कोरोना संक्रमित मां की अर्थी को कंधा देने वाले पांच बेटों ने भी तोडा दम

कोरोना संक्रमण से एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत, मां के बाद पांच बेटों ने भी तोड़ा दम
धनबाद,। धनबाद के कतरास के चाैधरी परिवार में कोरोना का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। कोरोना माैत का तांडव कर रहा है। सबसे पहले कोरोना ने 88 वर्षीय वृद्धा की जान ली। इसके बाद एक-एक कर वृद्धा के पांच बेटों की भी जान ले चुका है। पांचवें बेटे की रविवार की रात रिम्स रांची में मृत्यु हुई। भारत में अपने तरह की यह इकलाैती ऐसी मनहूस घटना है, जिसमें कोरोना से एक परिवार में छह लोगों की माैत हो गई है। एक पखवारे के अंदर कोरोना ने एक हंसते-खेलते परिवार को उजाड़ दिया है। माैत दर माैत से कतरास के रानी बाजार मरघटी सन्नाटा पसरा हुआ है। कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है।

रिम्स में हुई महिला के पांचवें बेटे की माैत
कतरास के चाैधरी परिवार के छठे सदस्य की कोरोना से माैत रविवार की रात रिम्स रांची में हुई। रांची में ही अंतिम संस्कार कर दिया गया था। पहले धनबाद के पीएमसीएच में भर्ती कराया गया था। यहां तबीयत बिगड़ने के बाद रिम्स रेफर कर दिया था। इससे पहले मृतक के एक भाई की माैत भी रिम्स में ही हुई थी। सबसे पहले परिवार में 88 वर्षीय महिला की माैत बोकारो के चास स्थित नीलम नर्सिंग होम में हुई। अंतिम संस्कार के बाद महिला की जांच रिपोर्ट आई। वह कोरोना पॉजिटिव थी। इसके बाद एक-एक कर महिला के पांच बेटों की माैत हो गई है। महिला के छह बेटे थे। एक बेटा दिल्ली में है।

एक गलती बन गई पूरे परिवार का काल

धनबाद के कतरास इलाके के एक परिवार के लिए कोरोना गाइडलाइन का उल्लंघन करना काल साबित हुआ। अब तक संक्रमण की चपेट में आकर इस परिवार के छह सदस्यों की मौत हो चुकी है। इस परिवार की सबसे बुजुर्ग (88 वर्षीय) महिला का अपने एक रिश्तेदार के शादी समारोह में शामिल होना पूरे परिवार के लिए जानलेवा साबित हुआ। इस समारोह से लौटने के बाद मां कोरोना से संक्रमित पाई गई। इसके बाद एक-एक कर इस मां के 5 बेटे भी संक्रमण की चपेट में आते चले गए। 4 जुलाई को दिन पहले मां की इलाज के दौरान मौत हुई तो परिवार में जैसे मौत का सिलसिला ही चल पड़ा। एक पखवारा में इस परिवार में मां और उसके 5 बेटों की मौत हो चुकी है।

कोरोना के आगे सुखी-संपन्न परिवार लाचार

चाैधरी परिवार कतरास का सुखी-संपन्न परिवार है। कतरास के अग्रणी परिवारों में गिनती होती है। धनबाद के साथ ही दिल्ली और छत्तीसगढ़ के रायपुर में कारोबार है, लेकिन कोरोना के आगे पूरी तरह लाचार है। 27 जून को इस परिवार के किसी रिश्तेदार के यहां कतरास में शादी समारोह था। इस शादी समारोह में शामिल होने कतरास के रानीबाजार 88 वर्षीय महिला दिल्ली से आई थी। वह समारोह में शामिल हुई। इस बीच तबीयत खराब होने पर उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के दौरान ही चार जुलाई को उसकी मौत हो गई। जांच रिपोर्ट में उसे कारोना पॉजिटिव पाया गया था। इसके बाद महिला के दो बेटे संक्रमित हो कर जान गंवा गए। तीन बेटे बीमार थे। परिवार पर कोरोना के कहर से उत्पन्न तनाव और अवसाद ने उनकी भी जान ले ली।
एक पखवाड़े में इस परिवार के छह लोगों की मौत हो गई। इस परिवार में 27 जून को शादी समारोह था। दिल्ली में अपने बेटे के पास रह रही महिला अपने पोते के शादी समारोह आई थी। यहां वह बीमार हुई तो बोकारो के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। चार जुलाई को उसकी मौत हो गई। इस बीच उसका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया। इसके बाद जांच रिपोर्ट आई तो महिला पॉजिटिव निकली। यहां एक चूक यह भी हुई कि महिला का अंतिम संस्कार सामान्य विधि-विधान से ही हुआ। मालूम ही नहीं था कि वह कोरोना संक्रमित है, अन्यथा मृतक संस्कार कोविड गाइड लाइन से होता।
कोरोना से संक्रमित मां की अर्थी को कंधा देने वाले उसके बेटों में भी कोविड-19 का संक्रमण दिखा और स्थिति इतनी खराब हुई कि पांच बेटों की हालत गंभीर हो गई और इलाज के दौरान पांचों की मौत हो गई। पांचवें बेटे को रिम्स रांची अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन सोमवार को उसने भी दम तोड़ दिया।
दरअसल, एक बुजुर्ग महिला 27 जून को अपने पोते की शादी में शामिल होने के लिए दिल्ली से धनबाद के कतरास गई थीं। महिला की उम्र 90 साल थी। यहां उनकी तबियत बिगड़ने लगी। इसके बाद उनका कोरोना का टेस्ट कराया गया जो पॉजिटिव निकला। 
महिला को अस्पताल में भर्ती कराया गया लेकिन इलाज के दौरान मौत हो गई। बेटों ने अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया। इसके बाद उस महिला के दो बेटे संक्रमित पाए गए, जिनकी इलाज के दौरान मौत हो गई। उसके कुछ दिन बाद दो और बेटों में कोरोना के लक्षण दिखे और इलाज के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। पांचवें बेटे ने सोमवार को रिम्स रांची अस्पताल में दम तोड़ दिया।
इस तरह सिर्फ 15 दिन के भीतर ही कोरोना वायरस महामारी की वजह से एक ही परिवार के छह लोगों की जान चली गई। परिवार की सबसे बड़ी गलती यह रही कि उन्होंने मां का अंतिम संस्कार आईसीएमआर की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर न करके सामान्य तौर पर ही कर दिया, जिसकी वजह से दूसरे लोगों में संक्रमण फैला। 

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