कारनामा गडकरी का, जलपोत  से 16 कंटेनर कोलकाता से वाराणसी

 आजादी के बाद पहली बार पेप्सी कंपनी के 16 कंटेनर गंगा नदी के रास्ते कोलकाता से वाराणसी आ रहे हैं. इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी में इन कंटेनरों को रिसीव करेंगे. वाराणसी से यही जलपोत इफ्को द्वारा निर्मित उर्वरक लेकर लौटेंगे.

नितिन गडकरी का कारनामा, जलपोत के जरिये पेप्सी के 16 कंटेनर कोलकाता से वाराणसी आएंगे
 नई दिल्ली: केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने एक असंभव दिखने कार्य को संभव कर दिखाया है. यह असंभव कार्य है गंगा में जलपोत से परिवहन. केंद्र में मोदी सरकार के आने के बाद वाराणसी से हल्दिया तक गंगा में कमर्शियल यातायात सेवा की शुरुआत करने की बात कही गई थी. हालांकि कई विशेषज्ञों ने इस वादे को असंभव करार दिया था. आजादी के बाद पहली बार पेप्सी कंपनी के 16 कंटेनर गंगा नदी के रास्ते कोलकाता से वाराणसी आ रहे हैं. इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वाराणसी में इन कंटेनरों को रिसीव करेंगे. वाराणसी से यही जलपोत इफ्को द्वारा निर्मित उर्वरक लेकर लौटेंगे. à¤ªà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¤¾à¤¤à¥à¤®à¤• तस्वीर

हमारी सहयोगी वेबसाइट zeebiz.com के मुताबिक, नितिन गडकरी ने ट्वीट पर इसकी जानकारी दी. उन्होंने लिखा, ‘ये इस सप्ताह में भारत की सबसे बड़ी खबर हो सकती है. आजादी के बाद पहली बार अंतर्देशीय जलपोत पर एक कंटेनर आ रहा है. पेप्सिको कंपनी गंगा नदी के रास्ते जलपोत एमवी आरएन टैगोर के जरिए अपने 16 कंटेनर को कोलकाता से वाराणसी ला रही है. ये बहुत बड़ी उपलब्धि है.’

गडकरी ने आगे लिखा, ‘आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी इस कंटेनर जलपोत को रिसीव करेंगे, जो पहली बार अंतर्देशीय जलमार्ग के रास्ते भारत आ रहे हैं.’ ये जलपोत 12 नंवबर को वाराणसी पहुंचेंगे. इसके लिए सरकार ने वाराणसी में एक मल्टीमॉडल टर्मिनल विकसित किया है. इस दिन ही प्रधानमंत्री मोदी इस टर्मिनल को भी देश को समर्पित करेंगे. गडकरी ने बताया कि इस टर्मिलन को रिकार्ड समय में पूरा किया गया है.प्रतिकात्मक तस्वीर

28 अक्टूबर को कोलकाता से जलपोत रवाना हुआ
जलपोत कोलकाता से 28 अक्तूबर को चल चुका है. वाराणसी से हल्दिया के बीच जलमार्ग की दूरी 1390 किलोमीटर है. गंगा में वाराणसी से हल्दिया तक जल परिवहन के लिए परीक्षण की शुरुआत के दौरान वाराणसी से दो जलपोत हल्दिया रवाना किए थे. इससे पहले, 12 अगस्त, 2016 को केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी द्वारा खिड़किया घाट से हरी झंडी दिखाकर रवाना किए गए दो जलपोतों में मारुति कारें और भवन निर्माण की सामग्री रवाना की गई थी. इसी दौरान मल्टी मॉडल टर्मिनल की आधारशिला भी रखी गई थी.

 जलपोत के माध्यम से कारोबार को अंजाम देने के लिए सरकार ने वाराणसी में एक मल्टी मॉडल टर्मिनल विकसित किया है। 12 नवंबर को प्रधानमंत्री इस टर्मिनल को भी देश को समर्पित करेंगे। इस टर्मिनल को रिकार्ड समय में पूरा किया गया है। गडकरी ने अपने ट्वीट में लिखा है कि पेप्सीको गंगा नदी के रास्ते जलपोत एमवी आरएन टैगोर के जरिए अपने 16 कंटेनर को कोलकाता से वाराणसी ला रही है। गडकरी ने कहा कि यह बहुत बड़ी उपलब्धि है। केंद्र सरकार ने वाराणसी से हल्दिया तक गंगा में कमर्शियल यातायात सेवा शुरू करने का वादा किया था।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक बार फिर से अपने संसदीय क्षेत्र आ रहे हैं। अबकी उनके 12 नवंबर को बनारस आने की संभावना है। इस दौरे में वे तीन बड़ी परियोजनाओं का तोहफा काशी और देश को देंगे। इसमें रिंग रोड, बाबतपुर एयरपोर्ट से वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग और रामनगर में बंदरगाह की परियोजना शामिल है। इस आशय की जानकारी केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को ट्वीट कर संभावनाओं को बल दिया है। गंगा के रास्ते कोलकाता से सामान लेकर चले कंटेनर जलपोत का पीएम 12 नवंबर को काशी में स्वागत कर सकते हैं। वहीं वाराणसी में स्थानीय सूत्रों का भी कहना है कि आगामी 12 नवंबर को पीएम काशी आ रहे हैं, वहीं हरहुआ में वह सभा भी करेंगे। इस बाबत अफसरों ने वहां पहुंचकर जमीन समतलीकरण भी शुरू कर दिया है।

रिकार्ड समय में पूरी हुई योजना

नितिन गडकरी ने वाराणसी में बने रिंग रोड और बाबतपुर एयरपोर्ट से वाराणसी राष्ट्रीय राजमार्ग तक बनी सड़क को रिकार्ड समय में पूरा होने की जानकारी दी है। इन परियोजनाओं के भी देश को उसी दिन समर्पित करने की संभावना है।

रामनगर स्थित बंदरगाह तक पश्चिम बंगाल से गंगा में अंतरदेशीय जलमार्ग संख्या एक से होता हुआ एक कार्गो कंटेनर पहुंच रहा है। केंद्रीय मंत्री ने इस संदर्भ में बताया है कि नए विकसित हुए मल्टीमॉडल टर्मिनल में 12 नवंबर को कंटेनर रिसीव कर इसका औपचारिक लोकार्पण किया जाना है।

सागरमाला सरीखी संकल्पना

एक अन्य जानकारी में बताया है कि आजादी के बाद पहली बार अंतरदेशीय जलमार्ग बनने के बाद पेप्सिको द्वारा कोलकाता से वाराणसी के लिए 16 कंटेनर गंगा नदी के रास्ते एमवी आरएन टैगोर पर पहुंच रहा है। इसे उन्होंने बड़ी उपलब्धि बताते हुए देश में सागरमाला की संकल्पना पूरी होने की एक बड़ी कड़ी बताया है। जिसके माध्यम से व्यावसायिक यातायात देश में काफी सरल हो जाएगा।

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