गुरु रामदास का जन्म और नोबेल पुरस्कार विजेता नाटककार जार्ज बर्नार्ड शा का देहावसान हुआ था आज

2 नवंबर का इतिहास

आज हम 2 नवंबर की यानि आज के इतिहास के महत्वपूर्ण घटनाओं पर एक बार फिर से नज़र डालेंगे.

2 November History
  • अंग्रेज अधिकारी कमांडर इन चीफ ऑफ ब्रिटिश इंड़िया राबर्ट क्लाइव ने 1774 में इंग्लैंड में आत्महत्या की।
  • एटलस नाम का जहाज 1834 में भारतीय मजदूरों को लेकर मॉरिशस पहुंचा था जिसे वहां अप्रवासी दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • अमेरिका के मूल निवासियों के विभिन्न गुटों के बीच 1835 में फ्लोरिडा के ओसिओला में दूसरा सेमीनोले युद्ध शुरू हुआ। यह लड़ाई फ्लोरिडा युद्ध के नाम से भी मशहूर है।
  • अकबर खान ने 1841 में अफ़ग़ानिस्तान में शाह शुजा के खिलाफ विद्रोह किया,जिसमें उसे सफलता मिली।
  • फ्रेंकलिन पियर्स 1852 में अमेरिका के राष्ट्रपति बने।
  • रूस द्वारा 1914 में तुर्की के विरुद्ध युद्ध घोषित।
  • बीबीसी ने 1936 में टेलीविजन सेवा शुरु की थी। यह विश्व की पहली नियमित हाई डिफनिशन सेवा थी। उस वक्त इसकी 200 लाइनें थी। 1964 में इसका नाम बीबीसी वन किया गया। जो आज भी जारी है।
  • हरक्युलिस नामक संसार का सबसे बड़ा और भारी हवाई जहाज, जिसके पंखों की लंबाई 390 फीट 11 इंच थी, उसने 1947 में अपनी एकमात्र उड़ान भरी। इसके चालक निर्माता और मालिक हाबर्ड ह्यूज थे।
  • मिस्र में 1951 में ब्रिटेन के खिलाफ हुए प्रदर्शनों पर काबू पाने के लिए करीब छह हजार ब्रिटिश सैनिक पहुंचे।
  • अमेरिका में 1962 के बाद 1984 में पहली बार एक महिला वेल्मा बारफिल्ड को फाँसी की सजा दी गयी।
  • बेरूत में कट्टरपंथियों के जरिए बंधक बनाए गए एक अमेरिकी नागरिक डेविड जैकोब्सन को 1986  में रिहा कराया गया।
  • पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में 1999 में संयुक्त राष्ट्र संघ और अमेरिकी केन्द्रों पर अज्ञात लोगों के द्वारा राकेट से हमला।
  • पश्चिम एशिया में 2000 में हिंसा रोकने के फ़ार्मूले पर सहमति।
  • अफ़ग़ानिस्तान में विशेष बलों की संख्या बढ़ाने का 2001 में अमेरिका का फैसला।
  • मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने 2002 में जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री पद को ग्रहण किया था।
  • चीन के हेनान में 2004 में हुए जातीय संघर्ष में 20 मरे।
  • ग़ुलाम नबी आज़ाद ने 2005 में जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री पद को ग्रहण किया था।
  • अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर ख़राब सोलर पंखों को ठीक करने के बाद डिस्कवरी 2007 को यात्री धरती पर सुरक्षित लौटे।
  • केन्द्र सरकार ने 2008 में सेवानिवृत्त के बाद पेंशन फंड से धन निकालने की सुविधा समाप्त की।

