अमृतसर दुर्घटना : इमरजेंसी में ट्रेन रोकने को क्या है ड्राइवर्स गाइडलाइन

दुर्घटना में मरने वालों में ज्‍यादातर लोग उत्‍तर प्रदेश और बिहार के हैं. मौके पर कम से कम 300 लोग मौजूद थे जो पटरियों के निकट मैदान में रावण दहन देख रहे थे.

अमृतसर हादसा: इमरजेंसी में ट्रेन रोकने को लेकर क्या है ड्राइवर्स के लिए गाइडलाइनप्रतीकात्मक तस्वीर

अमृतसर में दशहरे पर रावण दहन के दौरान हुए ट्रेन हादसे में करीब 60 लोगों की मौत हो गई है. जिस ट्रेन से हादसा हुआ उसके ड्राइवर का रेलवे अधिकारियों ने बचाव किया है. हादसा डीएमयू (Diesel Multiple Unit) ट्रेन से हुआ. रेलवे बोर्ड के चेयरमैन अश्वनी लोहानी के मुताबिक, डीएमयू को रोकने के लिए कम से कम 625 (या 640) मीटर पहले ब्रेक लगाना होता है.
चेयरमैन ने इसे ट्रेन हादस नहीं, रेल ट्रैक पर अतिक्रमण कहा है. डीएमयू ट्रेन के अलावा एक्सप्रेस, शताब्दी, पैसेंजर, लोकल और राजधानी एक्सप्रेस कितनी स्पीड पर चलती हैं? उन्हें रोकने के लिए कितने किलोमीटर पहले ब्रेक लगाना पड़ता है? इमरजेंसी में इन ट्रेनों को रोकने के लिए, ट्रेन पायलेट्स को क्या इंस्ट्रक्शंस मिलते हैं? इस संबंध में  उत्तरी रेलवे के चीफ पीआरओ दीपक कुमार के मुताबिक, एक्सप्रेस, सुपर फास्ट ट्रेनों की लिमिट डीएमयू की तुलना में थोड़ी ज्यादा हो सकती है. इसलिए उन ट्रेनों को रोकने के लिए डीएमयू की तुलना में निर्धारित दूरी भी 640 मीटर से ज्यादा होती है. जिसे 900 मीटर के करीब भी माना जा सकता है. ट्रेन की स्पीड जितनी ज्यादा होगी, उसे रोकने के लिए उतनी ज्यादा दूरी पर ब्रेक लगाना पड़ता है.Image result for अमृतसर दुर्घटना

इमरजेंसी में ट्रेन रोकने के इंस्ट्रक्शंस- 

ट्रेन ड्राइवर को भीड़ की स्थिति में किसी जगह पर रोकने का स्पष्ट निर्देश होता है, हालांकि उसके ऊपर ट्रेन में बैठे हजारों पैसेंजर्स की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी होती है. यानी यदि ट्रेन अधिक स्पीड में चल रही है तो अचानक ब्रेक लगाने से ट्रेन के डिरेल होने का खतरा भी होता है. ऐसे में ड्राइवर को रेलवे ट्रैक की बनावट और यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए निर्णय लेना होता है.
दीपक कहते हैं, ऐसी घटनाओं को रोकना इसलिए मुश्किल होता है क्योंकि विजिबिलिटी कम होने से ड्राइवर के लिए परेशानी बढ़ती है. शाम और रात के वक्त विजिबिलिटी और कम हो जाती है. इस मामले में रेलवे ट्रेक स्ट्रेट है या कर्व है. यह भी बेहद ज़रूरी होता है.
दीपक के अनुसार, इसके लिए लोको पायलेट (ट्रेन के ड्राइवर) को रूट की खास ट्रेनिंग दी जाती है. ट्रेनिंग के बाद ही उसे ट्रेन चलाने की जिम्मेदारी मिलती है. लेकिन कई दफा इसके बावजूद अप्रत्याशित (जिसकी उम्मीद न हो) कारणों से ऐसी घटनाएं हो जाती हैं. Image result for अमृतसर दुर्घटना

डीएमयू के अलावा बाकी ट्रेन कितनी स्पीड पर चलती हैं-
DMU- डीजल मल्टिपल यूनिट ट्रेन को रोकने के लिए लगभग 640 मीटर पहले ब्रेक लगाना पड़ता है.एक्सप्रेस ट्रेन- इस ट्रेन की एवरेज स्पीड 60 – 90 km/h होती है.शताब्दी एक्सप्रेस- 130 km/h से 155 km/hपैसेंजर ट्रेंन- एवरेज स्पीड 30–40 km/h, ऑपरेश्नल स्पीड 50 – 70 km/hलोकल ट्रेन- 85 km/hराजधानी एक्सप्रेस- 130-160 km/h

रेलवे ने पंजाब सरकार पर डाली

दुर्घटना की जवाबदेही, बोर्ड चेयरमैन बोले- नहीं कराएंगे जांच

बोर्ड चेयरमैन के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि इस दुर्घटना के लिए रेलवे की तरफ से मुआवजे का ऐलान नहीं किया जाएगा.

