उन्नाव रेप कांड:  सभी 5 केस दिल्ली  ट्रांसफर, रोजाना  सुनवाई

आरोपित विधायक  कुलदीप सिंह सेंगर को बीजेपी से निकाला,सुप्रीम कोर्ट ने  सीबीआई को उन्नाव की रेप पीड़िता की कार  एक्सिडेंट जांच 7 दिन में पूरी करने के निर्देश दिए है.

सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही सीबीआई को उन्नाव की रेप पीड़िता की कार के एक्सिडेंट मामले की जांच 7 दिन के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है. .
उत्तर प्रदेश के बहुचर्चित उन्नाव रेप कांड पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. सुप्रीम कोर्ट इस मामले से जुड़े सारे केस उत्तर प्रदेश से बाहर दिल्ली ट्रांसफर कर दिए हैं. शीर्ष अदालत ने सीबीआई अधिकारी को तलब करते हुए रेप केस की स्टेटस रिपोर्ट और रेप पीड़िता के ऐक्सिडेंट केस में अब तक हुई जांच की रिपोर्ट 12 बजे तक सौंपेने को कहा था. 12 बजे के बाद शुरू हुई सुनवाई में अदालत ने स्पष्ट किया कि उन्नाव रेप कांड से जुड़े सभी मामले की सुनवाई दिल्ली में होगी. सुप्रीम कोर्ट बेंच 2 बजे दोबारा बैठेगी.
सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही सीबीआई को 7 दिन के भीतर दुर्घटना मामले की जांच पूरी करने का निर्देश दिया है. दरअसल कोर्ट ने सीबीआई से पूछा था कि दुर्घटना की जांच में कितना समय लगेगा, इस पर सॉलिसिटर जनरल ने एक महीने का वक्त मांगा, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सात दिन के भीतर जांच पूरी की जाए.
इससे पहले उन्नाव कांड पर संज्ञान लेते हुए प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा था कि 12 बजे तक सीबीआई के किसी जिम्मेदार अधिकारी को बुलाइए. इस पर मेहता ने कहा कि मामले की जांच कर रहे सीबीआई अधिकारी लखनऊ में हैं. दोपहर तक उनका यहां आना मुश्किल है, इसलिए क्या मामले की सुनवाई कल की जा सकती है.
हालांकि प्रधान न्यायाधीश ने इससे इनकार करते हुए कहा, ‘सीबीआई डायरेक्टर से कहिए कि जांच अधिकारी से फोन पर पूरी जानकारी लें और दोपहर 12 बजे तक कोर्ट को अब तक हुई जांच के बारे में बताएं.
वहीं दोपहर 12 बजे दोबारा शुरू हुई सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सभी मामलों को दिल्ली ट्रांसफर करने का आदेश दिया. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट किया कि उन्नाव केस से जुड़े सभी मामले उत्तर प्रदेश के बाहर शिफ्ट होंगे. सीजेआई ने कहा कि उन्नाव से जुड़े सारे मामले दिल्ली ट्रांसफर किए जाएंगे. हालांकि कोर्ट ने अभी इस पर अंतिम फैसला नहीं दिया है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा- परिवार चाहे तो पीड़िता को इलाज के लिए ले आएं दिल्ली

बेंच ने कहा था कि वह लखनऊ के अस्पताल के डॉक्टरों से जानना चाहेगी कि क्या उन्हें एयर-एंबुलेंस पर एयरलिफ्ट किया जा सकता है.

