुनील यादव समेत तीन अज्ञात लोगों को वो अपने बेटे की मौत का ज़िम्मेदार बताते हैं और दावा करते हैं कि उन्होंने ही उनके बेटे के साथ ज़ोर-ज़बरदस्ती की, उससे अल्लाह को गाली देने को कहा, जय श्री राम के नारे लगाने को कहा और फिर उसे आग के हवाले कर दिया.

अब्दुल ख़ालिक़ के वायरल वीडियो और उनके पिता के बयान के आधार पर मीडिया में इसे ‘मॉब लिंचिंग’ का मामला बताया गया है और इन ख़बरों को सोशल मीडिया पर कई नामी लोगों ने शेयर किया है.

ये बात सही है कि बीते कुछ महीने में देश के अलग-अलग राज्यों में ‘मॉब लिंचिंग’ के कई मामले दर्ज किए गए हैं. जून 2019 में झारखंड के तबरेज़ अंसारी की मॉब लिंचिंग का मामला काफ़ी समय तक सुर्ख़ियों में रहा था.

लेकिन बीबीसी ने जब यूपी के चंदौली ज़िले में हुई ख़ालिक़ अंसारी की कथित मॉब लिंचिंग से जुड़े तथ्यों और दावों पर नज़र दौड़ाई तो ऐसा कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं मिला जिसके आधार पर इसे मॉब लिंचिंग की घटना कहा जा सके.

ये घटना वाराणसी से पूर्व में स्थित चंदौली ज़िले के सैयद राजा कस्बे की है. क़रीब 19 हज़ार की आबादी वाले इस कस्बे में 45 प्रतिशत मुसलमान हैं और बाकी हिंदू परिवार हैं.

ख़ालिक़ अंसारी के साथ हुई इस दुर्घटना के बाद इलाक़े में एक अलग सा तनाव और सुगबुगाहट तो है, लेकिन कस्बे के बड़े लोग यहाँ के इतिहास का हवाला देकर कहते हैं कि सैयद राजा में कभी मुसलमानों और हिंदुओं के बीच टकराव नहीं हुआ.

इसी कस्बे के एक छोर पर स्थित सरकारी स्कूल के दाहिने कोने पर अब्दुल ख़ालिक़ का घर है.

स्कूल की दीवार पर कमर लगाए खड़े ख़ालिक़ के बड़े भाई नूरुद्दीन अंसारी ने अपने घर की देहरी की तरफ इशारे करते हुए कहा, “यहाँ आकर वो चिल्लाया था, अब्बा बचाओ. उसके चिल्लाने की आवाज़ से ही मेरी आँख खुली थी. अम्मी रो रही थीं. अब्बा उसे कपड़ों में लपेटने की कोशिश कर रहे थे. तब मैंने पुलिस को फ़ोन किया.”

“ये 28 जुलाई, सुबह 6 बजे की बात है. उससे पहले क़रीब साढ़े चार बजे अम्मी ने देखा था कि ख़ालिक़ बिस्तर पर नहीं है. तब अब्बा बोले कि वो मैदान गया होगा, आ जाएगा. लेकिन जिस हालत में वो घर लौटा, उसे मैं बयान नहीं कर सकता.”

“उसने हमें बताया कि वो मनराजपुर गाँव के पास दौड़ने गया था. वहाँ चार लोगों ने उसे पकड़ लिया और उस पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा दी. हमने यही जानकारी उन पुलिसवालों को दी थी जो उसे लेने घर आये थे और उसे चंदौली के ज़िला संयुक्त अस्पताल ले गए थे.”

ख़ालिक़ के दावों की पड़ताल

स्थानीय पुलिस के अनुसार जब ख़ालिक़ अंसारी को ज़िला अस्पताल ले जाया जा रहा था, तो उसने कहा था कि घटना मनराजपुर नहीं, बल्कि छतेम के पास हुई. उसके बाद चंदौली ज़िले के पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह के सामने अस्पताल में उसका बयान रिकॉर्ड हुआ तो ख़ालिक़ ने कहा कि घटना भतीजा मोड़ के पास हुई थी.

अब इन तीन जगहों को समझिए. मनराजपुर एक यादव बहुल गाँव है जो अब्दुल ख़ालिक़ के घर से डेढ़ किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है. छतेम उत्तर दिशा में स्थित है और ख़ालिक़ के घर से एक किलोमीटर की दूरी पर है. जबकि भतीजा मोड़ उसके घर से दक्षिण दिशा में स्थित है और इन सबसे दूर है.

यानी तीन बिल्कुल अलग जगहें. मगर ऐसा कैसे हो सकता है? इसके जवाब में ख़ालिक़ की बुआ और उनके भाई नूरुद्दीन कहते हैं, “डॉक्टर ने बताया था कि वो 45 फ़ीसदी जल चुका है. वो बहुत ज़्यादा दर्द में था. ऐसे में हो सकता है कि उसने जगहों के नाम ग़लत लिए हों.”

लेकिन एक नाम जो अब्दुल ख़ालिक़ ने अपने बयान में बार-बार लिया, वो है सुनील यादव.

