आजम का जौहर विवि : ठगी और जोर जबरदस्ती की बासबूत दास्तान

मुस्लिम खलीफाई आंदोलन के नेता मोहम्मद अली जौहर को स्वतंत्रता सेनानी बता कर बनाये गये इस आजम खान के निजी विश्वविद्यालय के शुरू से आखिर तक झूठ और ठगी के अलावा दूर -दूर तक कुछ नही दिखता

रामपुर: मुलायम सिंह यादव की खानदानी  समाजवादी पार्टी साफ-साफ मुस्लिमपरस्ती के दम से राजनीति करती है ! उसके दम पर सत्ता हासिल कर खाने और खिलाने पर यकीन करती हे ! इस सच्चाई से वाकिफ रामपुर के आजम खान ने अंग्रेजी राज में तुर्की के खलीफा को हटा दिये जाने के विरोध में भारत में आंदोलन चलाने वाले मौलाना मोहम्मद अली जौहर  को स्वतंत्रता सेनानी बताकर सरकारी संसाधनों से अपना निजी संस्थान खोल लिया ! अब सरकार इसकी पडताल कर रही है तो आजम खान विक्टिम कार्ड खेलने पर उतर आये हैं !आजम खान के जौहर ट्रस्ट को लीज पर दी गई रामपुर के सबसे पुराने कॉलेज की जमीन का सच
दरअसल जिन दो बिल्डिंगों की लीज रद्द करने की संस्तुति की गई है कभी वहां पर डेढ़ सौ साल पुराना ओरिएंटल कॉलेज हुआ करता था. लेकिन जमीन कब्जाने के लिए कई तरह के खेल हुए. जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. यह रिपोर्ट भी शासन को भेज दी गई है.
जानिए आजम खान के जौहर ट्रस्ट को लीज पर दी गई रामपुर के सबसे पुराने कॉलेज की जमीन का सच सपा के कद्दावर नेता आजम खान
रामपुर जिला प्रशासन ने सपा के कद्दावर नेता आजम खान को भू-माफिया घोषित करने के बाद अब उनके मौलाना अली जौहर ट्रस्ट की दो बिल्डिंगों की लीज रद्द करने की संस्तुति की है. हालांकि इस मामले की जांच एसआईटी कर रही है, लिहाजा इस पर अंतिम फैसला उसे ही लेना है. दरअसल जिन दो बिल्डिंगों की लीज रद्द करने की संस्तुति की गई है कभी वहां पर डेढ़ सौ साल पुराना ओरिएंटल कॉलेज हुआ करता था. लेकिन जमीन कब्जाने के लिए कई तरह के खेल हुए. जिला प्रशासन की जांच रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. यह रिपोर्ट भी शासन को भेज दी गई है.

मदरसा आलिया की जमीन लीज पर लेकर किया यूनानी दवाखाना पर कब्ज़ा

जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह के मुताबिक पूरा मामला दो संस्थाओं से जुड़ा है. इस पर संस्तुति आज नहीं की गई है. जुलाई माह के शुरुआत में ही कर दी गई थी. लेकिन इस पर अंतिम फैसला एसआईटी को लेना है. जिलाधिकारी ने बताया कि दोनों ही मामले एसआईटी जांच के दायरे में है. पहला मामला मदरसा आलिया से जुड़ा है जिसे 90 साल की लीज पर जौहर ट्रस्ट को दिया गया है.

 डीएम आंजनेय कुमार सिंह

मदरसा आलिया के साथ ही लगा हुआ यूनानी दवाखाना था, जो ट्रस्ट को नहीं दिया गया था. लेकिन वहां के डॉक्टरों को भगा कर उस पर भी कब्ज़ा कर लिया गया. जब शिकायत मिली तो उसकी जांच कराई गई. जांच में पता चला मदरसा आलिया करीब डेढ़ सौ साल पुराना संस्थान था. यहां अरबी व फारसी पढ़ाई जाती था. रामपुर के मर्जर डॉक्यूमेंट में भी इसका उल्लेख है. ये भी लिखा है कि सैकड़ों साल पुराना संस्थान है, जिसमें अरबी और फारसी पढ़ाई जाती है. 2001 तक शासन द्वारा इसको लगातार मेंटेन किया गया. 2001 में इसे पहला अरबी विश्वविद्यालय बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई. इसके बाद पता नहीं क्या हुआ, 2002 के बाद ये हवाला देते हुए की शिक्षकों की संख्या कम है और इसे जीर्णोद्धार में डाल दिया गया.

