तो यह है कश्मीर में ताजा हलचल की वजह

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल

आतंकी खतरे पर अतिरिक्त फोर्स की तैनाती, एनएसए डोभाल ने ली अफसरों की बैठक, पाकिस्तानी आतंकवादी जम्मू-कश्मीर में बड़े हमले को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं. यही वजह है कि कश्मीर घाटी में अर्धसैनिक बलों की 100 कंपनियां तैनात की गई हैं.

नई दिल्ली, 28 जुलाई ! जम्मू-कश्मीर पर बड़े आतंकी हमले का खतरा मंडरा रहा है. इस खतरे के मद्देनजर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने काउंटर टेररिस्ट ग्रिड की अहम बैठक की. सूत्रों की मानें तो सुरक्षा एजेंसियों के पास आतंकी हमले का इनपुट है. इस इनपुट के मुताबिक, पाकिस्तानी आतंकवादी समूह जम्मू-कश्मीर में बड़े हमले को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं. यही वजह है कि कश्मीर घाटी में अर्धसैनिक बलों की 100 कंपनियां तैनात की गई हैं.

कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ जारी है जिसके खिलाफ सुरक्षा बल मुस्तैदी से डटे हुए हैं और कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं. शनिवार को शोपियां में सुरक्षा बलों ने दो आतंकियों को ढेर कर दिया. मारे गए दो आतंकवादियों में से एक जैश-ए-मुहम्मद (जेईएम) का पाकिस्तानी आतंकवादी मुन्ना लाहौरी था. वह आईईडी बनाने में माहिर था.पुलिस की ओर से जारी किए गए बयान के अनुसार, बोनबाजार क्षेत्र में मुठभेड़ में मारा गया दूसरा आतंकवादी जीनातुल इस्लाम कश्मीरी था. वह तुर्कवांगम गांव का था. मारे गए दोनों आतंकवादी संगठन जेईएम से जुड़े थे. मारा गया जैस आतंकवादी मुन्ना लाहौरी, 30 मार्च को बनिहाल में सुरक्षा बल के काफिले पर बमबारी करने और 17 जून को पुलवामा के अरिहाल में एक सेना के वाहन को विस्फोट से उड़ाने का जिम्मेदार था.शुक्रवार को गृह मंत्रालय ने एक बयान जारी किया था जिसके मुताबिक घाटी में सीआरपीएफ की 50, बीएसएफ की 10, एसएसबी की 30, आईटीबीपी की 10 कंपनियां तैनात की जाएंगी.सुरक्षाबल कश्मीर

बता दें कि आतंकवादी 15 अगस्त या उसके आसपास आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की फिराक में रहते हैं. कई बार आतंकियों ने घाटी के रास्ते देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकी हमले को अंजाम देने का प्लान तैयार किया, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने नाकाम कर दिया. घाटी में आतंकवादी गतिविधियों को देखते हुए नरेंद्र मोदी सरकार कोई जोखिम मोल लेना नहीं चाहती.

कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ जारी है जिसके खिलाफ सुरक्षा बल मुस्तैदी से डटे हुए हैं और कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं. शनिवार को शोपियां में सुरक्षा बलों ने दो आतंकियों को ढेर कर दिया. मारे गए दो आतंकवादियों में से एक जैश-ए-मुहम्मद (जेईएम) का पाकिस्तानी आतंकवादी मुन्ना लाहौरी था. वह आईईडी बनाने में माहिर था.

 इस वजह से अजीत डोभाल के घाटी दौरे को रखा गया था सीक्रेट

अजीत डोभाल दो दिन के दौरे पर श्रीनगर पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठक की थी.

 राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल के बिना किसी पूर्व जानकारी के घाटी पहुंचने के बाद अलग-अलग तरह के कयास लगाए गए. कोई उनके दौरे को अनुच्छेद 35ए से जोड़ रहा था तो किसी ने अनुमान लगाया था कि कश्मीर में कुछ बड़ा होने वाला है. इन सभी खबरों के बीच अब खुलासा किया गया है कि घाटी में एक बड़े आतंकी हमले के खतरे को देखते हुए एनएसए अजीत डोभाल ने सभी सुरक्षा एजेंसियों के साथ बैठक की थी. इसी के साथ घाटी में सेना बढ़ाए जाने के निर्णय को आतंकी हमले की सूचना को देखते हुए मात्र सेना को मजबूत करना बताया गया है.इसी कारण पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अपनी बेचैनी दर्शाते हुए कहा था कि भारी बल तैनाती से कश्मीरी डर रहा है ! उन जैसों की बेचेनी की वजह भी साफ ही है ! पाक आतंकियों की न चल पाई तो महबूबा मुफ्ती जैसों की राजनीति कहां रहेगी ?पीडीपी अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती ने इस फ़ैसले के लिए केंद्र सरकार की आलोचना की. उन्होंने कहा कि कश्मीर एक राजनीतिक मसला है और इसके लिए राजनीतिक समाधान की ज़रूरत है.महबूबा मुफ़्ती ने कहा, “केंद्र सरकार के इस फ़ैसले से घाटी के लोगों में खौफ़ का माहौल है. कश्मीर में और ज़्यादा सुरक्षाबलों की कोई ज़रूरत नहीं है. जम्मू-कश्मीर एक राजनीतिक समस्या है जिसका सैन्य समाधान नहीं है. भारत सरकार को अपनी नीति पर फिर से विचार करना होगा.”