उन्नाव मामला : सुप्रीम कोर्ट ने कहा- परिवार चाहे तो पीड़िता को इलाज के लिए ले आएं दिल्लीचीफ जस्टिस ने ये भी पूछा है कि ‘क्या पीड़िता के परिवार को सुरक्षा चाहिए.
उत्तर प्रदेश के उन्नाव बलात्कार मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट तलब की. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने पूछा कि ‘पीड़िता की तबीयत कैसी है? क्या हम उसे दिल्ली ला सकते हैं, अगर हां तो उसे एयरलिफ्ट कर के दिल्ली स्थित एम्स में भर्ती कराएं.
2 बजे मामले की सुनवाई दोबारा शुरू होने के बाज पीड़िता की मेडिकल रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी गई. डॉक्टरों की रिपोर्ट के मुताबिक, केजीएमयू के पास इलाज की सुविधाएं हैं. हालांकि पीड़िता दिल्ली शिफ्ट करने की हालत में है .ऐसे में चीफ जस्टिस ने वकीलों से कहा है कि ‘अगर परिवार चाहता है कि पीड़िता को दिल्ली शिफ्ट किया जाए, तो उन्हें शिफ्ट किया जा सकता है’. पीड़िता के साथ-साथ घायल वकीलों के बारे में भी ऐसा ही करने को कहा गया है.
इसके अलावा चीफ जस्टिस ने ये भी पूछा है कि ‘क्या पीड़िता के परिवार को सुरक्षा चाहिए. जिस पर वकील ने अदालत को बताया कि पीड़िता की चार बहनें हैं, माता हैं और एक चाचा हैं जिनकी पत्नी की एक्सीडेंट में मौत हो गई है. इन सभी को सुरक्षा चाहिए.’
परिवार को दी गई सुरक्षा
इसके बाद सीजेआई ने कहा- ‘हम उन्नाव में गांव में पीड़िता, उसके वकील, पीड़िता की मां, पीड़िता के चार भाई-बहनों, उसके चाचा और तत्काल परिवार के सदस्यों को सुरक्षा और संरक्षण भी देने का आदेश देते हैं.’
इससे पहले 12 बजे के बाद शुरू हुई सुनवाई में सीजेआई के सवालों का जवाब देते हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा था कि पीड़िता वेंटिलेटर पर है. फिलहाल केजीएमयू से इस आशय की जानकारी मांगी जाएगी कि उसकी हालत कैसी है. इसके बाद सीजेआई ने दो बजे मेडिकल रिपोर्ट तलब कर ली थी.

एक्सीडेंट से पहले उन्नाव रेप पीड़िता के परिजनों ने लिखीं 36 चिट्ठियां, नहीं मिला कोई जवाब

परिवार ने दावा किया कि इन पत्रों में से अधिकांश का अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया.
..उन्नाव बलात्कार पीड़ित के परिवार ने पिछले एक साल में शीर्ष सरकारी अधिकारियों, राजनेताओं और पुलिस अधिकारियों को जान का खतरा होने का दावा करते हुए 36 पत्र लिखे और सुरक्षा और मदद मांगी.
बुधवार को, महिला के मामा ने दावा किया कि पुलिस अधिकारियों और वरिष्ठ नौकरशाहों को पत्र भेजे गए थे और परिवार ने सीबीआई से भी संपर्क किया था. जब कुछ भी काम नहीं आया, तो उन्होंने 12 जुलाई को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई को चिट्ठी लिखी.
पीड़िता के मामा ने कहा कि – ‘भारतीय जनता पार्टी के विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के लोग हमें लगातार परेशान कर रहे हैं और धमकी दी जा रही है. हमने पुलिस को लगभग 36 पत्र लिखे, वरिष्ठ अधिकारियों से सुरक्षा उपायों का अनुरोध किया और विधायक के सहयोगियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जो हमें मामले को वापस लेने के लिए दबाव डाल रहे थे. कुलदीप सिंह सेंगर ने मेरा पूरा परिवार खत्म कर दिया है.और अब मैं केवल एक ही बचा हूँ.’बीते साल अगस्त में लिखी थी चिट्ठी

पिछले साल अगस्त में, महिला के परिवार को सीबीआई को एक पत्र लिखा था और आरोप लगाया था कि वे सेंगर के आदमियों से उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा रही है. इस साल 11 जुलाई को, 19 वर्षीय की मां ने भी उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक, ओपी सिंह को पत्र लिखा और इन्हीं संभावित खतरों की जानकारी दी.
पत्र में परिजनों ने कहा कि उसे मामले में एक अन्य आरोपित शशि के पति हरिपाल सिंह ने धमकी दी थी, जो जेल में बंद है. 12 जुलाई को प्रमुख सचिव गृह (यूपी) अरविंद कुमार को लिखे एक अन्य पत्र में, परिवार ने आरोप लगाया कि उसे सेंगर के भाई मनोज से धमकियां मिल रही थीं और उसने दावा किया कि मनोज अपने एक सहयोगी कन्नू सिंह और दो और लोगों के साथ उसके घर गया था. दावा किया कि उन्होंने ‘जज फिक्स किया’ और सेंगर की रिहाई का इंतजाम किया है.

