जीडीपी के हर बिंदु पर जवाब देगी सरकार

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नई दिल्ली  13 जून(अरूप रायचौधरी ) !प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी-पीएम) भारत के पूर्व मुख्य आर्थिक

सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यनपूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमण्यन के लिए इमेज परिणाम के उस बयान का बिंदुवार जवाब देने की तैयारी कर रही है, जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत के सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 2011-16 के दौरान 6.9 प्रतिशत के बजाय वास्तव में औसतन 4.5 प्रतिशत रही है। ईएसी-पीएम ने कहा है कि वह सुब्रमण्यन के शोध पत्र का विस्तार से अध्ययन करेगी और बाद में इसका बिंदुवार खंडन जारी करेगी। एक बयान में ईएसी-पीएम ने यह भी कहा है कि जीडीपी की गणना के तरीके व अन्य डेटा को लेकर किसी भी एकेडमिक बहस को सनसनीखेज तरीके से पेश किए जाने की जरूरत नहीं है। à¤¸à¤•à¤² घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के बारे में अनुमान के लिए इमेज परिणाम

ईएसी-पीएम के एक आधिकारिक बयान में कहा गया है, ‘एक उचित एकेडमिक बहस को सनसनीखेज तरीके से पेश करने की कवायद की कोई जरूरत नहीं है। यह स्वतंत्रता और भारत की सांख्यिकीय व्यवस्था के संरक्षण का मामला है, जिसके बारे में पूर्व सीईए को जानकारी है।’  इसमें कहा गया है, ‘निश्चित रूप से डॉ सुब्रमण्यन ने इन मसलों को सीईए के रूप में काम करते हुए भी उठाया होगा, जिसके बारे में उनकी अपनी मान्यता है, उन्होंने भारत की वृद्धि के आंकड़ों को समझने में वक्त लिया होगा और अभी भी अनिश्चय है।’
वास्तविक क्षेत्रों के 17 विभिन्न आर्थिक संकेतकों के डेटा के विश्लेषण करके तैयार किए गए एक शोध पत्र में सुब्रमण्यन ने कहा है कि भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 2011-2016 के बीच 3.5 से 5.5 प्रतिशत के बीच रही है, न कि 6.9 प्रतिशत, जैसा कि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने अनुमान लगाया है। उन्होंने कहा है कि जीडीपी की नई शृंखला में वास्तविक जीडीपी वृद्धि 2.5 प्रतिशत को बढ़ा चढ़ाकर दिखाया गया है।  इसकी वजह से भारत के जीडीपी के आंकड़ों को लेकर नए सिरे से बहस छिड़ गई है और इस से एक बार फिर लेखा जोखा को लेकर खामियां उजागर हुई हैं।
सुब्रमण्यन ने आउटपुट वॉल्यूम आधारित आंकड़ों का विश्लेषण किया है, जिसमें औद्योगिक उत्पादन सूचकांक, निर्यात और आयात, पर्यटकों की आवक, ऑटो सेल्स, विमान यात्रियों की संख्या व बिजली व पेट्रोलियम की खपत के साथ अन्य सूचकों का इस्तेमाल कर अपना दावा प्रस्तुत किया है। उन्होंने यह कहकर अपना शोध पत्र पूरा किया है कि जीडीपी की गणना के पूरे तरीके और अनुमान पर एक स्वतंत्र कार्यबल को विचार करना चाहिए। à¤¸à¤•à¤² घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के बारे में अनुमान के लिए इमेज परिणाम
अनुमान में उत्पादकता, गुणवत्ता को छोड़ दिया गया: सीआईआई
आर्थिक वृद्धि के आंकड़े विश्वसनीयता को लेकर ताजा बहस के बीच उद्योग मंडल सीआईआई ने बुधवार को कहा कि पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) अरविंद सुब्रमण्यन ने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) वृद्धि के बारे में जो अनुमान लगाए हैं उनमें उत्पादकता और गुणवत्ता को छोड़ दिया और वे केवल मात्रा पर आधारित है। इस बारे में अपनी टिप्पणी में सीआईआई के महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था जटिल है और केवल कुछ गिनती के संकेतकों के आधार पर उसका आकलन नहीं किया जा सकता। बनर्जी ने कहा, ‘ऐसा लगता है कि आर्थिक वृद्धि अनुमान में पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार ने उत्पादकता और गुणवत्ता को भुला दिया और केवल मात्रा पर गौर किया। जीडीपी आंकड़े को अधिक मजबूत और व्यापक रुख के साथ लेना होता है जिसमें वृद्धि को गति देने वाले सभी तत्व शामिल हों।’  उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था में 16-17 प्रतिशत का योगदान है लेकिन इसे अध्ययन में शामिल नहीं किया। वहीं जीडीपी में 50 प्रतिशत से अधिक योगदान देने वाला सेवा क्षेत्र को पर्याप्त रूप से नहीं दर्शाया गया है। बनर्जी के अनुसार हाल के वर्षों में आईटी तथा दूरसंचार क्षेत्रों अर्थव्यवस्था का सर्वाधिक गतिशील हिस्सा है। यह भी नदारद है। वहीं ग्रामीण सड़क जैसे कई ढांचागत क्षेत्रों ने कई साल तक दहाई अंक में वृद्धि हुई है लेकिन रिपोर्ट में यह गायब है।
बीते वित्त वर्ष में एनपीए घटकर 9.3 प्रतिशत पर : क्रिसिल