ख़ालिक़ ने अपने आधिकारिक बयान में कहा था, “चार लोग मोटरसाइकिल पर आये. उनके मुँह ढँके हुए थे. उनमें से एक का नाम मुझे सुनील यादव सुनाई दिया. उन्होंने मुझपर मिट्टी का तेल डालकर माचिस से आग लगा दी.”

अपनी पड़ताल में हमने पाया कि सुनील यादव पास के ही मनराजपुर गाँव में रहते हैं और साल 2016 में अब्दुल ख़ालिक़ के पिता ज़ुल्फ़िकार अंसारी का उनसे झगड़ा हुआ था और बात थाने तक जा पहुँची थी.

इस केस के मुख्य जाँच अधिकारी एसपी सिंह ने बताया, “ख़ालिक़ के बयान के आधार पर और परिवार के पुराने विवाद के चलते हमने सुनील यादव को नज़रबंद तो किया है. लेकिन उनके ख़िलाफ़ इस मामले में एक भी सबूत नहीं मिला है.”

‘जय श्री राम’ का नारा!

चंदौली पुलिस का दावा है कि कैमरे में दर्ज किसी भी बयान में अब्दुल ख़ालिक़ ने ज़बरन ‘जय श्री राम’ के नारे लगवाने की बात नहीं कही थी. ख़ालिक़ के बड़े भाई नूरुद्दीन ने भी इस बात की पुष्टि की है कि घर लौटने के बाद ख़ालिक़ ने सिर्फ़ चार लोगों द्वारा उसे जलाये जाने की बात कही थी.

लेकिन 28 जुलाई की शाम से सोशल मीडिया पर ख़ालिक़ के पिता ज़ुल्फ़िकार अंसारी और उनकी माँ का एक वीडियो सर्कुलेट किया जा रहा है जिसमें वो ये दावा करते हैं कि उनके बेटे ने जब ‘जय श्री राम’ कहने से मना किया, तो उसे ज़िंदा जला दिया गया.

ख़ालिक़ के बड़े भाई के मुताबिक़ ये वीडियो उस वक़्त का है जब ख़ालिक़ ज़िला अस्पताल में भर्ती था. इलाक़े के ही कुछ लोगों ने अपने मोबाइल से यह वीडियो बनाया था जिसे देखकर ऐसा लगता है कि ख़ालिक़ के माता-पिता मीडिया के लोगों से बात कर रहे हैं.

पुलिस के मुताबिक़ ये वीडियो अब्दुल ख़ालिक़ के पड़ोसी जाहिद अंसारी ने बनाया था और इसे सर्कुलेट करने में उसके दोस्त गुड्डू सोनकर और आज़म ने मदद की.

चंदौली के एसपी संतोष कुमार सिंह ने बताया, “तीनों को धार्मिक भवनाएं भड़काने और षड़यंत्र रचने के आरोप में गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया गया है. वीडियो वायरल होने के बाद जाहिद अपने घर से फ़रार हो गया था.”

पुलिस का ये भी दावा है कि इन तीनों ने ही अब्दुल ख़ालिक़ से सुनिल यादव का नाम लेने को कहा था.

ख़ालिक़ को आग कहाँ लगी?

अब्दुल ख़ालिक़ ने मौत से पहले अपने बयान में घटना की जो जगहें बताई थीं, वो उससे बिल्कुल विपरीत दिशा में स्थित एक मज़ार के पास देखा गया था. जिस समय ख़ालिक़ आग के गोले से जूझ रहा था, दिनेश मौर्य नाम के एक अख़बार विक्रेता ने उन्हें देखा था.

दिनेश मौर्य पेशे से किसान हैं और सुबह सैयद राजा कस्बे में अख़बार बाँटने का काम करते हैं. उन्होंने बीबीसी को बताया कि उन्होंने ख़ालिक़ को कस्बे से पश्चिम दिशा में स्थित काले शहीद बाबा की मज़ार के सामने देखा था.

उन्होंने बताया, “रविवार सुबह क़रीब साढ़े चार बजे जब मैं सेंटर से अख़बार लेने के लिए निकला तो मैंने देखा कि एक आदमी आग में लिपटा हुआ बाबा की मज़ार से निकला और नेशनल हाइवे पर दौड़ता हुआ सैयद राजा कस्बे की तरफ चला गया. मज़ार पर उस जलते हुए आदमी के अलावा मैंने किसी और को नहीं देखा.”

ये मज़ार नेशनल हाइवे नंबर दो पर स्थित है और मज़ार के सामने सड़क से दूसरी तरफ़ दिनेश मौर्य का घर है.

जब हमने उनसे पूछा कि वो ख़ालिक़ की मदद के लिए रुके क्यों नहीं, तो उन्होंने कहा, “मैं उसे देखकर डर गया था. मुझे लगा कि कोई पागल है और वो मेरी तरफ न दौड़ आए. वैसे भी इस मज़ार पर जादू-टोना करने वाले आते रहते हैं. लोग कपड़ों में या झंड़ों में आग लगाकर हाइवे पर दौड़ते भी हैं. इसलिए मैं वहाँ नहीं रुका.”