अधिकारियों ने नहीं दिया कोई जवाब

परिवार ने दावा किया कि इन पत्रों में से अधिकांश का अधिकारियों ने कोई जवाब नहीं दिया. योगी आदित्यनाथ सरकार में एक मंत्री के दामाद सहित सेंगर और नौ अन्य पर सोमवार को हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है.मामले को आगे की जांच के लिए सीबीआई को सौंप दिया गया है. यह मामला साल 2018 में सामने आया था, जब पीड़िता ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आवास के बाहर खुद को आग लगाने की कोशिश की. लड़की के परिवार ने आरोप लगाया था कि चार बार के विधायक सेंगर ने साल 2017 में अपने आवास पर पीड़िता के साथ बलात्कार किया था.

आरोपित विधायक  कुलदीप सिंह सेंगर को बीजेपी से निकाला

उत्तर प्रदेश  बीजेपी के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को पार्टी आलाकमान ने गुरुवार को अचानक दिल्ली तलब किया था. जिसके बाद स्वतंत्र देव अयोध्या दौरे को बीच में छोड़कर विशेष विमान से दिल्ली चले गए थे. इसके बाद ही ये साफ हो गया था कि पार्टी कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई कर सकती है.

उन्नाव रेप कांड: आरोपी MLA कुलदीप सिंह सेंगर को BJP ने पार्टी से निकालायोगी सरकार के सिफारिश करने के बाद उन्नाव रेप कांड की जांच सीबीआई कर रही है. सीबीआई ने

आरोपित

विधायक कुलदीप सिंह सेंगर समेत 25 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है…

बीजेपी ने रेप के आरोपित विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को पार्टी से निष्काषित कर दिया है. पार्टी के इस मामले में सख्त रूख का अंदाजा तभी से लगाया जाने लगा था जब आलाकमान ने यूपी बीजेपी के अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को गुरुवार सुबह अचानक दिल्ली तलब किया था. इसके बाद स्वतंत्र देव सिंह अपने अयोध्या दौरे को बीच में ही छोड़कर विशेष विमान से दिल्ली चले गए थे. तभी से ही ये साफ हो गया था कि बीजेपी कुलदीप सिंह सेंगर के खिलाफ कोई बड़ी कार्रवाई कर सकती है.
बता दें कि उन्नाव के बांगरमऊ विधानसभा सीट से बीजेपी के टिकट पर विधायक चुने गए कुलदीप सिंह सेंगर पर वर्ष 2017 में नाबालिग लड़की ने रेप का आरोप लगाया था. पीड़ित लड़की के मुताबिक न सिर्फ विधायक बल्कि उनके आदमियों ने भी उससे रेप किया था.

दुर्घटनाग्रस्त इसी कार में पीड़ित लड़की और उसके रिश्तेदार सवार होकर लौट रायबरेली से उन्नाव लौट रहे थे. उनके साथ उनका वकील भी कार में सवार था.

कौन हैं कुलदीप सिंह सेंगर
मूल रूप से फतेहपुर के रहने वाले कुलदीप सिंह सेंगर की माखी गांव में तूती बोलती है. उन्नाव के माखी थाना क्षेत्र के सराय थोक पर उनका ननिहाल है. वो यहीं आकर बस गए. कुलदीप सेंगर ने यूथ कांग्रेस से अपनी राजनीति की शुरूआत की थी. वो उन्नाव के अलग-अलग विधानसभा सीटों से लगातार 4 बार जीतकर विधायक निर्वाचित हुए हैं.
सेंगर वर्ष 2002 में भगवंतनगर से बीएसपी के टिकट पर सबसे पहली बार विधायक बने. इसके बाद 2007 और 2012 में वो सपा के टिकट पर चुने गए. जबकि वर्ष 2017 में वो उन्नाव जिले के बांगरमऊ से बीजेपी के टिकट पर चुनकर विधानसभा पहुंचे.

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