कारगिल हीरो को डबल प्रमोशन, वीर चक्र पुलिस सीनियर कॉस्टे. सतपाल बने असि. सीनियर इंस्पेक्टर 

  पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कारगिल युद्ध के दौरान अपने शौर्य का प्रदर्शन करने वाले पंजाब पुलिस के सीनियर कांस्टेबल सतपाल सिंह को डबल प्रमोशन दिया है।

मुख्य बातें
  • सेना से रिटायर होने के बाद पंजाब पुलिस में भर्ती हुए सतपाल सिंह
  • कारगिल युद्ध में पाकिस्तानी सैन्य अधिकारी को मौत के घाट उतारा
  • अदम्य साहस व वीरता के लिए सतपाल वीर चक्र से हुए सम्मानित

चंडीगढ़ : पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कारगिल युद्ध में अदम्य साहस एवं वीरता का परिचय देने वाले पंजाब यातायात पुलिस के एक सीनियर कांस्टेबल को डबल प्रमोशन दिया है। मुख्यमंत्री के आदेश के बाद सीनियर कांस्टेबल सतपाल सिंह अब असिस्टेंट सीनियर इंस्पेक्टर बनाए जाएंगे। कारगिल युद्ध के समय शौर्य एवं साहस दिखाने के लिए सतपाल सिंह को वीर चक्र से सम्मानित किया गया। सेना से रिटायर होने के बाद सतपाल 2010 में पंजाब पुलिस में भर्ती हुए लेकिन उस समय की शिरोमणि अकाली दल-भाजपा गठबंधन की सरकार ने उनकी वीरता को नजरंदाज कर दिया।

मुख्यमंत्री ने इस बात पर अफसोस जताया कि कारगिल युद्ध में अपनी वीरता का शानदार प्रदर्शन करने वाले सतपाल सिंह का सम्मान तत्कालीन सरकार ने नहीं किया और इसके चलते सतपाल को सीनियर कांस्टेबल के रूप में काम करना पड़ा। पंजाब सरकार ने जब सतपाल सिंह के बारे में और जानकारी इकट्ठा की तो उसे पता चला कि सतपाल भी उसी बटालियन का हिस्सा थे जिस बटालियन में कभी कैप्टन अमरिंदर अपनी सेवा दे चुके हैं। सतपाल सिंह के बारे में जानकारी सामने आने के बाद मुख्यमंत्री ने उन्हें डबल प्रमोशन देने का आदेश दिया। बता दें कि कैप्टन अमरिंदर पाकिस्तान के खिलाफ 1965 का युद्ध लड़ चुके हैं।

Kargil war

कारगिल युद्ध में टाइगर हिल पर पाकिस्तानी नॉर्दर्न लाइट इन्फेंट्री के कैप्टन समेत चार पाकिस्तान फौजियों को मौत के घाट उतारने वाले पंजाब पुलिस के हवलदार सतपाल सिंह को पंजाब सरकार ने प्रमोट कर एएसआई बना दिया है। सतपाल सिंह 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान फौज में सिपाही के थे। उनकी वीरता पर देश के राष्ट्रपति ने उन्हें वीर चक्र से सम्मानित किया था। रिटारयमेंट के बाद वह पंजाब पुलिस में भर्ती हुए थे।

सतपाल सिंह

बहादुरी गाथा
सतपाल को 1999 में राष्ट्रपति के. आर नारायण ने वीर चक्र से सम्मानित किया।