जादू-टोने से जुड़े दावे

स्थानीय लोगों ने बताया कि इलाक़े में इस मज़ार की बहुत पुरानी मान्यता है और सिर्फ़ मुसलमान नहीं, बल्कि हिंदू परिवार भी मानते हैं कि यहाँ बृहस्पतिवार को चादर चढ़ाने से मुरादें पूरी होती हैं.

कुछ लोगों का दावा है कि टोना-टोटका करने वाले लोग भी इस मज़ार पर आते जाते हैं.

स्कूल में अब्दुल ख़ालिक़ के साथ पढ़ने वाले उनके एक दोस्त ने अपनी पहचान ज़ाहिर न करने की शर्त पर बताया कि ख़ालिक़ पाँच वक़्त का नमाज़ी था. वो बहुत ही नेक इंसान था. लोगों से कम बात करता था और बाबा की मज़ार पर अक्सर जाया करता था.

चंदौली के पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार सिंह ने बीबीसी को बताया, “पुलिस को ऐसे लोग मिले हैं जिन्होंने दावा किया है कि ख़ालिक़ तांत्रिक विद्या सीखना चाहता था.” बीबीसी पुलिस के इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है.

उधर, ख़ालिक़ के भाई नूरुद्दीन को पुलिस के इन दावों पर विश्वास नहीं हो रहा.

हमने उनसे पूछा कि क्या उन्हें लगता है कि ख़ालिक़ परिवार से कुछ छिपा रहा था? तो उन्होंने कहा, “वो घर से निकला. किधर गया हमें नहीं पता. सब सोए हुए थे. लेकिन मेरा भाई ऐसा नहीं कर सकता. उसने हमें बताया था कि चार अज्ञात लोगों ने उसे जलाया. ज़रूर उसके साथ कुछ ग़लत हुआ है.”

उन्होंने कहा, “सोमवार दोपहर को हमें लगा था कि ख़ालिक़ 40 परसेंट से ज़्यादा जल चुका है, फिर भी वो कुछ वक़्त में ठीक हो जायेगा. लेकिन मीडिया वाले उसके मुँह में माइक घुसाये रहे. डॉक्टर ने कहा कि इन्फ़ेक्शन बढ़ गया है और मंगलवार सुबह उसने दम तोड़ दिया. वो होता तो कुछ चीज़ों और स्पष्ट होतीं.”

सीसीटीवी फ़ुटेज

ख़ालिक़ के पिता ज़ुल्फ़िक़ार अंसारी एक पेशेवर बुनकर हैं और दरियाँ बुनने का काम करते हैं. उन्होंने अपने बयान में दावा किया कि हर रोज़ की तरह उनका बेटा सुबह दौड़ने गया था. उसकी दिली तमन्ना थी कि वो फ़ौज में भर्ती हो. इसलिए वो 5 बजे प्रैक्टिस के लिए जाता था.

लेकिन ख़ालिक़ के घर से चार घर छोड़कर रहने वाले गणेश मौर्य दावा करते हैं कि उन्होंने ख़ालिक़ को सुबह सवा तीन बजे सैयद राजा बाज़ार की तरफ़ जाते देखा था.

गणेश ने बताया, “मेरे दोस्त असलम ने मुझे फ़ोन करके बुलाया था. उसकी भैंस को कोई परेशानी थी. मैं घर से निकला तो मैंने ख़ालिक़ को अकेले बाज़ार की ओर जाते देखा. मुझे लगा इतनी रात में ये लड़का बाज़ार की तरफ क्यों जा रहा है. पर मैंने उससे कुछ पूछा नहीं. आगे जाकर वो रेलवे ट्रैक की तरफ मुड़ गया.”

बाबा की मज़ार और अब्दुल ख़ालिक़ के घर के बीच जो प्रमुख रास्ता है, उसपर पड़ने वाली एक दुकान के बाहर लगा सीसीटीवी कैमरा गणेश की बात की पुष्टि करता है.

इस कैमरे की फुटेज में रात के 3 बजकर 21 मिनट पर ख़ालिक़ मज़ार की तरफ़ जाते हुए दिखता है.

फिर 5 बजकर 44 मिनट पर इसी कैमरे में जली हुई स्थिति में अब्दुल ख़ालिक़ पैदल अपने घर की तरफ लौटता हुआ दिखाई पड़ता है.

मज़ार से कुछ मीटर की दूरी पर पुलिस को ख़ालिक़ की जली हुई कमीज़ का कॉलर और उनके आर्मी कलर की पैंट के टुकड़े मिले हैं जो उनकी बुआ के अनुसार ख़ालिक़ की सबसे पसंदीदा पेंट थी.

जाँच अधिकारी ने बताया कि ख़ालिक़ के चप्पलों का जोड़ा मज़ार के गेट के बाहर एक जगह पर रखा हुआ मिला जिसे इस तरह से देखा जा रहा है कि ख़ालिक़ ख़ुद यहाँ तक आया और मज़ार के भीतर गया. उसे यहाँ लाने के लिए ज़बरदस्ती नहीं की गई.

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