मेरठ । पाकिस्तान इंटेलिजेंस ऑपरेटिव (पीआइओ) के लिए जासूसी करते पकड़ा गया सैनिक आठ बार पाकिस्तान को सूचनाएं भेज चुका है। जासूसी का मामला सामने आने के बाद मेरठ छावनी में दिनभर गहमागहमी रही। सभी सैन्य इस्टेब्लिशमेंट में वरिष्ठ अधिकारियों ने घटनाक्रम पर चर्चा की। सिग्नल रेजिमेंट से लेकर सेना मुख्यालय तक मामले की गूंज पहुंची। सेना की सभी एजेंसियों के साथ ही प्रदेश व केंद्र सरकार की एजेंसियां भी पड़ताल में जुट गई हैं।

दस महीने से कर रहा था जासूसी
उत्तराखंड के बागेश्वर का रहने वाले सैनिक कंचन सिंह को सेना पुलिस ने जासूसी के आरोप में पकड़ा है। मेरठ छावनी में दो साल से कंचन की तैनाती है। वह चार्जिंग रैम डिवीजन के इंटर डिवीजन सिग्नल रेजिमेंट (आइडीएसआर) में सिग्नलमैन के पद पर कार्यरत है। आइडीएसआर में तैनाती के पहले वह इसी डिवीजन की एक ब्रिगेड में तैनात था। ब्रिगेड के अंतर्गत सेना की तीन बटालियन तैनात होती हैं। इस लिहाज से दुश्मन एजेंसी के लिए जासूसी करते पकड़ा जाना सेना के लिए अधिक गंभीर विषय बन गया है।
दस साल से है सेना में
कंचन दस साल से भारतीय सेना में कार्यरत है। पिछले दस महीन से वह पाकिस्तान के संपर्क में था। कंचन को सेना पुलिस ने नौ अक्टूबर को ही अपनी गिरफ्त में ले लिया था।
रणनीतिक दस्तावेज की हो रही तलाश
सेना की जांच सबसे पहले पिछले 10 महीनों के दौरान कंचन और पाकिस्तान के बीच संपर्क के इर्द-गिर्द चल रही है। कंचन सिंह ने बातचीत और दस्तावेजों को भेजने के समय में कुछ अंतराल रखा है। प्राथमिक तौर पर करीब आठ बार उसके दस्तावेज भेजने और इससे अधिक बार बातचीत की जानकारी मिली है। दस्तावेजों की रिकवरी के साथ ही बातचीत के अंश भी निकाले जा रहे हैं। सेना के लिए रणनीतिक दस्तावेज बेहद अहम होते हैं। उसी रणनीति के आधार पर ही सेना के तमाम यूनिटों की जगह-जगह पर तैनाती होती है।

मोबाइल फोन खंगाल रही
सेना कंचन के मोबाइल फोन से हुए पुरानी बातचीत व दस्तावेजों के आदान-प्रदान के रिकॉर्ड को निकाल रही है। उसकी किन-किन पाकिस्तानी नंबरों पर बात हुई और किसे दस्तावेज भेजे गए, ये रिकॉर्ड निकाले जा रहे हैं। निजी कंप्यूटर व अन्य उपकरणों की आइटी विशेषज्ञ जांच कर रहे हैं। गैजेट्स से निकाली गई ये जानकारियां आइटी एक्ट में उसके खिलाफ सुबूत के तौर पर भी पेश की जाएंगी।
खंगाल रहे बैंक खाते
जासूसी के एवज में पाकिस्तानी एजेंसी की ओर से मोटी रकम दिए जाने की आशंका में सेना पकड़े गए जासूस के बैंक खातों की जांच कर रही है। प्राथमिक तौर पर बैंक खाते में मिले कुछ अनियमित ट्रांजेक्शन की जांच शुरू की गई है। कंचन के परिजनों के बैंक खातों को भी जांच के दायरे में रखा जा रहा है। इसके साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि सैनिक ने जासूसी केवल रुपयों के लिए की है या फिर उसे किसी तरह के हनी ट्रैप में फंसा कर यह काम कराया जा रहा है।
बागेश्वर में ही हुई पढ़ाई
मूल रूप से बागेश्वर निवासी कंचन सिंह की पूरी पढ़ाई बागेश्वर में ही हुई है। राजकीय इंटर कालेज में स्कूली शिक्षा पूरी करने के बाद वहीं गवर्नमेंट पीजी कालेज से स्नातक की पढ़ाई की। कंचन के पुकार के नाम कांचू का जिक्र जांच में आ रहा है।
पिछली तैनातियों के कृत्य भी खंगाले जा रहे 
आर्मी इंटेलिजेंस से मिली जानकारी के आधार पर सेना पुलिस ने पिछले दिनों पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी पीआइओ के लिए जासूसी करने के आरोप में कंचन को पकड़ा। यह पहला मामला है जिसमें एक सैनिक पाकिस्तानी एजेंसी के लिए जासूसी करते हुए पकड़ा गया। प्राथमिक जांच में सेना को कुछ और भी नाम मिले हैं जिनसे पूछताछ चल रही है। साथ ही पकड़े गए सैनिक कंचन सिंह की पिछली तमाम तैनातियों के दौरान उसकी गतिविधियों को गंभीरता से देखा जा रहा है। जांच में ब्रम्होस से संबंधित जासूसी मामले को भी खंगाला जा रहा है। हालांकि ब्रम्होस से अब तक कोई लिंक नहीं मिला है।
एटीएस भी करेगी छानबीन
मेरठ में सेना के एक जवान के जासूसी में पकड़े जाने के बाद आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) भी सक्रिय हो गया है। पता लगाया जा रहा है कि जवान ने किस स्तर की सूचनाएं पाकिस्तान को लीक की हैं। हालांकि मामला सेना से जुड़े होने के नाते जांच एजेंसी सीधे कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी। उल्लेखनीय है कि मेरठ छावनी स्थित एक सिग्नल रेजीमेंट में कार्यरत जवान को जासूसी के मामले में पकड़ा गया है। एटीएस लंबे समय से पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आइएसआइ के संपर्क में आये सुरक्षा संगठनों से जुड़े लोगों के बारे में छानबीन कर रही है। बीते दिनों एटीएस ने बीएसएफ के जवान अच्युतानंद मिश्र को भी जासूसी के मामले में पकड़ा था। बीएसएफ जवान हनीट्रैप का शिकार हुआ था। जिसके बाद से एटीएस सोशल मीडिया नेटवर्क पर खास नजर रख रही है।