2 नवंबर को जन्मे व्यक्ति

  • सिखों के चौथे गुरु रामदास का जन्म 1534 में हुआ।गुरू राम दासGuru ramdas.jpg (पंजाबीਸ੍ਰੀ ਗੁਰੂ ਰਾਮ ਦਾਸ ਜੀ), सिखों के गुरु थे और उन्हें गुरु की उपाधि 30 अगस्त 1574 को दी गयी थी। उन दिनों जब विदेशी आक्रमणकारी एक शहर के बाद दूसरा शहर तबाह कर रहे थे, तब ‘पंचम् नानक’ गुरू राम दास जी महाराज ने एक पवित्र शहर रामसर, जो कि अब अमृतसर के नाम से जाना जाता है, का निर्माण किया।

    गुरू राम दास (जेठा जी) का जन्म चूना मण्डी, लाहौर (अब पाकिस्तान में) में कार्तिक वदी २, (२५वां आसू) सम्वत १५९१ (२४ सितम्बर १५३४) को हुआ था। माता दया कौर  (अनूप कौर ) एवं बाबा हरी दास  सोढी खत्री का यह पुत्र बहुत ही सुंदर एवं आकर्षक था। राम दास  का परिवार बहुत गरीब था। उन्हें उबले हुए चने बेच कर अपनी रोजी रोटी कमानी पड़ती थी। जब वे मात्र ७ वर्ष के थे, उनके माता पिता की मृत्यु हो गयी। उनकी नानी उन्हें अपने साथ बसर्के गाँव ले आयी। उन्होंने बसर्के में ५ वर्षों तक उबले हुए चने बेच कर अपना जीवन यापन किया। एक बार गुरू अमर दास साहिब , रामदास साहिब  की नानी के साथ उनके दादा की मृत्यु पर बसर्के आये और उन्हें राम दास साहिब से एक गहरा लगाव सा हो गया। रामदास  अपनी नानी के साथ गोइन्दवाल आ गये एवं वहीं बस गये। यहाँ भी वे अपनी रोजी रोटी के लिए उबले चने बेचने लगे एवं साथ ही साथ गुरू अमरदास साहिब  द्वारा धार्मिक संगतों में भी भाग लेने लगे। उन्होंने गोइन्दवाल साहिब के निर्माण की सेवा की।

    रामदास साहिब  का विवाह गुरू अमरदास साहिब  की पुत्री बीबी भानी जी के साथ हो गया। उनके यहाँ तीन पुत्रों -१. पृथी चन्द जी, २. महादेव  एवं ३. अरजन साहिब  ने जन्म लिया। शादी के पश्चात रामदास गुरु अमरदास  के पास रहते हुए गुरु घर की सेवा करने लगे। वे गुरू अमरदास साहिब  के अति प्रिय व विश्वासपात्र सिक्ख थे। वे भारत के विभिन्न भागों में लम्बे धार्मिक प्रवासों के दौरान गुरु अमरदास  के साथ ही रहते।

    गुरू रामदास  एक बहुत ही उच्च वरीयता वाले व्यक्ति थे। वो अपनी भक्ति एवं सेवा के लिए बहुत प्रसिद्ध हो गये थे। गुरू अमरदास साहिब  ने उन्हें हर पहलू में गुरू बनने के योग्य पाया एवं 1 सितम्बर १५७४ को उन्हें ÷चतुर्थ नानक’ के रूप में स्थापित किया। गुरू रामदास  ने ही ÷चक रामदास’ या ÷रामदासपुर’ की नींव रखी जो कि बाद में अमृतसर कहलाया। इस उद्देश्य के लिए गुरू साहिब ने तुंग, गिलवाली एवं गुमताला गांवों के जमींदारों से संतोखसर सरोवर खुदवाने के लिए जमीनें खरीदी। बाद में उन्होने संतोखसर का काम बन्द कर अपना पूरा ध्यान अमृतसर सरोवर खुदवाने में लगा दिया। इस कार्य की देख रेख करने के लिए भाई सहलो एवं बाबा बूढा  को नियुक्त किया गया।