अमृतसर ट्रेन हादसाः रेलवे ने पंजाब सरकार पर डाली घटना की जवाबदेही, बोर्ड चेयरमैन बोले- नहीं कराएंगे जांचअमृतसर में दशहरा उत्सव के दौरान ट्रेन की चपेट में आने से 60 लोगं की मौत हो गई.

पंजाब के अमृतसर के पास दशहरे के मौके पर हुए ट्रेन दुर्घटना में 60 लोगों की मौत हो गई है. हालांकि रेलवे ने इस घटना की पूरी जवाबदेही पंजाब सरकार पर डाल दी है. रेलवे बोर्ड चेयरमैन अश्वनी लोहानी ने शनिवार सुबह खास बातचीत में कहा कि यह स्पष्ट रूप से अतिक्रमण का मामला है. उन्होंने साफ किया कि इस संबंध में रेलवे की तरफ से कोई जांच नहीं कराई जाएगी. उन्होंने कहा, ‘यह कहना गलत है कि इस घटना के लिए रेलवे जिम्मेदार है. ट्रैक पर दो क्रॉसिंग हैं, दोनों बंद थे. यह मेन लाइन है. वहां स्पीड लिमिट की कोई बंदिश नहीं होती.’ लोहानी ने कहा कि रेलवे प्रशासन को मेन लाइन के करीब कार्यक्रम आयोजित कराए जाने की कोई सूचना नहीं दी गई थी. लोग ट्रैक से दशहरा का कार्यक्रम देख रहे थे, लोगों को ज्यादा सचेत रहने की आवश्यकता थी. रेलवे ट्रैक्स पर कोई अतिक्रमण नहीं होना चाहिए.’इस कार्यक्रम के लिए रेलवे को न ही कोई जानकारी दी गई थी और न ही इसके लिए अनुमति नहीं ली गई थी.अमृतसर हादसा: अश्विनी लोहानी ने कहा- रेलवे को जिम्मेदार ठहराना गलत, कार्यक्रम की नहीं थी सूचना

लोहानी ने कहा कि यह दुर्घटना रेलवे के मेन लाइन पर हुई जिसमें ट्रेनें एक निर्धारित स्पीड पर चलती है. उन्होंने बताया कि डीएमयू ड्राइवर ने हॉर्न बजाया और ब्रेक लगाने की कोशिश भी की. हालांकि डीएमयू को रोकने के लिए कम से कम 625 मीटर पहले ब्रेक लगाना होता है. इस वजह से ड्राइवर ट्रेन नहीं रोक पाया. लोहानी ने कहा कि जिस ट्रेन से हादसा हुआ वह रेगुलर बेसिस पर चलती है. यह ट्रेन हादसे का मामला नहीं है बल्कि रेल ट्रैक पर अतिक्रमण का मामला है इसलिए रेलवे इस मामले की जांच के आदेश नहीं देगा.Image result for अमृतसर दुर्घटना
बोर्ड चेयरमैन के इस बयान के बाद माना जा रहा है कि इस हादसे के लिए रेलवे की तरफ से मुआवजे का ऐलान नहीं किया जाएगा. बता दें कि पंजाब सरकार ने मृतकों के परिवार को 5 लाख और केंद्र सरकार 2 लाख के मुआवजे का ऐलान किया है.एक दिन पहले ही रेलवे के एक अधिकारी ने कहा था कि एक वरिष्ठ मंत्री की पत्नी ने इस कार्यक्रम में शिरकत की थी यानी पंजाब सरकार और अमृतसर प्रशासन को इस कार्यक्रम की जानकारी थी.

इससे पहले घटना स्थल पर पहुंचे रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा ने भी कहा था कि रेलवे प्रशासन हर तरह की मदद कर रहा है. यह राजनीति करने का समय नहीं है. घायलों को मेडिकल सहायता देने का समय है. रेलवे प्रशासन को इस कार्यक्रम की कोई जानकारी नहीं थी. वहीं रेलवे ने भी दशहरे के मौके पर अमृतसर के पास हुए हादसे को लेकर कहा कि पुतला दहन देखने के लिए लोगों का वहां पटरियों पर एकत्र होना स्पष्ट रूप से अतिक्रमण का मामला था और इस कार्यक्रम के लिए रेलवे द्वारा कोई मंजूरी नहीं दी गई थी.

बता दें कि जिस दशहरा कार्यक्रम के दौरान हादसा हुआ उसमें पंजाब कैबिनेट के मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू की पत्नी नवजोत कौर सिद्धू ने भी शिरकत की थी. उन पर आरोप लग रहे हैं कि घटना के बावजूद मदद करने की बजाए वह वहां से रवाना हो गईं. हालांकि कौर ने साफ किया है कि रावण का पुतला जलने के साथ ही वह वहां से रवाना हो गई थीं और हादसे की जानकारी उन्हें नहीं थी. वहीं उन्होंने कहा कि इस वक्त प्राथमिकता राजनीति करने की नहीं बल्कि घायलों को सही इलाज सुनिश्चित करने की होनी चाहिए.

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