इसके लिए करीब डेढ़ करोड़ रुपए जीर्णोद्धार के लिए दिए गए और सीएनडीएस द्वारा इसका जीर्णोद्धार किया जा रहा था. उसके बाद से लगतार ही इसमें ताला ही बंद रहा. 2010 में प्रिंसिपल ओरिएण्टल कॉलेज (मदरसा आलिया) के द्वारा लिखा एक पात्र भी है, जिसमें यह उल्लेख किया गया कि ताला बंद होने की वजह से बच्चे वापस चले जा रहे हैं. इसके बाद 2016 में इसको लीज पर दे दिया गया. लेकिन लीज पर पाने के बाद रामपुर पब्लिक स्कूल खोला गया. लेकिन स्कूल को मदरसा आलिया की जगह पर न खोलकर यूनानी दावा खाना की जगह खोल दिया गया और वहां के डॉक्टरों को भगा दिया गया. इस तरह से यह अवैध कब्ज़ा था. जांच में सारी बातें जांच सामने आने के बाद हमने शासन को संस्तुति कर दी है कि इसका लीज रद्द करना उचित प्रतीत होता है. हालांकि ये कार्य एसआईटी के द्वारा ही फाइनल किया जाएगा.

मुर्तजा कॉलेज की जमीन लीज पर लेकर खोला सपा दफ्तर

दूसरी जगह है रामपुर के सबसे पुराना कॉलेज मुर्तजा कॉलेज. इस कॉलेज की जमीन को 30 साल के लिए लीज पर लिया गया. उसके एक भाग में स्कूल और दूसरे भाग में डीआईओएस और बीएसए का कार्यालय चलता था. इस बात की पुष्टि दस्तावेजों और जांच कमेटी की रिपोर्ट से भी होती है. 2007 में इस जमीन को जौहर ट्रस्ट को लीज पर देने के लिए आदेशित हुआ था, लेकिन 2012 में आधिकारिक रूप से जौहर ट्रस्ट को लीज पर दे दिया गया. जिसके बाद इसके एक भाग में समाजवादी पार्टी का कार्यालय बना दिया गया. तीसरा प्रकरण है रामपुर के सबसे आधुनिक मोंटेसरी स्कूल का. हालांकि इसको लीज पर नहीं लिया गया, लेकिन उसको लीज पर लेने का प्रयास किया गया. इसके लिए कई बार लिखा पढ़ी हुई है. 2005 में इसके लिए लिखा पढ़ी शुरू हुई. 2007 में सात शिक्षकों को हटा दिया गया. कहा गया कि चार-पांच बच्चे हैं. बाद में ये कहते हुए कि ये स्कूल बहुत दिनों से बंद है इसलिए इसकी जमीन जौहर ट्रस्ट को देना उचित है. लेकिन किन्हीं कारणों से ये हो नहीं सका.

जिसकी वजह से आजम भूमाफिया तक बन गए

मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी के लिए आजम खान पर गलत तरीके से कई हेक्टेयर जमीन कब्जाने का आरोप लगा है. इतना ही नहीं जिला प्रशासन द्वारा उन्हें भूमाफिया तक घोषित किया जा चुका है.

ये है आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी जिसकी वजह से वे भूमाफिया तक बन गएसपा सांसद आजम खान

यूपी की राजनीति में अपने कटाक्ष और बेबाकी से अलग पहचान रखने वाले सपा के कद्दावर नेता और रामपुर से सांसद आजम खान ने जिस ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए आजम खान ने राज्यपाल तक से मोर्चा लिया अब वही उसनके गले की फांस बन गई है. जी हां, हम बात कर रहे हैं रामपुर की मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की. जिसके लिए आजम खान पर गलत तरीके से कई हेक्टेयर जमीन कब्जाने का आरोप लगा है. इतना ही नहीं जिला प्रशासन द्वारा उन्हें भूमाफिया तक घोषित किया जा चुका है. पिछले 14 दिनों में आजम के खिलाफ 27 मुक़दमे भी पंजीकृत हो चुका है.