    जल्द ही नया शहर (चक रामदासपुर) अन्तराष्ट्रीय व्यापार का केन्द्र होने की वजह से चमकने लगा। यह शहर व्यापारिक दृष्टि से लाहौर की ही तरह महत्वपूर्ण केन्द्र बन गया। गुरू रामदास साहिब  ने स्वयं विभिन्न व्यापारों से सम्बन्धित व्यापारियों को इस शहर में आमंत्रित किया। यह कदम सामरिक दृष्टि से बहुत लाभकारी सिद्ध हुआ। यहाँ सिक्खों के लिए भजन-बन्दगी का स्थान बनाया गया। इस प्रकार एक विलक्षण सिक्ख पंथ के लिए नवीन मार्ग तैयार हुआ। गुरू रामदास साहिब ने ÷मंजी पद्धति’ का संवर्द्धन करते हुए ÷मसंद पद्धति’ का शुभारम्भ किया। यह कदम सिक्ख धर्म की प्रगति में एक मील का पत्थर साबित हुआ।

    गुरू रामदास साहिब ने सिख धर्म को ÷आनन्द कारज’ के लिए ÷चार लावों’ (फेरों) की रचना की और सरल विवाह की गुरमत मर्यादा को समाज के सामने रखा। इस प्रकार उन्होने सिक्ख पंथ के लिए एक विलक्षण वैवाहिक पद्धति दी। इस प्रकार इस भिन्न वैवाहिक पद्धति ने समाज को रूढिवादी परम्पराओं से दूर किया। बाबा श्रीचंद के उदासी संतों व अन्य मतावलम्बियों के साथ सौहार्दपूर्ण सम्बन्ध स्थापित किये। गुरू साहिब ने अपने गुरूओं द्वारा प्रदत्त गुरू का लंगर प्रथा को आगे बढाया। अन्धविश्वास, वर्ण व्यवस्था आदि कुरीतियों का पुरजोर विरोध किया गया।

    उन्होंने ३० रागों में ६३८ शबद् लिखे जिनमें २४६ पौउड़ी, १३८ श्लोक, ३१ अष्टपदी और ८ वारां हैं और इन सब को गुरू ग्रन्थ साहिब  में अंकित किया गया है। उन्होंने अपने सबसे छोटे पुत्र अरजन साहिब को ÷पंचम्‌ नानक’ के रूप में स्थापित किया। इसके पश्चात वे अमृतसर छोड़कर गोइन्दवाल चले गये। भादौं सुदी ३ (२ आसू) सम्वत १६३८ (१ सितम्बर १५८१) को ज्योति जोत समा गए।

  • समाज सुधारक और होम्‍योपैथ को बढ़ावा देने वाले महेंद्रलाल सरकार का जन्‍म 1833 में हुआ था.
  • शियाओं के निजारी इस्माईली मत के आध्यात्मिक नेता आगा ख़ाँ तृतीय का जन्म 1877 में हुआ।
  • असम के स्वतंत्रता सेनानी तथा राजनेता बसंत कुमार दास का जन्म 1883  में हुआ।
  • प्रसिद्ध भारतीय अभिनेता तथा फ़िल्म निर्माता-निर्देशक सोहराब मोदी का जन्म 1897 में हुआ।
  • प्रसिद्ध भारतीय चरित्र अभिनेता राम मोहन का जन्म 1929 में हुआ।
  • साहित्यकार ममता कालिया का जन्म 1940 में हुआ।
  • भारत के अदम्य निर्भीक पत्रकार, बुद्धिजीवी, प्रसिद्ध लेखक और राजनेता अरुण शौरी का जन्म 1941 में हुआ।
  • हिन्दी फ़िल्म संगीतकार अनु मलिक का जन्म 1960 में हुआ।
  • हिन्दी फ़िल्म अभिनेता शाहरुख़ ख़ान का जन्म 1965 में हुआ।
  • भारत के प्रसिद्ध पहलवान तथा कुश्ती के खिलाड़ी योगेश्वर दत्त का जन्म 1982 में हुआ।