एनपीए के लिए इमेज परिणामक्रिसिल की यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जबकि ज्यादातर बैंक एनपीए के ‘दर्द’ की सीमा से गुजर चुके हैं और अब वे इसके निपटान पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

क्रिसिल ने सोमवार को एक नोट में कहा, ‘‘प्रणाली के स्तर पर वित्त वर्ष 2018-19 के अंत तक एनपीए घटकर 9.3 प्रतिशत पर आ गया, जो मार्च, 2018 के अंत तक 11.5 प्रतिशत था।

रिपोर्ट में कहा गया है कि मार्च, 2015 के बाद पहली बार सार्वजनिक और निजी क्षेत्र दोनों के बैंकों के सकल एनपीए अनुपात में गिरावट आई है। रिजर्व बैंक के दबाव की वजह से डूबे कर्ज की पहचान का काम तेज₨ हुआ है। केंद्रीय बैंक चाहता है कि बैंकों का बही खाता उनके दबाव की सही तस्वीर दिखाए।

 मुद्रा लोन योजना को लेकर बुरी खबर, गुजरात में एनपीए 34 प्रतिशत बढ़ा,10,085 करोड़ रुपए पर पहुंचा कुल बकाया कर्ज

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी योजना मुद्रा लोन योजना को लेकर उनके गृह राज्य गुजरात से बुरी खबर आई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात में मुद्रा लोन योजना के तहत दिए गए कर्ज के गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए ) बनने के मामले बढ़े हैं। राज्य में बैंकों की रिपोर्ट के अनुसार छोटी इकाइयों को मुद्रा योजना के तहत दिए गए कर्ज के एनपीए बनने के मामले में मार्च तिमाही में 34 प्रतिशत का उछाल आया है।

2015 में शुरू हुई थी प्रधानमंत्री मुद्रा योजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (पीएमएमवाई) 2015 में शुरू की थी। इस योजना के तहत छोटे कारोबारियों को 10 लाख रुपए तक के कर्ज उपलब्ध कराए गए हैं। राज्य स्तरीय बैंक समिति (एसएलबीसी) की रिपोर्ट के अनुसार, इस योजना के तहत फंसा कर्ज मार्च तिमाही में 131.45 करोड़ रुपए बढ़कर 516.32 करोड़ रुपए पहुंच गया। यह दिसंबर, 2018 को समाप्त तिमाही के मुकाबले 34 प्रतिशत अधिक है। एसएलबीसी के अनुसार मार्च 2019 को समाप्त तिमाही के दौरान मुद्रा योजना के तहत राज्य में कुल बकाया कर्ज 16 प्रतिशत बढ़कर 10,085.04 करोड़ रुपए रहा जो दिसंबर 2018 को समाप्त तिमाही में 8,671.15 करोड़ रुपए था।

वित्त वर्ष 2018-19 में 6,595 करोड़ का वितरण 

रिपोर्ट में कहा गया है कि गुजरात में वित्त वर्ष 2018-19 में मुद्रा लोन योजना के तहत 8,083 करोड़ रुपए के वितरण का लक्ष्य रखा गया था। इस अवधि में राज्य में 6,595 करोड़ रुपए का वितरण किया गया है जो लक्ष्य का 81.59 फीसदी है। इस योजना का मकसद छोटे कारोबारियों को 10 लाख रुपए तक कोलेटरल फ्री लोन देना था। इसमें तीन कैटेगरी-शिशु (50 हजार रुपए तक), किशोर (50 हजार से पांच लाख रुपए तक) और तरुण (10 लाख रुपए) बनाई गई थीं। इसमें सबसे ज्यादा एनपीए शिशु कैटेगरी में हुआ है। राज्य के कुल 516.32 करोड़ रुपए के एनपीए में से 209.87 करोड़ रुपए का एनपीए शिशु कैटेगरी में है। इसके बाद 192.60 करोड़ का एनपीए किशोर और 113.86 करोड़ का एनपीए तरुण कैटेगरी में है।

9.3 फीसदी पर आया एनपीए: रिपोर्ट

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने कहा है कि मार्च 2019 को समाप्त तिमाही में कुल एनपीए घटकर 9.3 फीसदी आ गया है। एनपीएम में यह गिरावट भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अनुमान से भी ज्यादा है। पिछले साल समान अवधि में कुल एनपीए 11.5 फीसदी था। क्रिसिल की यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब अधिकांश बैंक एनपीए के बोझ तले दबे हैं और इससे छुटकारा पाने के लिए समाधान प्रक्रिया पर फोकस कर रहे हैं।

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