ये है जौहर यूनिवर्सिटी का इतिहास

दरअसल मुलायम सरकार के दौरान 2006 में आजम के इस ड्रीम प्रोजेक्ट की स्थापना हुई. जौहर यूनिवर्सिटी एक निजी विश्वविद्यालय है और इसे अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त है. हालांकि 2017 में सूबे की सरकार बदलते ही इस यूनिवर्सिटी की निर्माण धीमी पड़ गई. 2007 में मायावती सरकार बनी थी तो यूनिवर्सिटी की चारदीवारी पर बुल्डोजर चला दिए गए थे. आरोप था कि आजम खां ने चकरोड पर कब्जा कर लिया है. हालांकि 2012 में सपा सरकार आई तो टूटी हुई चारदीवारी फिर बना ली गई. 18 सितंबर 2012 को इस यूनिवर्सिटी का उद्घाटन हुआ. 2013 में तत्कालीन राज्यपाल अजीज कुरैशी ने अल्पसंख्या दर्जा दिए जाने पर मुहर लगा दी. अजाम खान इस यूनिवर्सिटी के चांसलर हैं.

मौलाना मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी

ये हैं आरोप

आरोप है कि जौहर ट्रस्ट के अंतर्गत बनी इस यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए जमीन के अधिग्रहण में घोर धांधली हुई. आजम खान और सपा सरकार के प्रभाव में अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए गलत तरीके से कई हेक्टेयर जमीन जौहर ट्रस्ट के नाम कर दी. लेकिन अब सूबे की सियासी फिजा बदलते ही आजम की मुश्किलें बढ़ गई हैं. सूबे की योगी सरकार ने मामले में एसआईटी जांच बैठा दी है. उधर जिला प्रशासन द्वारा की गई जांच में यह बात सामने आई है कि यूनिवर्सिटी की 39 हेक्टेयर जमीन सरकारी है. बची 38 हेक्टेयर जमीन जो किसानों से खरीदी गई है, वह भी सरकार में निहित होने योग्य है.

दलितों की जमीन को भी कब्जाने का आरोप

आजम खान के ऊपर यह भी आरोप है कि दलितों की जमीन को भी गलत तरीके से औने-पौने दाम पर जौहर ट्रस्ट के नाम रजिस्ट्री करा दी गई. रिपोर्ट के मुताबिक कुछ दलित किसानों ने जमीन दूसरे दलित किसानों को बेची और उसके कुछ घंटे बाद ही उसकी रजिस्ट्री तीसरे पक्ष को कर दी गई. इतना ही नहीं जमीन के सर्किल रेट भी कई बार घटाए गए. इतना ही नहीं कुछ जमीन को नदी का बहाव क्षेत्र बताकर सर्किल रेट घटा दिया गया.

वक्फ मंत्री रहे गलत तरीके से अल्पसंख्यकों की जमीन हड़पने का भी आरोप

कांग्रेस के नेता फैसल लाला ने सोमवार को राज्यपाल राम नाईक से मिलकर एक ज्ञापन सौंपा. इस ज्ञापन में उन्होंने आजम खान पर गंभीर आरोप लगाया. ज्ञापन में कहा गया था कि रामपुर से सांसद आजम खान ने ग्राम आलिया गंज के 26 किसानों की जमीन पर नाजायज कब्जा करके उन गरीब किसानों की जमीन को जौहर यूनिवर्सिटी के अंदर मिला लिया है. जिस पर उन किसानों की ओर से रामपुर के थाना अजीम नगर में आजम खान के विरुद्ध मुकदमे दर्ज कराए गए हैं और इतनी बड़ी तादाद में किसानों की जमीन पर कब्जा किए जाने पर जिला प्रशासन ने आजम खान को भूमाफिया घोषित करते हुए उनका नाम एंटी भू माफिया पोर्टल पर अपलोड किया है. लेकिन इसके बावजूद आजम खान ने जमीन से कब्ज़ा नहीं छोड़ा है.

राज्यपाल राम नाईक

जौहर यूनिवर्सिटी का सरकारी अधिग्रहण हो

फैसल लाला ने राज्यपाल से मिलकर अल्पसंख्यक दर्जा प्राप्त जौहर यूनिवर्सिटी को सरकारी अधिग्रहण करने गुहार लगाई. उनके इस ज्ञापन को राज्यपाल राम नाईक ने आवश्यक कार्रवाई के लिए मुख्यमंत्री को भी प्रेषित किया गया है. फैसल लाला का आरोप है कि इस यूनिवर्सिटी में सरकारी धन का उपयोग हुआ है लिहाजा इसका सरकारी अधिग्रहण होना चाहिए.

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