2 नवंबर को हुए निधन

  • मराठी रंगमंच में क्रांति लाने वाले प्रसिद्ध नाटककार अण्णा साहेब किर्लोस्कर का 1885 में निधन।
  • जार्ज बर्नार्ड शा का 1950 में 97 वर्ष की आयु में देहावसान। जार्ज बर्नार्ड शाImage result for जार्ज बर्नार्ड शा नोबेल पुरस्कार साहित्य विजेता, १९२५ महान नाटककार व कुशल राजनीतिज्ञ मानवतावादी व्यक्तित्व जार्ज बर्नार्ड शा का जन्म डबलिन मे 26 जुलाई 1856 को शनिवार को हुआ था। अपने माता पिता की तीन संतानो में ये अकेले पुत्र थे। इनके पिता जार्ज कारर शा को शराब की बुरी लत थी किन्तु इस बात का इनकी माँ ने इनपे असर नही होने दिया और इनके शिक्षा व्यवस्था पर ध्यान दिया , इनकी शुरुआती शिक्षा मिस कैरोलिन हिल नामक महिला से प्राप्त हुई और इनकी प्रारम्भिक शिक्षा के बाद इनकी रुचि साहित्य के क्षेत्र में बढती गई और इसीलिये इन्हे इंग्लैंड आना पड़ा जहाँ आकर इन्होने अपनी साहित्यिक रुचि को निखारा।इंग्लैंड के प्रसिद्द साहित्यकार-नाटककार जार्ज बर्नार्ड शा को प्रारम्भ में बड़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। उन्होंने अपनी चिर-परिचित शैली में कहा है – “जीविका के लिए साहित्य को अपनाने का मुख्य कारण यह था कि लेखक को पाठक देखते नहीं हैं इसलिए उसे अच्छी पोशाक की ज़रूरत नहीं होती। व्यापारी, डाक्टर, वकील, या कलाकार बनने के लिए मुझे साफ़ कपड़े पहनने पड़ते और अपने घुटने और कोहनियों से काम लेना छोड़ना पड़ता। साहित्य ही एक ऐसा सभ्य पेशा है जिसकी अपनी कोई पोशाक नहीं है, इसीलिए मैंने इस पेशे को चुना है।” फटे जूते, छेद वाला पैजामा, घिस-घिस कर काले से हारा-भूरा हो गया ओवरकोट, बेतरतीब तराशा गया कॉलर, और बेडौल हो चुका पुराना टॉप – यही उनकी पोशाक थी।

    उनके विचार कुछ ईस तरह के थे की, ‘हर पल अपने विचारों पर नजर रखना अर्थात यह ज्ञात होना कि मन क्या सोच रहा है, ध्यान की पहली सीढ़ी है. ध्यान से जीवन में गहराई आती है. जीवन का ध्येय है सत्य की खोज !  लेकिन सत्य क्या है ? उसकी खोज क्यों करनी है ? यह जगत क्या है ? क्यों है ? इस तरह के प्रश्नों के हल ढूँढने के बजाय क्या उन्हें इस जग में रहकर जीवन को और सुंदर बनाने का ही प्रयत्न नहीं करना चाहिए, जीवन में सुन्दरता तभी आ सकती है जब मन प्रेम से ओत-प्रोत हो, कोई दुर्भावना न हो, कहीं अन्तर्विरोध न हो. जैसी सोच हो वही कर्मों में झलके और वही वाणी में, लोग किसी भी प्राणी या वस्तु के प्रति भी हिंसक न हों और यह सब स्वतः स्फूर्त हो न कि ऊपर से ओढ़ा गया. जब फूल खिलता है तो उसके पास जाकर पंखुड़ियों को खोलना नहीं होता, नदी पर्वतों से उतरती है तो अपना मार्ग स्वयं ढूँढ ही लेती है. ऐसे ही उनके मनों में शुभ संकल्प उठें अपने आप, जीवन के कर्त्तव्यों को नियत करें और उन्हें पूर्ण करें’.