सतपाल सिंह ने बताया है कि वह फौज में 1992 में सिपाही भर्ती हुए थे। वह 8 सिख रेजीमेंट में थे। 1999 में कारगिल युद्ध के दौरान 8 सिख टीम को टाइगर हिल पर भारतीय फौज की मदद के लिए भेजा गया था। 5 जुलाई 1999 को वह अपनी पोजिशन संभाल चुके थे। भारतीय टुकड़ी को पीछे धकेलने के लिए पाकिस्तान ने 7 जुलाई को काउंटर अटैक किया था। भारतीय टीम में दो अधिकारी, चार जेसीओ और 46 अन्य रैंक के फौजी शामिल थे। इस टुकड़ी को 19 ग्रेनेडियर्स को टाइगर हिल पर कब्जा जमाने के लिए मदद को कहा गया था क्योंकि टाइगर हिल में जंग के दौरान तीन जेसीओ समेत 8 सिपाही शहीद हुए थे। इनमें से जो बचे थे वह अधिकतर घायल थे। घायल सूबेदार निर्मल सिंह ने इस दौरान कमांड अपने हाथ में रखी। अचानक पाकिस्तानी टुकड़ी उन पर चढ़ गई। हाथों से जंग शुरू हो गई। सभी एक दूसरे से हाथापाई कर रहे थे। एक शख्स अपनी पाकिस्तानी टुकड़ी को निर्देश दे रहा था। उसने उस शख्स को दबोच कर जमीन पर पटक दिया। उसके तीन साथी उस पर चढ़ गए तो उसने तीनों को पटक दिया। चारों को बेल्ट से बुरी तरह से पीट दिया था और उन पर पूरी एलएमजी मैगजीन खाली कर दी। बाद में उसे पता चला कि मारे गए एक शख्स कर्नल (यह पोस्ट नही, नाम का ही हिस्सा है )शेर खां को पाकिस्तान के सर्वोच्च सम्मान ‘निशान ए हैदर’ से सम्मानित किया गया। वह टुकड़ी का कैप्टन था। सतपाल के मुताबिक उसकी बहादुरी को देखते हुए 1999 में ही राष्ट्रपति के. आर नारायण ने वीर चक्र से सम्मानित किया। 2009 में वह फौज से हवलदार के पद से रिटायर हुए थे। 2010 में दोबारा पंजाब पुलिस में सिपाही के पद पर भर्ती हो गए। मौजूदा समय में वह भवानीगढ़ में ट्रैफिक पुलिस में हवलदार के पद पर तैनात है।सतपाल सिंह बताते हैं कि पंजाब के सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह उनकी सिख रेजीमेंट में ही सर्विस कर चुके हैं।

Patiala News - cm captain asi promoted to kill havildar including captain of pak army in kargil war

एक आधिकारिक प्रवक्ता ने बताया कि कारगिल युद्ध में अपनी बहादुरी दिखाने वाले सतपाल सिंह को असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर पद पर प्रोन्नत देने का आदेश कैप्टन अमरिंदर सिंह ने दिया है। कारगिल युद्ध के समय ऑपरेशन विजय के दौरान सतपाल सिंह द्रास सेक्टर में तैनात थे। वह टाइगर हिल पर कब्जा करने वाली भारतीय सैनिकों की टीम का हिस्सा थे। इस लड़ाई में सतपाल ने पाकिस्तानी सेना की नॉर्दन लाइट इन्फैंट्री के कैप्टन कर्नल (यह पोस्ट नही, नाम का ही हिस्सा है )शेर खान और तीन अन्य को मौत के घाट उतार दिया। कुछ समय बाद भारतीय फौज ने पाकिस्तान को बताया कि शेर खान बहादुरी के साथ भारतीय फौज के साथ लड़े थे। इसके बाद पाकिस्तान ने शेर खान को अपने देश के सबसे बड़े बहादुरी सम्मान निशान-ए-पाकिस्तान से सम्मानित किया।

डीजीपी दिनकर गुप्ता के मुताबिक सेना से रिटायर होने के बाद सतपाल सिंह पंजाब पुलिस में भर्ती हो गए। सतपाल की तैनाती संगरूर जिले में हुई थी जहां वह शानदार तरीके से अपनी ड्यूटी कर रहे थे। पुलिस अधिकारी ने बताया कि सतपाल सिंह ने छह महीने पहले अपना स्थानांतरण भवानीगढ़ करने का अनुरोध किया था जिसे स्वीकार कर लिया गया है। गुरुवार को कारगिल युद्ध के 20 साल पूरे हुए। प्रत्येक साल के 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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