जेके पीपल्स मूवमेंट के अध्यक्ष शाह फैज़ल ने कहा कि हमें चिंता है कि अगर जल्दबाज़ी में कुछ निर्णय लिया गया तो कश्मीर के हालात बिगड़ सकते हैं.उन्होंने कहा, “जब से सोशल मीडिया पर सर्कुलर शेयर होना शुरू हुआ है तब से हर कोई डर में है. मैंने आज एयरपोर्ट पर देखा है और लोगों लगता है कि हालात ख़राब हो सकते हैं और कश्मीर में कुछ बड़ा हो सकता है. कश्मीर एक संघर्ष क्षेत्र है जहां अफ़वाहें बहुत आसानी से फैलती हैं. यह एक अजीब स्थिति है. अभी तक किसी वरिष्ठ अधिकारी का बयान भी नहीं आया है जिससे की अफ़वाहों को शांत किया जा सके.”

उनसे ये पूछने पर कि किस तरह की चिंताएं हैं तो शाह फैज़ल ने कहा, “पिछले कुछ महीनों में कई चर्चाएं हुई हैं. जम्मू-कश्मीर की विशेष स्थिति को ख़त्म किया जा सकता है. हाल ही में इस मुद्दे पर चर्चा भी की गई थी. यह भी कहा जा रहा है कि सरकार कोई असाधारण क़दम भी उठा सकती है. लेकिन, हमारा मानना है कि ऐसे संवैधानिक मामले जल्दी में नहीं सुलझ सकते.”

अतिरिक्त सुरक्षाबल भेजने के फ़ैसले के आरोप की आलोचना करते हुए पूर्व एमएलए और आवामी इत्तेहाद पार्टी के अध्यक्ष इंजीनियर राशिद ने कहा, “कश्मीर में सुरक्षाबलों का आना कोई नहीं बात नहीं है. लेकिन, जिस उद्देश्य के लिए वो आ रहे हैं, वो चिंताजनक है. हमने यहां पकड़ो और मारों की नीति देखी है. हमने यहां लोगों को मरते देखा है. यहां कई अज्ञात कब्रें हैं.”

इंजीनियर राशिद कहते हैं, “कश्मीर के लोग कश्मीर की समस्या के समाधान के बारे में बात करते हैं. अगर कश्मीरियों के पास 25 पैसे हैं तो वो एक रुपये की मांग कर रहे हैं लेकिन केंद्र सरकार का कहना है कि वो 25 पैसे भी वापस दे दो. मैं भारत सरकार से अपील करता हूं कि कोई बचकाना क़दम न उठाए. इन तरीकों से कश्मीरियों को नहीं दबाया जा सकता.”

‘मन में डर बैठ जाता है’

कश्मीर में आम लोग अतिरिक्त सुरक्षाबलों के आने के फ़ैसले से डरे हुए हैं. लोगों का कहना है कि उन्हें नहीं पता कि क्या होने वाला है.

अब्दुल अहद ने बीबीसी हिंदी को बताया, “कोई नहीं जानता की क्या होने वाला है. यहां तक कि हमारे दो पूर्व मुख्यमंत्रियों को भी नहीं पता कि आगे क्या होगा. हम आम लोगों ने बस सुना है कि अतिरिक्त सुरक्षाबल भेजे जा रहे हैं जो हमारे लिए चिंता की बात है. ऐसे हालात में लोगों के मन में डर बैठ जाता है. अगर कुछ होने वाला है तो सरकारी अधिकारियों को इस बारे में स्पष्ट रूप से बताना चाहिए क्योंकि ये उनकी जिम्मेदारी है.”

अमिता शाह, कश्मीर

‘ये एक नियमित प्रक्रिया है’

हालांकि, बीजेपी की जम्मू-कश्मीर इकाई ने अनुच्छेद 35ए हटाने की ख़बरों को साफ़ तौर पर ख़ारिज कर दिया है. उनका कहना है कि अतिरिक्त सुरक्षाबल चुनाव को देखते हुए भेजे जा रहे हैं.

बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र रैना ने पत्रकारों को बताया, “यह फ़ैसला चुनाव को लेकर किया गया है. आने वाले दिनों में राज्य में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं और इसके लिए अतिरिक्त सुरक्षाबलों की ज़रूरत होगी. महबूबा मुफ़्ती और उमर अब्दुल्लाह ट्वीट करके डर पैदा कर रहे हैं. ऐसा कुछ नहीं है. आपको चिंता करने की ज़रूरत नहीं है.”

इस मामले में शीर्ष सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह एक नियमित प्रक्रिया है.