    प्रसंग:

    एक बार जब वह बहुत बीमार पडे तो डॉक्टर ने कहा कि अगर वह  अंडे और मास का शोरबा लेगे तो ही वह स्वस्थ  हो पायेगे . उन्हे डॉक्टरओ ने बहुत समझाया और कहा कि यदि वह उनकी बात नही मानेगे तो वह अवश्य  ही  मर जायेगे . जार्ज बर्नार्ड ने डॉक्टर का आदेश मनाने से इंकार  कर दिया लेकिन डॉक्टर भी अपना निर्णय बदलने    को तैयार नही हुई . डॉक्टर ने जार्ज बर्नार्ड से अंत मे कह दिया कि उन्हे बीमारी से छुटकारा नही दिलाया जा सकता है . जब जार्ज बर्नार्ड कि हालत एकदम बिगड़ गई तथा उन्हे लगा कि अब शायद ही जिंदा रह पायेगे तो उन्होने अपने सैकेट्री  को बुलवाया और कोर्ट के एक वकील को लाने को कहा .वकील के आने पर जार्ज बर्नार्ड शाह ने डॉक्टर के सामने ही अपनी ‘विल ‘ (वसीयत ) लिखवाई जिसमे उन्होने कहा ” मै जार्ज बर्नार्ड शाह शपथ पूर्वक कहता हू कि मेरी अंतिम इच्छा है , जब मै इस संसार से और अपने इस भौतिक   शरीर से आज़ाद हो जाओ तो जब मेरे शव को कब्रिस्तान ले  जाया जाये तो उस वक़्त निम्न  श्रेणी   के मातम मनाने वाले होंगे:- प्रथम पक्षी,  द्वितीय  भेडे, मेमने, गाये  और अन्य सभी तरह के चोपाये , तृतीय  पानी में रहने वाले जीव मछलियों . मेरे  साथ कब्रिस्तान  तक चलते समय इन जीवो के गले में एक विशेष कार्ड बंधा होगा , जिस पर अंकित होगा ‘ है प्रभु ‘ हमारे हितचिन्तक जार्ज बर्नार्ड  शाह पर दया करना , जिसने दूसरे जीवो कि प्राण रक्षा के लिये अपना जीवन न्यौछावर  कर दिया .Image result for जार्ज बर्नार्ड शा

    प्रसंग:

    जॉर्ज बर्नार्ड शॉ को एक महिला ने भोजन के लिये निमंत्रित किया. शॉ ने उसका आमंत्रण् स्वीकार कर लिया, जब कि वो उन दिनों काफी व्यस्त थे. जिस दिन उन्हे महिला के यहा जाना था. ऊस दिन भी वह कार्य मी व्यस्त थे. फिर समय निकालकर वह उसके घर पहुँचे. वह महिला उन्हें देखकर प्रसन्न तो हुई, लेकिन उनके पहनावे को देख-कर खिन्न हो गई और बोली, मेरी गाडी में अभी वापस जाइए और वेशभूषा बदलकर आइए. ठीक है कहकर शॉ गाड़ी में बैठकर चले गए . कुछ ही समय बाद वह कीमती वेशभूषा पहनकर आए . वह भोजन स्थल पर गए और जितने भी पकवान बने थे, उन सबको अपने कपड़ों पर डाल लिया . वह कहते जा रहे थे, खूब खाओ . यह भोजन तुम्हारे लिए ही है . जब लोगों ने देखा तो पूछा आप यह क्या कर रहे हैं शॉ बोले, दरअसल निमंत्रण मुझे नहीं मेरी वेशभूषा को मिला है . इसलिए में तो वहीँ कर रहा हूँ, जो मुझे करना चाहिए. उनके ऐसा कहने पर वहां चुप्पी छा गई . इधर निमंत्रण देनेवाली महिला को शर्मिंदगी उठानी पड़ी . वह जान गई की किसी भी व्यक्ति का मूल्यांकन उसकी योग्यता से किया जाना चाहिए न की उसकी वेशभूषा से.

    प्रसंग:Image result for जार्ज बर्नार्ड शा

    एक बार पिकैडली से बोंड की सड़क पर एक सुंदर महिला उनका बटुआ खाली देख निराश हो कर लौट गई। एक प्रकाशक ने कुछ पुराने ब्लाक खरीद कर स्कूलों में इनाम देने के लिए पुस्तकें तैयार करवाईं। उसने बर्नार्ड शा से कहा कि वह ब्लाकों के नीचे छापने के लिए कुछ कविताएं लिख दें। शा को उन से धन प्राप्ति की कोई आशा नहीं थी। उन्हें आश्चर्य तो तब हुआ जब इन कविताओं के लिए प्रकाशक के धन्यावाद पत्र के साथ पांच शिलिंग भी प्राप्त हुए। परंतु जार्ज बर्नार्ड शा ने लिखना नहीं छोड़ा और एक दिन वह इस इस युग के प्रख्यात नाटककार बन गए।

    सूक्ति:

    • तुम चीजें देखते हो ; और कहते हो, ‘क्यों ?’ लेकिन मैं उन चीजों के सपने देखता हूँ जो कभी थीं ही नहीं; और मैं कहता हूँ ‘क्यों नहीं ?’
    • किसी पुरुष या महिला के पालन-पोषण की आज़माइश तो एक झगड़े में उनके बर्ताव से होती है। जब सब ठीक चल रहा हो तब अच्छा बर्ताव तो कोई भी कर सकता है।
    • आह, बाघ आपसे प्रेम करेगा। खाने के प्रति प्रेम से सच्चा कोई प्रेम नहीं है।
    • सफलता कभी गलती ना करने में निहित नहीं होती बल्कि एक ही गलती दोबारा ना करने में निहित होती है।
    • कम्युनिकेशन के साथ सबसे बड़ी समस्या है कि इसके हो चुकने का भ्रम हो जाना।
    • अगर तुम्हारे पास एक सेब है और मेरे पास एक सेब है और हम इन सेबों का आदान-प्रदान कर लें तो भी हम दोनों के पास एक-एक ही सेब रहेंगे. लेकिन अगर तुम्हारे पास एक आईडिया है और मेरे पास एक आईडिया है और हम उन आइडियाज का आदान-प्रदान कर लें तो हम दोनों के पास दो-दो आइडियाज हो जायेंगे।
    विचार :
    • ज़िन्दगी खुद को खोजने के बारे में नहीं है. ज़िन्दगी खुद को बनाने के बारे में है.
    • गलतियाँ करते हुए बीताया गया जीवन बिना कुछ किये बीताये गए जीवन की तुलना में न सिर्फ अधिक सम्मानजनक है बल्कि अधिक उपयोगी भी है.Image result for जार्ज बर्नार्ड शा
    • इसे एक नियम बना लीजिये कभी भी किसी बच्चे को वो किताब पढ़ने को मत दीजिये जो आप खुद नहीं पढेंगे.
    • तुम चीजें देखते हो; और कहते हो, ‘क्यों? ’लेकिन मैं उन चीजों के सपने देखता हूँ जो कभी थीं ही नहीं; और मैं कहता हूँ ‘क्यों नहीं?’
    • जानवर मेरे दोस्त हैं… और मैं अपने दोस्तों को नहीं खाता.
    • विवेकी व्यक्ति खुद को दुनिया के हिसाब से ढाल लेता है : अविवेकी व्यक्ति इस कोशिश में लगा रहता है की दुनिया उसके हिसाब से ढल जाए. इसलिए सार विकास अविवेकी व्यक्ति पर निर्भर करता है.
    • जो अपना दिमाग नहीं बदल सकते वे कुछ भी नहीं बदल सकते.
    • जो लोग कहते हैं कि इसे नहीं किया जा सकता उन्हें उन लोगों को नहीं टोकना चाहिए जो कर रहे हैं.