सुरक्षाबल कश्मीर

इंस्पेक्टर जनरल सीआरपीएफ रविदीप साही ने श्रीनगर में एक समारोह के दौरान एक सवाल के जवाब में कहा, “सुरक्षाबलों का आना और जाना एक निरंतर प्रक्रिया है. क़ानून व्यवस्था और चरमपंथ विरोधी ऑपरेशन को मजबूत करने की ज़रूरत महसूस हुई है. यह नियमित तौर पर होता रहता है.”पिछले दो सालों में भारत की सुरक्षा एजेंसियों ने कई अलगाववादी नेताओं, कार्यकर्ताओं और व्यापारियों को आतंकी फंडिंग के आरोप में गिरफ़्तार किया है.हाल ही में, अपने दो दिवसीय कश्मीर दौरे पर गृह मंत्री अमित शाह ने कहा था कि आतंकवाद और अलगाववाद को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है.

बताया जाता है कि खुफिया जानकारी मिली है कि कश्मीर घाटी में पाकिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों द्वारा एक बड़े आतंकवादी हमले की योजना बनाई जा रही है. खुफिया जानकारी को देखते हुए कश्मीर में अर्धसैनिक बलों की संख्या बढ़ाई जा रही है.
बताया जाता है कि अजीत डोभाल दो दिन के दौरे पर श्रीनगर पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने सुरक्षा व खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों के साथ अलग-अलग बैठक की थी. इस दौरान उन्होंने कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था का भी जायजा लिया. डोभाल के इस दौरे को काफी सीक्रेट रखा गया था. बताया जाता है कि श्रीनगर पहुंचने से कुछ घंटे पहले ही अधिकारियों को एनएसए के पहुंचने की जानकारी दी गई थी.

तो इस वजह से अजीत डोभाल के घाटी दौरे को रखा गया था सीक्रेट                                                                                         तो इस वजह से अजीत डोभाल के घाटी दौरे को रखा गया था सीक्रेट

जम्मू-कश्मीर पर बड़े आतंकी हमले का खतरा मंडरा रहा है. इस खतरे के मद्देनजर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल ने काउंटर टेररिस्ट ग्रिड की अहम बैठक की. सूत्रों की मानें तो सुरक्षा एजेंसियों के पास आतंकी हमले का इनपुट है. इस इनपुट के मुताबिक, पाकिस्तानी आतंकवादी समूह जम्मू-कश्मीर में बड़े हमले को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं. यही वजह है कि कश्मीर घाटी में अर्धसैनिक बलों की 100 कंपनियां तैनात की गई हैं.

शुक्रवार को गृह मंत्रालय ने एक बयान जारी किया था जिसके मुताबिक घाटी में सीआरपीएफ की 50, बीएसएफ की 10, एसएसबी की 30, आईटीबीपी की 10 कंपनियां तैनात की जाएंगी.

घाटी दौरे पर इनसे मिले थे डोभाल
अजीत डोभाल ने राज्यपाल के सलाहकार के विजय कुमार, डीजीपी दिलबाग सिंह, मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम, आईजी एसपी पाणि से मुलाकात की. कश्मीर दौरे पर पहुंचे एनएसए ने इस दौरान आईबी के आलाधिकारियों से भी मुलाकात की. डोभाल ने इस दौरान किन मुद्दों पर चर्चा की इसकी कोई जानकारी अभी तक हाथ नहीं लगी है.बता दें कि आतंकवादी 15 अगस्त या उसके आसपास आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने की फिराक में रहते हैं. कई बार आतंकियों ने घाटी के रास्ते देश के विभिन्न हिस्सों में आतंकी हमले को अंजाम देने का प्लान तैयार किया, जिसे सुरक्षा एजेंसियों ने नाकाम कर दिया. घाटी में आतंकवादी गतिविधियों को देखते हुए नरेंद्र मोदी सरकार कोई जोखिम मोल लेना नहीं चाहती.

कश्मीर में आतंकियों की घुसपैठ जारी है जिसके खिलाफ सुरक्षा बल मुस्तैदी से डटे हुए हैं और कड़ी कार्रवाई कर रहे हैं. शनिवार को शोपियां में सुरक्षा बलों ने दो आतंकियों को ढेर कर दिया. मारे गए दो आतंकवादियों में से एक जैश-ए-मुहम्मद (जेईएम) का पाकिस्तानी आतंकवादी मुन्ना लाहौरी था. वह आईईडी बनाने में माहिर था.

पुलिस की ओर से जारी किए गए बयान के अनुसार, बोनबाजार क्षेत्र में मुठभेड़ में मारा गया दूसरा आतंकवादी जीनातुल इस्लाम कश्मीरी था. वह तुर्कवांगम गांव का था. मारे गए दोनों आतंकवादी संगठन जेईएम से जुड़े थे. मारा गया जैस आतंकवादी मुन्ना लाहौरी, 30 मार्च को बनिहाल में सुरक्षा बल के काफिले पर बमबारी करने और 17 जून को पुलवामा के अरिहाल में एक सेना के वाहन को विस्फोट से उड़ाने का जिम्मेदार था.

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