    • आप अपना चेहरा देखने के लिए आइना प्रयोग करते हैं ; आप अपनी आत्मा देखने के लिए कलाकृतियाँ देखते हैं.
    • अपने साथी प्राणियों के प्रति सबसे बड़ा पाप उनसे घृणा करना नही बल्कि उनसे कोई मतलब ना रखना है ; यही निर्दयता का सार है.
    • जिस आदमी के दांत में दर्द होता है, वो सोचता है कि हर कोई जिसके दांत सही हैं, खुश है। गरीबी से त्रस्‍त व्‍यक्ति अमीरों के बारे में यही गलती करता है।
    • वृद्ध लोग खतरनाक होते हैं, उन्‍हें इससे कोई मतलब नहीं रहता कि दुनिया का क्‍या होने जा रहा है।
    • मैंने कभी किसी शेरों को काबू करने वाले व्‍यक्ति के साहस के बारे में अधिक नहीं सोचा। पिंजरे के अन्‍दर वो कम से कम लोगों से सुरक्षित रहता है।
    • आदमी सबसे उँची चोटी पर चढ़ सकता है, लेकिन वो यहां अधिक देर तक रह नहीं सकता।
    • संभावनाएं कई हैं जब हम एक बार प्रतिक्रिया नहीं क्रिया करना का निश्‍चय कर लें।
    • जब कोई आदमी कहता है कि पैसा कुछ भी कर सकता है, तो साफ़ हो जाता है। उसके पास बिलकुल नहीं है।
    • सत्य को कह देना ही मेरा मज़ाक करने का तरीका है। संसार में यह सब से विचित्र मज़ाक है।
    • आमतौर पर आदमी उन चीजों के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहता है जिनका उससे कोई लेना देना नहीं होता।
    • पुस्तक प्रेमी सबसे धनवान व सुखी होता है, संपूर्ण रूप से त्रुटिहीन पुस्तक कभी पढ़ने लायक़ नहीं होती।
    • शिक्षा और प्रशिक्षण का एकमात्र उद्देश्य समस्या-समाधान होना चाहिये।
    • संसार मे समस्या यह है कि मूढ लोग अत्यन्त सन्देहरहित होते है और बुद्धिमान सन्देह से परिपूर्ण।
    • आप को अच्छा करने का अधिकार बुरा करने के अधिकार के बिना नहीं मिल सकता, माता का दूध शूरवीरों का ही नहीं, वधिकों का भी पोषण करता है।
    • आज अध्‍ययन करना सब जानते हैं, पर क्‍या अध्‍ययन करना चाहिए यह कोई नहीं जानता।
    • आप अपने भविष्य को नहीं बदल सकते लेकिन आप अपनी आदतों को बदल सकते है तथा सुनिश्चित मानें आपकी आदतें आपका भविष्य बदल देंगी।
    • कमाए बगैर धन का उपभोग करने की तरह ही खुशी दिए बगैर खुश रहने का अधिकार हमें नहीं है।

    साहित्यिक रचनाये

    आर्म्स एंड द मैन इनके प्रसिध्द नाटको मे एक है इसके अतिरिक्त इनका पहला नोवेल इम्माटुरिटी नाम से काफी प्रचलित हुआ।

    राजनीतिक जीवन

    इन्होने 1879 में जेटिकल सोसाइटी से अपने को जोड़ लिया जहाँ से इनके राजनैतिक जीवन की शुरुआत मानी जाती है।।

  • अमेरिकी गणितज्ञ श्रीराम शंकर अभयंकर का 2012 में निधन।

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